असमंजस मेें पङी कोयल बसंत की सुगंध पाकर भी कूकने की बजाए मुहं पर फेसमास्क लगाए अमराई मेें खामोश बैठी है ! उधर,,,गले में पांच पांच तोला सोने की मोटी चेन डाले और जैफ्री एपस्टीन के फॉलोवर्स कौए अमराई का चक्कर काटते हुए गा रहे हैं, - ' आजा मेरी गोदी मेें बैठ जा ! ' दूसरे कौए गैंग लीडर के कैरेक्टर को फॉलो कर रहे हैं, -' तू है मेरी क,,,क,,,क,,,किरन '!
इस छिछोरेपन के कारण आम के पेडों पर "बौर" तक नहीे आ रहे ! मौसम का नेटवर्क उङा हुआ है , सिर्फ कौए ही बसंत और वैलेंटाइन का टॉवर कैच कर रहे हैं ! बौर आ रहा है न गेहूं मेें बाली, सबको कोयल की कूक का इन्तजार है ! किसान चिंतित हैं, कौए मगन ! सियासत के अमृतकाल का रहस्य सिर्फ कौवों के समझ में आया है !
बसंत से पूरी तरह अपरिचित किंतु वेलेंटाइन की धीमी आंच मेें पूरी तरह पका हुआ शहर के कवि को गांव वाला बसंत दिसंबर मेें ही साक्षात् नजर आ रहा है, - 'ओ कामदेव ओ कामदेव !
तन मन सुलगे कृपा हो देव !
पीङादायक आया बसंत !
पत्नी विहीन तङपें अनंत !
कविता में मेंढक बोल रहे !
बादल दावानल डोल रहे
तेरी आराधना करू देव !
एक गर्लफ्रेंड तो भेज देव !
चुनाव खत्म हो चुका है, विजयश्री से उत्साहित एक नेता विकास की टोह लेने के लिए समर्थकों की मीटिंग में पूछ रहा है ,- अपने अपने इलाके की मुख्य समस्या बताइये,ताकि हम समझ सकें कि सबसे पहले प्राथमिकता किसे देना है !'
लोगों ने प्रथमिकता के आधार पर बताना शुरू कर दिया,-' विधायक जी, हमारी कॉलोनी में पानी बराबर नही आता-'!
- " पास में स्कूल नही है, बच्चो को बहुत दूर जाना पङता है '!
- " पिछ्ल बरसात में सङक बह गयी थी, तबसे मरम्मत भी नही हुई -'!
- ' मेरे इलाके मे एक भी डिस्पेंसरी नही है, मगर दारू की तीन तीन दुकाने खुल गई हैं "!
तभी एक दिव्य सुझाव आया- ' साहब जी, आपके विधानसभा का नाम 'कबीरनगर' बिलकुल ठीक नही है' !
" क्यों?"
' साहब जी, कबीर मुसलमान थे, इसलिए इसका नाम बदलकर ' संतनगर' कर दिया जाये '-!
सन्नाटा छा गया ! सब एक दूसरे का मुह देखने लगे !आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास,,,! लेकिन यह क्या, अचानक विधायक जी चिल्लाए, -' तालियां !! तालियां !!!'
सब घबराकर ताली बजाने लगे , विधायक जी ने खङे होकर सहर्ष घोषणा किया,-' क्षेत्र के विकासक्रम मे आप देव तुल्य लोगों ने सर्व सम्मति से जिस वकास का आदेश दिया है,वो मेरे सिर माथे पर ! ये बहुत कठिन काम है,और आप सबको तन मन धन से तैयार रहना होगा ! पन्द्रह दिन बाद धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल की शुभ शुरुआत करेंगे! तब तक आप लोग तैयारी करो, मैं भी अभी तीर्थ यात्रा पर दुबई जा रहा हूं- ! आमरण अनशन के लिए कुछ बलिदानी लोगों को भी तैयार कर लेना -'!
इतना कहकर विधायक जी अंदर चले गये !
कुछ लोगों के लिए अभी भी दुविधा वाली स्थिति बनी हुई है, - बसंत वैलेंटाइन दोऊ खङे- काके लागूं पांय ! आम आदमी पूरी जिंदगी मात्र दर्शक होकर गुजार देता है-, विकास, बसंत और वैलेंटाइन मेें से कुछ भी नही मिलता ! किस्मत में बौर आते ही नही ! जवानी अमृतकाल की तरह ऐसे दबे पांव आकर चली जाती है कि पता ही नही चलता ! सहमी हुई फ़रवरी आ चुकी है ! बसंत और वैलेंटाइन दोनो एक दूसरे को धकियाते हुए कह रहे हैं, - पहले आप,,,पहले आप -'! पहले आकर कौन रिस्क ले ! अब 14 फरवरी तक धर्म योद्धा त्रिशूल के साथ पार्कों मेें वैलेंटाइन के प्रेम पगे युवा जोडों को ढूंढ ढूंढ कर रक्षा बंधन मनवाएंगे ! ऐसा करने से वैलेंटाइन का हीमोग्लोबिन कम होगा, और संस्कृति तथा सभ्यता का इंडेक्स हमारी अर्थववस्था की तरह मजबूत होगा !
15 फ़रवरी तक वैलेंटाइन का वायरस विलुप्त हो चुका होगा, और सभी संस्करी धर्म योद्धा साल भर के लिए शीतनिद्रा में चले जायेंगे !
Sultan bharti (journalist)
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