" खड़क सिंह' ज़िंदा है "
आप को 'बाबा भारती' और उनका घोड़ा 'सुल्तान' तो याद होंगे? जी हाँ वो कहानी जिसमें खड़क सिंह 'बीमार' बनकर बाबा को लूटता हैं! कालजयी कहानी की यही खूबी होती है कि ऐसी कहानी के पात्र कभी मरते नहीं ! और आजकल तो अमृतकाल चल रहा है ! इस दौर में तो ऐसे लोग भी भी कालजयी हो चुके हैं, जिनके मरने की जब जब दुआ की गईं , तब तब उनकी उम्र का फाइबर 5 साल और बढ़ गया ! मरने की कामना करते हुए अब तक कई वरिष्ठ भद्रपुरुष 'वीरगति' को प्राप्त हो चुके हैं ! ( वर्तमान 'काल' का 'अमृत' सबको सूट नहीं करता !) इसलिए देश में तमाम 'खड़क सिंह' 'समस्याओं का स्वांग' लिए " बाबा भारती" को ठग रहे हैं ! संविधान, समय और समाज के मुताबिक ये गिरगिट की तरह रंग बदल कर परिवेश में घुलमिल जाते हैँ, औऱ अवसर पाते ही "बाबा भारती" को इमोशनल कर उनकी जमापूजी लूट कर फरार हो जाते हैँ ! सतयुग में बाबा भारती की आबादी ज्यादा और खड़क सिंह कम हुआ करते थे, इसलिए पहली लूट की न्यूज इतनी वाइरल हो गई थी ! आज तो उस आंकड़े में 180 डिग्री का इजाफ़ा हो चुका है !
कदम कदम कदम पर आज खड़क सिंह टकरा रहे हैं, जो दरअसल बाबा भारती की तलाश में फेरी लगाते रहते हैँ, - 'तू छुपा है कहां, ढूंढता मैं यहां-' ! कहावत है कि ढूढ़ने से भगवान भी बरामद हो जाते हैँ ! [हालांकि अब,,, वो दिन हवा हुए जब पसीना गुलाब था !] सतयुग वाले खड़क सिंह को ज़्यादा मेहनत करनी पडी थी, आज कलियुग तो इन्हीं खड़क सिंहों से हाउसफुल चल रहा है! ये घातक परजीवी अपने शिकार की रेकी करने के बाद उसके सगे बनने में देरी नहीं करते, फिर उचित मॉनसून पाते ही "बाबा भारती" को चर लेते हैँ।!
आजकल तो खड़क सिंह की संख्या इतनी बढ़ गई हैं कि बाबा भारती का आर्तनाद देख कर सरकार को अलग से साइबर थाना बनाना पड़ा ! आज का ओरिजिनल खड़क सिंह आपके आस्तीन में घुसकर आपको निपटाते हैं !
विपक्ष की चिंता वोट चोरी को लेकर है !बाबा भारती का 'घोड़ा' आये दिन खड़क सिंह चुरा रहा है,उस पर कोई प्रदर्शन नहीं ! सतयुग वाला डाकू हयादार था, लिहाज़ करता था ! आज का खड़क सिंह,- शर्म, संस्कार, संस्कृति, इमोशन और दया जैसी दकियानूसी भावनाओं से मुक्त है ! पुराने वाले खड़क सिंह ने इमोशनल हो कर घोड़ा लौटा दिया था ! आज के खड़क सिंह पहले घोड़ा चुराते फिर पुलिस के सहयोग से बाबा भारती की कुटी से 375 बोर का कट्टा बरामद कराते और फिर बाबा को 'अंदर' करवा देते ! बाद में खुद खड़क सिंह बाबा की जमानत कराता और,,,गांजे की वज़ह से खराब हो रही अपनी किडनी के बदले बाबा भारती की किडनी ले लेता ! जब तक 'बाबा भारती' की प्रजाति है, खड़क सिंह फलते फूलते रहेंगे!
एक और 'खड़क सिंह' इसी साल मई की गर्मियों में जंतर-मंतर पर मुझे बरामद हुए ! 26 अक्टूबर तक उनका खानदान और खलिहान दोनों हरा भरा रहा, फिर अचानक 27 अक्टूबर को उनका फ़ोन आया, -' भारती जी, मेरी काफी बड़ी रकम कहीं फंस गई है, परसों तक आ जाएगी, आज आनन फानन इन्तेजाम करना पड रहा है, वर्ना शिपमेंट वापस चली जाएगी। बाकी रकम तो दोस्त दे रहे हैं, सिर्फ बीस हज़ार तुमसे चाहिए परसों मेरा पैसा आ जाएगा, तुम्हें कुछ ज्यादा चाहिए तो भी बता देना' ! लेन देन में शर्म कैसी! बेझिझक मांग लेना-'!
कुछ लोगों का कैरेक्टर उनके चेहरे पर छपा होता है, बस पढ़ने वाला चाहिए ! किंतु पढ़ने वाला अगर 'बाबा भारती' की प्रजाति का हो तो कुछ नही हो सकता ! हालांकि मुझे बार बार ऐसा लग रहा था कि उधर खड़क सिंह है, परंतु उधर से उसकी दयनीय होती आवाज़ ने मुझे लुटने के लिए ललकारा, -' अकाउंट में पड़े 1800 रुपये लेकर अमृतकाल पार करेगा क्या ! काहे का पत्रकार/साहित्यकार बना फिरता है बे ! पिछले हफ्ते भी तो बीबी के दिए पैसे में से पांच सौ रुपये बचे थे, फौरन उसे दे दे '!!
" पांच सौ रुपये दे दूं ?'
" दो हज़ारों रुपये ' ।
' पर वो तो बीस हज़ार मांग रहा है '!
' दाईं तरफ से एक जीरो कम कर !'
' मेरा क्या होगा?'
"तुझको रक्खे राम तुमको अल्लाह रक्खे ' !
मैंने फ़ोन पर गिड़गिड़ा रहे मित्र से कहा, -'मेरे पास सिर्फ दो हज़ार हैं'!
वो फौरन खिसक कर 20 हजार से 5 हज़ार पर आ गया, - ' कम से कम पांच तो कर दो, परसों तो आप मेरे से चाहे जितना ले लो ! कारोबार में ऐसा होता रहता है '!
' पांच नहीँ होगा, फ़ोन रखो ' !
" कोई बात नहीं भारती जी, इस बार इतना ही सही ! ,एक मित्र का पेटीएम नंबर भेज रहा हूं, तुरंत भेजिए! परसों आपके पैसे दूध में धुल कर आपको लौटा दूँगा '!
आज 25 दिन हो गए ,अबहूँ न आए बालमा सावन बीता जाए! हमने तो सुना था- 'कल कभी नहीं आता'! उसने तो 'परसों' कहा था ! उसका सिर्फ what's app नंबर काम कर रहा है ! जिस पर उसके घर वाले बताते रहते हैं कि -'वो कहीं गए हैं, फ़ोन घर पर ही रखा है ' !.ऐसा बिल्कुल नहीं है कि वो फ़ोन उठाता नहीं , फ़ोन उठाने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि उस दिन उसे मेरी आवाज़ ही नहीँ सुनाई पड़ती! ये नेटवर्क नामुराद कभी बाबा भारती के फेवर में नहीं रहा ! लुटने पर जब भी कोई बाबा 'भारती' ने पुलिस को फ़ोन मिलाया, उधर से एक ही शुभ सूचना आयी ,- इस रूट की सभी लाइने व्यस्त हैं'-!
अजगर करे न चाकरी,,,,,! खड़क सिंह बग़ैर चाकरी किए गाड़ी से चलता है और बाबा भारती 'सुल्तान' को खोकर पैदल चलते हुए अपनी शुगर नॉर्मल करते नज़र आते हैं ! यही विधि का विधान है!
[ Sultan 'Bharti' ]
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