Friday, 25 September 2026

( व्यंग्य चिंतन) कि मैं कोई झूठ बोल्या !

(व्यंग्य चिंतन) कि मैं कोई झूठ बोलिया ?
         मैं सफेद दूध की कसम खाकर कहता हूं कि आज  शनिवार है, इसलिए जो भी कहूँगा  सच कहूँगा, सच के अलावा कुछ नहीं कहूँगा ! [ रोज रोज झूंठ बोलते और सुनते हुए तुम्हें कौन सा सच की पहचान है! ] सतयुग की पुरवाई चल रही है, कलियुग को धकेल कर अमृत काल आ चुका है, अब इस बसंत में झूठ का क्या का क्या  काम ! फुल बेकारी और हाफ एनकाउंटर का मारा आदमी चरित्र निर्माण में लगा है ! बुजुर्गों ने कहा है कि 'सच' दरअसल चरित्र निर्माण में पेट्रोल का काम करता है ! सच, चित और आनंद के मिलन से सिर्फ़ 'बाबाओं' को ईश्वर की प्राप्ति होती है, 'झुरहू' को कुछ नहीं मिलता  ! 
          जो झूठ की झील में एक पैर पर खड़े होकर तैरते हैं,वही मजदूरों के बखरी का धान सालों साल चर जाते हैँ! भैंस बैल, गाय बकरी का 'चारा' चतुर सुजान चरते चरते जेल गये और वापस आ गए,  क्योंकि किसी ने देखा ही नहीं! सबूत हो या  अदालत  में  किसी भैंस या बकरी ने गवाही दी होती ! ऐसे में कुरान या गीता पर हाथ रख कर प्रोफेशनल 'सदगुरु' जो बोल दे वही सच है ! और  ये पूरी तरह संविधान के दायरे में होता है, जो  कहता है,- '100 गुनाहगार भले बरी हो जाएं, किंतु किसी बेगुनाह को सजा न मिले-'! जांच के इसी चक्रव्यूह से महारथी बाहर आ जाते हैं और खौफ़जदा बेकसूर झुरहू अंदर चले जाते हैँ ! कोई चारा खाता है, कोई बन जाता है !
       धर्म का निर्माण भले ईश्वर ने किया हो,लेकिन कापीराइट तो पृथ्वी वालों के  पास है ! इतना बड़ा कारोबार ! धर्माधिकारी का ही महात्म है जो भगवान और भक्त दोनों को असुविधा नहीं होने पाती ! इन धर्माधिकारियो से कोई धर्म अछूता नहीं! धर्म में लगे सभी अंधविश्वास के भुन्गे इन्हीं की बदौलत है! धर्म के इन्हीं कोलंबस को शहीद बाबा के मीठा मलीदा से लेकर पहलवान बाबा की लाल लंगोट की पसंद का पता होता है! ये गोरखधंधा उच्च कोटि के झूठ और भय के के बग़ैर फलता फूलता नहीं! सत्यमेव जयते का अलख लगाकर झूठ का कारोबार बड़ी जल्दी फसल देने लगता है! 
          झूठ ही सत्य है, झूठ अमृतकलश है,सच की छाती पर बैठा दूध पीने वाला नाग है! झूठ स्वादिष्ठ कलाकंद है !सच तो कड़वा होता है, कसैला होता है! सच में प्रोटीन नहीं होता ! उल्टे सच के बारे में कहा गया, - सत्यम ब्रूयात 

Friday, 22 May 2026

'व्यंग्य चिंतन' कॉकरोच जनता पार्टी

 'व्यंग्य चिंतन' 
 कॉकरोच जनता पार्टी 

   अब इसे क्या कहेंगे ! सियासत का कॉकरोच या  कॉकरोच का सियासीकरण ! वो इन्फेक्शन की रफ्तार से आए और मंहगाई की तरह छा गये ! पहले लोग लाल हिट लेकर उन्हें ढूंढते थे, अब उन्हें गले लगा रहे हैं, गले में माला डाल रहे हैं, इमोजी बना रहे हैं ! रातो रात वो लोग उनके फॉलोवर बन गए  !इतनी बड़ी क्रांति, बीमारी के प्रतीक से परिवर्तन की उम्मीद बाँध बैठे ! गटर से शिखर तक  जाते देख कर आज चूहे, छछुदर और सांप को  कितनी हीनता हो रही होगी!
       रातो रात बीमारी की जगह उन से क्रांति का फौ वारा फूटता नज़र आने लगा 

Saturday, 18 April 2026

(व्यंग्य'चिंतन' ) ,,,,की ट्रेन कहीं छूट न जाये

व्यंग्य चिंतन  
ट्रेन कही छूट न जाए 

  आज सुबह से ही वर्मा जी के घर में  धमाचौकङी मची हुई थी ! पङोसी हैरान थे कि सुबह देर तलक सोने वाले वर्मा जी आज खुद ही सबको जगा रहू थे! खटापट से मेरी भी नींद  टूट चुकी थी
 
       

Tuesday, 17 February 2026

आई - 12/1083 संगम विहार paint T ex

04. 04. 026

1- total materials =Rs  2900
2-    Rollers.  02 ×100= 0200
3-   up n dwn  exp ₹   = 0140
   ..total.                  ₹= [3240]
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05 .04.2026

1-  sheesa.                ₹ - 0650
2-  Chaiy samosas    ₹  0040
3-  1 balti Oil bound  ₹  0700
4-   painter 1 [750×3] ₹ 2250
5-  painter 2 ( 750 ×3]₹ 2250=₹5890
     Up & dn  ,,,,,,   , ,,,,,,₹,,,,,,,,,,,,,,,,,,,