Saturday, 24 January 2026

(व्यंग्य चिंतन) विक्रम और बैताल रिटर्न

व्यंग्य "चिंतन" 

विक्रम और बैताल रिटर्न 

    महाराज बिक्रम बङे हठी थे , ठीक साढ़े 12 बजे रात में महल से निकलकर जंगल के रास्ते श्मशान की ओर चल पङे ! हवा मे ठंडक थी और आसमान में चांद मायावती की तरह चिंतित नज़र आ रहा था ! हालांकि बादलो का जमाव तगङा था ,लेकिन वो सभी यूजीसी के मुद्दे पर विपक्ष की तरह,  बिखरे  हुए  थे !   कभी-कभार थोङी देर के लिए जंगल में अंधेरा छा जाता था !
     पेङ की डाल पर बैठा उल्लू बिक्रम को देखकर बङबङाया,- ' मुझे तो महारानी के कैरेक्टर पर शक होता है ! इतनी सर्दी में  महाराज को बगैर कंबल के भगा देती है ! कुछ तो कंबल मेें काला है -'!
    " उल्लू का पट्ठा,,," महाराज बिक्रम बङबडाते हुए आगे बढ़ गये ! अगला द्रृष्य देखते ही महाराज के रोंगटे खङे हो गये ! अपने अपने बछङो के साथ घने जंगल में तीन गायें  चर रही थीं और उनके पीछे झाङी मेें छुपकर बैठा एक बब्बर शेर अपने मुंह पर तङातङ थप्पड मार रहा था ! महाराज बिक्रम  ये मंजर देखकर हैरानी से पूछा, -' आप अपने मुहं पर थप्पङ क्यों मार रहे हो, मिसेज ने तलाक दे दिया है  का  ?'
  शेर झुंझला गया,- " लगता है, बगैर सावन के अंधरा गये हो ,  खैर छोङो, ई बताओ कि ऊ सामने कौन सा जानवर है ?"
      " तीन गायें अपने बछङो के साथ घास-फूस चर रही है "! 
      " इनको मेरे इलाके में घुसने की हिम्मत कैसे हुई ! इसकी सजा मिलेगी, बराबर मिलेगी' !
       " गलती से भी उनके नजदीक मत जाना' !!
               " क्यों"?
      ' ये जंगल यूपी  की सीमा के नजदीक है, अगर गौहत्या  की खबर प्रशासन को लगी तो तुम्हरा एनकाउंटर तय है '! 
    " मै क्या करूं,  मुझे तो चक्कर आवे है" !
  " सत्तू की आदत डाल लो, शाकाहारी बन जाओ, या फिर वीजा लेकर अफ्रीका चले जाओ '!
    ' और कोई ऑप्शन ?'
   थोडा सोचकर बिक्रम बोले,- " जंगल छोङकर सियासत में आ जाओ, सिर्फ वहीं जंगल जैसी सुविधा है ! तुम्हें बिलकुल परायेपन का एहसास नही होगा ! अब तो भैया जी, स्माइल !'
   इतना कह कर महाराज बिक्रम श्मशान की ओर बढ गये, मगर कुछ आवाज सुन कर पीछे घूमकर देखा,,, !
    शेर दुबारा अपना मुंह पीटने लगा था !

      (----अगले अंक में पढिए,,,,बैताल ने जान छुडाने के लिए महाराज बिक्रम को कौन सी कहानी सुनाई और क्या सवाल पूछा !!! क्रमश: )

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