Tuesday, 17 February 2026

Saturday, 24 January 2026

(व्यंग्य चिंतन) विक्रम और बैताल रिटर्न

व्यंग्य "चिंतन" 

विक्रम और बैताल रिटर्न 

    महाराज बिक्रम बङे हठी थे , ठीक साढ़े 12 बजे रात में महल से निकलकर जंगल के रास्ते श्मशान की ओर चल पङे ! हवा मे ठंडक थी और आसमान में चांद मायावती की तरह चिंतित नज़र आ रहा था ! हालांकि बादलो का जमाव तगङा था ,लेकिन वो सभी यूजीसी के मुद्दे पर विपक्ष की तरह,  बिखरे  हुए  थे !   कभी-कभार थोङी देर के लिए जंगल में अंधेरा छा जाता था !
     पेङ की डाल पर बैठा उल्लू बिक्रम को देखकर बङबङाया,- ' मुझे तो महारानी के कैरेक्टर पर शक होता है ! इतनी सर्दी में  महाराज को बगैर कंबल के भगा देती है ! कुछ तो कंबल मेें काला है -'!
    " उल्लू का पट्ठा,,," महाराज बिक्रम बङबडाते हुए आगे बढ़ गये ! अगला द्रृष्य देखते ही महाराज के रोंगटे खङे हो गये ! अपने अपने बछङो के साथ घने जंगल में तीन गायें  चर रही थीं और उनके पीछे झाङी मेें छुपकर बैठा एक बब्बर शेर अपने मुंह पर तङातङ थप्पड मार रहा था ! महाराज बिक्रम  ये मंजर देखकर हैरानी से पूछा, -' आप अपने मुहं पर थप्पङ क्यों मार रहे हो, मिसेज ने तलाक दे दिया है  का  ?'
  शेर झुंझला गया,- " लगता है, बगैर सावन के अंधरा गये हो ,  खैर छोङो, ई बताओ कि ऊ सामने कौन सा जानवर है ?"
      " तीन गायें अपने बछङो के साथ घास-फूस चर रही है "! 
      " इनको मेरे इलाके में घुसने की हिम्मत कैसे हुई ! इसकी सजा मिलेगी, बराबर मिलेगी' !
       " गलती से भी उनके नजदीक मत जाना' !!
               " क्यों"?
      ' ये जंगल यूपी  की सीमा के नजदीक है, अगर गौहत्या  की खबर प्रशासन को लगी तो तुम्हरा एनकाउंटर तय है '! 
    " मै क्या करूं,  मुझे तो चक्कर आवे है" !
  " सत्तू की आदत डाल लो, शाकाहारी बन जाओ, या फिर वीजा लेकर अफ्रीका चले जाओ '!
    ' और कोई ऑप्शन ?'
   थोडा सोचकर बिक्रम बोले,- " जंगल छोङकर सियासत में आ जाओ, सिर्फ वहीं जंगल जैसी सुविधा है ! तुम्हें बिलकुल परायेपन का एहसास नही होगा ! अब तो भैया जी, स्माइल !'
   इतना कह कर महाराज बिक्रम श्मशान की ओर बढ गये, मगर कुछ आवाज सुन कर पीछे घूमकर देखा,,, !
    शेर दुबारा अपना मुंह पीटने लगा था !

      (----अगले अंक में पढिए,,,,बैताल ने जान छुडाने के लिए महाराज बिक्रम को कौन सी कहानी सुनाई और क्या सवाल पूछा !!! क्रमश: )

Wednesday, 21 January 2026

[व्यंग्य चिंतन] 'सखि, वैलेंटाइन आयो रे'

(व्यंग्य चिंतन)   'सखि वैलेंटाइन आयो रे'

         असमंजस मेें पङी कोयल बसंत की सुगंध पाकर भी कूकने की बजाए मुहं पर फेसमास्क लगाए अमराई मेें खामोश बैठी है ! उधर,,,गले में पांच पांच तोला सोने की मोटी चेन डाले और जैफ्री एपस्टीन के फॉलोवर्स कौए अमराई का चक्कर काटते हुए गा रहे हैं, - ' आजा मेरी गोदी मेें बैठ जा ! ' दूसरे कौए गैंग लीडर के कैरेक्टर को फॉलो कर रहे हैं,  -' तू है मेरी क,,,क,,,क,,,किरन '!
    इस छिछोरेपन के कारण आम के पेडों पर "बौर" तक नहीे आ रहे ! मौसम का नेटवर्क उङा हुआ है , सिर्फ कौए ही बसंत और वैलेंटाइन का टॉवर कैच कर रहे हैं ! बौर आ रहा है न गेहूं मेें बाली, सबको कोयल की कूक का इन्तजार है ! किसान चिंतित हैं, कौए मगन ! सियासत के अमृतकाल का रहस्य सिर्फ कौवों के समझ में आया है ! 
         बसंत से पूरी तरह अपरिचित किंतु वेलेंटाइन की धीमी आंच  मेें पूरी तरह पका हुआ शहर के कवि को  गांव वाला बसंत दिसंबर मेें ही साक्षात् नजर आ रहा है, - 'ओ कामदेव ओ कामदेव !
                       तन मन सुलगे कृपा हो देव !
          पीङादायक आया बसंत !
          पत्नी विहीन तङपें अनंत !
           कविता में मेंढक बोल रहे !
              बादल दावानल डोल रहे
         तेरी आराधना करू देव !
          एक गर्लफ्रेंड तो भेज देव ! 
    चुनाव खत्म हो चुका है, विजयश्री से उत्साहित एक नेता  विकास की टोह लेने के लिए समर्थकों की मीटिंग में पूछ रहा है ,- अपने अपने इलाके की मुख्य समस्या बताइये,ताकि हम समझ सकें कि सबसे पहले प्राथमिकता किसे देना है !'
      लोगों ने प्रथमिकता के आधार पर बताना शुरू कर दिया,-'  विधायक जी,  हमारी कॉलोनी में पानी बराबर नही आता-'!
   -   " पास में स्कूल नही है, बच्चो को बहुत दूर जाना पङता है '!
     -    " पिछ्ल बरसात में  सङक बह गयी थी, तबसे मरम्मत भी नही हुई -'!
- ' मेरे इलाके मे एक भी डिस्पेंसरी नही है, मगर दारू की तीन तीन दुकाने खुल गई हैं "!
    तभी एक दिव्य  सुझाव आया- ' साहब जी, आपके विधानसभा का नाम 'कबीरनगर' बिलकुल ठीक  नही है' !
      " क्यों?"
   ' साहब जी, कबीर मुसलमान थे, इसलिए इसका नाम बदलकर  ' संतनगर' कर दिया जाये '-!
    सन्नाटा छा गया ! सब एक दूसरे का मुह देखने लगे !आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास,,,! लेकिन यह क्या, अचानक विधायक जी चिल्लाए, -' तालियां !! तालियां !!!'
      सब घबराकर ताली बजाने लगे , विधायक जी ने खङे होकर सहर्ष घोषणा किया,-'  क्षेत्र के विकासक्रम मे आप देव तुल्य लोगों ने सर्व सम्मति से  जिस वकास का आदेश दिया है,वो मेरे सिर माथे पर ! ये बहुत कठिन काम है,और आप सबको तन मन धन से तैयार रहना होगा ! पन्द्रह दिन बाद धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल की शुभ शुरुआत करेंगे! तब तक आप लोग तैयारी करो, मैं भी अभी तीर्थ यात्रा पर दुबई जा रहा हूं- ! आमरण अनशन के लिए कुछ बलिदानी लोगों  को भी तैयार कर लेना -'!
        इतना कहकर विधायक जी अंदर चले गये ! 

         कुछ लोगों के लिए अभी भी दुविधा वाली स्थिति बनी हुई है, - बसंत वैलेंटाइन दोऊ खङे- काके लागूं पांय ! आम आदमी पूरी जिंदगी मात्र दर्शक होकर गुजार देता है-, विकास, बसंत और   वैलेंटाइन मेें से कुछ भी नही मिलता !  किस्मत में बौर आते ही नही ! जवानी अमृतकाल की तरह ऐसे दबे पांव आकर चली जाती है कि पता ही नही चलता ! सहमी हुई फ़रवरी आ चुकी है ! बसंत और वैलेंटाइन दोनो एक दूसरे को धकियाते हुए कह रहे हैं,  - पहले आप,,,पहले आप -'! पहले आकर कौन रिस्क ले ! अब 14 फरवरी तक धर्म योद्धा त्रिशूल के साथ पार्कों मेें वैलेंटाइन के प्रेम पगे युवा जोडों को ढूंढ ढूंढ कर रक्षा बंधन  मनवाएंगे ! ऐसा करने से वैलेंटाइन का हीमोग्लोबिन कम होगा, और  संस्कृति तथा सभ्यता  का इंडेक्स हमारी अर्थववस्था की तरह मजबूत होगा ! 
         15 फ़रवरी तक वैलेंटाइन का वायरस विलुप्त हो चुका होगा, और सभी संस्करी धर्म योद्धा साल भर के लिए शीतनिद्रा में चले जायेंगे !

      Sultan bharti (journalist)