Tuesday, 18 June 2024

(व्यंग्य चिंतन) जाने फिर क्यूँ जलाती है दुनियां मुझे

(व्यंग्य चिंतन )

"जाने फिर क्यूँ जलाती है दुनियां मुझे" 

     अब मुझे क्या मासूम कि सोनाक्षी सिन्हा की शादी कब हो रही है और किससे हो रही है, परंतु पिछले 15 दिनों से सोशल मीडिया पर चल रहे देवासुर संग्राम को देख कर लगा कि- शायद बहुत बड़ा  'अनर्थ' होने जा रहा है ! ऐसा  'घोर पाप' जिसका प्रायश्चित ही संभव नहीं ! 'सोनाक्षी शादी करने जा रही है'- ये तो खुशी की बात है किन्तु वो जहीर इकबाल से शादी करने जा रही है, ये तो घोर सदमें वाली खबर है ! ख़बर को सुन कर कुछ प्राणी कोमा में चले गए , तो कुछ मानसिक संतुलन खो बैठे! वो लड़की के रिश्तेदार भी नहीं हैं किन्तु इस विनाश कारी शादी पर 'खामोश' नहीं रह सकते ! बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना,,,जैसा मामला है ! इन्हें  दुर्भाग्यवश शादी की ख़बर लेट मिली और उधर लड़की के अज्ञानी माँ बाप विरोध में नहीं हैं , इसलिए ये लोग और दुखी हैं l, क्योंकि धर्मयुद्ध को दिशा नहीं मिल रही ! ले देकर सोनाक्षी  और  जहीर ही  बरामद  होते  हैं ! अग्निकुंड प्रज्वलित है और बुद्धि विवेक की आहुति शुरू है ! 
    लड़की लड़का के घर वाले शादी की तैयारी में लगे हैं और सोशल मीडिया पर 'खामखा' वालों ने मोर्चा थाम लिया है ! एक पक्ष सोनाक्षी के भूत, भविष्य और वर्तमान को इन्फेक्शन से बचाना चाहता है ! धर्म को अधर्म के संपर्क से दूर रखना चाहता है ! 'खामखा' वालों की अपनी निजी और परिवारिक समस्याएं भी इस आपदा के चलते गौण हो चुकी हैं ! वो- रूखी सूखी खाय के ठंढ़ा पानी पीव - वाली डगर से गुजर के भी ये शादी रोकने पर लगे हैं ! पर  करें  क्या,  दरअसल संविधान , लड़की के परिवार की सहमति और बहुमत की ख़ामोशी इस 'आंदोलन' के पक्ष में नहीं है !
    दूसरी तरफ, वर को अपना सहोदर मान रहे भक्त भी पूरे जोश में हैं ! अपनी सगी भाभी का अपमान करने वाले भी फेसबुक पर सोनाक्षी को 'भाभी जी' लिख रहे हैँ ! फेसबुक वॉल पर अग्निबान चल रहे हैँ ! 'लिव इन रिलेशनशिप' में कोई दोष न देखने वाले लोगों की शादी के लिए तमाम 'अब्दुल्ला' दिवाने हुए पड़े हैं ! हालत ये है कि रोजाना जब तक फेसबुक वॉल पर कुछ निकाल न दें,खाली पेट भी जुलाब की कैफियत बनी होती है ! फेसबुक पर सोनाक्षी सिन्हा और ज़हीर इकबाल की शादी इन 'अब्दुल्ला' दीवानो के लिए नाक का सवाल बन चुकी है! घर की बहन या बेटी की शादी को लेकर भी कभी इतने चिंतातुर नहीं थे ! फेसबुक पर ऐसा क्या लिख मारें कि ग्रुप में सिर्फ इन्हीं की बदबू पहचानी जाए ! तीन दिन बचे हैं , समुद्र मंथन बग़ैर लन्च अवरोध के चल रहा है ! 
     चरित्र हनन की सीमा रेखा पार कर अब वीर योद्धा फावड़ा लेकर इतिहास में कूद चुके हैं ! इतिहास ज्ञान में नई पीढ़ी का कहना ही क्या ! इतिहास के मामले में - बीती ताहि बिसार दे - का पालन हो रहा है - ' जो अच्छा लगे उसे अपना लो जो बुरा लगे उसे दफना दो-'! कुछ लोग सोनाक्षी को अतीत की याद दिला कर उसके भयावह भविष्य की तस्वीर दिखाने वाली पोस्ट डाल कर सवाल भी पूछ रहे हैँ, - ' मोहतरमा ! किस कंपनी 
 का फ्रिज भेजें आपको?'  कुछ विद्वान इतिहासकार तो सोनाक्षी को  सायरा खान ( रीना राय) की संतान बताकर खुद को दिलासा दे रहे है,  पर 48 डिग्री गर्मी और 148 डिग्री नफ़रत की आंच पर धधक रहे दिले नादां को सुकून कहां ! वर पक्ष की तरफ से भी 'ख़ामखा' वाले  फेसबुक को शौचालय समझ कर बैठ चुके हैं, - दोनों तरफ है हाजत बराबर बनी हुई!
     खबर कैसी भी हो,  देर सबेर चौधरी तक पहुंच ही जाती है! आज सुबह 07 बजे ही उसने मुझे जगा दिया,-' ओय भारती ! इब छोड़ दे बिस्तर ने! तभी तो कहूं अक क्यूँ न आ रहो मॉनसून इतै -'!
     " क्या मतलब?"
' छोरी बावली हो गयी के ! कूण है यू जहीर इकबाल,जिस के गैल लड़की लव जिहाद कर रही ! तमै कुछ बेरा' ?
  ' तुम तो फोन भी नहीं चलाते, किसने लव जिहाद  की खबर दे दी?'
       ' नु पता लगो अक तू जहीर नाम के छोरे के गैल सै , इब परे हो ले !'
    ' कमाल है, मैं जहीर इकबाल के साथ हूँ और मुझे अब तक पता नहीं चला ! कौन बोला तुमसे ?'
        'वर्मा जी नें , देख भारती ! मोहल्ले में ईद, दीवाड़ी, मोहर्रम अर् रामलीला सबै कुछ मिल जुल कै मनाया  ज्या ! तुम बाहर वालों के गैल 'केले' ही लव जिहाद मना रहो ! मुझे बताया को न्या -'! 
    मैंने अपने कान पकड़े, -' यार  तुझे बताये बग़ैर तो मुझे कब्र में भी नहीं जाना! तू ऐसी ख़बरों पर कैसे यक़ीन कर लेता है! दरअसल शत्रुघन सिन्हा की लड़की शादी कर रही है जहीर इकबाल नाम के लड़के के साथ,  वर्मा जी ख़ामखा परेशान हैं ! फ़िल्म इंडस्ट्री में कोई नई बात नहीं है ! फिरोज खान की लड़की ,संजय खान की लड़की,सलमान खान की बहन, दिलीप कुमार की भांजी आमिर खान की बेटी,,,,इन् सब ने हिन्दू  परिवार में शादी की है' ! 
          चौधरी सन्न था,  बड़ी देर बाद बोला,-' अर यू लव जिहाद कूण है ! पहले कदी सुना को न्या ?'
    ' उसका पता ठिकाना वर्मा जी को ही मासूम होगा,  मैं तो कभी मिला नहीं !'
          लाठी लेकर चौधरी उठ गया,-' वर्मा कू बताना पड़ेगा ! या मोहल्ले में वो रह ले या फिर लव जिहाद -! अर तू भी सुण ले भारती ! बाड़ बच्चेदार होकर तमैं लव जिहाद कौ खातर इत उत हाँडना  ठीक नो है-'!
          मुझे तो नाहक धमकाया गया है!

                    ( सुल्तान भारती)








        











Saturday, 4 May 2024

( थाना प्रभारी बल्दीराय )

सेवा में,
श्रीमान थानाध्यक्ष महोदय 
थाना बल्दीराय, जनपद सुल्तानपुर यूपी 

विषय,,,,,,बांटवारे में प्राप्त मेरे हिस्से के मकान पर दबंगई से कब्जा करने के खिलाफ आवेदन पत्र !

मान्यवर !
        मैं प्रार्थी अब्दुल रहमान  s/o मुहम्मद यासीन सिद्दीकी ( late) , गाँव pataila का निवासी हूँ ! मेरे पिताजी चार भाई थे,( मोहम्मद यासीन, मुहम्मद खलील , मोहम्मद जमील (उर्फ सुल्तान भारती) और मुहम्मद मुस्लिम!) इसमें मोहम्मद यासीन और मुहम्मद खलील का देहांत हो चुका है! 
      2016 में पुश्तैनी घर और खेत का बंटवारा हुआ ! बंटवारा के वक़्त-बड़े चाचा मुहम्मद जमील उर्फ सुल्तान भारती ( पत्रकार दिल्ली)और छोटे चाचा मुहम्मद मुस्लिम दिल्ली से आए ! दिवंगत चाचा मुहम्मद खलील की अंतिम इच्छा थी कि उनकी छोटी बेटी ( जो गाँव के मोनू से ब्याही है!) को भी रहने का ठिकाना मिले !
    भाई की इस इच्छा का सम्मान करते हुए चाचा मुहम्मद जमील ने पुश्तैनी घर में अपना हिस्सा भाई की बेटी और दामाद ( आसिया और मोनू) को दे दिया ! दिवंगत चाचा ( मुहम्मद खलील) का हिस्सा उनके बेटों सिकंदर और अकबर को मिला! सबसे छोटे चाचा ( मुहम्मद मुस्लिम) ने भी मकान का अपना हिस्सा दोनों मृतक भाइयों के बेटों को दे दिया! !
       बंटवारे के बाद कायदे से मोनू और आसिया को अपने हिस्से में रहना चाहिए, पर वो पूरे घर को इस्तेमाल कर रहे हैं ! उनकी नीयत पूरे पुश्तैनी घर पर कब्जा करने की है! उन्होने अभी मेरे हिस्से के मकान में गाय और भैस बाँधना शुरू कर दिया है! अभी दस दिन पहले मेरे चाचा ( पत्रकार Sultan bharti) दिल्ली से आए थे, उन्होंने मेरे सामने आसिया और मोनू से अपने हिस्से में रहने की ताकीद भी की थी ! ( 24-04-2024) ! तब दोनों ने दो दिन में गाय हटा लेने की  बात मानी थी ! चाचा के लौटने के बाद फिर गाय बांधने लगे !
  आपसे  विनम्र निवेदन है कि उनकी बेईमानी पर लगाम  लगाने की कृपा करें! मैं एक सोशल ऐक्टिविस्ट ( समाज सेवी) हूँ ! मुझे न किसी का हिस्सा चाहिए और न कोई जबरदस्ती मेरे हिस्से पर काबिज हो ! इसलिए इस विषय में मुझे संवैधानिक सहायता उपलब्ध कराते हुए उन्हें ( आसिया और मोनू) को अपने हिस्से में घर बनाने और रहने का निर्देश दिया जाए, आपके इस त्वरित सहयोग के लिए मैं सदैव आभारी रहूँगा- धन्यवाद  !!

                          प्रार्थी 

              अब्दुल रहमान सिद्दीकी  
     S/o मुहम्मद यासीन सिद्दीकी ( late)
      ग्राम,,, पटैला - थाना  बल्दीराय 
             ज़िला ,,, सुल्तानपुर  यूपी  
फोन   7889609414 
     

Thursday, 2 May 2024

(व्यंग्य चिंतन) "आनंद ही आनंद "!

"व्यंग्य चिंतन" 

आनंद ही  आनंद  !
          मुझे भी चाहिए ! क्या करूँ  कभी मिला नहीं ! आनंद हमेशा मेरी चाहत और तलाश के केंद्र में रहा, पर कमबख्त पकड़ में नहीं आया।  आनंद की खोज में जब जब दौड़ा, तो कभी मँहगाई मिली तो कभी कोरोना !  कुछ लोगों ने तो एक महापुरुष के दिव्य सुझाव पर अमल करते हुए कोरोना में ही आनंद ढूढ़ लिया था ! इस खोज का नामकरण हुआ - आपदा में अवसर ! समाजसेवा और सियासत के व्यवसायी  आनंद के ब्रांड एम्बेसडर बने, इसलिए आपदा से हमेशा- दो गज दूरी- आनंद ज़रूरी - का पालन होता रहा ! बेशक लेखक अगली पीढ़ी का आर्किटेक्ट होता है,  पर उसकी कुंडली में 'आनंद' वाली रेखा नहीं होती ! उसका दिमाग़ सेटेलाइट कैमरा और सुपर कंप्युटर से ज़्यादा क्रियाशील होता है, किंतु  शरीर से लेखक बेहद सुस्त प्राणी होता है ! वो समाज को  आनंद से भरी एक ( काल्पनिक) दुनियां दे सकता है किन्तु अपने लिए वास्तविक आनंद चाहता है ! न मिलने के कारण उसके अंदर क्रोध के दुर्वासा रिषि दावानल लेकर उमड़ते रहते हैं !
         मेरी समस्या थोड़ा जटिल है ! आनंद तो मुझे भी चाहिए, किंतु कहां से लाऊँ- आजतक समझ में नहीं आया ! वैसे भी बुद्धिजीवी होते ही प्राणी कई किस्म के आनंद से वंचित हो जाता है! गैर बुद्धिजीवी शख्स भौंडे और फूहड चुटकुले पर भी खुलकर हंस लेता है,  वहीं बुद्धिजीवी चुटकुला सुनते ही ऐसी गंभीरता ओढ़ लेता है गोया हंसते ही उसका टैलेंट डिलीट और वज़न कम हो जाएगा ! हमेशा गंभीर बने रहने से उसके अंदर एक कोयला सा सुलगता रहता है ! ऐसे में 'आनंद' संपर्क में आते ही  झुलस जाता है ! अति बुद्धिजीवी व्यक्ति से उसकी बीवी कभी सहमत नहीं होती, और बीवी के सांसारिक तर्कों से बुद्धिजीवी  सहमत नहीं होता ! ऐसे घर में आनंद की इंट्री हो तो कैसे हो ! वहाँ तो बसंत के महीने में भी बैशाख का भूसा सुलगता  रहता है !
         'आनंद' की बढ़ती हुई डिमांड देख कर कई आढ़ती मैदान में आ गए हैं ! ये दिव्य व्यापारी शुरुआत में आनंद  के बदले  सिर्फ श्रद्धा लेते थे , बाद में युवा शरीर और संपदा पर भी झपटते पाए गए ! हैरत है - 'आनंद' देने वाले आनंद बांट कर भी मालामाल हो गए और लेने वाले गरीबी रेखा के नीचे पहुच गए ! आनंद की अनुभूति तक विलुप्त थी ! लेन देन का ये ऐसा दिव्य कारोबार है जहां सिर्फ आनंद देने वाला सुखी नज़र आता है ! वैसे 'आनंद' तक पहुंचने की प्रक्रिया एक जैसी नहीं है ! किसी किसी को  'संतोष'  मात्र से परम 'आनंद' की प्राप्ति हो जाती है ! ( मुझे तो संतोष से एलर्जी है, उधार लेकर गाँव भाग गया !)  आज अमृतकाल    में संतोष करने वाले   लगभग विलुप्त होने के कगार पर है ! समाज और राजनीति में बैठे डायनासोर  'संतोष' को पास भी नहीं फटकने देते ! वो जनता की विरासत वाले इस सतोगुण को जीते जी हाथ नहीं लगाएंगे ! वोटर  को  चाहिए  कि - रूखी-सूखी खाय के सरकारी नलके वाला ठंढ़ा  'संतोष'  पीते रहे,,,!
            40 डिग्री तापमान में मेरा आत्मविश्वास पसीने पसीने हो रहा है ! कोरोना में बेरोजगार हो गया था, तब से आज तक  'आनंद' से आमना सामना नहीं हुआ , -  आवाज़ दो कहां हो !काश मुझे  भी  आपदा  में आत्मनिर्भर  होने का हुनर आता !  मेरे जैसे हज़ारों लोग जो दूसरों की जेब में अपना आनंद नहीं ढूँढते, कभी विकास नहीं कर सकते ! अभी अभी गाँव से लौटा हूं! मेरे एक मित्र ने बताया कि कुछ जागरूक लोग  'आनंद' बाँटने गावं तक आने लगे हैं ! मेरे बचपन में तो न बिजली थी न पांच किलो वाला आनंद ! चोर गाँव में  मात्र गेहूँ चुराने का जोखिम नहीं उठाते थे ! अब  ठग गाँव में जाने लगे हैं ! घर में रखे आनंद को दुगुना करने के लोभ में इस बार काफी लोग आनंद विहीन हो गए !
       पहले विकास के बाद आनंद आता था, अब चुनाव प्रचार के दौरान आने लगा है ! ईश्वर की तरह आनंद के भी अनंत रूप हैं! चुनाव प्रचार के दौरान ये साड़ी, सिलैंडर, सिलाई मशीन और दारू की पेटी के शक़्ल में आने लगा है ! इस दौरान हर पार्टी के उम्मीदवार  'आनंद' और  ऑफर साथ साथ लाते हैं, ' एक वोट दे दो- दो बोतल आनंद ले लो' ! हमारा मित्र चौधरी इस चुनावी मॉनसून में तीन चार महीने का  'आनंद' इकठ्ठा कर लेता है ! चुनावी मॉनसून में आनंद ही आनंद बरस रहा है! सभी लोग चाहते हैं कि पक्ष विपक्ष का सारा आनंद इधर ही हाथ लग जाये, पता नहीं बाद में किसके कुंडली में वनवास आए -इसलिये मत चूके चौहान!
          मैं  आनंद को लेकर अभी भी कंफ्यूज हूँ, मिलेगा या नहीं मिलेगा ! चंट लोगों ने बड़ी चतुराई से उपदेश देने का जिम्मा अपने हाथ में ले लिया ! खुद चंदे का आनंद लेते हैंऔर जनता को संतोष में ही परम आनंद ढूढ़ने का सुझाव देते हैं ! मोह माया से दूर रहने और - 'दाल रोटी खाओ  प्रभु के गुण गाओ - का उपदेश देते रहते हैं - ! 'आनंद' की खोज में लोग पहले हिमालय पर चले जाते थे ! आजकल लोगों ने आनंद की गठरी स्विस बैंक में जमा करना शुरू कर दिया है ! जैसे ही आनंद पर ख़तरा मंडराता है, प्राणी विदेश भाग जाता है !  बलात्कार में विश्व कीर्तिमान बनाने में लगे एक युवा महामानव ने अभी अभी देश से  भाग कर विदेश में शरण ली है ! कई महापुरुषों की नाभि का अमृत विदेश में है, उनकी मज़बूरी है कि वह  'आनंद' से ज़्यादा दिनों तक दूर नहीं रह सकते!

             ( सुल्तान भारती)
 



         

Monday, 29 April 2024

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                        (शख्सियत)

'इक़रा हसन'- की लोकप्रियता का तिलिस्म 

     मुस्कराता चेहरा, बोलती आंखें, सर पर हमेशा करीने के साथ नज़र आने वाला दुपट्टा ! साधारण शक़्ल सूरत की एक असाधारण क़ाबिलियत रखने वाली युवती ! उनका पहनावा और सर्व समाज में घुलमिल जाने वाला अंदाज़ देख कर कोई अजनबी कयास भी नहीं लगा सकता कि असाधारण रसूख वाले परिवार की ये साधारण सी नज़र आने वाली लड़की दिल्ली के 'लेडी श्री राम' और लंदन से पढ़ कर आई है ! वर्तमान में वो-  उच्च शिक्षा,प्रशंसनीय तहज़ीब, भारतीयता और गंगा जमुनी विरासत की सबसे सशक्त अलम बरदार बनकर उभरी हैं ! समाज सेवा और सियासत की कंटीले रास्तों पर इकरा ने पिछले 9 साल ज़बरदस्त मेहनत करके लोगों में अपना ये मुकाम हासिल किया है !
      सियासत और समाज सेवा उनको विरासत में मिली है! उनके दादा अख्तर हुसैन कैराना से सांसद थे! पिता मुनव्ववर हसन चुनाव जीत कर बारी बारी से चारों सदनों में बैठे ! वालिद की मृत्यु के बाद इक़रा की मां तबस्सुम हसन ने भी 2 बार लोकसभा का चुनाव जीता था ! बड़े भाई नाहिद हसन को 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में इक़रा ने तब चुनाव जिताया जब एक (तथाकथित) 'विवादित बयान' के चलते उन्हें जेल में बंद कर दिया गया ! और अब,,,इक़रा खुद कैराना से  सांसद हैं !
        चुनावी पर्यवेक्षक उसकी बढ़ती हुई लोकप्रियता,ज़मीनी पकड़, जनसंपर्क शैली,सादगी, शालीनता और सौम्य व्यावहार से उसकी जीत के प्रति आश्वस्त हैं ! नफ़रत के इस दौर में इक़रा एक उम्मीद है, रोशनी है और नि:संदेह एक सशक्त प्रेरणा भी, देश की लाखों युवक-युवतियों के लिए कि- देश और विदेश से उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी भारतीय तहज़ीब का दुपट्टा कितनी लोकप्रियता देता है ! 

   इक़रा पर एक शे'र तो बनता है -----
कोई तन्हा मुसाफिर कारवाँ बन जाता है जिस दिन!
उसी  दिन  'मुश्किलों' के  हौसले  भी टूट  जाते हैं !!
                  
           ( Sultan bharti)
                       

Monday, 8 April 2024

(व्यंग्य चिंतन) ग़रीबी रेखा पर खड़ा जीव

"व्यंग्य चिंतन "
गरीबी रेखा पर खड़ा जीव

      अब का बताएं भैय्या ! मुझे अपने पिछड़ेपन पर शर्म आ रही है और खासा गुस्सा भी ! वर्मा जी के पड़ोस में बस कर भी मैं ज़माने के हिसाब से खुद को अपडेट न कर पाया ! जब कोरोना आया, तो मैं 2 ग़ज़ दूरी को फॉलो न कर सका, जब कि वर्मा जी फ़ोन की लाइट जलाने से लेकर ताली, थाली,झांझ, मजीरा से ढोल नगाड़ा तक चले गए ! इतना पिछड़ापन होने के बावजूद चौधरी को जागरूक करने की ज़िम्मेदारी भी मेरे ऊपर है! क्या करें, हर ख़बर के सत्यापन की गहन ज़िम्मेदारी मेरी है ! खास ईद के रोज कुछ ऐसा ही हुआ !
     साढ़े 7 बजे सुबह ईद की नमाज़ पढ़ कर अभी मैं घर में घुसा ही था कि दरवाज़ा खोल कर चौधरी अंदर आया! मैं कुछ बोलता, उससे पहले ही चौधरी गुस्से में बोला,- कितै लिकड़ गया सुबह सुबह-'?
  ' आज ईद है, आ गले लग जा !'
' हट जा भारती पाछे नै !!'
     ' क्यों ! क्या हुआ '? 
' मोय पतो है अक् तू कहां ते लिकड़ कै आ  रहो!'
      ' मस्जिद से!'
  ' न ! गरीबी रेखा के नीचे ते लिकड़ के आ रहो ! केले केले  लिकड़ आया ! मुझे गैल न लिया ! हद हो गई बेशर्मी की-'!
      मैं अवाक था ! मैं वाकई मस्जिद से ईद की नमाज पढ़ कर आ रहा था, और चौधरी बड़ा गंभीर आरोप लगा रहा था कि  मैं गरीबी रेखा के नीचे से निकल कर आ रहा हूँ ! एक बारगी तो मुझे भी अपने ऊपर शक होने लगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मैं मस्जिद के बजाय गरीबी रेखा के नीचे से निकल कर आया  हूँ ! लेकिन मुझे भनक तक नहीं लगी , और चौधरी ने देख भी लिया ! क्या इतनी खामोशी से ग़रीबी रेखा के नीचे से ऊपर आया जाता है कि निकलने वाले को भी अपनी आहट न मिले ! ग़ज़ब भयो रामा,,,!
    मैने जेब टटोल कर देखा, जेब में 20 रुपये का एक विकलांग नोट अभी भी मौजूद था ! इस नोट ने  मेरा ढहता हुआ मनोबल  दुरुस्त किया और यक़ीन दिलाया कि मैं वहीं खड़ा हूँ जहां कल शाम था ! मैंने चौधरी को समझाया,- ' मैं ग़रीबी रेखा से बिलकुल बाहर नहीं आया, तुम तलाशी लेकर देख सकते हो ! जेब में वही बीस का नोट है जिसे परसों तुमने  लेने से मना किया था !-'!
    चौधरी सकते में आ गया,- ' वर्मा जी ने मोहल्ले में एक पोस्टर चिपकाया है, कि  पिछले दस साल में साढ़े तेरह करोड़ लोग ग़रीबी रेखा के  नीचे ते बाहर लिकाड़े गए , पर लिस्ट  दिखाई  कोन्या !'
    मैंने चैन की साँस ली ! वर्मा जी का स्कड मिसाइल फेल हो चुका था ! चौधरी कुर्सी पर बैठता हुआ बोला-' उरे कू सुण भारती ! जो लोग गरीबी रेखा ते बाहर लिकड़े सूं , उन्हें पहचानेगो कैसे-'! 
     विकट समस्या थी, -  चिंता मुझे भी होने लगी ! इतनी बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा से बाहर निकाले गए हैं ! पता नहीं निकलने वाले लोगों को जानकारी है या वो भी अंधेरे में हैं ! मैंने बूमरेंग का रुख वर्मा जी की तरफ मोड़ दिया-' हो न हो, वर्मा जी को सारी जानकारी है! क्या पता अपनी कॉलोनी की लिस्ट उन्होंने ही  सरकार को भेजी हो ! काफ़ी तेज आदमी हैं -'!
    ' इब कै सारी तेजी लिकाड़ दूँगा-'! चौधरी गुस्से में बोला-'  इब देखता हूँ अक् कैसे लिकड़ता है ग़रीबी रेखा ते बाहर-, वापस धकेल दूँगा-!'
 मैं यही तो नहीं चाहता था ! बड़े मुश्किल से चौधरी को समझा पाया कि ये वर्मा का नहीं केंद्र सरकार का काम है ! अब चौधरी और भी हैरान था,- ' खली , चोकर ,बिनौला  अर  हरा चारा सबै मंहगा हो गयो ! अर् दूध के लिए तू भी रौला काटे,  अक दूध में घना पानी दीखे ! के करूँ बता, पूरो तबेला ग़रीबी रेखा के नीचे घास चर रहो ! साढ़े तेरह करोड़ में छ: भैंस तो ले सकती थी सरकार -! ' 
   'हो सकता है अगली लिस्ट में भैंसों का नंबर आ जाए, लो सिवईं पियो-!'
     थोड़ी देर बाद नॉर्मल होकर चौधरी ने विचित्र सवाल पूछ लिया,-' तू कद लिकड़ेगो ग़रीबी रेखा ते बाहर-?'
      ' निकालने का काम सरकार का है ! पब्लिक का कर्त्तव्य है- चुनाव से पहले गरीबी रेखा के नीचे जाना, उस बाधा दौड़ में अब मैं क्वालिफाइड हूँ-!'
     "अर् मैं ?"
   " हम और तुम एक ही केटेगरी मे हैं, मगर ग़रीबी रेखा के नीचे से निकालने का काम रोज रोज नहीं, बल्कि पांच साल में एक बार होता है! "
     " तब तक के करूं?"
    ' वेट करो ! पहले भी बाहर आने के लिए साठ पैंसठ साल वेट किया था ! अभी तो जुमा जुमा  दस साल हुए हैं ! - ज्ञानी लोगों ने संतोष को 'परम सुखम'- बताया  है ! रास नहीं आ रहा है क्या !'
     'थारा उपदेश कुछ खास समझ में न आ रहो-'!
       'तो सुनो, देवासुर समुद्र मंथन के बाद पहली बार पृथ्वी पर अमृतकाल आया है, जब बग़ैर समुद्र मंथन के अमृतपान की अनुभूति हो रही है ! यह जो अनुभूति है, बड़ी काम की चीज़ हैं ! ये हमें जड़ और चेतन का फर्क बताती है ! प्रेम, आनंद और ऑक्सीजन इसी अनुभूति का परिणाम है ! अमृत काल भी इसी अनुभूति की प्रचंड उपस्थिति है ! मेरा ख्याल है कि अब गरीबी रेखा से ऊपर निकलने की मोह माया में नहीं पड़ोगे -'!

    समझ में कुछ न आए तो अपने पर कम मगर सामने वाले पर ज़्यादा गुस्सा आता है !  चौधरी आधी सिवईं छोड़ कर उठ गया !  मैं अभी भी साढ़े तेरह करोड़ वाली लिस्ट को लेकर चिंतित  हूँ ! पता नहीं उस लिस्ट में हमारे मोहल्ले के - कितने आदमी थे- !  सांभा है कि बोलता नहीं !

Sultan bharti 
   

Monday, 1 April 2024

(शिनाख्त) साइबर अपराध का बढ़ता दायरा

    (शिनाख्त)
           साइबर अपराध का चढ़ता पारा 

        तारीख  24 मार्च 2024- वक़्त रात के 11 बजे थे ! दक्षिण पूर्वी दिल्ली के अपने निवास में आधा घंटे पहले सोये शमीम खान अचानक नींद से जाग उठे!  उनके सेल फोन की घंटी लगातार बज रही थी! नींद की खुमारी में ही उन्होंने फ़ोन उठा लिया-' हैलो '! 
     उधर से आवाज़ आई-' आपने  'मुख्तार भाई' ( बदला हुआ नाम) से बारह हज़ार रुपये मांगे थे न ?'
शमीम खान अवाक् थे ! दिन मे सचमुच उन्होंने फ़ोन करके मुख्तार से 12000/ मांगे थे! उन्होंने समझ लिया कि मुख्तार ने ही इस आदमी से जिक्र किया होगा ! मुख्तार उनके दोस्त थे! उधर से उस आदमी ने कहना शुरू किया, -' आपका नंबर मुख्तार ने ही दिया है ! मैं आपको इसी नंबर पर पेमेंट भेज रहा हूं-'!
  नींद उड़ चुकी थी ! समस्या का निराकरण सामने था ! थोड़ी देर बाद फ़ोन स्क्रीन पर 10,000/ रुपया आने का मैसेज आया! साथ ही फ़ोन आ गया ,- ' सर्वर थोड़ा डाउन है, मैं दो हजार और भेजता हूं-'!
और फिर,,,,,स्क्रीन पर 2 हजार की जगह 20 हज़ार  का मैसेज आया ! शमीम भाई दो हजार की जगह बीस हजार देख कर हैरत में थे कि तभी फिर उसी शख्स का फ़ोन आ गया,- ' भाई साहब ! जल्दबाजी में अट्ठारह हज़ार रुपया ज़्यादा चला गया, प्लीज वापस भेज दो-'!
    रोज़ा नमाज़ के पाबंद शमीम खान उसे मुख्तार का परिचित समझ कर लुट गए ! उसी वक़्त उन्होंने दिए गए नंबर पर अपने अकाउंट से 18000/ रुपया भेज दिया, और खुशी खुशी बिस्तर पर लेट गए ! तब उन्हें क्या पता था कि वो तेजतर्रार साइबर अपराधियों के बिछाए जाल में फंस कर अपने खून पसीने की कमाई गवां बैठे हैं ! पुरसुकून नींद के आगोश में जाने से पहले उनके दिमाग़ में आया कि अकाउंट बैलेंस चेक कर लें!
    और जब चेक किया आँखों के आगे अंधेरा छा गया ! खाते में 12000/ आने की कौन कहे, 18000/ एक झटके में  निकल गया था ! 
     सुबह उन्होंने साइबर कैफे में जाकर ऑन लाइन शिकायत दर्ज करायी ! मामला साइबर क्राइम का था, इसलिए साइबर थाना बदरपुर जाना जरूरी था ! शमीम खान मेरे अच्छे मित्र हैं, उन्होंने मुझे साथ चलने को कहा ! मैं राजी था, उन्हीं की गाड़ी से साइबर थाना बदरपुर को रवाना हुआ! उस दिन होली थी, सड़क बिल्कुल खाली थी ! हम आधे घंटे में थाना पहुंच गए ! जाने के बाद पता लगा कि गलती से ऑन लाइन शिकायत दक्षिणपूर्व दिल्ली की जगह दक्षिण दिल्ली के साकेत थाना को चली गई है !  हमें वहां जाना पडा !
   वहां से साइबर क्राइम की कम्प्लेंट दुबारा बदरपुर थाने में ट्रांसफर हुई और हमें 2 दिन बाद आने को कहा गया ! थाने से निकलते हुए मायूस शमीम खान ने मुझ से कहा,-' पैसे वापस लौटने की उम्मीद तो है नहीं, पर मैं नहीं चाहता कि ऐसा फिर किसी के साथ हो ! यही सोच कर केस दर्ज करवाया है-! ये हरामखोर पकड़े जाना चाहिए-'!
     शमीम खान के इस एक कथन ने मुझे साइबर क्राइम पर लिखने के लिए उकसाया! केस मेरे सामने था ! लेटेस्ट टेक्नोलॉजी, आधुनिकतम गैजेट्स, तेज़ दिमाग़ पर आधारित अपराध की खतरनाक तिलिस्मी दुनियां ! अपराधी हज़ारों किलोमीटर दूर बैठा हमारे बैंक और बटुआ पर रेडार फोकस किए बैठा था ! विज्ञान और तकनीक के पंख पर बैठे इंसान से भी अपराधी दो कदम आगे खड़ा था ! सवाल गूंज रहा था, - इस शातिर दिमाग़ और रूपोश अपराधी को आखिर पकड़ते कैसे हैं ! जिज्ञासा बहुत बढ़ी, तो मैं साइबर थाने में दुबारा जाकर SHO ( थानाध्यक्ष) कुलदीप शेखावत से मिल कर साक्षात्कार का टाइम माँगा ! उन्होंने अगले दिन का वक़्त दे  दिया!
      मैंने तुरंत प्रतिष्ठित हिंदी पत्रिका ' उदय सर्वोदय' के चीफ़ एडीटर तबरेज खान को फ़ोन मिला कर स्टोरी पर चर्चा की तो वो फौरन तैयार हो गए! अगले दिन ( 30 मार्च 2024) को तयशुदा वक़्त पर हम शेखावत साहब के ऑफिस में थे---'

 मेरा पहला सवाल था --' इनका शिकार होने से कोई कैसे बच सकता है-?'
     ' भारती जी, फर्स्ट ऑफ आल , इस  नवीनतम तकनीक से लैस अपराधी से बचना है तो जागरूक नागरिक होना पड़ेगा ! जागरुकता ही आपको सुरक्षा दे  सकती है ! जानकारी,जागरूकता और लालच से दूर रहकर ही इन गुप्त लुटेरों से आप खुद को बचा सकते हैं-'!
(सवाल),,,,,' आज कल क्या ट्रेंड चल रहा है-'?
      ' ये कोई एक ट्रेंड पर नहीं चलते! मानवीय साइकोलोजी के माहिर जानकर हैं ये ! आजकल ये शेयर बाजार पे रेडार लगाए हुए हैं ! वहाँ बड़े शिकार मिलते हैं ! लोग लालच में फंस कर  इनके शिकार बन जाते हैं! यहां शिकार के लिए चारा डालने से पहले वो शेयर बाजार का पूरा स्टडी करते हैं, तब चुने हुए शिकार को लूटने का प्लान चॉक आउट करते हैं-'!
 (सवाल) ----' किस तरह करते हैं ये सब-?'!
 ' बड़े शिकार को भरोसा दिलाने के लिए ये एक बढ़िया एडवाइजर बन कर शेयर बाजार में पैसा इनवेस्ट करने की 'नेक सलाह' देते हैं ! धीरे धीरे इनके बताये रास्ते पर वो शख्स छोटी मोटी रकम जीतने लगता है ! फिर समय के साथ जीत की रकम और भरोसा दोनों बढ़ता जाता है ! शिकार को फंसाने के लिए  शिकारी अपनी जेब से चार पांच लाख रुपये दांव पर लगा देते हैं ! भरोसे और लालच में अंधे शिकार को पता ही नहीं चलता कि  शिकारी ही दोनों तरफ से पत्ते संभाले हुए है ! फिर बारी आती है  करोड़ों के इनवेस्ट की, और एक ही झटके में शिकार अपना सब कुछ गवां  बैठता है-'!
  (सवाल)  ----' और क्या हथकंडे अपनाते हैं-?'
 " सेक्स एक्स्टोरशन का कारोबार मेवात के साइबर अपराधियों में खूब चलता है ! वो अक्सर किसी बुजुर्ग को निशाना बनाते हैं! इनका फ़ोन उठाते ही बुजुर्ग को युवा लड़कियां स्क्रीन पर कपड़ा उतारती नज़र आती है! फिर वो बुजुर्ग को कपड़ा उतारने को कहती है, और यहीं से यौन फिरौती के शिकंजे में अमीर बुजुर्ग फंस जाता है! अक्सर ये सारा गेम लड़कों की तरफ से  होता है, और लड़की पोर्न वीडियो का एक एडिट फुटेज मात्र होती है ! इस तरह के रैकेट में फंसे बुजुर्ग अक्सर अपना दर्द  किसी को बता भी नहीं पाते-'!
  ( सवाल),,,,, ' साइबर क्राइम के कितने केस आते हैं रोजाना आपके थाने में -?'
    ' जनवरी से अबतक तीन महीने में  आठ हजार केस आ चुके हैं ! '
     सुनकर  मैं सन्न था  ! चलते चलते आखिरी सवाल पूछा -' सर ! देश की जनता और नागरिकों के लिए साइबर क्राइम को लेकर क्या सावधानी और सलाह देना चाहेंगे-?'
    " जागरूक बनें, लालच में मत पड़े ! पैसा कमाने का शॉर्ट कट रास्ता आपको मुसीबत में डाल सकता है ! किसी भी अजनबी लिंक या फ़ोन को अटेंड मत करें ! और,,,,,पुलिस को अपना दर्द बताने में देर मत करें-'!

    आधे घंटे बाद हम और तबरेज भाई दोनों जब कार से वापस लौट रहे थे तो दोंनो ही खामोश थे ! हमारे जेहन में साइबर अपराधियों की वहीं अदृश्य दुनियां और उनके रूपोश चेहरे की काल्पनिक तस्वीरें चक्कर लगा रही थीं !

            ( Sultan bharti journalist)

      

Wednesday, 27 March 2024

साहस सेवा और संकल्प : लाल सिंह आर्य

(साक्षात्कार)
साहस, सेवा और संकल्प :  'लाल सिंह आर्य'

    ( लाल सिंह आर्य! तीन बार भाजपा से विधायक, एक बार मध्यप्रदेश विधानसभा में मंत्री ! जनसेवा के पुराने पुरोधा , बचपन से आरएसएस के कैडर ! सत्तरह साल की किशोर अवस्था से सियासत में पदार्पण ! वर्तमान में भाजपा के एससी एसटी मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैँ! )
     (जाने माने पत्रकार और संघ के समर्पित सदस्य अजय कुमार सिंह ने फोन पर उनसे संपर्क किया और इंटरव्यू के लिए सहमति मिलने पर हमें  सूचना दी ! मैंने पत्रकार सुल्तान भारती को फोन मिलाया, विनम्र और सहयोगी स्वभाव के "भारती" साहब तुरंत  तैयार हो गए ! हम तीनों एक घंटे बाद नॉर्थ ब्लॉक स्थित लाल सिंह आर्य के सरकारी आवास पर जा पहुंचे ! आर्या जी ने मुस्करा कर सहमति दी और फिर शुरू हुई  सवालों की बौछार - और सधे हुए संतुलित शब्दों के साथ लाल सिंह आर्य का जवाब ! हमने लाल सिंह आर्य से उनकी ज़िंदगी, संघर्ष और उपलब्धियों से संबंधित तमाम पहलुओं पर विस्तार से बातचीत की!
(सवाल)-- कुछ अपने बचपन के बारे में बताएंगे! सुना है कि  खेलने कूदने की उम्र में आप समाज सेवा में उतर पड़े थे ?
   ( जवाब),,,,सात साल की उम्र में मैं संघ से जुड़ गया था ! समाज और राष्ट्र सेवा की भावना वहीं से पैदा हुई ! बाप चिनाई करने वाले मिस्त्री थे और दादा जूता बनाते थे! भिंड जिले के गंज मोहल्ला मे परिवार रहता था ! संघर्ष,सेवा और विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाता ! छात्र जीवन के दौरान 1984 में एबीवीपी का महा मंत्री बना !  1998 में मै पहली बार विधायक बना ! उस वक़्त मेरी उम्र 34 साल थी, और  फिर सफलता  का ये  कारवाँ बढ़ता ही गया !
(सवाल),,,,' संघ में कुछ पाने के लिए प्रतीक्षा सूची बड़ी लंबी होती है! आपको युवावस्था में में सब मिलने लगा ?'
( उत्तर),,,,' हमारे पूज्य सरसंघ चालक कहते हैं कि- संघ देता है, लेता नहीं ! लोग इस भाव से आयें कि हमें समाज को देना है, हमे संघ से मिलेगा कुछ नहीं-'!
(प्रश्न),,,,,'भिंड जिला चंबल बेल्ट में आता है जो डाकुओं का प्रभाव क्षेत्र है! कभी आपका आमना सामना उनसे हुआ है-?'
(जवाब),,,' चंबल को बदनाम किया गया है! हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री ने चंबल की इमेज खराब की है! वहाँ डाकू नहीं बागी होते थे , किंतु माननीय शिवराजसिंह चौहान के प्रयासों से अब चंबल इस समस्या से मुक्त है-'!
(सवाल),,,' आप विधायक रहे, मंत्री रहे! क्या कभी लोकसभा चुनाव लड़ने का विचार नहीं आया !अथवा पार्टी ने कभी ऑफर नहीं दिया-?'
( जवाब),,,,,'हमारी पार्टी में  किसी को कुछ मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ती, पार्टी खुद देती है!हमें jo भी काम दिया जाता है हम उसे एक मज़दूर, सैनिक और स्वयंसेवक बनकर पूरी निष्ठा से पूरा करते हैं-!'
(सवाल),,,,'सेवा के इस लंबे अंतराल में कभी ऐसा विचार आया कि सियासत से समाज सेवा ही बेहतर थी-?'
(जवाब),,,,'साधन विहीन समाज सेवा की रफ़्तार बहुत धीमी होती है ! सेवा भाव होते हुए भी कुछ ख़ास नहीं किया जा सकता ! इसलिए राजनीति में आना ज़रूरी था ! आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में समाज सेवा और जनसेवा को जो रफ़्तार मिली है, वो पूरे देश के सामने है! आज सत्ता में बैठे लोगों के पास साधन भी है और मन में  सेवा भाव भी-'!
(सवाल),,,,,'राजनीति में कभी ऐसा मौका आया जब ईमानदारी नेकी के बाद भी आप पर आरोप लगाया गया हो ?'
(जवाब),,,,' हाँ, एक कालखंड ऐसा भी आया था जब मुझे झूठे केस में फंसाने की कोशिश की गई थी, लेकिन सांच को आंच कहाँ ! लेकिन घबराया नहीं ! साथ ही संयम और मानसिक संतुलन खोया नहीं मैंने! आखिरकार झूठे का मुँह काला और  सच की जीत हुई ! याद रखें, सत्य परेशान हो सकता है, किन्तु पराजित नहीं '!
( सवाल),,,,' क्या भाजपा से पहले सत्ता में आने वाली पार्टियों ने एससी एसटी के लिए कुछ नहीं किया-?'
(जवाब),,,,' कुछ खास नहीं ! उनके लंबे शासन में इस वर्ग के लोग मंत्री और उपमुख्यमंत्री के पद पर तो पहुंचे किंतु समग्र विकास की लहर नहीं पहुंची !
एससी एसटी वर्ग के महापुरूषों के सम्मान के खातिर कुछ नहीं किया गया! वो  सब कुछ मोदी सरकार इतने कम अन्तराल में कर दिखाया ! आज सही अर्थ में सबका साथ- सबका विकास हो रहा है!देश आगे बढ़ रहा है-!'
( सवाल),,,,' क्या इस बार चार सौ सीटें मिलेंगी-?'
(उत्तर),,,' ये नारा नहीं भरोसा है ! समग्र विकास से पैदा होने वाला आत्म विश्वास है मेरा ख्याल है कि सीटों की संख्या चार सौ पचास से  पौने पांच सौ तक जा सकती हैं-'!
(सवाल),,,,' इस तरह तो विपक्ष खत्म हो जायेगा ?'
( जवाब),,,,,' विपक्ष को कोई दूसरा नहीं ख़त्म करता , खुद उसका चाल चरित्र और चेहरा ही खत्म करता है! जो बोएगा -वही काटेगा-!'
  ( सवाल),,,,'  चुनाव के परिपेक्ष्य में जनता के नाम कोई संदेश-?'
(जवाब),,,,' विकास का रास्ता चुने ! लगातार मजबूत होती अर्थव्यवस्था को और अधिक रफ़्तार दें! सबका साथ सबका विकास को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं और देश को विश्वगुरु होने मे  अपने वोट की भागीदारी सुनिश्चित करें-!'
       पूरे एक घंटे बाद हमारी कर मंडीहाउस की ओर वापस दौड़ रही थी !पत्रकार अजय सिंह को ड्रॉप जो करना था!

                  (तबरेज खान)
                  चीफ एडीटर