Friday, 22 May 2026

'व्यंग्य चिंतन' कॉकरोच जनता पार्टी

 'व्यंग्य चिंतन' 
 कॉकरोच जनता पार्टी 

   अब इसे क्या कहेंगे ! सियासत का कॉकरोच या  कॉकरोच का सियासीकरण ! वो इन्फेक्शन की रफ्तार से आए और मंहगाई की तरह छा गये ! पहले लोग लाल हिट लेकर उन्हें ढूंढते थे, अब उन्हें गले लगा रहे हैं, गले में माला डाल रहे हैं, इमोजी बना रहे हैं ! रातो रात वो लोग उनके फॉलोवर बन गए  !इतनी बड़ी क्रांति, बीमारी के प्रतीक से परिवर्तन की उम्मीद बाँध बैठे ! गटर से शिखर तक  जाते देख कर आज चूहे, छछुदर और सांप को  कितनी हीनता हो रही होगी!
       रातो रात बीमारी की जगह उन से क्रांति का फौ वारा फूटता नज़र आने लगा 

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