Thursday, 14 September 2023

(व्यंग्य भारती) "हिन्दी दिवस का बर्थ डे केक"

व्यंग्य भारती
          हिन्दी दिवस का बर्थ डे केक 

   मंत्री जी ने कई दिनों पहले कार्ड न्योता भेज  दिया था।  चौदह सितंबर को सभी "गणमान्य" श्रेणी के मेहमान मंत्री जी के आवास पर आ गए! सरकारी आवास के विशाल लान मे लोग कुर्सियों पर  बैठे ! एक बड़ी मेज पर एक बड़ा केक रखा गया।  मंत्री जी के मुहँ लगे उनके निजी कवि ने सबसे पहले हिन्दी मे एक ताजी कविता सुनाई जो हिन्दी दिवस की अपेक्षा मंत्री जी को ज्यादा समर्पित थी,- ----
हिन्दी आज महान  है!
भारत की पहचान  है!!

मंत्री जी के  प्रयासों से !
जन जन की पहचान है !!

आमंत्रित कवि विद्वानों का!
करते    वो   सम्मान    हैं !!

  कविता के तीसरे अंतरे में ही कवि ने  मंत्री जी को याद दिला दिया कि पिछले साल जैसा प्रोग्राम मत करना! ( पिछले हिन्दी दिवस पर अंग वस्त्र के साथ सम्मान राशि नहीं दी गई थी!)
     आमंत्रित मेहमान जहां सम्मान की  कल्पना में मगन थे  वहीं मंत्री चिंतित होकर अपने पी ए के कान मे कह रहे थे,- ' अब गलती मत करना,अगले साल किसी नए कवि को हायर करना "!
       कविता के बाद मंत्री जी के सचिव हिन्दी भाषा की उपयोगिता और महत्व पर प्रकाश डालने लगे, -' हिन्दी लैंग्वेज बोलने में बहुत  इजी है, तभी ये नैशनल लैंग्वेज बन पायी है, यू नो ! हमें इस लैंग्वेज पर प्राउड फील होना चाहिए-! हमारे विद्वान मंत्री जी का गवर्नमेंट से अपील है कि वो हिन्दी को वर्ल्ड लैंग्वेज बनाए ! हम सबको अपने फॅमिली मेंबर्स से सिर्फ हिन्दी में डिस्कशन करना चाहिए-यू नो ! !हिन्दी के ग्लोबल लैंग्वेज बनते ही हमारे विश्वगुरु होने के सारे स्पीड ब्रेकर खत्म हो जायेंगे ! हिन्दी के डेवलपमेंट के लिए मेरे साथ नारा लगायें -

हिन्दी ही अपनायेंगे !
इंग्लिश मार भगाएंगे !! "

      सचिव ने बैठने से पहले बड़ी गर्वित नजरों से उन श्रोताओं पर नजर डाली जो अभी भी इंग्लिश को मार भगाने का आवाहन कर रहे थे! इसके बाद हिन्दी के समर्थन में एक प्रचंड पहलवान ने माइक थाम लिया -" माँ सरस्वती की अपार अनुकंपा से हम हिंदी को राष्ट्रभाषा से विश्व भाषा बनाने के प्रगति पथ पर अग्रसर हैं ! हमारे आदरणीय मंत्री जी और सशक्त राष्ट्र के सतत प्रयास और संघर्ष से  ये संभव हो पाया है !  मंत्री जी  शतायु हों, जिससे पूरे ब्रह्माण्ड में चर अचर सभी जीवों की भाषा हिंदी और केवल हिंदी हो !यही मंत्री जी और सरकार दोनों का संयुक्त प्रयास है! अंतरिक्ष में हिंदी भाषा के विकास के लिए चांद पर हिंदी भाषा विकास संस्थान खोला जाए , - जय हिंदी! जय राष्ट्र भाषा-!"
     अब लोगों की नजरें वक्ताओं पर कम केक पर ज्यादा थी ! लोगों की अगाध श्रद्धाकेंद्र का सही आकलन कर मंत्री जी ने समापन भाषण दिया,-"आप लोगोँ का हिंदी प्रेम देख कर मुझे पूरा यकीन है कि हिंदी देश की राष्ट्रभाषा भले न  बन पाये , यूनिवर्सल भाषा पहले बनेगी ! शायद आप लोग भी देश की अपेक्षा हिंदी को यूनिवर्सल भाषा बनाने के लिये ज्यादा समर्पित हैं ! आपकी उस विलक्षण दूरदृष्टि को सलाम है, हिंदी के विकास के  लिए जिसका प्रथम प्रयास अपने बच्चों को अंगेजी मीडियम से पढ़ाना होता है ! अंग्रेजी भाषा के प्रति इतना प्यार,आकर्षण और समर्पण देख कर मुझे पूरा विश्वास है कि हिंदी को विश्व भाषा बनाने का कितना बड़ा समुद्र मंथन आप  चला रहे हो- ! मेरे परिवार में सारे धार्मिक कर्मकांड निपटाने वाले पंडित जी के दोनों बच्चे भी कॉन्वेंट में पढ़ते हैं! उनको भी सादर प्रणाम है-! आइए अब हिंदी के इस समग्र विकास की खुशी का केक काटते हैं-"!
         आज एक विद्वान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में सवाल पूछा है, - क्या दुनियां में किसी और  भाषा का पखवारा मनाया जाता है ? हो सकता है, मुझे तो नहीं पता! मुझे तो ये भी नहीं पता कि पखवारा मनाने से  हिंदी का कितना विकास होता है ! हिंदी विकास के नाम पर बने सफेद हाथी जैसे संस्थानों की ओर से कोई प्रगति रिपोर्ट आती हो तो मुझे उसका भी पता नहीं! हिंदी भाषी लेखकों का इस पखवारे में कितना विकास हो रहा है, मुझे कुछ नहीं पता! अलबत्ता ये पता है कि हिंदी के अधिकांश लेखक अपने लेखक होने की सज़ा काट रहे हैं! उनके साहित्य और हिंदी समर्पण को इन संस्थानों से कोई ऑक्सीजन नहीं 
मिलती! पेंशन भी नहीं ! ( कर्म और फल के अध्यात्म पर संदेह कैसा!)
       हिन्दी भाषा विकास की सारी औपचारिकता  जिवित हो उठी है !  सरकारी बैंक ने  इंट्री गेट पर हिंदी पखवारे का बैनर लगा दिया है , - कृपया फॉर्म , चैक और  विदड्रॉल  हिंदी  में भरें -!  लेकिन अंदर सारा काम अँग्रेजी में चल रहा था ! जैसे बैनर खुद कह रहा हो- 16 दिन की तो बात है, हंसते हंसते कट जाये रस्ते-! तीस सितंबर के  बाद सरकारी विभाग ये बैनर अगले साल सितंबर के लिए समेट कर आलमारी में रख देंगे ! ऐ राष्ट्रभाषा! हम तेरे लिए  एक पखवारे का बलिदान तो दे ही सकते हैं  न ! इसी से अपने पूरे साल का  हीमोग्लोबिन दुरुस्त कर लेना !
    हिंदी विकास के कथित प्रयास पर एक शे'र पेश करते हैं,,,,,,,
ये तो माना कि  तगाफुल  न करोगे  लेकिन !
खाक हो जायेंगे हम तुमको खबर होने तक !!

     ( Sultan bharti)


Tuesday, 5 September 2023

आगाज तो अच्छा था- अंजाम खुदा जाने

                 " आज का मुस्लिम "
आगाज़ तो अच्छा था- अंजाम,,,,,,,खुदा जाने 

     अवध के एक  जमीनी  शायर  एम जे  सिद्दीकी ने 1965 के इंडिया पाक जंग के हीरो अब्दुल हमीद ( परम वीर चक्र विजेता) की शहादत पर लिखा था _

मुसलामां हिंद का गाजी मुजाहिद !
लहू  में   दौड़ती  'ईमां'  की  धारा !!
शहादत   सुर्खरू  अपनी  रवायत !
वतन ने जब कभी  हमको पुकारा !!

       इसमें कोई दो राय नहीं कि इस्लाम की नीव में इबादत,सखावत, शुजाअत और शहादत की बहुत बड़ी भूमिका है! अपने मजहब और मुल्क के लिए शहादत देने में इस जंगबाज कौम का कोई मुकाबला नहीं है! सातवीं सदी (610 ईस्वी) में उदय और सोलहवीं सदी (1570 ईस्वी) में शौर्य, शासन, सभ्यता और न्याय के शिखर पर चमकते इस्लामी हुकूमत का अगले दो सौ साल में ऐसा पतन हुआ कि दुनियां आज भी हैरान है ! आज उसी शासक कौम के लोग बदहाली के ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां से वापसी के लिए कोई शॉर्ट कट रास्ता नहीं है । अपनी बदहाली के लिए खुदा और नाखुदा दोनों को कोसती ये कौम अपने गिरेबां में झांकने को बिल्कुल तैयार नहीं! इस्लाम के मूलभूत सिद्धांतों से भटक गई ये अपार भीड़ अपनी सियासी और सामाजिक नेतृत्व विहीनता के चलते  राजनैतिक पार्टियों के बीच फुटबाल बन कर  रह गई है! आज इस जमात में आला और पसमांदा दोनों शरीक हैं ! शोषण और दमन की इस फेहरिस्त में इदरीसी बिरादरी अकेली नहीं है! पूरी कौम ए मुस्लिमाँ उनके साथ खड़ी मिलेगी ! आइए,आज हम अपने देश में चल रहे   'प्रचंड' विकास,सामाजिकऔर आर्थिक भागेदारी तथा राजनीतिक भूमिका में  इस ' नेतृत्व विहिन भीड़' की दिशाहीनता और दुर्दशा का आकलन करते हैं!

शिक्षा,,,,,
       2011 के सर्वे के मुताबिक़ मुसलामानों की कुल जनसंख्या का 43% भाग अशिक्षित था ! कैसी विडंबना है कि जिस कौम की पवित्र पुस्तक कुरआन के आगाज का  पहला शब्द ही "इकरा" (यानि - "पढ़") हो, आज उस कौम के अनुयायी शिक्षा के क्षेत्र में इतने उदासीन  क्यों ! आबादी के पहले ब्रिटिश हुकूमत में, आई ए एस IPS जैसे उच्च पदों पर मुस्लिमों की भागीदारी 5% थी, आज इतनी  अधिक आबादी के बावजूद 3% है ! शिक्षा के क्षेत्र में जो लोग मदरसों की भूमिका पर उंगली उठाते हैं, तो उनके लिए हैरान करने वाला आंकड़ा ये है कि मुसलमानों के सिर्फ 4% बच्चे ही मदरसा जाते हैं, बाकी 96% बच्चे सरकारी और प्राइवेट स्कूल्स का रुख करते हैं ! इनमे एक बड़ा तबका उन बच्चों का है जो मिडिल क्लास के बाद आगे जाते ही नहीं! अब खुद सोचो कि ऐसे में अगर कोई  'अब्दुल' के साथ "पंचर" शब्द जोड़ रहा है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है! राजा राम मोहन राय जैसे विश्वविख्यात समाज सुधारक देश को देने वाले मदरसों को पेट्रो डॉलर और आतंकवाद से जोड़ा जा रहा है!

सरकार की भूमिका,,,,,,

          आजादी के बाद जब कॉंग्रेस की सरकार बनी तो देश का पहला केंद्रीय शिक्षा मंत्री एक मुसलामान को बनाया गया ! ( मौलाना अबुल कलाम आजाद) उसके पहले ऊर्दू को मुख्य भाषा का दर्जा हासिल था ! कॉंग्रेस के शासन में ऊर्दू का वो रुतबा और दर्जा खत्म होता रहा! बंटवारे मे  मुस्लिम समुदाय को नेतृत्व दे रही शख्सियत और असरदार लोग पाकिस्तान चले गए और भारत से मुहब्बत करने वाले आला और पसमांदा मुस्लिम यहीं रुक गए ! राष्ट्रनिर्माण और कुर्बानी देने मे अग्रणी रहे इस कौम के अनुयायी आज भी पाकिस्तान के निर्माण के लिए ताने सुन रहे हैं ! इस  कौम को सत्ता और सर्विस मे वो भागीदारी क्यों नहीं दी जाती जिसकी हकदार है! मुस्लिमों का तुष्टिकरण करने का आरोप झेल रही कांग्रेस ने मुसलामानों को आखिर दिया क्या है? जो दिया है, पूरा देश जानता है! मुस्लिमों की दयनीय दुर्दशा को उजागर करने वाली रंगनाथ और सच्चर कमेटी की रिपोर्ट पर आज तक कितना अमल हुआ ?

नेतृत्व की भारी कमी,,,,,

       केन्द्रीय अल्पसंख्यक मंत्री स्मृति ईरानी के अनुसार आज मुसलामानों की आबादी देश की कुल आबादी का 19% है ! ( यह संख्या पाकिस्तान की कुल आबादी से ज्यादा है! पर इस बेहाल और बदहाल कौम के पास आज की तारीख में न कोई एक सर्वस्वीकृत धार्मिक नेता है न सियासी ! इतनी बड़ी आबादी चौराहे पर खड़े उस निरीह चौपाये की तरह है जो भ्रमित है कि किधर जाये ! उसने हमेशा दूसरे धर्म के लोगों को अपना नेता बनाया,फिरभी उसी से देशभक्ति की सनद मांगी जाती है! हर पार्टी चुनाव के वक़्त उससे यही आकांक्षा रखती है कि वो वोटर बन कर  रहे जन प्रतिनिधि नहीं !

हाल क्या है,,,,,,?

 1-   हमें अपने मतभेद बलाए ताक रख कर  एक।       मंच पर आना होगा!
2-     'अशिक्षा'  का कलंक मिटाने के लिए युद्ध             स्तर पर काम करने की जरूरत है! हमारे       नबी का  शिक्षा के लिए जो फरमान था,( शिक्षा     के लिए हिजरत करने का सुझाव) उसे  अपनी जिंदगी में उतारना होगा ! 
3-     हर  मुस्लिम माँ बाप को अहद करना होगा।           कि हमारा बच्चा ऊंची तालीम हासिल।                 करेगा !
4-      सफेद हाथी साबित हो  रहे  बड़ी बड़ी मुस्लिम संगठन अगर स्कूल नहीं खोल रहे तो उनसे दूरी बनाए!
5-        सिर्फ वोटर बनकर मत रहें, सत्ता में अपनी भागीदारी के लिए संघर्ष करें, जागरूक             होकर अपना हक मांगे!
6-       मस्जिद जाना शुरू करें और नमाज के बाद  देश,कौम, समाज और अपने बेहतर भविष्य के लिए  चर्चा करें ! याद  रखें, हमें अपने हक और संवैधानिक अधिकार के लिए खुद संगठित होकर संघर्ष करना होगा ! अल्लामा इकबाल ने कहा था-
7-     हमें अपने बच्चों को वीर अब्दुल हमीद और           ब्रिगेडियर उस्मान बनाना होगा, जो हमारे               मुल्क और कौम का नाम दुनियां में रोशन             करें ! हम सरकार से मांग करते हैं कि वीर            अब्दुल हमीद के नाम से गाजीपुर या दिल्ली        में एक यूनिवर्सिटी खोली जाए !
अपनी हिम्मत अपनी कूवत अपने बाजू तौलकर!
कूचा ए हस्ती में उड़ना है तो उड़  पर खोल कर!!

        इदरीसी समाज संगठित हो रहा है, ये देख कर खुशी होती है ! अब बहुत सी राजनैतिक दलों के लोग आप के पास आयेंगे ! आपको पसमांदा बताकर आपके सर्व विकास का वादा करेंगे! आप  मिलें, सुनें और अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें  ! अपने नेतृत्व की वकालत करें ! अपने संवैधानिक अधिकार को हासिल करना होगा! हमें आरक्षण क्यूँ नहीं मिलता? ये कौन बतायेगा ! देश की आर्थिक शक्ति में रीढ़  की भूमिका निभा रहे इस श्रमजीवी समुदाय मे अब घनघोर जनजागरण शुरू करने का  वक़्त आ गया है ! 
     हमारे आज के हालात को अर्सा पहले विश्व विख्यात शायर और क्रान्तिकारी योद्धा मौलाना अल्ताफ हुसैन "हाली"  ने  हूबहू  कुछ  यूं बयान किया है,,,,,,,

न अहले हुकूमत के हमराज़ हैं हम !
न  दरबारियों  में  सरफराज  हैं हम !!
न रखते हैं कुछ मंजिलत नौकरी में!
न   हिस्सा  हमारा  है  सौदागरी  में !!

 तो,,,,बस तैयार हो जाओ शिक्षित और संगठित होकर हमें इस परिभाषा को बदल देना है ! हमें याद रखना होगा कि,,,,,,,

कोई तन्हा मुसाफिर कारवाँ बन जाता है जिस दिन 
उसी  दिन  मुश्किलों  के  हौसले  भी  टूट जाते  हैं!!

        और,,,खुदा  की   कसम ! आज हम   तन्हा नहीं हैं !!

            ,,,,,,,, अबुल हाशिम ,,,,,,

Friday, 1 September 2023

(व्यंग्य 'भारती') "चंदा मामा या मामू "

व्यंग्य 'भारती'

 "चाँद"- तुझे "मामा" कहूँ - या  "मामू" 

          अब तो पहचान बतानी होगी ! बहुत हो गया छुपा छुपी ! चंदा मामा तुम्हें भी डॉक्यूमेंट दिखाना पड़ेगा ! तुम्हारे धर्म को लेकर बहुतै कन्फ्यूजन है  ! तुम मामा हो या मामू ? कौन से धर्म में आते हो ! बताना पड़ेगा ! मामा और मामू  में से एक को  चुनना पड़ेगा ! एक म्यान  में मामा मामू दोनों नहीं रह सकते ! चन्द्रयान, विक्रम और प्रज्ञान  तीनों नाम सनातनी हैँ ! इसलिए तुम भी मामा बन कर रहो, मामू नहीं ! अब मामा और मामू में से किसी एक को सिलेक्ट कर लो !  शराफत से मान जाओ तो ठीक है मामा, वर्ना चलनी से देखना ही नहीं, चलनी मे पानी भरवाना भी हमें आता है !
              राजधानी दिल्ली के एक संत का सुझाव है कि तुम्हें हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दिया जाए ! क्या हुआ? इतने में ही नर्भसा गए  का ! मामा समझा करो ! यहां हमारे प्लेनेट पर  बहुतै पंगा है ! हम  का  करें, विपक्ष है कि मानता नहीं ! सरकार जनता को हिंदू राष्ट्र देना चाहती है, मगर  विपक्ष  है  कि  टमाटर नींबू और प्याज का रोना रो रहेहैं ! विपक्ष कभी नौकरी मांगता है कभी सस्ता टमाटर ! घोर कलियुग है जी ! स्वर्ग और मोक्ष की जगह उन्हें सस्ता सिलेंडर चाहिए !
         सुनो मामा जी ! आराम से मान जाओ तो बढ़िया है ! वर्ना हम तुम्हारे पूरे ग्रह को दिल्ली के प्रॉपर्टी  डीलरों को 99 साल के लीज पर दे देंगे! उसके बाद तो तुम पूरे ब्रह्माण्ड  में ओरिजिनल काग़ज़ लेकर दौड़ते रहोगे, मगर अपनी ही प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा नहीं  पाओगे ! हमारे ग्रह पर ऐसे ऐसे प्रॉपर्टी डीलर हैँ जो तुम्हें तुम्हारे ग्रह के मालिकाना हक का काग़ज़ उस  वक़्त  का  दिखा देंगे जब तुम्हारे ग्रह का जन्म भी नहीं हुआ था ! अब बताओ क्या करोगे ! घबरा गए न! इसलिए कहता हूं मामा जी अभी समय है ! वैसे  हिन्दू राष्ट्र घोषित होने में तुम्हारा कोई नुकसान भी नहीं है ! सोचो पृथ्वी से कितने श्रद्धालु हम से वीज़ा लेकर तुम्हें देखने आयेंगे !  महिलाएँ चलनी से देख देख कर बोर हो गई हैं ! अब साक्षात दर्शन करेंगी ! रक्षा बंधन पर कितना रश रहा करेगा !
          अब काहे चिंतित हो ! देखो ऐसा है कि  कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है! दोनों हाथों में लड्डू नहीं  होगा ! मामा होने के लिए मामू का मोह छोड़ना पड़ेगा ! हमें तुम्हारी कला और कलाकारी दोनों का पता है ! तुम कब भगवान के माथे पर होते हो कब भाग्यचक्र में -हमें मालूम है! इतना सम्मान रास नहीं आ रहा है  का ! ईद से एक दिन पहले दिखाई देने का मोह छोड़ना पड़ेगा ! अब ये- खाओ ब्रिटानिया फिफ्टी फिफ्टी - नहीं चलेगा !
        अब काहे सोच में पड़ गए ! हिन्दू राष्ट्र घोषित होने से क्या होगा ? ये सब कुछ जनता के लिए होगा ! वैसे,,,,हो सकता है कि जनता को भी न पता हो कि वो हिन्दू राष्ट्र चाहती है ! एक दिन ईंटभट्टा पर काम करने वाले कई मज़दूरों से मैंने भी यही सवाल पूछा था- " आपको क्या चाहिए-'?
  -" अगर ठेकेदार समय पर पैसा दे दे तो इस बार गिरवी रखा खेत छुड़ा लूँगा बाबूजी ! दो साल पहले बेटी की शादी के लिए गिरवीं रखा था!"
    "और तुम ?"
    " एकलौता बेटा सफ़ाई कर्मी था, तीन साल पहले सीवर की सफ़ाई करते वक़्त जहरीली गैस से मर गया था ! हम चाहते हैं कि मुआवजे के साथ किसी एक को नौकरी भी मिल जाए!"
     ' और  आप?' वो एक बुजुर्ग मजदूर था 
     " बाबूजी मेरी नज़र कमज़ोर हो गई है  ! मैं पिछले अट्ठारह साल से ईंट भट्टा पर हूँ। हर साल सर्दी में सोचता हूं कि आंख खुलवा लूँगा, पर इतना बचता ही नहीं! कस्बा भी दूर है यहां से !'
    "और काकी तुम?"
       " आदमी के मरने के बाद पतोहू ने निकाल दिया घर से! जब तक हाथ पाँव चल रहा है , भीख नहीं मांगूंगा- बेटे से न गाँव वालों से "!
     सुन लिया न , तो मामा जी उनमे से तो किसी को हिन्दू राष्ट्र नहीं चाहिए ! हो सकता है कि ये लोग जनता की  गिनती न आते हों ! तो,,,,प्रस्ताव आना शरू है ! चुनाव से पहले तुम्हें  हिन्दू राष्ट्र  बनना होगा ! और हाँ,  फिर पूछ रहा हूँ- कहीं किसी और मजहब का ऑफर तो नहीं पकड़ा न ! पहले कोई नील आर्म स्ट्रॉन्ग और बज एल्डरिन आए थे ! वैसे तो पहले पूरा ब्रह्मांड सनातनी था ! तलवार के डर से बीच में कुछ लोग फिसल गए थे ! तो क्या हुआ, अब घर वापसी कर लो  ! ऐसा कुछ हो  गया हो तो बता देना, संपूर्ण शुद्धीकरण के लिए तुलसी पत्र, गंगाजल और गौमूत्र की  कोई  कमी नहीं है l 

Friday, 11 August 2023

(व्यंग्य "भारती") "फ्लाइंग् किस "!

(व्यंग्य भारती")
         फ्लाइंग  किस !

      अरे  भैया ! ई  का किया आपने! आए थे हरि भजन को - ओटन लगे कपास !  फ्लाइंग किस  की का जरूरत थी ! भारत जोड़ो में ये कार्यक्रम भी शामिल था  क्या ! फिर काहे बखेड़ा पैदा कर दिया! देख रहे हैं कि महिलाएँ कितना क्रोधित हैँ ! संस्कारी महिलाएँ बहुत क्रोध में हैँ ! इस तरह तो आपको भारत जोड़ो नहीं करने देंगी, - बाबा  समझा करो ! ये  संविधान भवन है, संसद है- 'सी बीच'  नहीं है ! वो तो गनीमत समझो  कि नेताओं का बुद्धि विवेक पार्टी के गाइड लाइन के हिसाब से जागता और सोता है, वर्ना स्वयं संज्ञान से मुसीबत हो जाती ! उसका शुभ लाभ भी मिला आपको, फ्लाइंग किस पर जब एनडीए की कुछ महिलाएँ विरोध कर रही थीं  तो 'इंडिया' की प्रगति शील महिलाएँ  मेज थप थपा रही थीं। एक तरफ संस्कार आहत होता नज़र  आ  रहा था, वहीं दूसरी तरफ रूढ़िवादी परम्पराएं टूट रही थीं, और देश गुफा युग से निकल कर राकेट युग में दाखिल हो रहा था !
जाकी रही भावना जैसी !
      का सोच कर फ्लाइंग् किस  फेंका था ! ई कोई 
फेंकने की चीज़ थी ! यहां तो फेंकने वाले एक से एक सुपरमैन बैठे हैं ! वो  विकास और  विश्व गुरु के अलावा और कुछ  नहीं फेंकते ! ऐसे मुकाम पर आप  हवा में चुंबन फेंक रहे हो  ! बड़े ढीठ हो यार ! प्यार के इस प्रतीक को लेकर अंदर कैसे आ  गए  डर  नहीं लगा आपको ! काहे मुहब्बत की दुकान खोलने पर आमादा हो ! मौसम और मानसून काहे नहीं देखते ! अब मुहब्बत और दुकान दोनों टार्गेट पर है ! मुहब्बत  यानि 'लव' की बात करोगे तो दुकान में  'जेहाद' उड़ेल दिया जाएगा ! कहां सोये हुए हो, जब से  'लव' ने 'लालच' में  आकर धर्म परिवर्तन कर लिया है, वो जेहाद हो गया है ! पहले अज्ञानता वश लोग उसे "लव" कहते थे ! ऐसे संक्रमित  लव के शुद्धीकरण  के  लिए अब  घर वापसी का विकल्प खुला है !
        वैसे कमाल है बाबा, क्या नाम और  नारा ढूँढ़ निकाला है,- मुहब्बत की दुकान ! 1992 में ये "दुकान" एक दम से बंद हो गई थी, फिर 31 साल तक दुकान खोलने की सुध नहीं आयी ! अब इतने दिनों में तो बंद दुकान में रखा माल ( मुहब्बत) सड़ गया होगा मान्यवर ! काहे ऐसे सड़े हुए माल की  "दुकान" खोलना चाहते हैं , जिससे फूड पॉइंजिनिंग का खतरा हो ! मुहब्बत की दुकान खोलने का आइडिया आपका है या पार्टी के किसी और महापुरुष का ! सुझाव देने वाले उन 'महान आत्मा ' से मुझे पूछना था कि मुहब्बत की ये दुकानें क्या उसी तरह खोली जाएंगी, जैसे 22  मई 1987 को हाशिम पुरा और  मलयाना  में   खोली  गई थीं ! दुकान के  कई दर्ज़न ग्राहक हिंडन नदी में बहते हुए नजर आए थे। और जिन क़ातिल वर्दी वालों ने 'मुहब्बत' मे आकर गोलियों से  भूना था,उन्हें भी बरी कर दिया गया था ! बाबरी मस्जिद जिन्न ने  आपकी मुहब्बत वाली पार्टी को वनवास पर भेजा !अब आप फ्लाइंग् किस और मुहब्बत लेकर आए हैं! खुदा बचाए इस मुहब्बत से !
            आपकी धर्मनिरपेक्षता भी ग़ज़ब है ! शायद आप  समझ नहीं पा रहे कि शिवभक्त होने में फायदा है या मुहब्बत की दुकान खोलने में ! भारत जोड़ो का तो  मैं भी कायल हूँ, हिम्मत और हौसले का काम था, परिपक्व हो गए हैं आप ! अब ये आंख मारना और फ्लाइंग किस जैसी बचकाना हरकत से बाहर आइए, क्योंकि आपके मुकाबले   जो शख्स रुबरु है,वो नंबर और आयु में ही नहीं,-शब्द,सामर्थ्य,सियासत,सूझबूझ और  व्यूह संरचना का महारथी है ! ये विराट दौलत उसके संघर्ष की उपलब्धि है, विरासत की नहीं ! सच कडुआ सही, तहे दिल से कुबूल करना चाहिए !
        राजस्थान में भी आपकी  मुहब्बत वाली दुकान है, नासिर और जुनेद को जिंदा जलाने वाले मोनू मानेसर उर्फ मोहित यादव को आज तक नहीं पकड़ा गया ! काहे भैय्या !! ई  जिम्मेदारी खाली डबल इंजन सरकार की है  का ! वो तो नहीं पकड़ेंगे, पूछो क्यों? मामला  उस  दोहे के जैसा  है कि  - कस्तूरी कुंडल बसे, मृग ढूंढे बन मांहि,,-! तो,,, 'कुंडल' के अलावा तमाम दुनियां में  "कस्तूरी" की  तलाश जारी है  ! चलिए कोई बात नहीं, आपका ध्यान अगले साल होने वाले आम चुनाव पर है अभी ! कहां कहां दुकान खुल सकती है, ये मुद्दा पहले है ! इस तरह की घटनायें तो  वोट बैंक को मोबलाइज भी  करती हैं !
 ये जो वोटर हैँ न, इनकी याददाश्त पांच साल से पहले संक्रमित हो जाती है! इसी के चलते एक से बढ़कर एक मुंगेरीलाल हसीन सपने बेच जाते हैं !

    और हम,,,,,,आश्वासन को विकास समझ कर उम्र के 5 साल शीत निद्रा में काट देते हैं ! दुनियां में "विश्वगुरु" के अकेले दावेदार जो ठहरे !!

Monday, 7 August 2023

(व्यंग्य "भारती") "गुंडा" रक्षक दल !

व्यंग्य "भारती"
सियासत की नाभि मे "गुंडा"

           'मंगनी राम' दरोगा अभी गुटखे का ठीक से आनंद भी नहीं ले पाए थे कि हेड कांस्टेबल नकछेद ने आकर सूचना दी, - ' चार जेन्ट्लमैंन आए हैं "!
    मंगनी राम ने गुटखे की पिचकारी मारते हुए कहा-" का  प्रॉब्लम है?"
       " पड़ोसी राज्य से आए हैं,  " मंगू मवाली" के बारे में जानकारी चाहते हैँ "!
      " बुला लो "! 
सादी वर्दी में पड़ोसी राज्य से चार पुलिस वाले आए थे आए हुए एक सब इंस्पेक्टर ने कहा,- ' का करें ! हम जानते हैं कि मंगू मवाली गुंडा है और दोनों  लड़कों को उसी ने जिंदा जलाकर मार डाला था, पर उसे हमारे इलाके में ये सब करने की क्या जरूरत थी? इस दंगा के बाद  हमारे ऊपर बड़ा दबाव है ! थोड़ा हेल्प करिए!"
   मंगनी राम ने गले मे फंस रहे गुटखे को फिर थूक दिया-' हम भी धर्म संकट में हूँ! ऊपर से दबाव है कि उसे हर उस जगह तलाशा जाए, जहां वो बिल्कुल नहीं है, बूझा का?"
      " दिल्ली से दबाव है, दंगा के बाद 

Thursday, 29 June 2023

(व्यंग्य भारती)। "आस्था ही तो है"

"व्यंग्य भारती"

    "आस्था ही तो है"

           अपने देश में आस्था भी है और अमृतकाल भी ! सौभाग्य से दोनों प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं! बस - साधारण आंखों से नज़र नहीं आती,- जिन खोजा तिन पाइयाँ -! अमृतकल है लेकिन विरोधी और विपक्ष को बिलकुल दिखाई नहीं देता ! कारण - जाकी रही भावना जैसी -! भावना तो है किंतु उसमे आस्था नहीं है ! भावना में आस्था न हो तो मोतियाबिंद हो जाता है ! अमृतकाल का रसपान करना है तो आस्था पैदा करो ! फिर तो,,, तेरे द्वार खड़े भगवान भगत भर ले रे झोली -! आस्था नहीं है तो झोला उठा कर चलते बनो ! आस्था ने प्रगति करने में सबको पीछे छोड़ दिया है, ( कलि) "काल" का सारा "अमृत" आस्था की बदौलत है !
            पहले आस्था सात्विक और शाकाहारी हुआ करती थी, बाद में मोनोपॉली बरकरार रखने के चक्कर में आस्थाओं में टकराव पैदा हुआ और आस्था में हिंसा की घुसपैठ हो गई ! फिर आस्था ने आस्था पर हमला बोल दिया, -' भला उसकी आस्था मेरी आस्था से श्रेष्ठ कैसे -'! वो और होंगे जो जियो और जीने दो - जैसे रूढ़िवादी विचारधारा पर अमल करते हैं, हम एक म्यान में दो आस्था नहीं रखने वाले ! तुम अपनी आस्था को लेकर पाकिस्तान चले जाओ ! ये हमारी आस्था का देश है, इस मामले में, एक बार मैने जो कमेंटमेंट कर दिया तो फिर हम संविधान की भी नहीं सुनते ! आस्था और बलि का पुराना रिश्ता रहा है ! पहले सरकारी पुल बनाने में भी लोहा,सीमेंट और बालू से ज़्यादा आस्था का ख्याल रखा जाता था, इसलिए नीव में मसाले से ज्यादा मानव बलि का ध्यान रखना पड़ता था ! जब से आस्था रहित पुल और फ्लाईओवर बनने लगे, आए दिन गिरने लगे हैं ! 
        आस्था आहत हो रही है, चोटिल हो रही है और प्रचंड हो रही है ! कभी कभी तो ये आस्था किसी खास समुदाय वाले सिंगल पर्सन को देखने पर आगबबूला भी हो जाती है ! पिछले हफ्ते हरिद्वार में गंगाघाट पर कुछ दाढ़ी वाले युवकों को घूमते देख कर भी आस्था को क्रोध आ गया था ! अच्छा हुआ कि " एंटी आस्था एलिमेंट" वक्त की नज़ाकत को भांप कर वहां से हट गए, वरना चोटिल आस्था की टोह लेने वाले मीडिया के '        महावीर ' माइक लेकर पूछ रहे होते, - ' क्या तुम को पता नहीं कि तुम्हें देखने मात्र से आस्था आहत होने लगी है, फिर भी यहां चले आए! इस साज़िश में और कौन कौन शामिल है ! अपना नाम बताइए?"
        आस्था को लेकर मल्ल युद्ध जारी है ! डिबेट में आने वाले बुद्धिजीवी अगर मारपीट करने में अक्षम और अनुभवहीन हैं तो उनका लाइव चीरहरण तय है ! पिछले दिनों एक योद्धा को महिला द्वारा - बडे़ बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले - से गुजरते देखा गया ! पहले कभी आस्था इतनी सेंसेटिव नहीं थी ! आज वाली आस्था में सहिष्णुता की मलाई नही है!
      अब सियासत के भीष्म पितामह की समझ में आ गया है कि जनता को क्या चाहिए! अब आस्था में विकास की गति देख कर जनता खुश है ! बाकी विकास अभी पाइप लाइन में हैं! हॉर्न बजाते रहो, जगह मिलने पर साइड दी जाएगी! विकास की वरीयता क्रम में अभी आस्था के बाद दूर दूर तक कोई नहीं है ! पहले और अब की आस्था में बहुत अंतर है ! वर्तमान आस्था मोनोपोली चाहती है। इसलिए तमाम धर्म वैज्ञानिक फावड़ा लेकर दूसरों के धर्म की खुदाई में लग गए हैं! सारा गेहूं घुना हुआ साबित करना है ! नकली इतिहास खुरच कर हटाना है और असली को खोद कर निकालना है ! इतिहास के मर्मज्ञ फावड़ा लेकर काम में लग गए हैं, दुनियां हमारी जागरूकता देख कर हीनभावना के चलते सकते में है।
    अब तो सियासत और समाज दोनो आस्था से चल रहे हैं ! अब तो आस्था ही पंच वर्षीय योजनाओं का मेरुदंड है ! आस्था  सत्ता की नाभि का कल्याणकारी अमृत है, और आस्था ही सबसे बड़ा विकास !  इसलिए, धर्म की जय हो ! विश्व का विकास हो ! ( हमारा जो होना था हो गया!)  सभी मानव एक हों ! ( यहां रुकावट के लिए खेद है!)  तमसो मा ज्योतिर्गमय है -! ( अंदर का धर्मयोद्धा जाग रहा है, सारे घर के बदल डालूंगा !)

           विगत दस दिन से अब मेरी सारी आस्था यूनिफॉर्म सिविल कोड की ओर मुड़ गई है !!

        
        

Sunday, 18 June 2023

"व्यंग्य भारती"। 72 हूरों का पैकेज

(व्यंग्य "चिंतन")

    " 72   हूरों   का पैकेज"

               मीडिया का कब्ज इस बार हूरों की बदौलत दूर हो रहा है ! कुछ लोगों के लिए तो हूर का ज़िक्र ही झंडू पंचारिष्ठ का काम करता है और अगर मामला इकट्ठा 72 हूरों का हो तो महान लोग  स्वर्ग की अप्सराओं का मोह छोड़ कर हूरों के हवनकुंड में कूदने आ जाते हैं ! इस स्वादिष्ट शास्त्रार्थ में चैनल के मीडिया प्रभारी कुछ अधेड़ "हूरों" को भी शामिल कर लेते हैं ताकि बूढ़े दर्शकों की भी आस्था बनी रहे। हूरें सदैव से आकर्षण का केंद्र रही हैं, अब बहस इस बात को लेकर है कि किसी सम्प्रदाय विशेष को ऐसा बड़ा पैकेज क्यों ! ये तो ईश्वर द्वारा किया गया  सरासर तुष्टिकरण का केस है ! ज़िंदगी में चार हूरों का पैकेज और मरने के बाद 72 हूरों का ! इस तुष्टिकरण के खिलाफ चैनलों ने जेहाद छेड़ दिया है! ऊपरवाला बरामद नहीं हो रहा है, इसलिए नीचे दाढ़ी वालों के पीछे माइक लेकर दौड़ रहे हैं!
       चैनल वाले लिफाफा में 'पंजीरी' भी देते हैं, इसलिए दोनों संप्रदाय के धर्मयोद्धा डिबेट में आ जाते है ! देवपुरुष से ज़्यादा , डिबेट में आईं (एक्सपायरी डेट छूती) हुरें गुस्सा हैं ! एक हूर कुपित होकर दाढी वाले पर गुस्सा निकाल रही है, - ' तुम मर्दों के लिए बहत्तर हूरें, हमारे लिए क्या -!'
     दाढी वाले सन्न ! बुढ़ापे के दहलीज़ पर खड़ी "हूर" जन्नत में मिलने वाले पैकेज को लेकर अभी से चिंतित है ! चिंता वाजिब भी है , कहीं स्वर्ग के संविधान में हूरों के पैकेज में पृथ्वी की तरह ब्वॉयफ्रेंड और लिव इन रिलेशनशिप की सुविधा न हुई तो ,,,! ( क्या जीना तेरे बिना -!) हूरों पर हुंकार भरते लोग और फुफकार मारती टीआरपी देखकर हर चैनल ने व्हिप जारी कर दिया, - ' मंहगाई, अपराध और समंदरी तूफ़ान जैसे सांसारिक विषय में कोई प्रोटीन नहीं है ! सारे लोग कैमरा और माइक लेकर मुस्लिम मोहल्लों में फेरी लगाओ, मस्जिदों की परिक्रमा करो !  सारे सवाल 72 हूरों को लेकर पूछो ! मगर सावधान, पढ़े लिखे से नहीं अनपढ़ और मज़दूर लोगों की बाइट ज़्यादा लेना ! हमारी टीआरपी और तुम्हारी सेलरी का फाइबर वहीं से आएगा , वरना यू आर फायर्ड -'!
     दिव्य पत्रकारों की अक्षौहिणी सेना कुरुक्षेत्र की ओर प्रस्थान कर गई ! ठेले पर आम बेचते एक दाढ़ी वाले को देख कर एक पत्रकार ने अपना माइक संभाला, -' क्या नाम है आपका?' 
       ' कलीम नाम है, सब कल्लू कहते हैं '!
          " हूर के बारे में क्या कहना है?"
      कल्लू भाई ने समझा कि कोई नए नस्ल का आम आया है , - ' मंडी में ढूंढ लो बाबू, अभी शायद गोदाम से निकला नहीं । वैसे मेरे पास तोतापरी है, बढ़िया जायका है -'!
     " हूर आम की नस्ल में नहीं आती ! मैं उस हूर की बात कर रहा हूं जो आप लोगों को मरने के बाद जन्नत में मिलती हैं -'!
       " तब तो मेरे दादा ही बता सकते हैं आपको, चलिए मैं उनकी कब्र दिखा देता हूं, आप खुद ही पूछ लेना - ! मुझे तो बहुत गाली देते थे -'!
        एक पत्रकार अपने केमरामैन के साथ पंचर बनाने वाले अब्दुल की दूकान पर जा पहुंचा ! लंच का वक्त था कल्लू भाई बिरयानी खा रहे थे! भूखे पत्रकार ने अब्दुल से पूछा,- ' अब्दुल भाई, बडे़ की बिरयानी है क्या?'
    ' बड़े की बिरयानी तो बडे़ लोगों को नसीब होती है बाबू जी ! हम तो पंचर जोड़ने वाले छोटे लोग हैं, बकरा और मुर्गा से ही काम चला लेते हैं '!
      ' हैसियत'  की ऐसी कबीर वाणी सुन एंकर हीनता के चलते सदमे में आ गया ! थोड़ी देर में खुद को संभाल कर अब्दुल से पूछा, -'  बहत्तर हूरों के बारे में कुछ बताएंगे -?'
      " हां हां बिल्कुल !"
एंकर ने चैन की सांस ली, -' सुना है कि मरने के बाद बहत्तर हूरें मिलती हैं आप लोगों को ! कैसी होती हैं देखने में -?'
    " काहे जल्दी मचा रहे हैं बाबू जी ? मरने के बाद हूरें मिलती हैं न ! पहले मरने तो दीजिए -! अभी से परेशान हो , चलिए ऑक्सीजन आने दीजिए -'!
     गली में रद्दी पेपर खरीदने वाले अच्छन मियां से एक पत्रकार ने पूछा, - ' ये बहत्तर हूरों का क्या मामला है मियां जी ?' 
     " पता नहीं बाबू! हमारे मोहल्ले में सत्तार मियां ही अकेले ऐसे मर्द हैं जो "दो" हूरों को झेल रहे हैं ! हालांकि चार हूरों की छूट है, पर दो हूरों के सिलबट्टे में पिस कर पहलवान सत्तार मियां दस साल में पचासी किलो से पचास किलो  पर  आकर अटके हैं ! बड़ा कलेजा है भाई का, पिसे जा रिया है !"
        पत्रकार बहत्तर हूरों तक पहुंच ही नहीं पा रहा था !  अच्छन मियां बता रहे थे, -' मुहल्ले के जो नवजवान लौंडे चार शादियों का नमकीन ख्वाब देखते थे, अब सत्तार मियां का हस्र देखकर तौबा तौबा करते हैं ! पर मियां तुम बताओ ये बहत्तर हूरों वाला कौन मर्द मुजाहिद है, अभी जिंदा है क्या?'
      एक यू ट्यूबर सब्जी बेचने वाले बाबू मियां से पूछ रहा था, -'  ये हूरें दिखने में कैसी होती हैं खां साहब?'
    "बिल्कुल टमाटर की तरह सुर्ख़ रंग , मूली के पत्ते की तरह हरी आंखें, शहतूत जैसे होंठ ,तरोई जैसी पतली कमर,  गरदन जैसी कोई सब्जी फिलहाल दूकान में नहीं है! कुल मिलाकर ये समझो बाबू जी, कि उनमें कोई आदत हमारी बीवियों जैसी नहीं होगी, कि घर में घुसे नहीं कि जेब पर डाका पड़ा -'!
          " तुम्हें तो मरने के बाद 72 हूरें मिल जाएंगी, औरतों को क्या मिलेगा ?'
      " यहां की दुनियां में ज़्यादा से ज़्यादा चार हूरों की इजाजत है, वहां ये आंकड़ा बहत्तर तक है ! पर न तो यहां हर कोई चार हूरों के साथ चैन से जीता है न वहां बहत्तर के साथ जन्नत में जी पाएगा।  बाकी मैं तो ठहरा जाहिल, मौलाना साहब  सही जानकारी देंगे आपको -'!

      उधर एक चैनल के डिबेट में दाढ़ी वाले एक युवक ने ये कह कर आग पर घी डाल दिया था, - ' जैसा अमल होगा वैसा ईनाम मिलेगा ! गीता में भी कहा गया है कि - जैसा करम करोगे वैसा फल देगा भगवान' -! बस फिर क्या था, डिबेट में बैठीं तीन अधेड़ "हूरों" ने इसे अपने "कर्म" पर कटाक्ष समझ कर दाढ़ी वाले पर सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी थी ! 

        दर्शकों में उत्साह छा गया , एक धर्मविशेष का चीर हरण देख कर विरोधियों को घर का कनस्तर बगैर आटे के भरता हुआ नज़र आ रहा था, देश आत्मनिर्भर हो रहा था और ऐसा लगता था कि विश्व गुरु होने के रास्ते की सारी बाधाएं अब जाकर दूर हुई हैं !   

   72 हूरों  के चलते प्रगति के कितने सारे मेगा प्रोजेक्ट रूक  गए थे !

       -  Sultan bharti - [Satirist]