Thursday, 29 October 2020

" शान्ति - सेवा - न्याय "!

                         अगर आप सौभाग्यवश पुलिस थाने में घुसते हैं तो बोर्ड पर लिखे तीन शब्दों पर नज़र पड़ती है,- शान्ति, सेवा और न्याय !  ये तीनों चीजें थाने में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं,पर मिलती उसे हैं जिसकी जेब में "सौभाग्य".होता है ! अगर आप के पर्स में सौभाग्य नहीं है तो आप की वापसी शांति पूर्वक संभव नहीं । आप हफ्तों अशांत हो सकते है! शान्ति के लिए कुछ भी करेगा। लोग शान्ति की खोज में हिमालय पर चले जाते हैं, लेकिन यहां थाने में आपका टीए - डीए  बच जाता है ! थाने की यही विशेषता है, यहां शान्ति के साथ शान्ति की उम्मीद में आने वाले अक्सर अशांत और असंतुष्ट होकर बाहर आते हैं ।
        पुलिस ने थाने के दरवाजे पर कंटिया डाल रखी है, 'यहां पर  शान्ति सेवा और न्याय मिलता  है '! कामयाब व्यापारी कभी दाम नहीं लिखता।  आप पहले अंदर तो आओ  फिर बताऊंगा कि शान्ति का बाज़ार भाव क्या है!
अंदर आप अपनी मर्जी से आते हैं,मगर जायेंगे शान्ति की मर्जी से। जब तक बीट कॉन्स्टेबल  संतुष्ट नहीं हो जाता कि अब आप "शान्ति" को अफोर्ड कर लेंगे, आप की कोचिंग चलती रहेगी ! शान्ति  बड़ी मुश्किल से मिलती है, इस हाथ दे - इस हाथ ले ! ( नहीं तो ले तेरी की ,,,!)
        कितनी अच्छी चीज़ हैं -.शान्ति, सेवा और न्याय ! पर लोग लेना ही नहीं चाहते ! थाने जाते हुए पैर कांपते हैं, बीपी बढ़ जाता है! लोग अक्सर अकेले जाने से कतराते हैं ! कोई पंगा हो जाए तो शान्ति के लिए लोग मोहल्ले के लुच्चे नेता को साथ लेकर थाने जाते हैं ! अब शान्ति का रेट थोड़ा और बढ़ जाता है, क्योंकि थोड़ा विकास नेता को भी चाहिए ! थाने वाले नेता को देखते ही ऐसे खिल उठते हैं गोया  आम के पेड़ में पहली बार बौर देखा हो ! तीनों अच्छी चीजें हैं, पर थाने से कोई लाना ही नहीं चाहता ! शरीफ़ आदमी थाने में घुसते हुए ऐसे घबराता है गोया  किसी का बटुआ चुराते हुए पकड़ा गया हो ! नमूने के तौर पर दिन दहाड़े थाने के पास लुटा शरीफ आदमी घबराया हुआ थाने में  "न्याय" की उम्मीद में जाता है ! बीट कॉन्स्टेबल पूछता है, -' के हो गयो ताऊ !"
        " एक बदमाश  मेरा पर्स छीन कर  भागा है "!
  " तो मैं के करूं ! तमै चोर कू दौड़ कर पकड़ना था!"
         " इस उमर में मैं भाग नहीं सकता।"
   " ता फिर इस उमर में नोट लेकर क्यों हांड रहो ताऊ! खैर, कितने रुपए थे?"
        " पांच हजार '!
    बीट कॉन्स्टेबल खड़ा हो गया, " नू लगे अक  कनॉट प्लेस का झपटमार था! इस इलाके के गरीब झपटमार पांच सौ से ऊपर की रकम नहीं छीनते"!
       " क्यों ?"
   " ग़रीब इलाका है, ऊपर से कोरोना का कहर! किसी की जेब में सौ पचास से ऊपर होता हो नहीं ! पिछले महीने एक थैला चीन कर एक  भागा था! बाद में ईमानदार झपटमार ने थैला यहां मालखाने में जमा करा दिया था !"
          " क्यों "? 
   " थैले में दो जोड़ी पुराने जूते थे, जो मरम्मत के लिए कोई ले जा रहा था। झपटमार ने समझा  "प्याज़" है "!
         '' मैं तो लुट गया, मेरी रिपोर्ट लिखो !"
        " कोई फायदा नहीं  ! दुनियां में किसी को ' 'एफ आई आर '  से शान्ति   नहीं मिलती! शान्ति मिलती है गीता के वचन दोहराने से, - ' तेरा था क्या जिसे खोने का शोक मनाते हो ! जो आज तेरा है, कल किसी और का हो जायेगा !  अब आत्मा को  "पर्स"  में नहीं  बल्कि "परमात्मा" में लगाओ! ये झपटमारी नहीं, विधि का विधान है ताऊ !"
     शान्ति के बाद नंबर आता है " सेवा" का ! ये चीज़ थाने में बगैर भेदभाव के मिलती है ! इसी के खौफ से काफ़ी लोग लुटने, पिटने और अपमानित होने के बाद भी थाने नहीं जाते ! सेवा के मामले में नर  नारी का भी भेदभाव नहीं है ! कुछ समय से नारी की  सेवा के लिए नारी पुलिस की व्यवस्था होने लगी है !. कभी कभी "सेवा" बर्दाश्त न कर पाने की वजह से  लोग थाने में ही वीरगति को प्राप्त हो जाते हैं ! इस तरह के सेवा भाव से प्राणी को मरणोपरांत मोक्ष मिले ना मिले, पर "सेवादार" को प्रमोशन ज़रूर मिलता है!
         थाने में उपलब्ध तीसरी दुर्लभ चीज़ है "न्याय" ! ये भी शान्ति और सेवा की तरह निराकार  होती है। थानेदार की पूरी कोशिश होती है कि थाने आने वाले सारे श्रद्धालुओं को न्याय की पंजीरी प्राप्त हो, पर नसीब अपना अपना ! दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम ! बीट कॉन्स्टेबल भी यही चाहता है कि वादी और प्रतिवादी दोनो को न्याय की लस्सी मिले! ऐसे में। कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है ! "सेवा" के इस मैराथन में जो ज़्यादा "खोता" है - उसे थोड़ा ज़्यादा न्याय मिलता है ! थाने से बाहर आकर वादी और प्रतिवादी दोनो महसूस करते हैं कि न्याय के नाम पर जो कुछ मिला, उसमे से "शान्ति" गायब है!     लेकिन,,,,,,,,,,,

 अब पछताए होत क्या - जब चिड़िया चुग गई खेत !

Wednesday, 28 October 2020

"मन की बात "!

            मैं क्या करूं, बहुत समझाया अपने दिल को - पर दिल है कि मानता नहीं ! मैंने लाख दलील दी कि इस दौर में कोई नहीं सुनेगा, लिहाज़ा सुनाना ही है तो मन की बात किसी पेड़ या सरकारी पुल को सुना दो। ज़्यादा से ज़्यादा सदमे में आ कर पेड़ सूख जायेगा या पुल को लकवा मार जायेगा ! पर जनाब, कोरोना में तपा हुआ दिले नाकारा  काम की बात की जगह मन की बात पर अड गया ! और ज़्यादा समझाने पर मुझ पर ही एहसान लादने लगा , -' शुक्र करो कि मन की बात पर अड़ा हूं, कहीं तुमसे ऑक्सीजन सिलेंडर मांगा होता तो ?"
      " देश में ऑक्सीजन की कोई कमी  नहीं है ! घर में गाय बांधा करो"!
  " कितनी ढिठाई से बता रहे हो ! जैसे मैंने हाथ पकड़ा हो ! अफ़सोस ! सद अफ़सोस !!"
     " किस बात का ?" मैंने दिल से पूछा !
  " मेरे साथ धोखा हुआ, फरिश्तों ने मुझे बताया ही नहीं कि जिसकी बॉडी में मुझे प्लांट कर रहे हैं, वो भविष्य में एक लेखक होने वाला है! काश मैंने तुम्हारी कुंडली देखी होती ! साठ साल के बाद जाऊं तो जाऊं कहां !"
    " तुम्हें तो गर्व करना चाहिए कि तुम एक विख्यात व्यंग्यकार का दिल हो !"
      " जिसके पास कभी कभी दाढ़ी बनवाने का भी पैसा नहीं होता " दिल भड़क उठा - ' कोई इज्जतदार आदमी होता तो कोरोना में निकल लेता या फ़िर खुदकुशी कर लेता ! आज के बाद मेरे मुंह मत लगना , कहे देता हूं!" 
      मुझे भी आदत पड़ गई है!  मन को समझाया,-' दिल की बात सुने दिलवाला ! मन तो मेरा भी करता है कि इकतारा बोले - टून्न टून्  ! पर सुनेगा कौन ! आजकल हर कोई मन की बात सुनाना चाहता है, पर सुनना नहीं चाहता ! मन की बात तो सिर्फ एक की सुनी जाती है ! हमारी तो काम की बात भी कोई नहीं सुनता ! मैं तो लोगों के  मन की बात भी इतनी श्रद्धा से सुनता हूं , गोया  कोई काम की बात हो ! मेरे जैसे निष्काम भक्त को ना काम मिल रहा है ना काम की बात ! हालत ये हो गई है कि मैं जब भी काम की बात करना चाहता हूं, मुंह से मन की बात निकलती है !
           मिर्ज़ा गालिब की भी यही प्रॉब्लम थी ! उनका "दिल" अपने मन की बात तो सुनाता था मगर  खुद गालिब के मन की बात नहीं सुनता था ! दिल की इसी डिप्लोमेसी से खीझ कर चचा गालिब ने एक शेर लिखा था , -
       "दिले नादां"  तुझे  हुआ  क्या  है !
        आखिर इस मर्ज की दवा क्या है !!
     कमाल है! चचा गालिब उसी नामाकूल दिल से दवा का पता पूछ रहे हैं जिसने मर्ज दिया है ! बकौल - तुम्हीं ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना - ! मन की बात पर श्रोता की गाइड लाइन नहीं अप्लाई होती ! वो गाना तो सुना  होगा ,-. मै चाहे ये करू मैं चाहे वो करूं,,,,, मेरी मर्ज़ी ! मैं चाहता हूं कि जब मन की बात करूं तो मेरा दिल उसे काम की बात समझ कर - रोजा इफ़तार करे ! खिट खिट ना करे ! दिल में जीडीपी की चिंता नहीं, संतोषम परम् सुखम का होना ज़रूरी है !

                मैंने अपने पड़ोसी दोस्त चौधरी को टटोला, -' आज मैं तुमसे मन की बात करना चाहता हूं '! 
   " ये मुंह  अर - मसूर की दाल ! थारी मन की बात तो म्हारी भैंस भी ना सुने ! मोय पतो सै,  अक थारे मन कौ बात दूध की उधारी चालू करने के खातर होगी ! ना भाई ना , उधार प्रेम कौ कैंची सै। परे कर  मन की बात नै !"

         किससे कहूं मन की बात ! कोई सूरत नज़र नहीं आती !!
     


Tuesday, 27 October 2020

" कुछ अलग सी,,,फैमिली वाली फीलिंग !"

            फेमिली वाली फीलिंग       ( व्यंग्य)

           अब क्या बताऊं जी, जब से जेठ का महीना लगा है - मुझे फेमिली वाली फीलिंग नहीं आ रही है ! बुद्धिजीवी लोग पूछ सकते हैं कि गर्मी के महीने का फेमिली वाली फीलिंग से क्या संबंध है ! जो लोग कॉविड के लपेटे में नहीं आए हैं , उनको तो ऐसी फीलिंग आयेगी ही ! उन लोगों से पूछिए जिनके घर में कोरोना ने कुंडी खटखटाई और घर के बुजुर्ग ने दरवाजा खोल दिया ! बुजुर्ग के बीमार होते ही पहले मुहल्ले वाली फीलिंग दफा हुई और जब बुजुर्ग मर के अजनवी कंधों पर रवाना हुआ तो फेमिली वाली फीलिंग भी दम तोड गई! टीवी खराब है और सोशल मीडिया पर न सतयुग की ख़बर आ रही
 है  न  फैमिली वाली फीलिंग ! बस हर चैनल पर कोविड वैक्सीन छितराई हुई है ।  
          विज्ञापन देख रहा हूं, एक सुंदर महिला को सरसों के तेल में ' फेमिली वाली फीलिंग' आ रही है ! ये जो फैमिली वाली फीलिंग है न , आजकल फेमिली के अलावा जाने कहां कहां से आ रही है। ( मेरो बेगम को मायके जाने पर ही ये फीलिंग आती है! )  ये  फेमिली वाली फीलिंग अजीब अजीब सी चीजों से आने लगी है। मूड की बात है, आने पर उतारू हो जाए तो बीबी के मायका चले जाने पर भी आ जाए , और ना आना हो तो करवा चौथ के रोज फेमिली वाली फीलिंग की जगह महाभारत वाली फीलिंग आ जाए ! कुछ लोगों को फैमिली वाली फीलिंग बहुत आती है, कुछ को ढूंढने पर भी नहीं बरामद होती! बहुत से लोग ऐसे हैं कि उनकी फीलिंग में फैमिली होती ही नहीं ! कुछ लोगों में ऐसी फीलिंग तभी आती है अब फेमिली पड़ोस की हो !.कुछ प्राणियों का घर खाली हो तभी फेमिली वाली फीलिंग अंदर आती है !
        आख़िर कैसे आती है ये फैमिली वाली फीलिंग ! सुना है ,- मार्केट में कोई आटा आया है, जिसकी रोटी खाने से भी ' फैमिली वाली फीलिंग' आती है। (फीलिंग का गेहूं से बड़ा गहरा रिश्ता है ! पेट भरा हो तो डकार में भी फेमिली वाली फीलिंग होती है ! ( पेट खाली हो तो दिल में चूहे और चिंगारी की फीलिंग आती है !) मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी  ' सवा सेर गेहूं' ऐसी ही फीलिंग के ऊपर है ! घर के मटके में गेहूं हो तो खाली पेट भी फैमिली वाली फीलिंग आती है ! मटका ख़ाली हो तो फैमिली की जगह क्रान्ति की फीलिंग आती है ! गेहूं का क्रान्ति से बडा गहरा संबंध है! व्यंग्य सम्राट परसाई जी कहते हैं,-" घर में गेहूं हो तो पूरा विश्व  ''संकट विहीन" नजर आता है"!
                        मैं पहले फेमिली वाली फीलिंग को बहुत अच्छा समझता था! ( ये तब की बात है जब कोरॉना ने मुझे बेरोजगार नहीं किया था !) हफ्ते में एक दिन घर पर होता था ! चारों तरफ अगरबत्ती की खुशबू जैसी फैमिली वाली फीलिंग महसूस करता था ! फिर कोरोना आया और फिर उसके बाद चिरागों में रोशनी ना रही,,,,! अब संडे  तो शनि बनकर कुंडली में पसर गया है ! कोरोना के आते ही कनस्टर का आटा और फेमिली वाली फीलिंग दोनो विलुप्त ! ( हालांकि मेहमान और कौआ दोनो गायब हैं) जिन मर्दे मुजाहिद पतियों ने लॉक डाउन का लंबा कारावास घर में काटा है, उन्हें तो सहनशीलता के लिए गैलेंट्री एवार्ड मिलना चाहिए! ऐसे किसी वीर पुरुष से कभी मार्च से मई के बीच की ' फेमिली वाली फीलिंग ' के बारे में पूछ कर देखो - लाठी लेकर दौड़ा लेगा ! 
                         फीलिंग ने बाजारवाद को हवा दी है । कुछ वॉल पेपर आए हैं जिन्हें कच्चे फर्श पर लगाने से फेमिली को  ' टाइल ' वाली फीलिंग आती है। ( ये ठीक ऐसे है जैसे पनीर टिक्का खाकर कोई चिकन टिक्का वाली फीलिंग स्पार्क करे!) इस फीलिंग के चलते कई महापुरुषों ने हल्दी में घोड़े की लीड मिला कर बेच दिया , पर फेमिली को उल्टी की फीलिंग नहीं हुईं ! मै चार दिन से टीवी नहीं देख पा रहा हूं, चाहता हूं कि महाभारत के संजय वाली फीलिंग आए, पर बार बार धृतराष्ट्र वाली आ जाती है। टीवी ठीक कराऊंगा तो बेगम -  कौन बनेगा करोड़पति - देखना शुरू कर देंगी ! ( केबीसी देखने से ही कुछ लोगों में कड़की के अंदर करोड़पति होने की फीलिंग आ जाती है! )ज़िंदगी के रेगिस्तान में भटक रहे साहित्यिक जीव को  नखलिस्तान की फीलिंग ही नहीं आ रही !
      
       हालात ने एनेस्थीसिया की शक्ल लेली है, फैमिली वाली हो या दुश्मन वाली - कोई भी फीलिंग महसूस नहीं हो रही । कोरोना होने पर गंध को फीलिंग नहीं होती ! दुकानदार और प्राइवेट डॉक्टर में इंसानियत की फीलिंग नहीं रही !  सियासत की "होलिका" में भाई चारे की फीलिंग नहीं होती ! कोरोना हमारे संस्कार में घुस गया शायद ! स्पुतनिक और कोविड शील्ड का कोई चक्रव्यूह काम नहीं कर रहा ! रिश्तों की फीलिंग खत्म हो रही है ! हम इंसान की जगह तमाशबीन बन कर खड़े हैं ! सड़क पर भीड़ किसी को कत्ल करती है और हम में बचाने की फीलिंग नहीं आती !

         नया बाजारवाद हमे नया संस्कार दे रहा है! आटे में फेमिली की फीलिंग, टाइल में मार्बल की फीलिंग , मां बाप को वृद्धाश्रम में रख कर मदर और फादर्स डे की फीलिंग ! ज़हरीली शराब से गरीबों को मार कर अनाथालय बनवाने की फीलिंग ! ऐसी भीड़ में भला मुझ तक फेमिली वाली फीलिंग आए भी तो किधर से !! नींद तक रात में नहीं आती !!
                                  ( सुलतान भारती )


Sunday, 25 October 2020

" की टुक टुक - बिहार मा चुनाव छे !"

            मुझे बगैर टीवी देखे यकीन हो गया कि बिहार को स्वर्ग से सुंदर बनाने के दिन आ गए । अब बिहार में दरवाज़ा खटखटा कर लोगों को नौकरी दी जायेगी, - बड़ी दूर से आए हैं ' हाथ में लड्डू लाए हैं ' ! कोई दस लाख नौकरी लाया है, तो कोई उन्नीस लाख़ ! ( जाने आज तक किस गोदाम में संभाल कर रखी थीं !) लोग दुर्दिन के लिए ही तो बचा कर रखते हैं ! कोरोना में छीनकर लॉकर में रख दिया था, अब चुनाव में काम आएंगी ! कई पार्टियां सकते में हैं ! इतनी सारी नौकरिया इन दोनों ने बांट दी, अब मै क्या बांटू ! झोले में रखी जन्नत में दीमक ना लग जाए !
                पूरे अड़सठ साल में जहां जहां सड़क नहीं बन पाई थी, अब आठ हफ्ते में लाकर वहां सड़क रख रख दी जायेगी ! सड़क होगी तभी तो विकास गाँव तक पहुंचेगा ! ( जहां सड़क नहीं है, विकास ग्राम प्रधान के घर से आगे जाता ही नहीं !) सड़क कितनी ज़रूरी है, ये तो अप्रैल और मई में ही पता  चल गया था जब लॉक डॉउन में पूरे देश के मज़दूर शहरों से पैदल ही गांवों को चल पड़े थे ! सड़क बहुत ज़रूरी है ताकि शहर से गांव तक पैदल आने में असुविधा न हो ! ( रहा कोरोना , तो प्राकृतिक आपदा का इलाज तो अमेरिका और रूस के पास भी नहीं है ! यही क्या कम है कि  "वैक्सीन" ना होते हुए भी हम फ्री देने जा रहे हैं!)
            जिसके गुल्लक में ज़्यादा चैनल है, वो चुनाव से पहले जीत रहा है! जिसके पास नहीं है वो मतगणना का इंतज़ार करेगा ! साम दाम दण्ड भेद का इस्तेमाल कर हवा बनाई जा रही है ।वोटर अपने विधान सभा की सर्वे रिपोर्ट सुनकर सकते में हैं कि जनता तो विरोध में है , फिर ये किसके वोट से जीतते नजर आ रहे हैं ! हर दिन एक सर्वे आ रहा है, रोज के रोज बिहार सुशासन और विकास के कारण जापान से आगे जा रहा है ! जनता की सांस फूल रही है , इतना विकास सम्हाले कैसे ! हालांकि बगल झारखण्ड और बंगाल बेहाल हैं, पर उनके लिए अभी  "कृपा " रूकी हुई है !
         वैसे विकास बांटने में केजरीवाल जी अभी भी प्रथम स्थान पर बने हुए हैं! पानी और बिजली इतना बांटा की दिल्ली अभी भी सदमे से उबर नहीं पाई !. बीच में पानी बिजली छोड़ कर मरकज में जाकर कोरोना भी बांट आए । अब उन्हें लगा कि  सही विकास तो यही है। फिर क्या था, उन्हें सत्य का ज्ञान हो गया और  " ईश वाणी " भी सुनाई देने लगी थी कि दिल्ली दंगो का मास्टर माइंड कौन है ! तब से आजतक वो जब भी विकास करना चाहते हैं, कोरोना उनका हाथ पकड़ लेता है !
       चुनाव ना आए तो कभी पता न चले कि जनता ने पिछले ५ साल में कितना "सुशासन" भोगा है! चुनाव में ही पता चलता है कि हंस कौन है और कौआ कौन ! तो,,, नए नए खुलासे हो रहे हैं ! कई तारणहार धोती में गोबर लगाए गलियों में आवाज़ लगाते घूम रहे हैं, -' सोना लै जा रे ! चांदी लै जा रे !" कोई पैर में कीचड़ लगाए आवाज़ लगा रहा है, "  ये  ' हाथ ' हमे दे दे ठाकुर "! कोई स्लोगन दे रहा है , " लालटेन फिर आई है !
                          बिजली तो हरजाई है !!"
         पढ़े लिखे बेरोजगार को अब कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है! घर बैठे पंद्रह सौ की पेंशन लें और मछली उद्योग में मन लगाएं! चुनाव से पहले जितनी जन्नत बटोरनी हो बटोर लो ! चुनाव के बाद - ढूंढते रह जाओगे ! नक्सल और बाढ़ एक बड़ी समस्या है! नक्सल विपक्ष की देन है और बाढ़ विधाता की ! दोनो को जीतने के बाद ही सबक सिखाया जायेगा !  तब तक,,,,,

       रुकावट के लिए खेद है !!
           ,,

Thursday, 22 October 2020

' मास्क ' है तो मुमकिन है!

     मेट्रो रेल बंद होने के बाद आज पहली बार मेट्रो का सफ़र किया , मज़ा आ गया ! DMRC ने सीटों को कोरोना की सहूलियत के हिसाब से अरेंज किया है!  एक सीट छोड़ कर बैठने की व्यवस्था की गई है! ( ताकि बीच में कोरोना के बैठने की सहूलियत रहे!) कोरोना चलने फिरने में चूंकि लाचार होता है,। इसलिए उसकी संख्या और विकलांगता को देखते हुए हर डब्बे में उसकी सीटें सुरक्षित की गई हैं ! डीएमआरसी  हर स्टेशन के इंट्री गेट पर यात्री के हाथ का टेंप्रेचर जांच कर उसे कोरोन फ़्री मान लेती है ! अब अगर कोरोना यात्री के पीठ पर बैठ कर अन्दर आ गया तो ये कोरोना की गलती है, डी एम आर सी  की नहीं !
                          अंदर मेट्रो ट्रेन ख़ाली सी लगी! मेट्रो के नए नियम और कोरोना के खौफ ने सूरत ही बदल रखा है ! अगर सांसों के आवागमन से परेशान हो कर किसी ने फेस मास्क उतार दिया तो बगल बैठा यात्री घबरा जाता है। ऐसा लगता है गोया सारा कोरोन्ना सिर्फ मुंह के रास्ते अंदर जाने का इंतज़ार कर रहा हो ! (मुंह के अलावा और कहीं से जाना ही नहीं चाहता!) फेस मास्क के बावजूद दोनो कान खुले होते हैं, मगर उधर से जाने के लिए - कोरोना है कि मानता नहीं ! कान के रास्ते अंदर जाने में कोरोना को क्या प्रॉब्लम है, इसपर रिसर्च की ज़रूरत  है ! मेरे ख्याल से, नाक और मुंह के रास्ते में तमाम खतरे हैं! आदमी दाल रोटी के साथ कोरोना को भी खा जायेगा ! नाक में और भी  खतरा है, आदमी ने छिनका तो तो मलबा के साथ कोरोना की पूरी कॉलोनी दलदल में गाना गाती नजर आयेगी, " ये कहां पे आ गए हम - सरे राह चलते चलते !" फिर भी - कोरोना है कि मानता नहीं!
        फेस मास्क की आड़ में पुलिस वाले आत्मनिर्भर होने में लगे हैं! जैसे जैसे कोरोना का ग्राफ गिर रहा है, प्राईवेट अस्पताल और पुलिस की बैचैनी बढ़ रही है! ट्रैफिक पुलिस आपके स्वास्थ्य को लेकर कितनी चिंतित है, इसका पता मुझे कल चला जब, चलती कार के ठीक सामने आकर पुलिस वाले ने मेरे दोस्त की गाड़ी रोक कर फेस मास्क चेक किया! सबके चेहरे पर मास्क पाकर उसके चेहरे पर जो निराशा मैंने देखी, तो ऐसा लगा गोया अभी अभी उसका टाइटेनिक जहाज़ डूबा हो! जनता के स्वास्थ्य को लेकर पुलिस की इतनी चिंता और  बेचैनी कभी देखी नहीं ! फेस मास्क के बगैर चेहरा तुम्हारा! वसूली हमारा! मिले सुर मेरा तुम्हारा !!
      मुझे कोरोना के कैरेक्टर पर शुरू से ही डाउट रहा है, चीन से आए माल का क्या भरोसा ! लगता है साले चीन ने कोरोना को सिखा पढ़ा कर भेजा है कि -' फेसमास्क के बगैर मानना मत , कम्पनियों से हमारी डील हो चुकी है। फेस मास्क देखते ही पतली गली से निकल लेना - पापी पेट का सवाल है! आजकल वैसे भी इंडिया वाले हमारे पेट पर लात मार रहे हैं !' दो लोगों के बीच की खाली सीट पर मरणासन्न अवस्था में लेटा कोरोना दो लोगों  की बात सुन कर अपना बीपी बढ़ा रहा है , ' ये साला मनहूस कब दफा होगा इंडिया से ?'
      " बिहार का चुनाव हो जाने दो, फिर इसी का लिट्टी चोखा खायेंगे ! वैसे भी चाइनीज़ माल की होली तो जलानी तय है !"
              " इस वायरस का फेस मास्क से क्या लेना देना है?"
        " वो कहावत तो सुनी होगी, मुंह लगना। गंदे लोग हमेशा मुंह लगने के फ़िराक़ में रहते हैं, इसलिए हमने मुंह पर फेस मास्क लगा लिया है! वैसे, मैं तो चाहता हूं कि ये मरदूद एक बार घुसे तो सही मुंह के अंदर !"
   " फ़िर तो बहुत बुरा हाेगा !"
           " वही तो ! रोटी रोज़ी की तलाश में भटक रहे इन्सान के लिए दस रुपए का फेस मास्क भी भारी पड़ रहा है ! भूख और गुस्से की आग में उसकी आंतें नाग की तरह फनफना रही हैं ! एक बार कोरोना अंदर गया कि भूखे इन्सान ने डकार मारी ! कोरोना की पूरी कॉलोनी एक बार में ' स्वाहा '!! देख रहे हो कि पिछले दस दिन में कोरोना की आबादी कितनी घटी है?"
     " हां, सर्दियों में भूख बहुत लगती है "! 

    कोरोना अगले स्टेशन पर उतर कर अपनी फेमिली की गिनती करने लगा !

Tuesday, 20 October 2020

" ब्रेकिंग न्यूज़" !

         आजकल न्यूज का अकाल है, मगर ब्रेकिंग न्यूज़ की भरमार है ! पहले न्यूज़ की भरमार थी, ब्रेकिंग न्यूज़ कभी कभी शुतुरमुर्ग की तरह नज़र आता था। अब तो हालत ये है कि हर घंटे ब्रेकिंग न्यूज़ सामने आ रही है। ख़बर भी ऐसी कि सुनकर दिल ब्रेक हो जाए ! सारे चैनल न्यूज़ छोड़ कर ब्रेकिंग न्यूज़ के पीछे लाठी लिए दौड़ रहे हैं । कुछ ब्रेकिंग न्यूज़ की बानगी देखिए, - ' हरियाणा में एक किसान ने अपने पालतू  "भैंसे" का नाम  सुलतान  रखा है '! अगले चानल की ब्रेकिंग न्यूज़, ' पाकिस्तान में  "आटा" महंगा - तख्ता पलट की आशंका बढ़ी '! एक दूसरे चैनल की खोज, - ' राजस्थान  की  "नृत्य करने वाली बकरी".पर आज रात नौ बजे  विशेष कवरेज देखिए "! ( इन्हें देश में कहीं भी भूख, बेकारी, महंगाई, दुख संताप या समस्या नज़र ही नहीं आई  ! दैहिक दैविक भौतिक तापों ने कोरोना आते ही देश छोड़ दिया था!)
         आजकल लोग अनुष्का शर्मा के होने वाले बच्चे को लेकर खासे उत्साहित हैं ! हमारे दिव्य चैनलों की व्याकुलता बढ़ती जा रही है ! एंकर और कैमरामैन खाना पीना भूल कर विराट कोहली और अनुष्का के घर की परिक्रमा कर रहे हैं। कई न्यूज़ चैनल के अंडर कवर एजेंट अस्पतालो का इंट्री रजिस्टर चेक कर रहे हैं ! कल्पना कीजिए कि बच्चे की डिलीवरी के लिए अनुष्का के अस्पताल में भर्ती होते ही ये चैनल किस किस्म की 'ब्रेकिंग न्यूज़" प्रसारित करेंगे ! चलिए कुछ नमूने से आपको वाकिफ कराते हैं ! 
       सबसे पहले हर ख़बर पर पहली नज़र रखने वाले चैनल का एंकर ,-" यही है वो सौभाग्यशाली अस्पताल जिसमें सुबह तीन बजकर तेरह मिनट पर अनुष्का शर्मा एडमिट हुई हैं ! अस्पताल में किसी को जाने की इजाज़त नहीं हैं! अस्पताल के गेट पर भारी सुरक्षा व्यवस्था है! गेट से दस गज दूर एक कुत्ता आने जाने वालों को बड़े गौर से गिन रहा है! हमारे साथ इस वक्त अस्पताल के लेबर रूम की एक नर्स गुलाबो सिताबो खड़ी हैं, चलिए हम उनसे बात करते हैं , " गुलाबो जी, आप कब से यहां पर हैं ?"
       ' अभी आधा घण्टे से,!" 
"नहीं मेरा मतलब इस अस्पताल में ?"
       " बीस साल हो गए , "!
        " इस अस्पताल की सबसे बड़ी खूबी क्या है?"।          " दो तीन डॉक्टरों का कैरेक्टर ढीला है ! एक डॉक्टर पर इल्ज़ाम है कि अपेन्डिक्स के ऑपरेशन में सड़ी हुई आंत के साथ  उन्होंने मरीज़ की एक किडनी भी निकाल ली थी !"
     अगले चैनल का एंकर बड़े राजदार अंदाज़ में बोल रहा था, "देर से टीवी खोलने वाले अपने दर्शकों को हम बता दें कि ये वही अस्पताल है जिसमे अनुष्का शर्मा को एडमिट कराया गया है। पहली बार इस अस्पताल की एक्सक्लूसिव तस्वीरें आप हमारे चैनल पर देख रहे हैं! इस सदी की सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ ! क्रिकेट रैंकिंग में शीर्ष पर रहने वाले विश्व विख्यात खिलाड़ी विराट कोहली की पत्नी और देश की जानी मानी अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का बच्चा इसी अस्पताल में जन्म लेने वाला है ! आप सब बने रहिए हमारे साथ !" 
      अगले चैनल पर आंखो पर चश्मा चढ़ाए एक सज्जन ऐसे चीख रहे थे, गोया मधुमक्खियों के छत्ते पर पत्थर फेंक कर भागे हों -' मैंने आठ महीने पहले ही कह दिया था कि अपने बच्चे की डिलीवरी के लिए अनुष्का जी यही अस्पताल चुनेंगी ! सिर्फ हमारे चैनल को ये सटीक अंदाजा था, क्योंकि सिर्फ हम जानते थे कि समंदर की हवा नवजात शिशुओं के लिए बहुत स्वास्थवर्धक होती है ! हमारी संवाददाता मिस पूतना अस्पताल के आसपास के माहौल पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं ! अस्पताल में उन्हें घुसने नहीं दिया गया, इसके लिए हम महाराष्ट्र  पुलिस की कड़ी निंदा करते हैं"!
         चौबीस में से अट्ठारह घण्टे हिन्दू मुसलमान की राग दरबारी अलापने वाला एक  चैनल  इस खबर को कुछ इस अंदाज में ब्रेकिंग न्यूज़ बनायेगा , " सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ ! आप सब सिर्फ मेरे चैनल पर देख रहे है। अभी छे घंटे पहले अनुष्का शर्मा जी यहां बच्चे की डिलीवरी के लिए एडमिट कराईं गई हैं! सबसे पहले इस अस्पताल की प्री डिलीवरी तस्वीरें आप सिर्फ मेरे चैनल पर देख रहे हैं ! तसवीर में अस्पताल को देख कर मुझे भी काफ़ी खुशी हो रही थी, मगर अभी अभी पता चला है कि अस्पताल से सिर्फ एक किलोमीटर दूर एक मदरसा भी है ! मदरसे का अस्पताल से इतना नजदीक होना एक हिन्दू बच्चे  के लिए ठीक नहीं है ! जाने महाराष्ट्र सरकार इस मुस्लिम तुष्टिकरण से कब बाज आयेगी "!
        डिबेट के शौकीन  एक अभूतपूर्व चैनल कुछ इस अंदाज़ में डिबेट चलायेगा  "आज की सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ ! अनुष्का शर्मा अपने बच्चे को जन्म देने के लिए मुंबई के शानदार अस्पताल में भर्ती ! बेकारी  और विज्ञापन की परवाज़ न करते हुए आप सब बने रहिए हमारे साथ ! डिलीवरी के बाद  अनुष्का शर्मा  सबसे पहले किसे फ़ोन करेंगी ? इसी बड़ी बहस में भाग लेने के लिए हमारे स्टूडियो में इस वक्त मौजूद हैं विख्यात बंगाली तांत्रिक सूफ़ी जिन्नात अली, डाक्टर का पेशा छोड़ कर राजनीति में आए डॉक्टर प्राणहरण जी और आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाले बाल क्रंदन जी ! आप सभी का हम हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं ! कहीं मत जाइयेगा, हम तुरंत हाज़िर होते हैं, एक छोटे से ब्रेक के बाद ,,,,,,,,"!

    (  सावधान ! ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही है!)

Monday, 19 October 2020

"शुगरिया" ने हाय राम बडा़ दुख दीन्हा !

              अब और क्या कहूं, बाकी सब खैरियत  है ! खैरियत की लिस्ट दिनों दिन आत्मनिर्भर हो रही है, आप को भी बता देता हूं ! अठारह साल से शुगर है। दो साल से काम धंधा बंद है । आठ महीने से कोरोणा की लोरी सुन रहा हूं, " सो जा राजदुलारे सो जा "! मगर इतनी उपलब्धियों के बाद नींद कहां आती है ! शुगर ने जीवन की लज्ज़त से चीनी छीन लिया है ! शुगर सुनने में बडा़ स्वादिष्ट लगता है, मगर ज़िंदगी में ढेर सारी कड़वाहट घोल देती  है  ! 
                     ।     एन एन मेरी ज़िन्दगी का बचपना चालीस साल तक मेरे साथ रहा ! खुदा का शुक्र है कि ईमानदारी की छोटी सैलरी में बड़ी बरकत रही। लेकिन जाने कब बरकत के ढेर में छुप कर हलकट शुगर आ गई, फिर उसके बाद चिरागों में रोशनी ना रही,,,,। बात २००५ की है, किसी की सलाह पर मैंने अपनी शुगर चेक किया ! उस मनहूस दिन को कैसे भूल सकता हूं, शुगर थी - 325 एम सी जी ! चेक करने वाला घबरा गया ! बस उसके बाद - आज तक आह भर रहा हूं,- " हमसे का भूल हुई, ई जो सज़ा हमका मिली "! उसके बाद आजतक सलाह देने वालों की सूनामी ज़ारी है!
            मेरे फेमिली मित्र  " वर्मा जी ' जैसे मेरे ही बीमार होने का ही इंतजार कर रहे थे । उन्होंने आते ही मुझे टटोला " सुना है, तुम्हें शुगर हो गई है! बहुत खतरनाक बीमारी है, अल्ला जाने क्या होगा आगे ! बीमा करवाया है कि नहीं ?" 
      " करवा लिया था, मुझे पता था कि मोहल्ले में मेरी लंबी उमर की चाहत रखने वालों की कोई कमी नहीं है"!
      वर्मा जी को धक्का लगा, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी, " तीन सौ पच्चीस तो बहुत ज़्यादा है! इतनी शुगर में तो दोनो किडनी पंचर हो जाती है"!
  "  वो भी चेक करवा लिया। किडनी के साथ साथ लिवर, हार्ट, पेनक्रियाज सब कुछ ठीक है"!
        वर्मा जी की आशाओं पर गाज गिरी! उन्होंने फौरन मैदान छोड़ दिया, ' चलता हूं, कभी भी हार्ट फेल होता दिखे तो फोन कर देना "! अगला वेलविशर हमारा जिगरी दोस्त और पड़ोसी जगदीश चौधरी था , " उ रे कू सुन भारती ! सुना है अक  तमै शुगर  हो - गी ?"
           " हां, आज कल तो ये बीमारी आम है "!
     " रजिस्टर देख कै बताऊं सू "! 
     " रजिस्टर में क्या देखना है ?"
            " थारी दूध कौ उधारी! लेना देना खरा होना चाहिए ! थारा के भरोसा इब ! वैसे तू बढ़िया आदमी था, पर होनी कू कूण टाल सके! के बताया डॉक्टर नै ?"
       " डॉक्टर ने कहा है कि सुबह शाम उधार दूध पीने से चार महीने में शुगर गायब हो जाती है!"
         " मेरी भैंस इब ना ठा सके थारी जिम्मेदारी "!
इसके बाद मुझे पता चला कि मोहल्ले में कितने हकीम लुकमान और धन्वंतरि वैद्य मौजूद हैं ! रजाई भरने वाले रज्जू काका ने कीमती सुझाव दिया -' मेरठ में एक बाबा शुगर की दवाई देते हैं ! उनकी दवाई से छे महीने में शूगर के कीड़े मर जाते हैं "!
      " शुगर में कीड़े !!" मैं चिल्लाया
   " हां, ज्यादा मिठाई में कीड़े पड़ते हैं !"
                   एन  गांव के छेदी बाबा ने बताया, " सुबह शाम नीम की पत्ती पेट भर कर खाया करो, शुगर और अर्थव्यवस्थ दोनो कंट्रोल हो जायेगी "! तीसरा सुझाव अनोखा था, " सारी समस्या का जड़ खान पान है । हमारे ऋषि मुनि कंद मूल खा के दो ढाई सौ साल तक रिसर्च करते थे ! हिमालय पर जाकर रहो, शुगर और आबादी दोनों कंट्रोल में रहेगी "!

         पर उपदेश कुशल बहुतेरे !   ग़ालिब ने कहा है कि , मैं ना अच्छा हुआ - बुरा ना हुआ '! मुझे यकीन है कि उन्हें भी शुगर थी, और लोगों की सलाह से परेशान होकर उन्होंने ठीक ना होने का फैसला किया होगा ! अजब दुनियां के ग़ज़ब लोग, दूसरों को तब तक बीमारी भूलने ही नहीं देते, जब तक वो शरसैया पर ना लेट जाए !!