Wednesday, 18 September 2024

('व्यंग्य' चिंतन ) "सितंबर में- हम कू हिन्डी मांगटा"

(" व्यंग्य" चिंतन)

' सितंबर में- हम कू हिंडी  मांगटा'
      
                 अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी का पखवारा चल रहा है! सभी सरकारी प्रतिष्ठानों में बैनर लगा दिया है, -  हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है -! अंदर काम करने वाले लोग बग़ैर घबराए सारा काम अँग्रेजी में निपटा रहे हैं! बड़े बड़े सरकारी अस्पतालों ने भी बैनर लटका दिया है, - हिंदी बोलने में आसान, लिखने में और आसान-'! अंदर पर्चा बनाने से लेकर दवा लिखने तक सारा काम अँग्रेजी में चल रहा है! सभी अपने अपने तरीके से हिन्दी का हीमोग्लोबिन ठीक करने में लगे हैं! आखिर 365 में 15 दिन की तो बात  है 
  अब यही समस्या है दुरंत ! "ऊपर" से आदेश है कि मंत्रालय के बाहर एक बैनर लगा दिया जाए कि हम हिन्दी पखवारा मना रहे हैं! आज से 15 दिन  तक लगातार हम सारे काम हिन्दी में करेंगे ! इसमें चाहे जितनी बाधा आए, हम 15 दिन पीछे नहीं हटेगे, आखिर हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है-'!
इसके बाद हिन्दी के प्रति मोह और माया दोनों बंधन मुक्त होकर बैनर में छलकने लगे ! कई ऑफिस और बैंक के गेट पर हिन्दी प्रेम साफ साफ चुगली कर रहा था, - कि  ये तो कुछ ज्यादा हो गया-! एक बैंक के सामने बैनर लगा था,- हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है, आओ इसे विश्व भाषा बनाएं-! (और ये महान काम भी उन्हें सितंबर में ही याद आता है !)
अक्टूबर लगते ही वो तमाम मोह माया से मुक्त हो कर अपने बच्चों के लिए ' इंग्लिश स्कूल ' ढूँढने में  लग जाते हैँ-!
        कमाल तो ये है कि हिंदी पखवारा मनाने का ऐसा बैनर दिल्ली के वो सरकारी अस्पताल भी   पूरी दिलेरी से  लगाते हैं जिनका एक भी डॉक्टर दवाई का नाम हिन्दी में नहीं लिखता ! इसके बावजूद हिन्दी के प्रति उनकी अगाध आस्था देखिये,  वो सितंबर का पूरा एक पखवारा  हिन्दी को विश्व भाषा बनाने में खर्च कर देते हैं ! अपने देश का डॉक्टर हिन्दी सिर्फ घर में बोलता है! ड्यूटी पर तो  छींक भी आ जाए तो अँग्रेजी में 'सोरी' बोल कर खेद व्यक्त करता है! इस से हिन्दी के प्रति उसके 'समर्पण' और अँग्रेजी के प्रति  'कर्त्तव्य' का पता चलता है! पार्टी में अँग्रेजी बोल कर वो गर्वित होकर टोह लेता है कि मौजूद लोगों पर उसकी विद्वता की कितनी छींटे पडी हैं ! कुछ लोग तो अपने अनपढ़ घरेलू नौकरो को भी अंग्रेज़ी में  डान्टते हैं ! इसके दो फायदे हैं, - एक- नौकर पर रोब ग़ालिब होता है, और नौकर को चूंकि अंग्रेज़ी नहीं आती,  इसलिए वो उतना बुरा नहीं मानता ! ( रिंद के रिंद रहे,  हाथ से जन्नत न  गई-!)
    हिन्दी पखवारा चल रहा है,  लोग घर में अंग्रेज़ी अखबार पढ़ रहे हैं! वर्मा जी अपने बेटे को अगस्त महीने में ही  सलाह दे रहे थे, -'  घर में अँग्रेजी बोलने की कोशिश करोगे तभी इंटरव्यू क्लीयर कर पाओगे ! लेकिन तुम्हारे कान पर तो ताला लगा है ! अगले महीने हिन्दी दिवस है, मैं चुप रहूँगा, किंतु गांधी जी के महीने में अगर अंग्रेज़ी बोलने से अना कानी की तो कान उखाड़ लूँगा--'
  " मगर हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है"!
" मुझे कोई एतराज़ नहीं हैं,  बस तुम अंग्रेज़ी बोलना शुरू कर दो-"!
      " अब तो हिन्दी में भी इंटरव्यू होने लगा है!"
' तो तुम्हें अंग्रेज़ी पसंद नहीं है?'
      " हिन्दी में जो मिठास है, वो अंग्रेज़ी में कहा !"
  "अंग्रेज़ी के बग़ैर कैरियर से मिठास उड़ जायेगी "!
      " आप तो घर में अंग्रेज़ी नहीं बोलते "!
 " मेरे बाप ने मुझे गावं में बढ़ाया था ! वो अंग्रेज़ और अँग्रेजी दोनों के दुश्मन थे "!
 " लेकिन पिछले हिन्दी दिवस पर आप मंच पर लोगों को शपथ दिला रहे थे कि हिन्दी को विश्व भाषा बना कर दम लेंगे-"!
    वर्मा जी गुस्से में लाल हो गये, -' बहुत ज़बान चलने लगी है, बाप से ज़बान लड़ाता है,  चल उन्तालिस का पहाड़ा सुना-'! 
 बेटे ने अँग्रेजी का कड़वा घूट गले के नीचे उतारा !
       'बुद्धि जीवी' जी हिंदी के मंचपछाड़ कवि हैं, उनकी कविताओं से पीड़ित शहर की साहित्य सभा ने उन्हें मंच से बनवास दे रखा है ! लेकिन बुद्धिजीवी जी नें हार नही मानी ! वो बग़ैर बुलाए मंच पर रचना समेत पहुंचने लगे ! उन्हें देखते ही समस्त साहित्यकारों में कोरोना जैसा आतंक फैल जाता ! दो तीन कवि सम्मेलन में अराजकता और असफलता के बाद आयोजक और बुद्धिजीवी जी में आखिरकार इस बात पर सहमति हो गयी कि उन्हें भी पारिश्रमिक दिया जाएगा,लेकिन वो उस दिन कवि सम्मेलन से दूर रहेंगे ! बुद्धिजीवी जी को इस सौदे में कोई खोट नजर नहीँ आया ! 
         साउथ इंडिया के रहने वाले एक मंत्री जी साहित्य सम्मेलन में राष्ट्र भाषा हिन्दी की खूबसूरती पर प्रकाश डाल रहे थे , -' हिन्दी स्पीकिंग और रीडिंग  बहुत इजी ! हिन्दी दिवस वेरी गुड ! हिंदी पखवारा में गुड फीलिंग्स आता ! ये अभी हमारा नैशनल लैंग्वेज,  बट विश्वगुरु होने के बाद वर्ल्ड लैंग्वेज बनेगी- यू नो ? चलो इस बात पर ताली बजाने का ! एक स्लोगन रिपीट करने का-

सितंबर  मंथ का क्या पहचान !
'हिन्दी    भाषा    बने    महान' !!

      सितंबर खत्म, बैनर वापस आलमारी में! अलविदा हिन्दी पखवारा ! ये 15 दिन सरकारी बाबुर्ओं पर कितना भारी पड़ता है! वहीं हम हिन्दी  प्रेमी उत्तर भारत के लोगों का खोया हुआ मनोबल वापस आ जाता है !  शायद हम यूनिवर्स में पहले ऐसे लोग हैं जो अपनी राष्ट्रभाषा को पूरा साल देने की जगह एक पखवारा देते हैं ! कल 30 सितंबर है,  तो अलविदा हिन्दी पखवारा ! कुर्बानी के इसी 15 दिन से साल भर काम चलाओ ! अपना हीमोग्लोबिन दुरुस्त करो ! 'कथित हिन्दी प्रेमी' अगले सितंबर में फिर राष्ट्र भाषा के लिए पूरे एक पखवारे की कुर्बानी देंगे !

    तब तक के लिए हिन्दी के प्रति उनका मोह 'कोमा' में रहेगा !

                      [ सुल्तान भारती]
 


Sunday, 18 August 2024

("व्यंग्य" चिंतन ) सबका साथ सबका विकास

'व्यंग्य' चिंतन 

'सबका साथ सबका विकास'

 आसमान से गिरे ख़जूर में अटके ! सामने हाल में सोने की बजाय मैं ये सोच कर छत पर बने कमरे में सोने चला गया कि चौधरी समझेगा कि मैं घर में नहीं हूँ! अभी मुझे ठीक से नींद की खुमारी भी नहीं आ पायी थी कि चौधरी आ गया-' नीचे कूलर की हवा गरम लग रही- के ! दो घंटे ते कितै हाँड रहो!'
     ' पर मैं तो कहीं गया ही नहीं-!'
   'मन्ने के बेरा '- चौधरी कुर्सी पर बैठता हुआ बोला-'इब नू बता अक थारा विकास हो गयो के'?
     नींद के खुमारी की वज़ह से मैं कुछ और समझा,  मैंने कहा, - ' वो तो तीस साल बीत गए ! अब तो बच्चे काफ़ी बड़े हो गये !'
 चौधरी बिगड़ गया, - ' केले ही विकास कर लई मन्ने बताया कोन्या ?'
   जैसे अंगारा छू लिया हो,  मैं एक दम से खुमारी से बाहर आ गया! मैंने तुरंत सफ़ाई दी, - 'मैंने समझा तुम मेरी शादी के बारे में पूछ रहे हो!'
  ' मेरे गैल तू भी बुढ़ापे में आ लिया पर  'लव जिहाद' ते इब तक बाज न आ रहो-'!
   " अब मैंने क्या किया?"
       ' परे कर लव जिहाद ने,  नू बता- थारा विकास हो लिया, या कॉंग्रेस ने रोक रख्या सै ?'
   'कॉंग्रेस कैसे विकास रुकेगी,  वो तो विपक्ष में है!'
  'तभी तो कोई विकास ने होने दे रही ! न खुद विकास कर रही, अर् न होने दे रही ! इब केले प्रधान मंत्री जी के करें-!'
     विकट समस्या थी ! टीवी में खबर सुन कर चौधरी रुके हुए विकास को लेकर चिंतित था ! बस उसे शंका थी कि कहीं कॉंग्रेस से सांठ गांठ करके मैंने चुपचाप अपना विकास न कर लिया हो ! मेरी तरफ से आश्वस्त होकर चौधरी ने नई शुरुआत कर दी, -'देश की अर्थव्यवस्था घनी ऊपर लिकड़ गी, इब भैंस तो सस्ती हो ज्यागी ?'
    मेरी नींद उड़ चुकी थी ! ऊपर से चौधरी के सारे सवाल ' विकास' और  'आत्मनिर्भरता' के बारे में थे, जिसमें हम दोनों ही कुपोषण के शिकार थे ! चौधरी भैंसों के भविष्य को लेकर चिंतित था और मेरा खुद उसकी भैंसों से मानवीयता का नाता था!(  इन भैंसों ने ही कहीं न कहीं हम दोनों को एक बेहतरीन रिश्ते में बाँध रखा था !) 
     मैंने कहा ,-' सरकार तो किसानों के हक में है ! बहुत सारी स्क़ीम लाई है ! मुर्गा, बकरी,गाय और भैंस का फॉर्म खोलने के लिए  शहर से देहात तक किसान फायदा उठा रहे हैँ-!'
   चौधरी ने फिर सवाल दागा, -' पर कदी कॉंग्रेस ने विकास रोका, फिर,,,,,!'
  'कॉंग्रेस बनवास काट रही है,  वो क्यों किसानों का विकास रोकेगी ?'
   मेरे बारे में चौधरी की शंका थमने का नाम ही नहीं ले रही थी,- 'मेरे धोरे एक सवाड़ हा, सही सही बतावेगो-'?
     ' किस बारे में-?'
  ' तेरी आत्मनिर्भरता के बारे में-'!
' पूछ लो "!
      " इब के लोकसभा चुनाव में कॉंग्रेस ने घनी सीट लूट लई , इब तेरे धोरे कितने मंगलसूत्र इकठ्ठा हो गये-?"
     मैं तो आसमान से गिरा,ये कैसा सवाल था ! मैंने घबराकर पूछा,-' क्या मुफ़्त अनाज की योजना में गेहूं के साथ मंगलसूत्र भी मिलने लगा है-'?
         चौधरी ने मुझे चेतावनी दी, -' घना बुद्धिजीवी होने की ज़रूरत कोन्या-! मोय पतो है-अक् -कॉंग्रेस कू वोट देकर तम लोग मंगलसूत्र लूटना चाह रहे,  पर के कर सकै, सत्ता में आने के लिए आत्मनिर्भर न  हो पाए ! फिर भी इतनी सीट पाकर थोड़ा बहुत मंगलसूत्र तो छींना ही होगा ? के करेगा इतना लूट कै -! ऐसी आत्मनिर्भरता किस काम की ?"
              मुझे हंसी आ गई-' अच्छा तो मेरी ये वाली आत्मनिर्भरता तुम्हारे गले में अटक रही है ! भाई मेरे,  मैं लूटपाट में आत्मनिर्भर होने के मामले में बिलकुल अयोग्य हूँ ! मंगलसूत्र की कौन कहे मैं तो किसी का मोबाइल भी छीन कर नहीं भाग सकता ! अल्बत्ता दो बार चोर मेरा मोबाइल लेकर भाग चुके हैं ! अब तुम खुद सोचो मैं 'मंगलसूत्र' लूट कर कैसे आत्मनिर्भर हो सकता हूँ-?'
    चौधरी के चेहरे पर सुकून नज़र आने लगा, -'इब चाय तो मंगा ले,  इतना विकास तो होगा तेरे धौरे ?'
       पांच मिनट बाद चाय और बिस्कुट दोनो आ गया ! मैंने चौधरी से पूछा,- ' इस बार गाम ते बड़ी जल्दी आ लिया-'?
     चौधरी की आंखें आसमान में कुछ ढूढ़ने लगी थीं, -' गाम बदल गयो भारती! इब किसी के गैल  थारे धौरे बैठने का वक़्त है न लगाव ! सब की चादर लंबी हो - ली ! उतै अर बुरा हाल सै, सरकार विकास के खातिर ग्राम कू पैसा भेजे, पर विकास ग्राम प्रधान के दरवाज़े से आगे जाने कू त्यार कोन्या ! खैर, विकास ने परे कर,  अर् नू बता- अक् ,,,,बचपन में कदी तूने मंगलसूत्र छीना था-?"

    आज पहली बार मैंने चौधरी को घूर कर देखा तो चौधरी ठहाका मार कर हंसने लगा !

          [Sultan 'bharti'  Journalist]


Wednesday, 14 August 2024

(व्यंग्य चिंतन) पानी

[व्यंग्य चिंतन]  

" ई है "संगम विहार" ज़रा देख बबुआ"! 

    अब का बताएं भैया कि इस बस्ती में 'पानी'की समस्या ने किस तरह नाको चने  चबवा दिए ! दो दिन से  एक कविता याद आ रही है, ज़रा सुनिए -                        नल  से  वाटर  टपक   रहा  ऐसे !
                      किसी  विरहिन के आंसुओ जैसे !
                      तीन   दिन  से  नहीं   नहाये   हैं !
                      जब   से  "संगम विहार" आए हैं !!

      अब आप सोचते होंगे कि संगम विहार ज़रूर राजस्थान, सहारा या सिनाई रेगिस्तान की कोई बस्ती होगी,  जहाँ  अच्छे दिन की कोई पहुंच नहीं है ! अरे नाहीं  हो , ई अनाथ विधानसभा तो देश की राजधानी  दिल्ली में है और  वो भी साउथ दिल्ली में ! हे बाबू i ई मा हैरान होने की कौनो ज़रूरत नाहीं- ! संगम विहार में विकास आते हुए घबराता है ! ऐसी घबराहट उसे हर मौसम में होती है ! चलिए आज आपको उपेक्षा के हाशिए पर जी रहे संगम विहार के विकास की कहानी सुनाते हैं!
      1990 में जब मैं यहाँ आया तो कालोनी बस रही थी ! पानी और बिजली दोनों गायब ! विकास और तारणहार की जगह यहां नीलगाय घूमते थे ! 1993 में विधानसभा बनते ही विकास की सुनामी आ गई ! जनता की मुख्य समस्या पानी थी ,( वैसे सड़क और बिजली भी नहीं थी,  पर उसके बगैर लोगों ने जीने की आदत डाल ली थी!) 1993 में दिल्ली विधानसभा चुनाव का ऐलान हुआ तो संगम विहार की जनता कन्फ्यूज हो गई ! हर पार्टी के तारणहार विकास की लिस्ट लेकर आ गए थे ! जनता की समझ में नहीं आ रहा था कि  किसके वाले  'टूथपेस्ट' में नमक है ! जनता सिर्फ पानी, बिजली और सड़क का विकास चाहती थी, लेकिन यहां चुनाव में उतरे तारणहार-200 बिस्तर वाला हॉस्पीटल, कॉलेज, पार्क, पोस्ट ऑफिस, बैंक, सीवर सब कुछ देने पर उतारू थे !
         जब जनता ने देखा कि इतने सारे  'भागीरथ' गंगा लेकर आ गए हैं तो उनको विकास में कुछ काला नज़र आने लगा ! बस उन्होंने सारे  उम्मीदवारों को छोड़ कर एक आजाद उम्मीदवार को चुन लिया ! ( ये वही साल था जब संगम विहार  के लोग पूरी पूरी रात जाग कर "काला बंदर" ढूँढते थे ! दिन में काला बंदर और विकास दोनों जाने कहाँ छुप जाते थे ! संगम विहार की जनता ने हर पार्टी को मौक़ा दिया और सभी ने ' भरपूर' विकास किया,   पर यहाँ की जनता का दुर्भाग्य देखिये कि विकास उसके दरवाज़े तक नहीं पहुंचा ! ससुरा 'विकास' 'विधायक' के ऑफिस में आकर  पसर  जाता था !
       2015 की "झाड़ू क्रांति" के बाद संगम विहार के आम आदमी को पूरी उम्मीद थी कि - दुख भरे दिन बीते रे भैय्या- अब सुख आयो रे,,,! किन्तु पानी का संकट अभी भी बना हुआ था ! पार्टी सुप्रीमो ने संगम विहार की जनता का जल संकट देख कर वहाँ के विधायक को ही दिल्ली जल बोर्ड का मुखिया बना दिया, पर लगता था पानी ही संगम विहार आने को राजी नहीं था ! विधायक ' स्वर्ग'  (सोनिया विहार) से गंगा का पानी संगम विहार लाना चाहते हैं पर-' पानी है कि मानता नहीं-! बाद में बड़ी अनुनय विनय के बाद जब सोनिया विहार में गंगा का पानी घुसा तो उसने शर्त रख दिया,- मैं सदियों से पापियों को "तारने" में लगी हूँ,  पहले मैं यहां के पापियों को "तारने" का काम करूँगी !
सुना है यहां पर पानी माफ़िया बहुत हैं ! पहले उनके काम आती हूँ  ! और रही यहाँ की गरीब जनता,  तो उसके पास पानी तक तो है नहीं , मेरे धोने लायक पाप कहां से  लायेगी ! ऐसी निष्पाप जनता मेरे किस काम की -'! बस तभी से जनता टैंकर की 'नाभि का अमृत'  ग्रहण कर रही है और गंगा ने अपने पानी को पापियों के "कल्याण" में लगा दिया है-!
       "आप" की महिमा न्यारी, एक बार टिकट दे दिया तो उम्मीदवार को बदलने का जोखिम कौन उठाए ! इसी सोच ने सियासत में चारण पैदा कर दिया ! वर्तमान विधायक ने जगह जगह क्षेत्र में बोर करवा के पानी की कमी का आँशिक  समाधान तो किया है किन्तु अगस्त से दिसंबर तक ही इन बोरबेल में वाटर लेवल कारगर होता है! उसके बाद गर्मी के 6 महीने प्यासी जनता नारा लगाती हैं,,,,
संगम विहार की करूँण कहानी !
टंकी  खाली  -  सड़क  पे  पानी !!
      समझ में नहीं आता कि संगम विहार के लोगों को टैंकर से कब छुटकारा मिलेगा, कब उनके घर के  नलों में पानी आएगा? 
     संगम विहार में पानी की विकट समस्या है और खुद "पानी"भी एक बड़ी समस्या है , छत पर रखी टंकी खाली है और सड़क पर पानी की कोई कमी नहीं ! नाली की गंदगी बीमारी पैदा करती है! सीवर व्यवस्था इतनी अलौकिक है कि बारिस के दिनों में संगम विहार की लड़कों पर नदी बहने लगती  है, - ' शर्म उनको मगर नहीं आती-' ! विकास अभी विलुप्त है,  परंतु जैसे जैसे विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहा है, अप्रवासी 'तारणहार' विकास की वैतरनी लेकर क्षेत्र में आने लगे हैं !
             आज बारिश हुई है और मैं संगम विहार आया हुआ हूँ ! पीपल चौक पर खड़ा हूँ ! नेताओं  के आंख के अलावा हर जगह पानी नज़र आ रहा है ! दूर दूर तक सड़क पर पानी बह रहा है ! बारिश और  नाली का पानी एक होकर- मिले सुर मेरा तुम्हारा- याद दिला रहा है ! हमदर्द तक जाने के आटो वाला 15 रुपये की जगह मुझसे 25 रुपये मांग रहा है ! ( दस रुपया पानी में आटो चलाने के!)  पानी की इस आपदा ने जाने कितने लोगों को आत्मनिर्भर होने का अवसर दिया है !

आज की 'आपदा'  में आटो वाला मुझे भी 'अवसर' समझ रहा है !
                        Sultan bharti (journalist) 





Sunday, 4 August 2024

सेवा में,                         date 01. 08. 2024
आयुक्त महोदया 
केन्द्रीय Vidyalay संगठन 
18, संस्थागत क्षेत्र- शहीद जीत सिंह मार्ग   नई       दिल्ली 

सन्दर्भ-- मेरी अध्यापिका पत्नी के ट्रांसफर के                    सम्बंध में आवेदन पत्र!
महोदया ,
          पुनर्विचार हेतु मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि,,,,,,,
     मेरी  पत्नी महनाज़ ( आर्ट टीचर) दक्षिणी दिल्ली के वायुसेना बाद केंद्रीय Vidyalay में  नियुक्त  थी, विगत वर्ष उसका तबादला दिल्ली संभाग से 'कराईकल' (Chennai संभाग) कर दिया गया ! [करईकल Chennai से भी 2500 किलो मीटर दूर है!)
इतने दुर्ग़म स्थान पर पोस्ट संभालने के बाद हमारे दिल्ली स्थित परिवार में तमाम समस्याएं टूट पडी हैं, एक बार सुन लें,,,!
1-  मेरी दोनों बेटियाँ दिल्ली में पढ़ रही हैं, और उनके subjects करईकल वाले केंद्रीय Vidyalay में नहीं है! 
2- मेरी माँ ( नईमाँ   ) की उम्र 82 वर्ष है और बहुधा वो बीमार रहती हैं! वो भी मेरी बेटियाँ की देखभाल नहीं कर सकती !
3- ग्यारह और चौदह वर्षीया मेरी दोनों बेटियो को खाना, Tiffin, स्कूल भेजना,लाना और खुद ड्यूटी पर जाना,,,,दिनों दिन बेहद मुश्किल और चुनौती पूर्ण होता जा रहा है!
4- मैं  खुद Rhumatide Arthritis से पीड़ित हूँ और दिल्ली के मशहूर हॉस्पिटल Apollo में दिखाने के बाद मेरा इलाज चल रहा है!
5- फ़िलहाल इस वक़्त मेरी सास [ Mother in law) आकर मेरे परिवार को संभाल रही हैं, मगर कब तक ! उनका अपना परिवार भी है!
     मैं बहुत परेशान और तनाव में हूँ ! इस तरह तो हमारा परिवार बिखर जाएगा ! इस उमर में जब कि बच्चों को  माँ की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है, उनकी माँ मजबूरन उनसे बहुत दूर  है,और मैं उनका बाप कुछ नहीं कर सकता !
    मानवीयता के नाते कृपया मेरी पत्नी की Posting "करईकल"  से हटा कर  दिल्ली संभाग के आस पास - गुरुग्राम ,Faridabad, नोएडा, Ghaziabad [हरियाणा औऱ यूपी] के किसी केंद्रीय Vidyalay में ट्रांसफर कर दिया जाये,  ताकि वो कम से कम हर हफ्ते अपने बच्चों और परिवार से मिल सके, और अपने शैक्षिक और पारिवारिक दोनों कर्तव्य का पालन कर सके !       हमारे परिवार के लिए यह  बहुत बड़ा उपकार होगा आपका , धन्यवाद !

                                प्रार्थी 

                          मुहम्मद आसिफ़
                          H/O.   -   महनाज़ 
              [ कर्मचारी   क्रo संख्या    49211 ]


Friday, 19 July 2024

(व्यंग्य चिंतन) 'आ' - से- 'अब्दुल का आम' !

                      व्यंग्य 'चिंतन '
        'आ' - से-  "अब्दुल का आम "

           अभी अभी लोकसभा चुनाव 2024 का परिणाम आया था , कहीं खुशी कहीं ग़म ! यूपी में ग़ज़ब भयो रामा जुलम भयो रे-! इसके लिए प्रशासन का सारा गुस्सा 'अब्दुल' के ऊपर है,  थोक में वोट विपक्ष को दे आया ! देखता हूँ अब तेरा  ठेला कौन बचाता है! यूपी सरकार ने फौरन हिटलिस्ट बनाने का आदेश दे दिया !  24 घंटे अब्दुल के लिए में चिंतित रहने वाले सलाहकार विचार विमर्श में लग गए ! एक ने अब तक हुए विकास की लिस्ट देखते हुए कहा, -'घर तो अवैध बता कर पहले ही तोड़ा जा चुका है '!
       'अब्दुल का लड़का जिस मदरसे में तालीम ले रहा था, उसे भी अवैध बताकर ताला लगा दिया है ! अब कौन सा विकास किया जाए ?'
     ' नौकरी कर रहा होता तो सस्पेंड करवाना आसान था ! ठेले का क्या करें ?' 
    ' कई बार तो जब्त कर चुके , अब अगर जब्त किया तो ठीया पक्का हो जाएगा-'!
   ' आम की पेटी में आर.डी.एक्स. बरामद कर लें तो लंबी सजा काटेगा-'!
   ' फॉर्मूला पुराना हो गया , कुछ और सोचो- !'
    बड़ी देर से चिंता में डूबे एक विचारक ने अब्दुल के स्थायी कल्याण का रास्ता सुझाया ,-' देश के बहुसंख्यक आबादी की गंगा जमुनी संस्कृति के प्रति प्रेम के कारण हमारा बड़ा नुकसान हुआ है ! दोनों समुदाय इतना घुलमिल कर रहते हैं कि अलग अलग पहचान ही मुश्किल है! इन्हें अलग अलग करने का एक तरीका है-!'
      " खुल कर बताओ गुरु !"
   " ज़्यादातर इनके ठेला,खोमचा ,पंचर, बिरयानी, फल जैसे छोटे कारोबार हैं! नियम लागू होना चाहिए कि दुकान के मालिक को दुकान पर बड़े बड़े अक्षरो में अपना नाम लिख कर रखना होगा ! बस- दूसरों के पंचर ठीक करने वाला अब्दुल का सारा धंधा पंचर हो जाएगा-"!
      " कैसे गुरु?"
   " 80 पर्सेन्ट अब्दुल न दाढ़ी रखते हैं न टोपी पहनते हैं ! ऊपर से दुकान का नाम बड़ा कंफ्यूजन वाला होता है, - 'पप्पू के मशहूर केले', 'मोनू बिरयानी वाला'  , 'कल्लू के चिकन पराठे, ' मुन्ना मछली वाला'- 'सोनू मसाले वाला  "मुन्नू  कैंचीवाला" इनमे अब्दुल कौन है,  ये पता ही नहीं चलता ! ऐसे लव जिहाद के चलते हमारा धर्म भ्रस्ट होता है ! जब असली नाम  लिखा होगा तो उनकी  दुकान  पर जाएगा कौन '!?
     ' हमारे लोग पता होने के बावजूद उनकी दुकान से सामान खरीदते हैं-'!
    'इसीलिए हम आजतक विश्वगुरु नहीं बन पाए ! लेकिन अब नाम लिखवाने से ये बाधा दूर हो जाएगी ! आने वाली कांवड़ यात्रा में इस प्रयोग को आजमा लेते हैं !"
    'फॉर्मूला तो बढ़िया है गुरु, लेकिन अपने लोगों को गंगा जमुनी इन्फेक्शन से निकालने के लिए तगड़ा जन जागरण करना होगा '! एक 'शुभचिंतक' ने राय दी!
       ' अभी वक़्त है,  मैं संगठन के महागुरु को बताता हूँ  ! जनहित के लिए कल्याणकारी इस योजना को प्रशासन तक पहुंचाने और लागू करवा ने का काम उनका है ! आप लोग धर्मनिरपेक्षता की अफीम चाट कर सोये अपने समाज को लगाने में लग जाओ -'!
       और फिर कुछ दिन बाद ये 'सर्व जन सुखाय' - 'सर्व जन हिताय'-वाली योजना घोषित हो गयी ! चारों तरफ से ततैया टूट पड़े ! 'जनहित' में- भूतो न भविष्यति- बताई जा रही इस कल्याणकारी योजना से सभी पार्टियों के लोग बौखला उठे ! सीधे सीधे सम्प्रदायवाद को हवा दे रहे इस तुगलकी फरमान में मेगा मीडिया के अलावा किसी को हीमोग्लोबिन बढ़ता या विकास होता नज़र नहीं आ रहा था ! चैनल पर डिबेट शुरू हो गया था और सोशल मीडिया पर समुद्र मंथन ! फ़ेसबुक वाल पर प्रचुर  मात्रा में ज्ञान गंगा उतरने लगी थी ! पक्ष विपक्ष में घमासान शर संधान शुरू हो गया ! इसके पक्ष में मीडिया मुगल कह रहे थे, -  "इस के लागू होने से सबका साथ सबका विकास योजना में बुलेट ट्रेन जैसी तेजी आएगी-'!
      " इससे सिर्फ साम्प्रदायिकता बढ़ेगी-"!
" पहचान के साथ धंधा करने में दिक्कत क्या है-'?
  " सतीश सब्बरवाल ( सबसे बड़े बीफ निर्यातक) को भी पहचान के साथ धंधा करना चाहिए-'!
    " खून देने वाले का नाम भी पैकेट पर क्यों नही लिखा जाता?"
   ' फल की दुकान पर बिकने वाले फल को उगाने वाले मालिक का नाम भी लिखा जाना चाहिए-'!
        " केंटुकी चिकन से आस्था को कोई खतरा नहीं,  बशर्ते  वहां  कोई मुस्लिम कर्मचारी न हो-'!
       शोध शुरू हो चुका था,  मीडिया के चिंतक,  सत्ता में बैठे नेता और समाज में बैठे चारण ये साबित करने में एडी चोटी का जोर लगा रहे थे कि इसी कामधेनु योजना  से विकास का मानसून आएगा ! जनता इस विकास परियोजना से दूर खड़ी दिल्ली के आकाश में बादल तलाश रही थी !
 और,,,,, नफ़रत के ग्रास रूट पर अब्दुल और आम  के बीच का फर्क खत्म होता नज़र रहा था !
        मगर 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल के 'विकास' वाली इस  "बहु आयामी" योजना पर पानी फ़ेर दिया ! सुप्रीम कोर्ट ने दुकान के बाहर प्रोडक्ट लिस्ट लगाने की अनिवार्यता जताई , नाम लिखने की ज़रूरत खारिज कर दी!
       आदेश आते ही, अब्दुल के 'समग्र विकास' के लिए दिन रात पसीना बहा रहे, कई योद्धा कोमा में चले गए !
                  [ सुल्तान 'भारती']



Monday, 8 July 2024

( एक सच्चाई) " काला लंगोट "!

[सत्य कथा] 
          'काला लंगोट'

             मेरा नाम अब्दुल मजीद है! इस प्रेम कहानी का नायक मैं ही हूँ !  मेरी उम्र तब 18 या 19 साल थी ! शायद हाई स्कूल का इन्तेहान हो चुका था और छुट्टियों चल रही थीं !  लेकिन मुझे पढ़ाई से ज्यादा कबड्डी, कुश्ती  ,अखाड़ा ,तालाब में दो तीन घंटे  नहाना,  दर्ज़नों दोस्तों के साथ गुल्ली डंडा खोलना और दबंगई दिखाने वाले को सबक सिखाना  ज्यादा पसंद था ! साथियों के लिए मैं उनका अघोषित मुखिया था ! 1972 या 73 का साल चल रहा था! उस दौर में अवध के गाँव में कुंवारों के लिए इश्क़ एक प्रतिबंधित विषय था !  हमें इकठ्ठा हंसी मजाक करते देख कर डाट कर भगा देना, विवाहित और बुजुर्गों का जन्मसिद्ध अधिकार था ! शादी से पहले इश्क़ करना तो समझो चरित्रहीनता जैसा गुनाह था !  इश्क और सेक्स हमारे लिए बड़ा सनसनी खेज और रहस्यमय विषय थे ! ये वो दौर था जब नौटंकी के लौंडे को लड़की का मेकअप करते हुए देखने के लिए युवा लौंडे स्टेज के पीछे बने मेकअप रूम के अंदर घुस जाते थे ! 
             उस दिन संडे था,  दोपहर के वक़्त अम्मा ने कहा कि बाजार से नमक और लाल मिर्च ले आऊं !  उस वक़्त दुकानदार नमक की बोरी दुकान के बाहर ही लगा कर रखते थे! (नमक के डले वाली इन् बोरियो पर अक्सर कुत्ते पेशाब करते नज़र आते थे !) दोनों चीज़ खरीद कर जब मैं बाजार से निकलने  ही  वाला था कि तभी  उस लड़की को पहली बार देखा  ! वो 14 या 15 साल की मध्यम कद और सांवले रंग की एक खूबसूरत लड़की थी ! उसके साथ एक पांच छह साल का लड़का उंगली पकड़ कर चल रहा था ! लड़की  के हाथ  में एक छोटा थैला था, और वो लगातार मुझे देखे जा रही थीं ! 
         बाजार से लगे हुए गाँव में मेरे कई ठाकुर और बनिया दोस्त थे,  मैंने घबरा कर चारों ओर देखा - कहीं कोई देखता नज़र नहीं आया ! मैं बाजार से निकल कर रोड की ओर बढ़ा,  वो  मुझसे लगभग 20 कदम आगे थी ! अचानक उसने पलट कर मुझे देखा और फिर आगे बढ़ गई ! मैं सोच में पड़ गया,  - कौन है ये लड़की ! क्या ये मुझे जानती है ! मुख्य सड़क पर आकर वो बाईं तरफ मुड़ गई थी ! वह रास्ता मेरे गावं के विपरीत दिशा को जाता था ! अब मैं धर्म संकट में पड़ गया !  थैला लेकर घर जाऊँ या लड़की के पीछे ! वो कुछ दूर जाकर रुक गई और पलट कर मुझे देखने लगी ! अचानक मेरे हाथ का थैला इतना वज़नदार लगा गोया मैंने उसमें पत्थर भर लिया हो ! लड़की अभी भी मुझे देख रही थी और मैं इधर उधर देख कर कंफर्म कर रहा था कि कोई मुझे तो नहीं देख रहा है ! आखिरकार मैंने दर्या - ए- आतिश में कूदने का फ़ैसला कर  लिया ! मुझे यह गलतफ़हमी होने में तनिक भी देर न लगी कि ज़रूर खूबसूरत लड़की मेरे ऊपर मर मिटी है ! 
      जहां लड़की खड़ी थी वहाँ से 50 ग़ज आगे मेरे जानकार मित्र रामकुमार गुप्ता के पान की गुमटी थी ! मैं  तेजी से आगे बढ़ा और सामान वाला थैला राम कुमार को देते हुए कहा,  -' लौट कर ले लूँगा,  एक बीड़ा पान लगा दो- स्पेशल वाला -'!
    ' उस्ताद ! तुम कब से पान खाने लगे' ?
        मैंने उसे घूरा तो वो अपने काम में लग गया! तभी लड़की अपने भाई के साथ मेरे सामने से गुजरी, इस बार मैंने उसे करीब से देखा ! उसकी आंख और नाक बहुत स्पेशल थी ! उसके पैरो में बहुत मामूली सैन्डल थी  !  सलवार सूट भी मामूली कपड़े का था ! अलबत्ता कुदरत ने लड़की को उम्र से पहले जवान कर दिया था ! मुझे देख कर वो बार बार अपना दुपट्टा ठीक कर रही थी ! राम कुमार ने पान लपेट कर मुझे पकड़ाया और मैं तेजी से आगे बढ़ा ! मैं जनता था कि गुप्ता की नज़र मुझ पर ही  होगी,  इसलिए वहां पर लड़की को पान पकड़ाना खतरे से खाली नहीं था ! लड़की के बगल से होकर निकलते हुए मैंने उसे सुनाते हुए कहा, -' आगे नहर के पास मिलता हूँ-!'
     " क्यों?" 
    मैं तो जैसे ज़मीन पर गिरा ! किसी अजनवी लड़की से बात करने का ये पहला प्रयोग ही पंचर हो रहा था,  फिर भी मैंने हिम्मत दिखाया, -' तुम्हारे लिए पान लाया हूँ-'!
      " अच्छा "! लड़की धीरे से बोली !
     मैं सूखते गले और धड़कते दिल के साथ आगे बढ़ गया  ! नहर 5 मिनट दूर थी और मैं सुखद कल्पना में गोते लगा रहा था ! मेरे 18 दोस्तों में मैं पहला खुश नसीब था जिसे कोई लड़की मौन आमंत्रण दे रही थी ! मैं कल्पना कर रहा था कि कल जब दोस्तों को यह स्टोरी बताऊँगा तो सारे लोग किस तरह छाती पीटते नज़र आयेंगे ! लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी कि मैं लड़की से बात शुरू कैसे करूँ  !!
    नहर जैसे उड़ कर तुरंत करीब आ गई ! मुझे गुस्सा आया,  अभी तो मैं कुछ सोच ही नहीं पाया था ! लड़की भी दो मिनट बाद आ पहुंची ! मैं खड़ा रहा, लड़की बगैर मुझे देखे आगे जाने लगी ! एक बार तो मैंने तय किया कि मुझे वापस लौट जाना चाहिय ! तभी लड़की ने पीछे मुड़कर मुझे देखा !  इस बार तो उसने मुझे आने का इशारा भी किया ! मैं यंत्रवत चल पड़ा ! सड़क पर कभी-कभी लोग नज़र आ  जाते थे ! मैं तेजी से  उसकी ओर बढ़ा! कपड़े में उभरा हुआ उसका जिस्म किसी का भी ईमान खराब कर देने का तिलिस्म रखता था ! जैसे ही मैं उसके  करीब  पहुंचा  वो  मेरी  तरफ  घूम  कर  बोली ,- ' तुम्हारा नाम मजीद है न?'
    " हाँ, मगर तुम कौन हो'?
        '  सबीना ! ये मेरा भाई है, - सईद ! बाजार में मेरे अब्बा कपड़ा सिलते हैं ! मैं रोज दोपहर को उनको खाना देने आती हूँ ! कल भी आऊंगी -'!
     आखिरी तीन शब्द मुझे संकेत दे रहे थे और आमंत्रण भी ! मैंने पूछ लिया, -' मगर तुम मुझे कैसे जानती हो-'?
      ' पिछले साल औघड़ बाबा के मेले में तुम ने मकनपुर के समद को पीटा था न ! फिर पुलिस तुम दोनों को पकड़ कर थाने ले गई थी !'
     ' हाँ,  वो साला मेले में घूम  रही एक लड़की को छेड़ रहा था ! इसी बात पर मैंने उसे पीट दिया था !'
    " वो रज्जो थी, मेरी सहेली ! उस दिन पहली बार मैंने तुम्हें देखा था ! मुझे तुम बहुत अच्छे लगे थे-! उस दिन के बाद मैं कई दिन तक तुम्हारे बारे में ही सोचती रही-'! 
         लेकिन मैं तो कुछ और ही सोच रहा था ! अगला गाँव 15 मिनट के फासले पर था और मैं इतनी जल्दी उससे अलग  होने  के  लिए  इतनी  दूर नहीं आया था ! सड़क के बाईं तरफ हरे भरे खेत शुरू हो गये थे ! बाजरे के खेतों में हाथी भी घुस जाए तो बाहर से नज़र न आए ! उधर वो  लगातार  बोले  जा  रही थी -' फिर मैंने तुम्हें कई महीने बाद बसंत पंचमी के रोज देखा,जब तुम अखाड़ा कूदने आए थे ! तुम्हारे साथ तुम्हारे बहुत सारे दोस्त थे जो जोर जोर से चिल्ला कर तुम्हें जोश दे रहे थे ! उस दिन तुमने काला लंगोट पहना हुआ था ! मैंने तो तुम्हें देखते ही तुम्हारी जीत के लिए रोज़ा रखने की मन्नत भी मांग ली थी-! और तुम जीत भी गए थे !"
     ' तुम्हारा गाँव कौन सा है-?' मैंने पूछा !
 " शेखपुर , अभी आधा घंटे दूर है !' 
       मैंने चैन की साँस ली, उस गाँव का रास्ता खेतों से होकर जाता था, और मुझे नहीं लगता था कि लड़की मेरी किसी बात को  मना करेगी ! पर एक डर भी था,  उसका छोटा भाई कहीं  खेल न बिगाड़ दे ! लड़की चुप होने को तैयार नहीं थी, -' तुम्हारे ऊपर काला रंग बहुत अच्छा लगता है! तुम वो काला लंगोट अभी भी पहनते हो-?'
     अचानक मुझे पान याद आया , निकाल कर लड़की को पकड़ते हुए कहा, -' ये तुम्हारे लिए है"!
      'इसमें कुछ मिलाया तो नहीं है! हमारी बड़ी बहन को एक बार एक लड़के ने पान खिला कर उसके साथ 'बुरा काम' किया था !' 
     ' कौन सा बुरा काम ?'
   ' शादी से पहले अगर लड़की और लड़का सुहाग रात मना लें तो वो बहुत ही बुरा काम है ! अम्मा कहती हैं कि शादी के बाद दूल्हा उस लड़की से प्यार नहीं करता '! 
     गाड़ी पटरी पर आते आते उतर रही थी ! मैंने थोड़ा गुस्से में कहा, -' सब बकवास है, भला इतने दिन बाद दूल्हे को कैसे पता चलेगा -'?
    'अम्मा कहती हैं कि सुहागरात को दूल्हे को सब पता चल जाता है-!' 
    जैसे गरम लोहे को अचानक पानी में डाल दिया गया हो, सारा परिश्रम व्यर्थ होता नज़र आया ! मैंने इस  सदमें  से  निकलने  की  आखिरी  कोशिश की, -' मैं नहीं मानता ! वैसे भी जब कोई किसी से प्यार करता है तो चाहने वाले को मना कैसे  कर  सकता है ! तुम्हारे प्यार में उलझ कर मैं तीन किलो मीटर पैदल चल कर यहां तक आ गया ! तो फिर ठीक  है, अब तुम अपने घर जाओ, मैं अपने घर जाता हूँ-!'
     मैं सड़क के किनारे एक पेड़ के नीचे रुक गया,  वो भी खड़ी हो गई! उसके चेहरे पर सन्नाटा और बड़ी बड़ी आँखों में उलझन और मायूसी साफ नज़र आ रही थी ! मैं जहां खड़ा था, मेरी बाईं तरफ से एक चकरोड सीधा उसके गाँव को जाता था ! रास्ते के दोनों तरफ नज़र आ रहे बाजरे के घने लंबे खेत अचानक मुझे चिढ़ाने लगे थे ! दो तीन मिनट की ख़ामोशी में जैसे कई साल समा गए थे !
   अचानक उस लड़की ने मेरे दोनों हाथ पकड़ कर धीरे से पूछाः-' क्या तुम भी मुझ से उतना प्यार करते हो, जितना मैं करती हूँ- '!
         मैं इस सवाल के लिए बिलकुल तैयार नहीं था ! वो  सीधे मेरी आँखों में झाँक रही थी ! वो मेरे साथ लगभग सट कर खड़ी थी ! पान खाकर उसके होंठ बिल्कुल दहक उठे थे! उसकी सांसो की खुशबू ने मुझे लगभग मदहोश  कर दिया था ! मैं मना करना चाहता था,  मगर मेरे मुँह से निकला-"हाँ "! 
    'चलो, मुझे थोड़ी दूर तक और छोड़ दो"- वो मुस्कराने लगी- ' यहां सड़क पर आते जाते लोग देख रहे हैँ '! 
   थोड़ी देर बाद हम बाजरे के घने खेतों के बीच से गुजरती पतली चकरोड से गुजर रहे थे ! दूर दूर तक सन्नाटा ! शायद  किस्मत मेरा साथ दे रही थी ! मैंने लड़की की कमर में हाथ डाल कर उसे अपने जिस्म के साथ सटाते हुए कहा,-' मैं तुम्हारे साथ अभी प्यार करना चाहता हूँ, बिलकुल असली सुहाग रात वाला प्यार-"!
    ' कहां !' उसकी मुस्कराहट उड़ गई!
             ' यहीं इसी बाजरा के खेत में'! 
      मैं बेकाबू होता जा रहा था,  ज़िंदगी में पहली बार किसी लड़की को अपने बाहों में भर कर खड़ा था ! अचानक मैंने उसे कमर के नीचे से पकड़ कर ऊपर उठा लिया तो उसका छोटा भाई देख कर हंसने लगा ! लड़की बोली, -' कहीं मेरे भाई ने अम्मा से बता दिया तो मुझे बड़ी मार पड़ेगी' !
     ' तो तुम मुझ से प्यार नहीं करती?"
   " बहुत करती हूँ, तुम्हें दुबारा देखने के  लिए रोज़े रखे थे "!
      मुझे उसके रोज़े या मुहब्बत में कोई इंट्रेस्ट नहीं था !  मेरे समूचे वज़ूद में जैसे गरम लावा दौड़ रहा था, -' अगर इतना प्यार है तो अब और न तड़पाओ, चलो, खेतकेअंदर ! -"
   मैं अभी भी उसे बाहों में उठाए खड़ा था ! लड़की ने मुस्करा कर कहा, -' कोई देख लेगा, अब नीचे उतार दो!'
         मैंने नीचे उतार दिया तो लड़की ने पहले पान थूका, फिर मुझे अपने बाहों में भर कर बोली,' सच  सच बताना मजीद ! क्या तुम बाद में मेरे साथ शादी कर लोगे ?'
इस सवाल के लिए मैं बिलकुल तैयार नहीं था ! ऐसा लगा गोया किसी ने मुझे बर्फ की सिल्ली पर लिटा दिया हो ! भला हमारे और सोहागरात के बीच में शादी का क्या काम ! लड़की कह रही थी,- 'तुमने पान दिया, मैंने खाने से पहले खोल कर भी नहीं देखा कि अंदर बेहोश करने की दवा है या ज़हर ! क्योंकि मैं तुम्हें प्यार करती हूँ ! तुम आग में कूदने को  कहोगे - कूद जाऊँगी -'!
  मुझे गुस्सा आ गया- "तो फिर प्यार करने में इतना नखरा क्यों कर रही हो "!
     हैरत थी, इस बार सबीना ने शादी का नाम ही नहीं लिया,  बल्कि मुझे बाहों में कसते हुए कहने लगी,- ' ठीक है,जो होगा देखा जाएगा,  मैं तुम्हें नाराज़ नहीं कर सकती ! एक बार क्या दस बार के लिए भी मना नहीं करूंगी ! अब तो गुस्सा थूक कर  मुस्करा दो "!
    मैंने मुस्कराते हुए उसे खींच कर सीने से लगा लिया, - ' शुक्रिया "! 
    " तुम्हारे होंठ लड़की की तरह लाल क्यूँ हैं?"
   " मैं कोई नशा नहीं करता, इसलिए ! सिर्फ तुम्हारे साथ प्यार करने का नशा है "!
       लड़की ने मेरे होंठों को चूमते हुए कहा ,-' कल दोपहर को अब्बा को खाना देने अकेले  आऊंगी ! तुम वहीं आसपास रहना ! जब अब्बा खाना खा लेंगे तो मैं बाहर आकर इशारा करूगी, तुम मेरे से पहले आकर इसी बाज़रे के खेत में मेरा इन्तेज़ार करना "!
     " मैं आ जाऊँगा, पर आज क्यों नही?"
 " लगता है कि जुनून में तुम्हें मेरा भाई भी नहीं नज़र आ रहा ! अभी तो हम उसकी आंखों के सामने हैं तो कोई बात नहीं, लेकिन जब हम खेत के अंदर जाकर सुहागरात वाला   प्यार करेंगे तो उसे क्या क़ह कर खेत के बाहर खड़ा करेंगे! उसने खेत में आकर देख लिया तो,,,! मेरे बाप तो काट कर मुझे  नहर में डाल देंगे-'! 
     मैं उसके होंठों को चूमना चाहता था , लेकिन किस करने की बजाय उसे छोड़ते हुए कहा, -' ठीक है, अब तुम जाओ ! कल इसी खेत में मिलेंगे ! तुम कहो तो आज रात मैं इसी खेत में सो जाऊँ!"
     लड़की ने मुझे हैरत से देखा, फिर बाहों में भर लिया, - 'मैंने तुमसे मिलने की दुआ माँगी थी ,रोज़े रखे तभी तुम मिले ! मैं फिर रोज़े रख कर दुआ मांगूंगी कि तुम ज़िंदगी में हमेशा आगे रहो,  अखाड़े की तरह !'
     मैं मुस्कराया -" अच्छा !" 
" कल  वही काला लंगोट पहन कर आना जिसे पहन कर तुम अखाड़ा कूदने आए थे ! बहुत अच्छे लगते हो काले लंगोट में-'!
    मैं घबरा गया,-" मैं  लंगोट पहन कर इतनी दूर कैसे आऊंगा?"
        सबीना खिलखिला कर हंसी, -" मेरा मतलब पाजामा के नीचे लंगोट पहन कर आना-!" 
     " ठीक है, पहन कर आऊंगा!'
      " सलाम वालेकुम, कल मिलेंगे "!
                   और,,,,,,,, वो चली गई !
    वो रात अंगारों पर कटी ! अगले दिन दोपहर को बाजार गया तो  देख कर धक्का सा लगा,  सिलाई करने वाले की दुकान बंद थी ! पूछने पर पता चला कि सबीना का बाप आज आया ही नहीं ! मेरा माथा ठनका ! मैं लगभग भागता हुआ दो किलो मीटर दूर बाजरे के खेत में पहुंचा ! तीन घंटे अंदर बिता कर मायूस होकर बाहर आया ! पास के एक ऊंचे दरख्त पर चढ़ कर सूरज डूबने तक शेखपुर गाँव की ओर ही देखता रहा ! अब मेरे दिल में उसे पाने की नहीं बस उसे देखने की चाहत थी ! मैं उसे किसी मुसीबत में नहीं देखना चाहता था, और दिल बार बार कह रहा था कि सबीना मुसीबत में है ! उस दिन मैं 9 बजे रात को घर लौटा था ! 
          एक हफ्ता जैसे सजा काटते हुए बीता !
     एक हफ्ते बाद सिलाई की दुकान खुली, मगर दोपहर में खाना लेकर एक औरत आई ! उसकी शक़्ल देखते ही मैं समझ गया कि वो सबीना की माँ है ! या मौला ! सबीना कहां है !  मैं दोस्तों का दर्द तो बांट लेता था,  पर अपना बढ़ता हुआ नासूर किसी दोस्त को बताया भी नहीं ! 04 महीने निकल गए, एक बार फिर सिलाई की दुकान दस दिन तक बंद रही ! मैं कॉलेज जाने लगा था, पर पढ़ाई में मन नही लगता था ! दोस्तों में अजनबी की तरह बैठने लगा ! मेरी चाहत घुन बनकर मुझे खाने लगी थी ! 
    एक दिन मैंने अपने अजीज दोस्त आरिफ को सारी बात बता दी ! उसने मुझे जम कर फटकार लगाई,-' आज छह महीने बाद बता रहे हो ! कोई बात नहीं, मैं अपनी अम्मा को उसके घर भेजता हूँ! मगर एक बात बताओ, अम्मा से क्या कहूँगा ?"
   मैंने सर झुकाते हुए कहा, -" मैं सबीना से शादी करना चाहता हूँ !"
   " तुम सैयद हो, वो गाँव तो पठानो का है ! तुम्हारे घर वाले राजी हों जाएँगे?"
  " मेरी मां मुझे बहुत चाहती हैं, मैं अपनी माँ को मना लूँगा-! और वैसे भी उसके अलावा मैं किसी किसी से शादी नहीं करूँगा-!'
   "वो लोग तो फौरन मान जायेंगे ! मेरे यार जैसा खूबसूरत दामाद कहां पायेगे !"
      पर मुझे क्या मालूम कि किस्मत के बुलंद सितारे  टूट चुके थे ! आरिफ की माँ टीचर थी और सब लोग उनका सम्मान करते थे ! दो दिन बाद वो सबीना के माँ बाप से मिल कर लौटी तो मेरे लिए बहुत बुरी खबर लाई, -" बेटा ! बुरा मत मानना , गलती तुम्हारी है ! जिस दिन तुम सबीना से आखिरी बार मिले थे,  हमें तभी बता देते ! अब तो जो होना था वो हो गया-"! 
    मुझ में सुनने की भी ताब नहीं बची थी ! मैं एक गुनाहगार की तरह सर झुकाये बैठा था और वो बता रही थीं, -" उस दिन सबीना कई घंटे देरी से घर पहुंची तो मां को शक हुआ ! सबीना के छोटे भाई सईद ने पूछने पर जो कुछ बताया उस से पता चला कि लड़की किसी लड़के साथ बाजार से यहां तक आई थी ! फिर घर वालों ने लड़की को खूब पीटा , मगर उसने तुम्हारा नाम नहीं बताया ! सबीना के बाप ने भागदौड़ कर चार महीने के अंदर ही  उसकी शादी अपने साले के लड़के रफीक से कर दिया ! आजकल लड़की लड़का अहमदआबाद में हैं! सबीना की माँ ने बताया कि शादी के बाद तो लड़के की किस्मत ही पलट गई है, रफीक खूब कमा रहा है! वहाँ अपना घर खरीद लिया है-! गाँव में भी पक्का घर बनवा रहा है "!
       मेरी सारी उम्मीदें रेज़ा रेजा बिखर गई ! सारी बाजी हार चुका था ! सारे सपने टूट चुके थे ! बस मुझे ये खुशी थी कि सबीना अपने परिवार के लिए लकी साबित हुई ! मेरे दिल पर अपने आप को गुनाहगार समझने  का जो बोझ था, वो थोड़ी देर के लिए कम हो गया था ! मैंने तो प्यार की आड़ में  गुनाह करने का इरादा किया था,  लेकिन खुदा ने मुझे गुनाहगार होने और सबीना को बर्बाद होने से बचा लिया था ! पर हमारे उस मासूम पाकीजा इश्क़ का हस्र क्या हुआ जिसे सबीना के रोज़ा और दुआ ने परवान चढ़ाया था !

     लोग कहते हैं कि वक़्त सारे घाव भर देता है ! मैं पढ़ाई में डूब गया ! पांच साल बाद मेरी भी शादी हो गई ! फिर मैं शहर आ गया,  नई ज़िंदगी में खुद को व्यस्त रखने में मशगूल हो गया ! स्वभाव के बिल्कुल विपरीत मैं अखबार में लिखने लगा ! फिर पत्रकार बना, और एक निहायत अजनबी शहर में  मैं बेहतरीन लेखक और कहानीकार बन गया ! आज बहुत सारे फ़ैन हैं मेरे ! आजकल किताब लिख रहा हूँ ! दोस्त कहते हैं कि मेरे शब्द में दर्द और दर्द में राहत के साथ तिलिस्म होता है ! मेरे आर्टिकल कमाल के होते हैँ ! मैं कैसे  बताऊँ कि एक गुनाहगार लड़के को मिली ये दौलत किसके रोज़े और  दुआओं की बदौलत है ! 
         वक़्त की परवाज में चालीस साल कांटें पर  निकल गए ,,,,!
     आज मैं 66 साल का हूँ, और गाँव आया हुआ हूँ !  ये वही महीना है ,जब खेतों में बाज़रा के पेड़ लहलहा रहे हैँ ! मैं लगभग हर साल इसी मौसम में  गाँव आता हूँ ! उम्र के साथ और भी बहुत कुछ बदल गया है! सड़क के किनारे पेड़ों की जगह मकान उग आए हैं ! शाम का  वक़्त है, हवा की सरगोशी मुझे लगातार आगे बढ़ने को प्रेरित कर रही थी ! मेरे कदम अपने आप उत्तर की ओर बढ़ रहे हैँ , जैसे आगे की चकरोड पर मुझे कोई ख़ज़ाना हासिल होना है ! आज भी  मैंने पैंट के नीचे काला लंगोट पहना हुआ है ! इसे मैंने 40 साल से संभाल कर रखा है ! अब  यादों के अलावा कुछ है भी तो नहीं  ! मैं अपलक सूनी पगडंडी में खो गया, जहाँ धीरे धीरे दो परिचित चेहरे उभर रहे थे ! काफी देर बाद पास के दरख्त पर बैठा मोर चीखा तो मैं यादों से बाहर आ गया ! सूरज अपनी सारी लाली समेट कर पश्चिम में दरख्तों के पीछे छुपने में लगा था !
        मैं वापस लौट पड़ा ! वैसे मेरा कोई इरादा नहीं कि मैं सबीना से मिल कर राख में  दबी चिंगारी कुरेदूँ ! बस मैं तो एक बार उसे दूर से देख कर खुशी खुशी इस बेहिस दुनियां को खैरबाद कह दूँगा !  
    दोस्तों ! आज भी मेरा मानना है कि अगर ये महज कहानी होती तो सबीना मुझे ज़रूर मिलती, मगर यह तो  सलीब पर चढ़ी किसी बदनसीब इंसान के पुरदर्द ज़िंदगी की कड़वी हक़ीक़त है !  और,,,, हक़ीक़त कभी किसी की मानवीय कल्पना और संवेदनाओं के हिसाब से रास्ते नहीं बदलती ! 
          अब तो खुदा से बस एक ही दुआ है,  - कि,,,,,,

हमारी रूह को तुम फिर से कैद-ए-जिस्म मत देना!
बड़ी  मुश्किल  से  काटी  है 'सज़ा ए ज़िंदगी'  मैंने !!

              ( Sultan bharti)









     

Thursday, 4 July 2024

[बौछार] केजरीवाल संपत्ति का खुलासा करें

(सवालों के रुबरु)

" केजरीवाल के सभी विधायक और मंत्री अपनी संपत्ति का व्यौरा दें-!"  (रमेश विधूड़ी)

           ( वो मीडिया का सम्मान करते हैँ मगर अपने प्रचार के लिए कभी लालायीत नहीं दिखे! कडुआ सच बोलने के मामले में लाभ/ हानि की परवाह नहीं करते ! बनावटीपन से मीलों दूर रहने वाले भाजपा के प्रख्यात पूर्व सांसद रमेश विधूड़ी क्या सचमुच मुस्लिम विरोधी हैं, या जानबूझ कर उनकी छवि ऐसी बनाई गई ! 'उदय सर्वोदय पत्रिका के संपादक  सुलतान भारती की  रमेश विधूड़ी के साथ खास बातचीत-!)

S. B,,,     " दक्षिणी दिल्ली लोकसभा चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में आप गृहमंत्री जी के साथ मंच पर नजर आए थे,  उसका सकारात्मक नतीज़ा भी भाजपा उम्मीदवार को मिला! आजकल आपने अपने आपको कहां व्यस्त कर लिया है?"
R B,,,,, हमारी पार्टी में विचारधारा महत्व रखती है, व्यक्ति विशेष नहीं ! दो बार हमें मौक़ा मिला,  जनता ने मुझे जनादेश दिया! इस बार पार्टी ने मेरे बजाय किसी और को उम्मीदवार बनाया ! हमें दूसरी ज़िम्मेदारी दी गई है! चुनाव के दौरान मैं ,,,,,,
में दूसरे प्रदेशों में पार्टी उम्मीदवार को जिताने के लिए प्रचार में लगा रहा ! इस दौरान मैं पार्टी हाई कमान के आदेश पर उत्तर प्रदेश और हरियाणा के चुनाव प्रचार में लगा रहा-'!

SB,,,,'चुनाव हुआ, एनडीए की सरकार बनी,  चंद्र बाबू नायडू और नीतीश के समर्थन पर टिकी सरकार में स्थायित्व देख रहे हैँ-'?
RB,,,,' चल रही है और चलेगी,  बाकी मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखने पर कोई रोक नहीं है! चंद्र बाबू नायडू बहुमत के नेता हैं, उन्होंने वही निर्णय लिया है जो प्रदेश और जनहित में है! नीतीश जी  नें इंडिया गठबंधन को समर्थन करके देख लिया ! समर्थन देकर भी उन्हें अपमान मिला ! तभी उन्होंने कहा, - अब मैं कहीं नहीं जाने वाला-! दोनों पार्टियों के नेता पूरे समर्थन के साथ सरकार को सहयोग दे रहे है और एनडीए में किसी प्रकार का मतभेद या मनभेद नहीं है-'! 

SB,,,,- ' केंद्रीय राजनीति से हम दिल्ली प्रदेश की ओर आते हैं, - जब से केजरीवाल सत्ता में आए हैं, आप हाथ पैर धोकर उनका विरोध करते आ रहे हैँ! क्या आम आदमी पार्टी में आपको कोई अच्छाई नहीं नज़र आती-?
RB,,,,,' हमारा विरोध मुद्दे पर आधारित है,  किसी व्यक्तिगत दुश्मनी थोड़ी है ! उनकी कथनी और करनी में ज़मीन आसमान का अंतर है, फिर चाहे वो फ्री अनाज का मामला हो या बिजली का! अनाज तो उन्हें केंद्र सरकार सस्ते दाम पर देती है '!

SB,,,,,' सरकारी स्कूल्स में पढ़ाई का स्तर और मोहल्ला क्लिनिक के बारे में क्या कहेंगे-'!
RB,,,,' शिक्षा और स्वास्थ्य में किए गए प्रयोग सिर्फ दावे तक रह गए! उनकी पोल दिल्ली वालों के सामने खुल चुकी है! मोहल्ला क्लिनिक में ज़रूरी दवाई होती नहीं! केजरीवाल जी के आवास,सुरक्षा,विज्ञापन का खर्चा उनके वादों से मेल क्यों नहीं खाता!  केजरीवाल जी अपने सभी विधायक और मंत्री की संपत्ति का व्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं करते-! पता तो चले कि पिछले दस साल में उनकी संपत्ति बीस गुना कैसे बढ़ गई ! वो संपत्ति का खुलासा कब करेंगे?'

SB,,,,,'  इसी बीस जून को आपके लोकसभा क्षेत्र में आने वाले संगम विहार में कुछ असामाजिक लोगों ने सौहार्द बिगाड़ने की ज़बरदस्त साज़िश रच डाली थी ! क्षेत्र के हिन्दू मुस्लिम और नेता तनाव को खत्म करने में लगे थे,  तभी बाहर के एक शख्स ने आकर यहां के पुलिस ऑफिसर के सामने बग़ैर किसी सबूत के एक सम्प्रदाय विशेष को दोषी करार देते हुए उनके सामुहिक नरसंहार की धमकी भी दे डाली, इस विषय में आपका क्य़ा कहना है?'
            RB,,,,,,' इस तरह की धमकी कोई नहीं दे सकता,  देश में कानून है. ( फिर भी) ऐसा कोई कहता है तो उस पर FIR दर्ज होनी चाहिए ! इस तरह के माहौल खराब करने वाले लोग संगम विहार , दक्षिण पुरी, तुगलकआबाद बदरपुर आदि में नहीं हैं! ये लोग बाहर ( ओखला और ट्रांस जमुना) से यहाँ आते हैं! ज़रूरत इस बात की है कि यहां के रहने वालों को ऐसे लोगों पर नज़र रखने की ज़रूरत है! न उनके भड़काने में आयें न शरण दें ! ऐसे लोगों को शरण देने वाले भी अपराधी हैं! वर्ना दिल्ली दंगा जैसा ही नुकसान होगा-'!

         ( उदय सर्वोदय के मुख्य संपादक तबरेज खान का फोन लगातार बज रहा था,  उन्हें देर हो रही थी ! इंटरव्यू खत्म हो चुका था और हम संपादकीय कार्यालय की ओर लौट रहे थे ! एक सवाल खुद मुझे कचोट रहा था-'रमेश विधूड़ी न चाहते हुए भी हमेशा विवाद व चर्चा में क्यों बने होते हैँ ? शायद कडुआ सच बोलने के इस आदत के चलते उन्होंने खोया भी बहुत कुछ है! उनके लंबे संघर्ष और उपलब्धियां  एम के "राही" के एक शे'र से बाखूब समझ सकते हैं, - 
जिस्म  छिल जाता है पहचान नई पाने में !
इतना आसान नहीं 'मील का पत्थर' होना !!

( Sultan bharti)