Sunday, 14 January 2024

(शख्सियत) मुहम्मद यामीन खान

हिम्मत-ए-मर्दा मददे खुदा' इस मुहावरे से जिस शख्सियत की ज़िंदगी या कहें जीवन-संघर्ष को शब्दों में बाँधने की कोशिश कर रहा हूँ उसका नाम है यामीन खान। भावुकता, संघर्ष, सेवा और संकल्प ही है जिनकी पहचान। आजकल ये शिल्पकारों के शिल्पी माने जाते हैं, उनके बीच तो मसीहा ही समझे जाते हैं। यामीन के मुताबिक, उनकी ज़िंदगी की जंग जोश से भरे एक युवा होते 16 वर्षीय किशोर के रूप में देश की राजधानी दिल्ली से शुरू हुई। वह नवम्बर'84 की जलती हुई दिल्ली थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिखों के खिलाफ यामीन की मानें तो खासकर सिखों के खिलाफ एक उन्माद दिल्ली की सड़कों पर सैलाब की तरह उमड़ रहा था। शायद एक खास कौम के बरख़िलाफ़ उठे सत्तादल के भटके युवाओं के उन्माद की वजह यह थी कि इंदिरा को उन्हीं के आवास के गेट पर गोलियों से भूनकर शहीद करने वाले उनके अपने ही अंगरक्षक सिख थे। फिर क्या था, कुछ ही घण्टों के बाद उस वक्त के अंध-जोशीले कांग्रेसी और इसीतरह के और नौजवान शिखों के घर जलाने, उन्हें मारने-काटने, घर जलाने में मुब्तिला हो गये, उस सनक में उन्हें बूढ़े, बच्चे, महिला, जवान में कोई फर्क नहीं दिख रहा था (भले ही बाद में पछतावा हुआ हो)। अपने दिल-दिमाग से ज्यादा जोश और दोस्त(जो उनके मुताबिक उस समय के आरएसएस के लोग थे) को सही समझने वाले आम  लड़कों की तरह जोश में होश खो देने वाली उस भीड़ में यामीन भी शामिल हो गये। लेकिन एक अनाथ सरदारनी जो उन (इंदिरा के) हत्यारों को बराबर गालियां और श्राप दे रही थी, उसकी बातें सुनकर यामीन की इन्सानियत जाग गई। अचानक उस सादा दिल जवान के ज़मीर को झटका लगा कि 'आखिर इन बेकसूर लोगों को किसी एक की गलती की सज़ा ये उन्मादी युवा क्यों दे रहे हैं, और बिना कान देखे कौए को खदेड़ने वालों की तरह हम भी इनमें जोश में शामिल हो गये हैं।' इन्सानियत जागते ही वहशीपन भागता नज़र आया। अब यामीन इन निर्दोष लोगों के साथ खड़े थे। –शायद उन्हें उस वक्त प्राइमरी की किताबों में पढ़ी सिद्धार्थ (गौतम) की कथा में कही  ' मारने वाले से बचाने वाला बड़ा (महान) होता है '–बात का मर्म समझ में आ गया। मानो हृदयपरिवर्तन हो गया हो। न केवल कई लोगों / परिवारों को बचाया, बल्कि हिम्मत-साहस, जज्बे के साथ युवा सिखों के जत्थे तलवारें लेकर निकले तो यह खुद उस हिंसक भीड़ का सामना करने के लिए सीना तानकर खड़े हो गए। पुलिस की मंशा के विपरीत सिखों के बचाव में भीड़ पर यथाशक्ति हमलावर होने की वजह से पुलिस के डंडे खाए, हवालात तक पहुंचे। उनके एक खास करीबी की मानें तो, 'हवालात का दरवाज़ा अन्य 'पुलिसिया आरोपों' की वजह से भी देखने का 'सु-अवसर' प्राप्त हुआ। हालांकि वे खुद इस सवाल को 'बचपना' कहकर टाल देते हैं, लेकिन समझने की कोशिश करें तो जवाब मिल ही जाता है। 
खैर, उनसे हुई बातचीत के मुताबिक, 84 के दंगे से उपजे जनसेवा के भाव ने उनकी जिंदगी बदल दी। उसे  इंसानियत की राह पर चलने का मुकद्दस मकसद दे दिया। कुदरती होनी में विश्वास करने वाले, खुर्जा (अलीगढ़) के  बरका गाँव में जन्मे, बचपन बिताए यामीन खान के समाजी जिंदगी की राह आसान की 1986 में उनकी शरीक-ए-हयात ने। बकौल खान, 'मैं इस बात के लिए उनका एहतराम करता हूँ कि वे बहुत डिमांडिंग लेडी नहीं रहीं, शुरुआती दौर में उनके त्याग, सन्तुलन और सन्तोष ने मुझे समाज सेवा के काम में आगे बढ़ने का हौसला दिया। जितना भी मिला उसी में घर और बच्चों की सलीके से परवरिश कर हमें उस तरफ़ से बे-फिक्र किया।'.. और वे चल पड़े ऐसे काम की तलाश में, जिसमें सेवा और दोनों हो...इस बीच करीब एक दशक तक उन्होने समाजसेवा के जुनून में लोगों, संस्थाओं से जुड़ते-टूटते रहे। कुछ गलत लोगों की संगत के बायस पुलिस के हत्थे चढ़े, तो अच्छे काम व बर्ताव के नाते अनेक सामाजिक और पत्रकार साथियों से मदद मिली। पत्रकारिता का क्रेज देखकर उधर हाथ भी आजमाया । एक वक्त आया, जब उन्हें लगा कि आजकल समाजसेवा की लम्बी पारी 'एकला चलो रे' की तर्ज़ पर खेलना 'बहुत कठिन है डगर पनघट की' जैसा है। बिना किसी संस्था के यह काम कर पाना आसान नहीं होता। 
     1998 में आते-आते वे 'समझदार' हो गये और 'अल फ़लाह' संस्था (NGO) बनाई। लेकिन कार्यप्रणाली और उससे सम्बन्धित दांव-पेच सीखने, जज़्बे को राह देने के लिए यामीन नगीना धामपुर संस्था से जुड़े। संस्था के साथ जुड़कर उन्होंने उस दौरान उड़ीसा व गुजरात में आये भीषण भूकम्प के हताहतों/पीड़ितों को राहत/सेवा प्रदान की। नगीना धामपुर, बिजनौर से जुड़कर उन्हें सेवा करने और काम जानने का मौका तो मिला ही, उनके प्रदर्शनी/ शिल्प बाजार में सहयोगी होने के नाते गरीब कल्याण और कारीगरी को प्रोत्साहित करने वाली सरकारी योजनाओं का भी ज्ञान हुआ। इसके लिए वे संस्था के साथ ही प्रेरणास्रोत और मददगार रहे महिला गरीब कल्याण योजना से जुड़े दिल्ली सरकार के तत्कालीन अधिकारी ए.के. हांडा का आभार जताते हैं ।फिर क्या था? फ़लाह हैंडीक्राफ्ट सोसायटी का बेड़ा चल पड़ा। कहते हैं किसी व्यक्ति के आगे बढ़ने और ऊचाईयां छूने के पीछे किसी औरत का हाथ होता है। यामीन इसे क़ुदरत खास करम मानते हैं कि खुदा ने उन्हें ऐसी दो औरतें बख्शी। दूसरी पत्नी उन्हें मीडिया से जुड़ाव के दौरान मिलीं। उन्हें भी पत्रकारिता का शौक था। शौक और साथ के नाते दोनों करीब आये और एक-दूजे के हो गये। अब वे समाजसेवा और व्यवसाय में खासा सहयोग करने लगीं। कारोबार परवान चढ़ने लगा।
इस सवाल पर कि समाजसेवा और कारोबार एक साथ कैसे साधते हैं?---यामीन खान इसे जेनुइन सवाल करार देते हुए बताते हैं कि जब वे सरकार की गरीब, दस्तकारी, महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं/कार्यों के बारे में गहराई से जान गये, तो दिल्ली और आसपास के गरीब रहवासियों, झुग्गी बस्तियों में जाकर ऎसे लोगों की तालाश की, जिनके पास हुनर तो है, लेकिन अपने उत्पादों को बढ़ाने के लिए पूंजी और बेचने के बाज़ार नहीं है। जब वे इस तरफ़ बढ़े तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। अबतक न केवल सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, ख़ासकर शिल्पकारी, हथकरघा, पॉटरी, कुम्हारी, सिलाई-कढ़ाई (इम्ब्रायडरी), खिलौने, अचार, पापड़, मुरब्बा, समान्य कपड़े बनाने वाले कामों से जुड़े विभाग व उपक्रमों से सहायता दिलाकर अपनी देखरेख और सम्बन्धित सरकारी के सक्षम/सक्रिय निर्देशन में पिछले एक-डेढ़ दशक में दिल्ली के संगम विहार, फरीदाबाद और आसपास के तीन हज़ार से अधिक परिवारों के रोजी-रोटी का जुगाड़ किया, बल्कि करीब दो दर्जन प्रदर्शनी/शिल्प बाजार लगवा कर उनके उत्पादों को बाजार दिया और घरेलू महिलाओं को बाहर निकलने का मौका और मंच दिया। जड़ी-बूटियों को जंगलों से खोजकर आम व खास का इलाज करने वाले पुश्तैनी वैद्यों को भी उन्होंने मदद, व्यापार और बाज़ार दिया। वे फ़लाह हैंडीक्राफ्ट सोसायटी, जिसके कि वे कोआर्डिनेटर हैं, के हस्तशिल्प के विकास सम्बन्धी कार्यों को आगे बढ़ाने में सबसे ज्यादा श्रेय 'सिडबी' को देते हैं। उनके मुताबिक, सुल्तान भारती (अध्यक्ष), पूनम शाक्य (जनरल सेक्रेटरी), सुनीता आदि मेम्बरान का सबसे बड़ा गाइडेंस और सहयोग मानते हैं। यामीन बताते हैं कि अब उन्होंने अपने बच्चों को भी स्वतंत्र होकर कार्य करने का मौका दे दिया है।
हाल ही में दिल्ली के द्वारका में आयोजित दस दिवसीय नेशनल गांधी शिल्प बाज़ार की सफलता और उत्पादों की रिकार्ड बिक्री से उत्साहित यामीन खान से जब पूछा कि एक तरफ़ देशी संस्कृति को बढ़ावा, दूसरी ओर फ़ैशन शो जैसे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की तरह फ़ैशन शो जैसे आइटम का इस्तेमाल करना, कितना उचित है? उन्होंने कहा, इसके पीछे भी घरेलू महिलाओं के भीतर की कला को उभारने के साथ ही अपने उत्पाद के प्रति आकर्षण बढ़ाना ही उद्देश्य है।
पूरे डेढ़ घंटे बाद जब मुहम्मद यामीन खान का साक्षात्कार ख़त्म हुआ तो अपनी मैग्ज़ीन ( उदय सर्वोदय) के ऑफिस की ओर लौटते हुए रह रह कर मेरे जेहन में अवध के शायर एम के "राही" का एक शे'र  गूंज रहा था-
कोई तन्हा मुसाफ़िर कारवाँ बन जाता है जिस दिन!
उसी  दिन  मुश्किलों  के  हौसले  भी  टूट  जाते हैं!!

                 (सत्य प्रकाश)


Friday, 5 January 2024

अफजल ka इंटरव्यू

शख्सियत 

" है राम के वज़ूद पर  हिन्दोस्तां को नाज़"
                                         अफजाल 
                 ( राष्ट्रीय संयोजक राष्ट्रीय मुस्लिम मंच)

         अगर आप भारतीय राजनीति से खुद को जरा भी अपडेट रखते हैं तो- मुस्लिम राष्ट्रीय मंच- से वाकिफ़ होंगे! 2006 में आरएसएस द्वारा गठित इस संघठन का मकसद था, देश के ज़्यादा से ज्यादा मुसलामानों को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ना ! इसके सूत्रधार हैं  इन्द्रेश कुमार जी और राष्ट्रीय संयोजक हैं अफजाल जी ! विनम्र और संघर्षशील अफजाल के सतत संघर्ष  का ही नतीज़ा है कि विपरीत विचारधारा और परिस्थितियों में भी उन्होंने संगठन को अंकुर से वृक्ष की शक़्ल में खड़ा कर दिया !
     ठीक 1 जनवरी 2024 की सुबह तयशुदा प्रोग्राम के तहत एक कार नोएडा की तरफ से कश्मीरी गेट ( पुरानी दिल्ली) की ओर बढ़ रही थी ! इस पर मेरे अलावा उदय सर्वोदय पत्रिका के चीफ़ एडीटर तबरेज खान और सह संपादक अजय चौहान बैठे हुए थे ! पत्रकार अजय सिंह- मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सुप्रीमो इन्द्रेश और संयोजक अफ़जाल के काफी क़रीबी हैं ! आधे घंटे बाद हम लोग अफ़जाल भाई के घर में मौजूद थे! वहाँ पर अफजल के अलावा मंच के राजस्थान प्रमुख दादू खान और महबूब खान के अलावा संघ के वरिष्ठ प्रचारक महिरध्वजसिंह भी मौजूद थे ! उन सब को  किसी प्रोग्राम में जाना था, इसलिए बग़ैर किसी औपचारिकता के मैंने अफ़जाल  भाई से सवाल दाग दिया,-  " सारे ही चैनलों पर- राम मंदिर- की ही चर्चा है ! क्या लगता है, इसके आगे सारे मुद्दे गौण हो  गए हैं-?"

     " नहीं ऐसा नहीं है, विकास के सारे काम भी चल रहे हैं ! राम मंदिर का मुद्दा कोई आज का नहीं बहुत पुराना है ! महापुरुष किसी एक वर्ग या संप्रदाय के नहीं  होते ! मर्यादापुरुषोत्तम राम के बारे में किसी शायर ने कहा है-

है  राम  के  वज़ूद  पर  हिन्दोस्तां  को नाज़ !
अहले नज़र समझते हैं उनको इमाम ए हिंद !!

अगर निजाम ए मुस्तफा का ज़िक्र होता है तो हमें अच्छा लगता है, उसी तरह रामराज का भी स्वागत होना चाहिए।  रामराज यानि सब के लिए इन्साफ़, सबका विकास !"
,,,,,,,,( सवाल)- ' जिस लक्ष्य को लेकर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना की गई, क्य़ा वो लक्ष्य पूरा हो गया है-?'
   ( जवाब) - '  हमनें वो ज़माना देखा जब दूसरी सरकारें थीं और आए दिन देश में दंगा होता था, कर्फ्यू लगा होता था! महीनो लोगों की मुलाकात नहीं हो पाती थी ! आज देश में वैसा कुछ नहीं है! हमारी कोशिश है कि मुस्लिम नजदीक आयें, समझें और गलतफ़हमी से मुक्त हो कर प्रगति और निर्माण में भागीदारी निभाएं ! हमारे मंच को इस दिशा में आश्चर्यजनक सफलता प्राप्त हो रही है"!

,,,,,,,(सवाल)-" राम मंदिर के बारे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सबको पता है, मैं उस पर नहीं जाऊँगा ! मेरा सवाल है कि काशी और मथुरा का मुद्दा भी उसी ढर्रे पर है, आपका क्य़ा कहना है-?"
(जवाब)----" इस विषय में जनमत और संप्रदायमत  अलग अलग हो सकते हैं, इसलिए निर्णायक फैसले के लिए कोर्ट होता है ! एक प्रजातांत्रिक व्यवस्था में संविधान ही तय करता है कि फ़ैसला क्या हो ! तो,,,,,मैं यही कहूंगा कि कोर्ट का जो भी फ़ैसला हो, दोनों पक्षों को स्वीकार्य होना चाहिए- "!

(सवाल),,,,,,   " देश की जनता के नाम क्या संदेश देना चाहेंगे ?"
 (जवाब),,,,;" देश में रहने वाले सभी हिन्दू औऱ मुसलामान को संविधान का पालन करना चाहिए ! संविधान का जो भी फ़ैसला हो, सबको स्वीकार्य होना चाहिए! देश का मुसलमान कहीं बाहर से नहीं आया है! राम किसी के लिए पूज्य हैं तो  किसी के लिए श्रद्धेय ! पूज्य और श्रद्धेय में कोई ख़ास फर्क नहीं है!"

(सवाल),,,," पूज्य और श्रद्धेय में बड़ा बारीक फर्क है,- चलिए, यहां पर - मुस्लिम राष्ट्रीय मंच- के सह संयोजक हाजी दादू खान जोइया हैं जो राजस्थान हाई कोर्ट में एडवोकेट हैं- आपसे मेरा सवाल है कि राम मंदिर बनवाने में आपके संगठन का कितना योगदान है "?
(जवाब),,,,," हमारे संगठन ने माननीय राष्ट्रपति जी को पत्र लिखकर राममंदिर बनाने के लिये अनुरोध किया ! देश के हिन्दू मुसलामानों से सम्पर्क कर इस विषय में आम सहमति बनाने का सघन प्रयास किया! राम मंदिर निर्माण में सहमति बनाने के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने भी  बढ़ चढ़ कर प्रयास किए हैं ! मंच का प्रमुख उद्देश्य है कि विवाद न हो और भाई चारा बना रहे -"!

(आखिरी सवाल),,,,," मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के एक और पदाधिकारी महबूब खान यहां पर हैं, जो राजस्थान के गंगा नगर से ज़िला संयोजक हैं ! महबूब खान जी, राम मंदिर निर्माण में मुसलामानों की क्य़ा रुख होना  चाहिए -"?
( जवाब),,,,; " मैं तो चाहता हूँ कि आपस में भाई चारा होना चाहिए और सभी हिंदू मुस्लिम भाइयों को मिल जुल कर  रहना चाहिए-"! 

     ( समाप्त)


Thursday, 21 December 2023

(व्यंग्य चिंतन) फ़िर भी, हैप्पी न्यू ईयर

(व्यंग्य चिंतन)

 फ़िर भी, हैप्पी न्यू ईयर 

          अभी नये साल के  "हैप्पी" होकर आने में कई दिन बक़ाया थे कि 24 दिसंबर को किसी ने दरवाज़ा खटखटाया! मैंने घबराकर  दरवाज़ा खोला तो सामने चौधरी खड़ा था ! मुझे लगभग एक तरफ धकेलते हुए मेरी बेड तक आया औऱ रज़ाई में घुसते हुए बोला, 'घनी ठंढ करवा दी तने ! इब खड़े खड़े के कर रहो,कुर्सी पै बैठ जा- वर्ना ठंढ लग ज्या  गी "!
         " पर  वो तो मेरी रज़ाई है "!
    " वसुधैव कुटुम्बकम  का पालन करने  की जगह रज़ाई के खातर जान दे रहो ! दूजी रज़ाई नो है तेरे धौरे ! कदी तू भी आत्मनिर्भर हो लिया कर !!'
      मैं अंदर से एक औऱ रज़ाई ले आया औऱ सोफ़े पर बैठता  हुआ बोला,- ' बड़ी जल्दी उठ गए !"
     " मैं तुझे चेतावनी देने आया हूं  अक् इस बार मोय - हैप्पी न्यू ईयर- मत कहना "!
      " क्यों "?
 " गए साड़ तूने हैप्पी न्यू ईयर कहा, - खरी, चोकर, भूसा,सबै महंगा हो गयो ! इस बार अपनी काड़ी जुबान पै कंट्रोल रखना ! कदी कोरोना न आ  ज्या दुबारा-"!
      " पर  बीमार तो मैं हुआ था ! तुम्हें तो  ज़ुकाम तक न हुआ -"!
    " नू लगे  अक् तमै भी किसी की हैप्पी न्यू ईयर  लग  गी। पूरे साड़  तुझे हैप्पी न देखा कती, फ़िर काहे का हैप्पी न्यू ईयर ! तूझे आगाह करने आया हूं अक् इस बार अपना हैप्पी अपने धौरे रखना "!
    " इतनी नाराज़गी ठीक नहीं, आखिरकार तू मेरा तीस साल पुराना दोस्त है, हम बने तुम बने इक दूजे के लिए-'!
     "पता नहीं वा कूण सा मनहूस दिन था जिब मैंने तेरे गैल दोस्ती करी, हैप्पी होण कू तरस गयो -'!
        " झूठ ! तीस साल पहले जब तुम आये तो तुम्हारे तबेले में सिर्फ ढाई भैंस थीं, दो भैंस औऱ एक उनका बच्चा ! आज अट्ठाइस भैंसों वाला एक आत्मनिर्भर तबेला है तुम्हारे पास " !!
    'परे कर तबेला ने, अर् नू बता अक यू 'पनौती' कूण सी चीज़ है?"
  " विपक्ष का मनोबल बढ़ाने वाला यह एक ऐसा 'कोरो वॉरियंट'  था, जो क्रिकेट विश्वकप के फाइनल में लॉन्च हुआ औऱ चार राज्यों मे हुए चुनाव परिणाम सुनने के बाद 'वीरगति' को प्राप्त हुआ-" !
    " मैं समझा  को न्या?"
   " पनौती का अर्थ कैसे समझाऊ , यूँ समझ लो कि कमज़ोर,रणछोड़ और सुखद कल्पना में जीने वालों की खोज का नाम है पनौती ! इसकी आड़ में वह अपनी नाकामी को कुछ समय के लिए छुपा लेते हैँ !"
       " पर मोय नू लगे अक् तू मेरी भैंसों के लिये पनौती है"!
          'क्या ऐसा किसी भैंस ने कहा ?'
 ' वो तो शराफत में  कुछ नहीं कहतीं, संस्कारी जो  ठहरी ! पर मैंने भाँप लिया "!
     " क्यूँ नहीं, भैंसों के साथ रहते थोड़ा संस्कार तो तुम्हारे अंदर भी आ गया है"!  
   अचानक चौधरी मुझे घूरता हुआ बोला,- ' इब थारे धौरे भी एकाध बूँद संस्कार बचा हो तो चाय मंगा ले!" 
    तभी मेरा युवा बेटा चाय नमकीन औऱ पकौड़ी लेकर आया और चौधरी को नमस्ते कर मेज पर रख दिया ! चौधरी बोला, -' जीता रह बेटा !' फिर मेरी तरफ घूर कर बोला,-" थोड़ा संस्कार इस बच्चे ते सीख ले भारती -"!
      25 दिसंबर की रात डेढ़ बजे फ़िर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया ! दरवाज़ा खोला तो सामने चौधरी की जगह सांता क्लॉज़ खडा था! उसकी हालत देख कर लगता था कि भागता हुआ आ रहा है ! पैंट नुचा हुआ था, एक तरफ की दाढ़ी लटक रही थी , मैंने पूछा,- 'ये क्या हाल बना रखा है, कुछ लेते क्यों नहीं ?' 
     "पूरे चौदह इंजेक्शन लेना पड़ेगा, पर अभी तो कुत्ते पीछे पड़े हैं। मुझे दौड़ा दौड़ा कर काटा है!"
  " अंदर आ कर आराम से बैठो "!
   " रंग बिरंगे कपड़े देख कर कुत्ते नाराज़ हो गए घाव को डेटॉल से धोना पड़ेगा ! जाने उनको नए साल से क्या दुश्मनी है !" 
         ' नये साल से ? '
    " हाँ , इधर से गुजरते देख एक कुत्ते ने भौंक कर मुझे देखा, मैंने उसे हैप्पी न्यू ईयर कह दिया ! गुस्से में वो मेरे पीछे दौड़ पड़ा ! उसके पीछे आधा दर्जन और कुत्ते थे ! शायद वो इलाके का मुखिया था  !"
    बाहर ठंढ और घात में बैठे कुत्ते दोनों थे, सांता वहीं सो गया ! सांता क्लॉज़ जब खर्राटे ले रहा था तो चौधरी ने रज़ाई में छुपा कर रखी बोतल निकाल लिया ! वो 31 तारीख तक और इन्तेज़ार नहीं कर सकता था !  न्यू ईयर के ख़ातिर  उसने 4 दिन पहले ही 2 बोतल 'हैप्पी' का इन्तेजाम कर लिया था ! फ़िर हैप्पी होने में देरी क्यों !!

             हैप्पी न्यू ईयर,,,,, रस्म दुनियां भी मौक़ा भी है- दस्तूर भी है ! और,,,, वैसे भी  जनवरी 2024 को 24  कैरेट 'हैप्पी' करने के लिए सरकार युध्दस्तर पर लगी हुई है ! इस साल को हैप्पी होने से कोई नहीं रोक सकता ! राम मंदिर बनकर तैयार है । सारे चैनल  हैप्पी होकर गा रहे हैं,- "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो"-! कुछ मनहूस लोग इसके बाद भी विकास का रोना रो रहे हैं,- ' अबहूं न  आए बालमा सावन बीता जाये-'! नए साल को  सामने देख  विपक्ष हैप्पी होने की जगह आहत होकर कोरस में गा रहा है,- 'जाने कहाँ गए वो दिन,,,,'! 
    जिनकी कुंडली में  'बनवास' पसरा पड़ा हो, उनके लिए  'न्यू ईयर' भला "हैप्पी" कैसे हो सकता है ! ख़ैर,,, एक शे'र मुलाहिजा हो,,,,

झोपड़ी से महल तक आकाश से धरती तलक !
नफ़रतों  का खात्मा हो,  प्यार  जिन्दाबाद हो !!

           Sultan bharti 
             (Journalist)
      


     
     

Friday, 15 December 2023

दिल्ली के द्वारका में हस्तशिल्पियों का महाकुंभ

दिल्ली के द्वारका में हस्तशिल्पियों का महाकुंभ 

        देश  की जानी मानी गैर सरकारी संस्था "फलाह" द्वारा आयोजित  Craft मेला अभी चार दिन पहले खत्म हुआ है ! वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से 8 दिसंबर से 17 दिसंबर 2023 तक चलने वाले इस शिल्प मेले में पूरे देश से हस्तशिल्पियों का आगमन हुआ ! द्वारका के सेक्टर 11 में आयोजित इस विशाल मेले में लगभग 300 हस्तशिल्पियों ने अपने स्टॉल लगाए ! इसमें कई स्टेट और नैशनल अवार्ड पा चुके हस्त शिल्पी भी आए हुए थे !
            10 दिन तक चलने वाले इस मेले में आने वाले हस्त शिल्पी और दर्शकों के मनोरंजन के लिए हर शाम मनोरंजन के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते रहे ! अंतिम तीन दिन तो गीत संगीत और नृत्य देखने वालों का तांता लगा रहा ! वैसे मनोरंजन के लिहाज से सबसे भव्य आयोजन " फैशन शो" का रहा, जिसमें लगभग देश विदेश की लगभग 80 माडल ने रैम्प पर जलवा बिखेरा!
          मिनिस्ट्री ऑफ textiles के सहयोग से इस तरह के मेले "फलाह" सोसाइटी पूरे देश में मेला आयोजित करती आई है ! एक संक्षिप्त मुलाकात में 'फलाह' के संचालक और जाने माने समाजसेवी  मुहम्मद यामीन खान ने  "राष्ट्रीय  विश्वास"  को बताया - "इस  तरह के मेले में हमारे देश की कला से लोग वाकिफ़ होते हैं ! हस्तशिल्पियों के बनाए माल को एक बड़ा बाजार और मुनाफा मिलता है ! सरकार उन्हें आकर्षक TA और DA भी देती है ! देश की जनता को इन मेलों में सही मायनों में एक "लघु भारत" का दर्शन होता है, और यही हमारे देश की विशेषता और खूबसूरती है "!

Saturday, 2 December 2023

सेवा,साहस और संकल्प-" रमेश बिधूड़ी"

(कवर स्टोरी)         रमेश बिधूड़ी ( भाजपा सांसद)
  सेवा, साहस और संकल्प की कहानी 

          अपने मित्र पत्रकार तबरेज खान के साथ मैं निर्धारित समय पर सुनपत पहुंच गया था! यह दक्षिणी दिल्ली के विश्व विख्यात मुहम्मद बिन तुगलक के एतिहासिक किले से लगा हुआ गाँव तुगलकआबाद  है! जब हम गांव में प्रवेश करते हैं तो विशाल किला हमारी बाईं तरफ नज़र आता है!  10 बजने में अभी 8 मिनट बाकी थे ! अंदर घुसते ही मेरा सामना 5 फीट 8 इंच लंबे एक खूबसूरत और कसरती युवक अनुज चौधरी से होता है ! मैं तबरेज के साथ अंदर के विशेष कमरे में बैठ जाता हूँ  ! अपनी अपनी समस्या लेकर आने वालो का तांता लगा है ! ये नज़ारा पिछले 30 सालों से  ऐसा ही है ! यहां पर हर दिन कोई न कोई चैनल वाले बैठे ही रहते हैं ! तीन दिन की लगातार कोशिश के बाद आज सांसद जी ने वक़्त दिया था ! दरअसल जनसेवा के आगे वो किसी भी चीज़ को कभी प्राथमिकता नहीं देते !
        एक घंटे लगातार जन शिकायतों के निवारण के बाद वो हाल में आकर कुर्सी पर बैठते ही बोलते हैं,- " भारती जी,  क्षेत्र में जाना है, पांच मिनट दे पाऊँगा बस-"!  और,,,, मैंने बगैर ताखीर के पहला सवाल दाग दिया----

     --- पांच राज्यों में मतदान और अब मतगणना का परिणाम आ गया!  इसका कितना असर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा-?
     " दोनों के मुद्दे अलग होते हैं! दिल्ली के चुनाव को  देख लीजिए! केजरीवाल की पार्टी अच्छे मार्जिन से  दिल्ली की सत्ता में है लेकिन लोकसभा चुनाव में दिल्ली के अंदर इनका खाता भी नहीं खुलता! स्टेट इलेक्शन और जनरल इलेक्शन में बड़ा फर्क होता।लोकसभा चुनाव में मोदी जी का चेहरा और उनके काम होते हैं, जिनसे देश की जनता दस साल से लाभान्वित हो रही है! विपक्ष के पास न ऐसा चेहरा है  न विकास का प्रमाण !और  शायद विकास की नीयत भी नहीं है "!

--- दिल्ली में केजरीवाल को चुनने वाली जनता लोक सभा में भाजपा को चुन लेती है! अब तो दिल्ली नगर निगम पर भी  "आप" का कब्जा है-?

   " आप को ये भी याद रखना चाहिए कि दिल्ली नगर निगम में लगातार  15 साल  भाजपा रही, कांग्रेस भी रही! अब अपने असंभव और झूठे वादों की बदौलत केजरीवाल की पार्टी बैठी है!  पांच सौ स्कूल बनाने का वादा किया, पचास भी नहीं बना पाए! जनता ने पहचान लिया है! झूठ बोलकर ज्यादा दिन तक जनता को बेवक़ूफ़ नहीं बना सकते-"!

-----' 2014 और  2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष विभाजित था,उनका कोई एक संयुक्त और सशक्त उम्मीदवार नहीं था ! मगर इस बार एनडीए के सामने 'इंडिया' का प्रत्याशी खड़ा मिलेगा! क्या ये एक मुश्किल चुनौती नहीं होगी-"?
       " देखिये, 2014 का आम चुनाव हो या 2019 का! मैं बिल्कुल स्पष्ट कर दूँ कि अगर जनता ने  पौने चार लाख वोटों से मुझे जिताया तो वो वोट जनता ने मोदी जी को दिया, उसमें रमेश बिधूड़ी की तारीफ़ नहीं है ! मोदी जी के नाम और काम का वही तिलिस्म इस बार भी घमंडिया गठबंधन पर बहुत भारी पड़ेगा! मोदी जी की कल्याणकारी योजनाएं हर सम्प्रदाय और व्यक्ति के लिए हैं! उनका लक्ष्य तुष्टिकरण नहीं विकास है ! ये बात अब मुसलामान भी समझ चुका है, इसलिए वो भी मोदी जी से जुड़ रहा है-"

-----' भाजपा का सबसे लोकप्रिय नारा है, सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास ! लेकिन जब चुनाव होता है तो उम्मीदवारों की सूची में मुसलमान का नाम नहीं होता - ये कैसा विश्वास है?"
     " ऐसा नहीं है, पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में हम ने ओखला सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था, पता है उसका क्या हस्र हुआ ! जमानत भी नहीं बची! मुसलामान ही उस  मुसलामान का  सपोर्ट नहीं करता,  जिसे भाजपा ने टिकट देकर उतारा हो ! इसके बावजूद बीजेपी विकास के मामले में मुस्लिमों से कोई भेदभाव नहीं करती !राष्ट्रवादीऔर प्रबुद्ध मुस्लिम अब धीरे धीरे हमारी पार्टी में आ रहे हैं ! विश्वास की ताली दोनों हाथ से बजती है-"!

----' आने वाले लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए  का मुकाबला एक संगठित गठबंधन " इंडिया"के उम्मीदवार से होने वाला है, क्या कहेंगे-?"
       ( गंभीर होकर)- " उसे इन्डिया मत कहें ! सिर्फ कह देने से वो इन्डिया नहीं हो जाता ! रह गया उनके उम्मीदवार की बात, तो  चार राज्यों में हुए चुनाव परिणाम कल देख लेना! मैं जमीनी हकीकत देख कर आया हूँ! जनता ने आईना दिखा दिया है! वो इन्डिया नहीं घमंडिया गठबंधन है! जनता को बातों से कब तक बेवक़ूफ़ बताओगे"!

,,,,,'   'आप' का आरोप है कि केजरीवाल की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उनके नेताओ को जेल में डाला जा रहा है?'
  " गिरफतार लोगों के आरोप पत्र के साथ सबूतों की फेहरिश्त भी है! पार्टी की बात छोड़िए, जनता भी नहीं चाहती कि  उसके विकास का पैसा भ्रस्ट नेताओं की जेब में जाए ! जुर्म साबित होने के बाद भी मुज़रिम पर हाथ क्यों न डाला जाए! आखिर  पुलिस, 'ई डी',एसआईटी, सीबीआई जैसी एजेंसी किस लिए हैं ?  जैसी करनी वैसी भरनी- !'

,,,,,,' देश में  "विकसित भारत संकल्प यात्रा" चल रही है, जिसका समापन राम मंदिर के उद्धाटन के आसपास होगा ! जब इस तरह की यात्रा चलती है  तो कई बार संवेदनशील क्षेत्रों में तनाव फैल जाता है, अथवा  'मस्जिद से पथराव' के बाद दंगा हो जाता है! आखिर इस यात्रा से जनता को क्या हासिल होगा?' 
        " इसे यात्रा का नाम दिया गया है, लेकिन ये यात्रा नहीं है! ये  जनहित में शुरू की गई ज़न जागरण अभियान है! इस अभियान में जरूरत मंद लोगों की मुश्किलों को उनके दरवाज़े पहुंच कर हल किया जा रहा है, बजाय इसके कि जनता कार्यालयों के चक्कर काटे! सभी संबंधित अधिकारी  डीएम SDM आदि इलाके में आकर जनता की सेवा कर रहे हैं! उज्जवला योजना के लाभार्थी को मौके पर ही  गैस कनेक्शन मिल रहा है ! लोन वाले को लोन दिया जा रहा है,वहीं पर उसका आधार कार्ड बन रहा है! जीवन सुरक्षा के अंतर्गत बेटियों का बीमा हो रहा है, वहीं मौके पर ही श्रमिक कार्ड बन रहा है! ताकि जानकारी के अभाव में दर दर भटकती जनता को उसी के दरवाज़े सेवा दी जा सके -'!

,,,,,' अगले साल लोकसभा चुनाव है, एनडीए बनाम इंडिया! कैसा रहेगा रिजल्ट '?
      " 2014 में मोदी जी के नेतृत्व में 282 सीट आयी थी, 2019 में  303 सीट आई थी,इस 2024 में बार साढ़े तीन सौ से चार सौ सीट आएगी  ! लिख लीजिए, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली में विपक्षी गठबंधन को एक भी सीट नहीं मिलेगी "!

,,,,,,' आपके शुभचिंतकों और पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी से आपके दिनचर्या की जो जानकारी मिलती रही है, वो किसी को भी हैरत में डाल सकती है ! एक बजे के बाद सोना और सुबह चार बजे उठ जाना ! ऐसी कठिन रुटीन में पिछले तीस साल कैसे निकले ! बहुत कठिन है डगर पनघट की '?
    ( थोड़ी देर के लिए अतीत में खोने के बाद वो मुहं खोलते हैं -)  " जनसेवा खानदानी विरासत है हमारी ! कभी आजतक बच्चों के साथ दो दिन भी दिल्ली से बाहर नहीं बिताया ! फिर भी परिवार ने बहुत मॉरल सपोर्ट किया! जब हमारे नेता आदरणीय मोदी जी सारा वक़्त राष्ट्र सेवा में दे रहे हैं तो हमें भी सेवा के उसी पथ पर सतत चलते रहना है! अब तो इसी अग्निपथ पर  मुझे आनंद और संतुष्टि मिलती है-"!
    इंटरव्यू खत्म हो चुका था ! वो उठे और जनसेवा के नियमित कर्त्तव्य पथ पर चले गए! 
       दो गाड़ियां एमबी रोड की ओर बढ़ रही थीं, और,,,,मेरे दिमाग में रह रह कर एक शे'र गूंज रहा था,,,,,

कोई तन्हा मुसाफिर कारवाँ बन जाता है जिस दिन!
उसी  दिन  मुश्किलों  के  हौसले  भी  टूट  जाते हैं!!

           ( Sultan bharti journalist)




Wednesday, 1 November 2023

(व्यंग्य चिंतन) " फिर भी नेता मुस्कराता है"!

"व्यंग्य चिंतन "

'फिर भी,,, नेता मुस्कराता है'!

     आज सुबह ही सुबह टीवी पर न्यूज देखा , एक  महान नेता मुस्कराता हुआ हाथ हिला रहा था! मैंने समझा चुनाव जीता है, मगर न्यूज रीडर बता रहा था  कि सैकड़ों करोड़ रुपये के घोटाले में ई डी ने सम्मन जारी किया है,और जांच एजेंसी चाहती है कि  आरोपी जांच में सहयोग करे ! ( आरोपी भी "अपने खिलाफ जांच' में सहयोग करते हैं"- ये ज्ञान मुझे स्तब्ध कर रहा था ! )  एजेंसी की जांच शायद आरोपी के सहयोग के बगैर आत्मनिर्भर नहीं हो पा रही थी ! शायद इसीलिए नेता मुस्करा रहा था। 

       आम आदमी और खास आदमी में यही  तो फर्क है! जेल की कल्पना मात्र से आम आदमी के प्राण सूख जाते हैं! प्राणी मुस्कराने की जगह रुआँसा हो जाता है! लेकिन सत्ता का सूप पी रहा "खास" आदमी"  जेल  की कल्पना मात्र से मुस्कराने लगता है! जांच एजेंसी उसकी जांच से  पहले उससे विनम्र निवेदन करती है कि  वो जांच में सहयोग करे !  'जांच में सहयोग' बड़ा  बहुआयामी शब्द है ! किसी छोटे मोटे गरीब या कुपोषित चोर, गिरहकट अथवा झपटमार से जांच में  सहयोग की अपील नहीं की जाती,बल्कि कुछ ऐसे केस मे भी उसे नत्थी कर दिया जाता है कि चोर खुद से सवाल पूछने लगता है, - ' वो चोरी मैंने कब की थी! क्या मुझे नींद में चोरी करने की बीमारी है' ? पुलिस उससे जांच में सहयोग की बजाय "पिटने" में सहयोग की मांग करती है! छोटी चोरी पर ज्यादा पिटना बेचारे का मुकद्दर है!
        न्यूज चौधरी ने भी देखा था ! आरोपी नेता को मुस्कराते देख चौधरी भी हैरान था ! उसने अपनी  हैरत  मुझ  से शेयर की,- ' उरे कू सुन भारती !'
      ' जी भाई!' 
 " टीवी वाड़ा नेता कौ बारे में नू कह रहो अक वा पै घोटाले कौ इल्ज़ाम सै , पर नेता घबराने की बजाय मुस्कराता हुआ हाथ हिला रहो -!'
     ' तुम इतने हैरान क्यों हो?'
     " उसकू डर न लग रहो कदी !"
          " क्यों डरे ! वो कोई शरीफ आदमी है क्या जो थाना पुलिस से डर जाए ! अव्वल तो अभी जांच जारी है! अगर जांच में दोषी साबित भी हो  गये तो भी चिंता की कोई बात नहीं है-'!
   ' पुड़िस पकड़ लेगी '!
   '  पुलिस चोर , गिरहकट और  शरीफ को पकड़ने के लिए है, इतने बड़े चोर को पकड़ने के लिए उनकी 'आत्मा'  तैयार नहीं होती ! नीरव मोदी से लेकर विजय माल्या तक कोई गिरफतार हुआ ?'
      " मन्ने के  बेरा ?"
     " कोई नहीं पकड़ा गया !"
            ' लेकिन क्यूँ-''!
     " क्योंकि  वो चोर नहीं डॉन  हैं ! और  डॉन के बारे में अमिताभ बच्चन बोल चुके हैं,- डॉन की तलाश तो ग्यारह मुल्कों की पुलिस कर रही है-! पुलिस को डॉन की  सिर्फ तलाश करना होता है , गिरफ्तारी नहीं ! पुलिस  को अगर चोर की तलाश होती तो अब तक एक की  जगह  चार को पकड़ लेती ! चोर के मामले में "जांच" और  सहयोग की बाध्यता भी नहीं होती !"
        " कोई नू कह रहो  अक दारु में घोटाला हुआ है! तू बता भारती , 'सकल' ते यू नेता भला आदमी लग  रहो !"
       " शक़्ल देखकर अपराध नहीं तय होता, एक शे'र  है- भोले भाली सूरत वाले होते हैं 'सैयाद' भी' !
          " इतना बड़ा इल्ज़ाम लग लिया, अर नेता हंसता हुआ हाथ हिला रहो!"
          " एक आत्म निर्भर नेता की यही पहचान है! वो इल्ज़ाम को भी भुना लेता है! ट्रेजडी देखिए, उसी पार्टी के दो निहायत ईमानदार नेता जेल काट रहे हैं और मुखिया बाहर खड़ा मुस्करा रहा है, "खांसी" सर्दी  न  मलेरिया हुआ-!"
        " विपक्ष साथ खडा सै !"
 " इजराइल ने गाजा में हज़ारों नागरिक के अलावा चार हजार के करीब बच्चे मार दिए ! मगर अमेरिका सहित पूरा यूरोप उसके साथ खडा है! इससे क्या इजराइल के पाप धुल जाते हैं "!
      " पर  नू बता भारती ! नेता हंसा क्यों ?"
   "  पहले जनता भी हंस लेती थी, अब सिर्फ नेता ही विपरीत परिस्थितियों में हंस पाता है ! वो अपनी चतुराई और जनता के  भोलेपन पर हंसता है ! चौधरी समझा करो !"
   " चतुराई ! मैं समझा कोन्या ?"
 " जनता को ये समझाना कि परिवार की तंदुरूस्ती और खुशहाली के लिए 'मोहल्ला क्लिनिक' जरूरी है और  मोहल्ला क्लिनिक की खुशहाली के लिए दारू की दुकान ज़रूरी है,- रिंद के रिंद रहे हाथ से  जन्नत न गई-!'
          ' वर्मा  नु  कह रहा-अक् -दारू वाड़े ने पैसा देकर नेता कू फंसा दई -"! 
        " फंसाया होता तो वो ऐसे  न मुस्कराते ! उनकी मुस्कराहट बताती है जैसे उनका नाम घोटाले में नहीं, नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया हो- "!
            चौधरी का चेहरा बता रहा था कि वो अभी भी नेता की मुस्कराहट को लेकर चिंतित है!

              ( Sultan bharti journalist)