Thursday, 21 December 2023

(व्यंग्य चिंतन) फ़िर भी, हैप्पी न्यू ईयर

(व्यंग्य चिंतन)

 फ़िर भी, हैप्पी न्यू ईयर 

          अभी नये साल के  "हैप्पी" होकर आने में कई दिन बक़ाया थे कि 24 दिसंबर को किसी ने दरवाज़ा खटखटाया! मैंने घबराकर  दरवाज़ा खोला तो सामने चौधरी खड़ा था ! मुझे लगभग एक तरफ धकेलते हुए मेरी बेड तक आया औऱ रज़ाई में घुसते हुए बोला, 'घनी ठंढ करवा दी तने ! इब खड़े खड़े के कर रहो,कुर्सी पै बैठ जा- वर्ना ठंढ लग ज्या  गी "!
         " पर  वो तो मेरी रज़ाई है "!
    " वसुधैव कुटुम्बकम  का पालन करने  की जगह रज़ाई के खातर जान दे रहो ! दूजी रज़ाई नो है तेरे धौरे ! कदी तू भी आत्मनिर्भर हो लिया कर !!'
      मैं अंदर से एक औऱ रज़ाई ले आया औऱ सोफ़े पर बैठता  हुआ बोला,- ' बड़ी जल्दी उठ गए !"
     " मैं तुझे चेतावनी देने आया हूं  अक् इस बार मोय - हैप्पी न्यू ईयर- मत कहना "!
      " क्यों "?
 " गए साड़ तूने हैप्पी न्यू ईयर कहा, - खरी, चोकर, भूसा,सबै महंगा हो गयो ! इस बार अपनी काड़ी जुबान पै कंट्रोल रखना ! कदी कोरोना न आ  ज्या दुबारा-"!
      " पर  बीमार तो मैं हुआ था ! तुम्हें तो  ज़ुकाम तक न हुआ -"!
    " नू लगे  अक् तमै भी किसी की हैप्पी न्यू ईयर  लग  गी। पूरे साड़  तुझे हैप्पी न देखा कती, फ़िर काहे का हैप्पी न्यू ईयर ! तूझे आगाह करने आया हूं अक् इस बार अपना हैप्पी अपने धौरे रखना "!
    " इतनी नाराज़गी ठीक नहीं, आखिरकार तू मेरा तीस साल पुराना दोस्त है, हम बने तुम बने इक दूजे के लिए-'!
     "पता नहीं वा कूण सा मनहूस दिन था जिब मैंने तेरे गैल दोस्ती करी, हैप्पी होण कू तरस गयो -'!
        " झूठ ! तीस साल पहले जब तुम आये तो तुम्हारे तबेले में सिर्फ ढाई भैंस थीं, दो भैंस औऱ एक उनका बच्चा ! आज अट्ठाइस भैंसों वाला एक आत्मनिर्भर तबेला है तुम्हारे पास " !!
    'परे कर तबेला ने, अर् नू बता अक यू 'पनौती' कूण सी चीज़ है?"
  " विपक्ष का मनोबल बढ़ाने वाला यह एक ऐसा 'कोरो वॉरियंट'  था, जो क्रिकेट विश्वकप के फाइनल में लॉन्च हुआ औऱ चार राज्यों मे हुए चुनाव परिणाम सुनने के बाद 'वीरगति' को प्राप्त हुआ-" !
    " मैं समझा  को न्या?"
   " पनौती का अर्थ कैसे समझाऊ , यूँ समझ लो कि कमज़ोर,रणछोड़ और सुखद कल्पना में जीने वालों की खोज का नाम है पनौती ! इसकी आड़ में वह अपनी नाकामी को कुछ समय के लिए छुपा लेते हैँ !"
       " पर मोय नू लगे अक् तू मेरी भैंसों के लिये पनौती है"!
          'क्या ऐसा किसी भैंस ने कहा ?'
 ' वो तो शराफत में  कुछ नहीं कहतीं, संस्कारी जो  ठहरी ! पर मैंने भाँप लिया "!
     " क्यूँ नहीं, भैंसों के साथ रहते थोड़ा संस्कार तो तुम्हारे अंदर भी आ गया है"!  
   अचानक चौधरी मुझे घूरता हुआ बोला,- ' इब थारे धौरे भी एकाध बूँद संस्कार बचा हो तो चाय मंगा ले!" 
    तभी मेरा युवा बेटा चाय नमकीन औऱ पकौड़ी लेकर आया और चौधरी को नमस्ते कर मेज पर रख दिया ! चौधरी बोला, -' जीता रह बेटा !' फिर मेरी तरफ घूर कर बोला,-" थोड़ा संस्कार इस बच्चे ते सीख ले भारती -"!
      25 दिसंबर की रात डेढ़ बजे फ़िर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया ! दरवाज़ा खोला तो सामने चौधरी की जगह सांता क्लॉज़ खडा था! उसकी हालत देख कर लगता था कि भागता हुआ आ रहा है ! पैंट नुचा हुआ था, एक तरफ की दाढ़ी लटक रही थी , मैंने पूछा,- 'ये क्या हाल बना रखा है, कुछ लेते क्यों नहीं ?' 
     "पूरे चौदह इंजेक्शन लेना पड़ेगा, पर अभी तो कुत्ते पीछे पड़े हैं। मुझे दौड़ा दौड़ा कर काटा है!"
  " अंदर आ कर आराम से बैठो "!
   " रंग बिरंगे कपड़े देख कर कुत्ते नाराज़ हो गए घाव को डेटॉल से धोना पड़ेगा ! जाने उनको नए साल से क्या दुश्मनी है !" 
         ' नये साल से ? '
    " हाँ , इधर से गुजरते देख एक कुत्ते ने भौंक कर मुझे देखा, मैंने उसे हैप्पी न्यू ईयर कह दिया ! गुस्से में वो मेरे पीछे दौड़ पड़ा ! उसके पीछे आधा दर्जन और कुत्ते थे ! शायद वो इलाके का मुखिया था  !"
    बाहर ठंढ और घात में बैठे कुत्ते दोनों थे, सांता वहीं सो गया ! सांता क्लॉज़ जब खर्राटे ले रहा था तो चौधरी ने रज़ाई में छुपा कर रखी बोतल निकाल लिया ! वो 31 तारीख तक और इन्तेज़ार नहीं कर सकता था !  न्यू ईयर के ख़ातिर  उसने 4 दिन पहले ही 2 बोतल 'हैप्पी' का इन्तेजाम कर लिया था ! फ़िर हैप्पी होने में देरी क्यों !!

             हैप्पी न्यू ईयर,,,,, रस्म दुनियां भी मौक़ा भी है- दस्तूर भी है ! और,,,, वैसे भी  जनवरी 2024 को 24  कैरेट 'हैप्पी' करने के लिए सरकार युध्दस्तर पर लगी हुई है ! इस साल को हैप्पी होने से कोई नहीं रोक सकता ! राम मंदिर बनकर तैयार है । सारे चैनल  हैप्पी होकर गा रहे हैं,- "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो"-! कुछ मनहूस लोग इसके बाद भी विकास का रोना रो रहे हैं,- ' अबहूं न  आए बालमा सावन बीता जाये-'! नए साल को  सामने देख  विपक्ष हैप्पी होने की जगह आहत होकर कोरस में गा रहा है,- 'जाने कहाँ गए वो दिन,,,,'! 
    जिनकी कुंडली में  'बनवास' पसरा पड़ा हो, उनके लिए  'न्यू ईयर' भला "हैप्पी" कैसे हो सकता है ! ख़ैर,,, एक शे'र मुलाहिजा हो,,,,

झोपड़ी से महल तक आकाश से धरती तलक !
नफ़रतों  का खात्मा हो,  प्यार  जिन्दाबाद हो !!

           Sultan bharti 
             (Journalist)
      


     
     

Friday, 15 December 2023

दिल्ली के द्वारका में हस्तशिल्पियों का महाकुंभ

दिल्ली के द्वारका में हस्तशिल्पियों का महाकुंभ 

        देश  की जानी मानी गैर सरकारी संस्था "फलाह" द्वारा आयोजित  Craft मेला अभी चार दिन पहले खत्म हुआ है ! वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से 8 दिसंबर से 17 दिसंबर 2023 तक चलने वाले इस शिल्प मेले में पूरे देश से हस्तशिल्पियों का आगमन हुआ ! द्वारका के सेक्टर 11 में आयोजित इस विशाल मेले में लगभग 300 हस्तशिल्पियों ने अपने स्टॉल लगाए ! इसमें कई स्टेट और नैशनल अवार्ड पा चुके हस्त शिल्पी भी आए हुए थे !
            10 दिन तक चलने वाले इस मेले में आने वाले हस्त शिल्पी और दर्शकों के मनोरंजन के लिए हर शाम मनोरंजन के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते रहे ! अंतिम तीन दिन तो गीत संगीत और नृत्य देखने वालों का तांता लगा रहा ! वैसे मनोरंजन के लिहाज से सबसे भव्य आयोजन " फैशन शो" का रहा, जिसमें लगभग देश विदेश की लगभग 80 माडल ने रैम्प पर जलवा बिखेरा!
          मिनिस्ट्री ऑफ textiles के सहयोग से इस तरह के मेले "फलाह" सोसाइटी पूरे देश में मेला आयोजित करती आई है ! एक संक्षिप्त मुलाकात में 'फलाह' के संचालक और जाने माने समाजसेवी  मुहम्मद यामीन खान ने  "राष्ट्रीय  विश्वास"  को बताया - "इस  तरह के मेले में हमारे देश की कला से लोग वाकिफ़ होते हैं ! हस्तशिल्पियों के बनाए माल को एक बड़ा बाजार और मुनाफा मिलता है ! सरकार उन्हें आकर्षक TA और DA भी देती है ! देश की जनता को इन मेलों में सही मायनों में एक "लघु भारत" का दर्शन होता है, और यही हमारे देश की विशेषता और खूबसूरती है "!

Saturday, 2 December 2023

सेवा,साहस और संकल्प-" रमेश बिधूड़ी"

(कवर स्टोरी)         रमेश बिधूड़ी ( भाजपा सांसद)
  सेवा, साहस और संकल्प की कहानी 

          अपने मित्र पत्रकार तबरेज खान के साथ मैं निर्धारित समय पर सुनपत पहुंच गया था! यह दक्षिणी दिल्ली के विश्व विख्यात मुहम्मद बिन तुगलक के एतिहासिक किले से लगा हुआ गाँव तुगलकआबाद  है! जब हम गांव में प्रवेश करते हैं तो विशाल किला हमारी बाईं तरफ नज़र आता है!  10 बजने में अभी 8 मिनट बाकी थे ! अंदर घुसते ही मेरा सामना 5 फीट 8 इंच लंबे एक खूबसूरत और कसरती युवक अनुज चौधरी से होता है ! मैं तबरेज के साथ अंदर के विशेष कमरे में बैठ जाता हूँ  ! अपनी अपनी समस्या लेकर आने वालो का तांता लगा है ! ये नज़ारा पिछले 30 सालों से  ऐसा ही है ! यहां पर हर दिन कोई न कोई चैनल वाले बैठे ही रहते हैं ! तीन दिन की लगातार कोशिश के बाद आज सांसद जी ने वक़्त दिया था ! दरअसल जनसेवा के आगे वो किसी भी चीज़ को कभी प्राथमिकता नहीं देते !
        एक घंटे लगातार जन शिकायतों के निवारण के बाद वो हाल में आकर कुर्सी पर बैठते ही बोलते हैं,- " भारती जी,  क्षेत्र में जाना है, पांच मिनट दे पाऊँगा बस-"!  और,,,, मैंने बगैर ताखीर के पहला सवाल दाग दिया----

     --- पांच राज्यों में मतदान और अब मतगणना का परिणाम आ गया!  इसका कितना असर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा-?
     " दोनों के मुद्दे अलग होते हैं! दिल्ली के चुनाव को  देख लीजिए! केजरीवाल की पार्टी अच्छे मार्जिन से  दिल्ली की सत्ता में है लेकिन लोकसभा चुनाव में दिल्ली के अंदर इनका खाता भी नहीं खुलता! स्टेट इलेक्शन और जनरल इलेक्शन में बड़ा फर्क होता।लोकसभा चुनाव में मोदी जी का चेहरा और उनके काम होते हैं, जिनसे देश की जनता दस साल से लाभान्वित हो रही है! विपक्ष के पास न ऐसा चेहरा है  न विकास का प्रमाण !और  शायद विकास की नीयत भी नहीं है "!

--- दिल्ली में केजरीवाल को चुनने वाली जनता लोक सभा में भाजपा को चुन लेती है! अब तो दिल्ली नगर निगम पर भी  "आप" का कब्जा है-?

   " आप को ये भी याद रखना चाहिए कि दिल्ली नगर निगम में लगातार  15 साल  भाजपा रही, कांग्रेस भी रही! अब अपने असंभव और झूठे वादों की बदौलत केजरीवाल की पार्टी बैठी है!  पांच सौ स्कूल बनाने का वादा किया, पचास भी नहीं बना पाए! जनता ने पहचान लिया है! झूठ बोलकर ज्यादा दिन तक जनता को बेवक़ूफ़ नहीं बना सकते-"!

-----' 2014 और  2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष विभाजित था,उनका कोई एक संयुक्त और सशक्त उम्मीदवार नहीं था ! मगर इस बार एनडीए के सामने 'इंडिया' का प्रत्याशी खड़ा मिलेगा! क्या ये एक मुश्किल चुनौती नहीं होगी-"?
       " देखिये, 2014 का आम चुनाव हो या 2019 का! मैं बिल्कुल स्पष्ट कर दूँ कि अगर जनता ने  पौने चार लाख वोटों से मुझे जिताया तो वो वोट जनता ने मोदी जी को दिया, उसमें रमेश बिधूड़ी की तारीफ़ नहीं है ! मोदी जी के नाम और काम का वही तिलिस्म इस बार भी घमंडिया गठबंधन पर बहुत भारी पड़ेगा! मोदी जी की कल्याणकारी योजनाएं हर सम्प्रदाय और व्यक्ति के लिए हैं! उनका लक्ष्य तुष्टिकरण नहीं विकास है ! ये बात अब मुसलामान भी समझ चुका है, इसलिए वो भी मोदी जी से जुड़ रहा है-"

-----' भाजपा का सबसे लोकप्रिय नारा है, सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास ! लेकिन जब चुनाव होता है तो उम्मीदवारों की सूची में मुसलमान का नाम नहीं होता - ये कैसा विश्वास है?"
     " ऐसा नहीं है, पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव में हम ने ओखला सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था, पता है उसका क्या हस्र हुआ ! जमानत भी नहीं बची! मुसलामान ही उस  मुसलामान का  सपोर्ट नहीं करता,  जिसे भाजपा ने टिकट देकर उतारा हो ! इसके बावजूद बीजेपी विकास के मामले में मुस्लिमों से कोई भेदभाव नहीं करती !राष्ट्रवादीऔर प्रबुद्ध मुस्लिम अब धीरे धीरे हमारी पार्टी में आ रहे हैं ! विश्वास की ताली दोनों हाथ से बजती है-"!

----' आने वाले लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए  का मुकाबला एक संगठित गठबंधन " इंडिया"के उम्मीदवार से होने वाला है, क्या कहेंगे-?"
       ( गंभीर होकर)- " उसे इन्डिया मत कहें ! सिर्फ कह देने से वो इन्डिया नहीं हो जाता ! रह गया उनके उम्मीदवार की बात, तो  चार राज्यों में हुए चुनाव परिणाम कल देख लेना! मैं जमीनी हकीकत देख कर आया हूँ! जनता ने आईना दिखा दिया है! वो इन्डिया नहीं घमंडिया गठबंधन है! जनता को बातों से कब तक बेवक़ूफ़ बताओगे"!

,,,,,'   'आप' का आरोप है कि केजरीवाल की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उनके नेताओ को जेल में डाला जा रहा है?'
  " गिरफतार लोगों के आरोप पत्र के साथ सबूतों की फेहरिश्त भी है! पार्टी की बात छोड़िए, जनता भी नहीं चाहती कि  उसके विकास का पैसा भ्रस्ट नेताओं की जेब में जाए ! जुर्म साबित होने के बाद भी मुज़रिम पर हाथ क्यों न डाला जाए! आखिर  पुलिस, 'ई डी',एसआईटी, सीबीआई जैसी एजेंसी किस लिए हैं ?  जैसी करनी वैसी भरनी- !'

,,,,,,' देश में  "विकसित भारत संकल्प यात्रा" चल रही है, जिसका समापन राम मंदिर के उद्धाटन के आसपास होगा ! जब इस तरह की यात्रा चलती है  तो कई बार संवेदनशील क्षेत्रों में तनाव फैल जाता है, अथवा  'मस्जिद से पथराव' के बाद दंगा हो जाता है! आखिर इस यात्रा से जनता को क्या हासिल होगा?' 
        " इसे यात्रा का नाम दिया गया है, लेकिन ये यात्रा नहीं है! ये  जनहित में शुरू की गई ज़न जागरण अभियान है! इस अभियान में जरूरत मंद लोगों की मुश्किलों को उनके दरवाज़े पहुंच कर हल किया जा रहा है, बजाय इसके कि जनता कार्यालयों के चक्कर काटे! सभी संबंधित अधिकारी  डीएम SDM आदि इलाके में आकर जनता की सेवा कर रहे हैं! उज्जवला योजना के लाभार्थी को मौके पर ही  गैस कनेक्शन मिल रहा है ! लोन वाले को लोन दिया जा रहा है,वहीं पर उसका आधार कार्ड बन रहा है! जीवन सुरक्षा के अंतर्गत बेटियों का बीमा हो रहा है, वहीं मौके पर ही श्रमिक कार्ड बन रहा है! ताकि जानकारी के अभाव में दर दर भटकती जनता को उसी के दरवाज़े सेवा दी जा सके -'!

,,,,,' अगले साल लोकसभा चुनाव है, एनडीए बनाम इंडिया! कैसा रहेगा रिजल्ट '?
      " 2014 में मोदी जी के नेतृत्व में 282 सीट आयी थी, 2019 में  303 सीट आई थी,इस 2024 में बार साढ़े तीन सौ से चार सौ सीट आएगी  ! लिख लीजिए, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली में विपक्षी गठबंधन को एक भी सीट नहीं मिलेगी "!

,,,,,,' आपके शुभचिंतकों और पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी से आपके दिनचर्या की जो जानकारी मिलती रही है, वो किसी को भी हैरत में डाल सकती है ! एक बजे के बाद सोना और सुबह चार बजे उठ जाना ! ऐसी कठिन रुटीन में पिछले तीस साल कैसे निकले ! बहुत कठिन है डगर पनघट की '?
    ( थोड़ी देर के लिए अतीत में खोने के बाद वो मुहं खोलते हैं -)  " जनसेवा खानदानी विरासत है हमारी ! कभी आजतक बच्चों के साथ दो दिन भी दिल्ली से बाहर नहीं बिताया ! फिर भी परिवार ने बहुत मॉरल सपोर्ट किया! जब हमारे नेता आदरणीय मोदी जी सारा वक़्त राष्ट्र सेवा में दे रहे हैं तो हमें भी सेवा के उसी पथ पर सतत चलते रहना है! अब तो इसी अग्निपथ पर  मुझे आनंद और संतुष्टि मिलती है-"!
    इंटरव्यू खत्म हो चुका था ! वो उठे और जनसेवा के नियमित कर्त्तव्य पथ पर चले गए! 
       दो गाड़ियां एमबी रोड की ओर बढ़ रही थीं, और,,,,मेरे दिमाग में रह रह कर एक शे'र गूंज रहा था,,,,,

कोई तन्हा मुसाफिर कारवाँ बन जाता है जिस दिन!
उसी  दिन  मुश्किलों  के  हौसले  भी  टूट  जाते हैं!!

           ( Sultan bharti journalist)




Wednesday, 1 November 2023

(व्यंग्य चिंतन) " फिर भी नेता मुस्कराता है"!

"व्यंग्य चिंतन "

'फिर भी,,, नेता मुस्कराता है'!

     आज सुबह ही सुबह टीवी पर न्यूज देखा , एक  महान नेता मुस्कराता हुआ हाथ हिला रहा था! मैंने समझा चुनाव जीता है, मगर न्यूज रीडर बता रहा था  कि सैकड़ों करोड़ रुपये के घोटाले में ई डी ने सम्मन जारी किया है,और जांच एजेंसी चाहती है कि  आरोपी जांच में सहयोग करे ! ( आरोपी भी "अपने खिलाफ जांच' में सहयोग करते हैं"- ये ज्ञान मुझे स्तब्ध कर रहा था ! )  एजेंसी की जांच शायद आरोपी के सहयोग के बगैर आत्मनिर्भर नहीं हो पा रही थी ! शायद इसीलिए नेता मुस्करा रहा था। 

       आम आदमी और खास आदमी में यही  तो फर्क है! जेल की कल्पना मात्र से आम आदमी के प्राण सूख जाते हैं! प्राणी मुस्कराने की जगह रुआँसा हो जाता है! लेकिन सत्ता का सूप पी रहा "खास" आदमी"  जेल  की कल्पना मात्र से मुस्कराने लगता है! जांच एजेंसी उसकी जांच से  पहले उससे विनम्र निवेदन करती है कि  वो जांच में सहयोग करे !  'जांच में सहयोग' बड़ा  बहुआयामी शब्द है ! किसी छोटे मोटे गरीब या कुपोषित चोर, गिरहकट अथवा झपटमार से जांच में  सहयोग की अपील नहीं की जाती,बल्कि कुछ ऐसे केस मे भी उसे नत्थी कर दिया जाता है कि चोर खुद से सवाल पूछने लगता है, - ' वो चोरी मैंने कब की थी! क्या मुझे नींद में चोरी करने की बीमारी है' ? पुलिस उससे जांच में सहयोग की बजाय "पिटने" में सहयोग की मांग करती है! छोटी चोरी पर ज्यादा पिटना बेचारे का मुकद्दर है!
        न्यूज चौधरी ने भी देखा था ! आरोपी नेता को मुस्कराते देख चौधरी भी हैरान था ! उसने अपनी  हैरत  मुझ  से शेयर की,- ' उरे कू सुन भारती !'
      ' जी भाई!' 
 " टीवी वाड़ा नेता कौ बारे में नू कह रहो अक वा पै घोटाले कौ इल्ज़ाम सै , पर नेता घबराने की बजाय मुस्कराता हुआ हाथ हिला रहो -!'
     ' तुम इतने हैरान क्यों हो?'
     " उसकू डर न लग रहो कदी !"
          " क्यों डरे ! वो कोई शरीफ आदमी है क्या जो थाना पुलिस से डर जाए ! अव्वल तो अभी जांच जारी है! अगर जांच में दोषी साबित भी हो  गये तो भी चिंता की कोई बात नहीं है-'!
   ' पुड़िस पकड़ लेगी '!
   '  पुलिस चोर , गिरहकट और  शरीफ को पकड़ने के लिए है, इतने बड़े चोर को पकड़ने के लिए उनकी 'आत्मा'  तैयार नहीं होती ! नीरव मोदी से लेकर विजय माल्या तक कोई गिरफतार हुआ ?'
      " मन्ने के  बेरा ?"
     " कोई नहीं पकड़ा गया !"
            ' लेकिन क्यूँ-''!
     " क्योंकि  वो चोर नहीं डॉन  हैं ! और  डॉन के बारे में अमिताभ बच्चन बोल चुके हैं,- डॉन की तलाश तो ग्यारह मुल्कों की पुलिस कर रही है-! पुलिस को डॉन की  सिर्फ तलाश करना होता है , गिरफ्तारी नहीं ! पुलिस  को अगर चोर की तलाश होती तो अब तक एक की  जगह  चार को पकड़ लेती ! चोर के मामले में "जांच" और  सहयोग की बाध्यता भी नहीं होती !"
        " कोई नू कह रहो  अक दारु में घोटाला हुआ है! तू बता भारती , 'सकल' ते यू नेता भला आदमी लग  रहो !"
       " शक़्ल देखकर अपराध नहीं तय होता, एक शे'र  है- भोले भाली सूरत वाले होते हैं 'सैयाद' भी' !
          " इतना बड़ा इल्ज़ाम लग लिया, अर नेता हंसता हुआ हाथ हिला रहो!"
          " एक आत्म निर्भर नेता की यही पहचान है! वो इल्ज़ाम को भी भुना लेता है! ट्रेजडी देखिए, उसी पार्टी के दो निहायत ईमानदार नेता जेल काट रहे हैं और मुखिया बाहर खड़ा मुस्करा रहा है, "खांसी" सर्दी  न  मलेरिया हुआ-!"
        " विपक्ष साथ खडा सै !"
 " इजराइल ने गाजा में हज़ारों नागरिक के अलावा चार हजार के करीब बच्चे मार दिए ! मगर अमेरिका सहित पूरा यूरोप उसके साथ खडा है! इससे क्या इजराइल के पाप धुल जाते हैं "!
      " पर  नू बता भारती ! नेता हंसा क्यों ?"
   "  पहले जनता भी हंस लेती थी, अब सिर्फ नेता ही विपरीत परिस्थितियों में हंस पाता है ! वो अपनी चतुराई और जनता के  भोलेपन पर हंसता है ! चौधरी समझा करो !"
   " चतुराई ! मैं समझा कोन्या ?"
 " जनता को ये समझाना कि परिवार की तंदुरूस्ती और खुशहाली के लिए 'मोहल्ला क्लिनिक' जरूरी है और  मोहल्ला क्लिनिक की खुशहाली के लिए दारू की दुकान ज़रूरी है,- रिंद के रिंद रहे हाथ से  जन्नत न गई-!'
          ' वर्मा  नु  कह रहा-अक् -दारू वाड़े ने पैसा देकर नेता कू फंसा दई -"! 
        " फंसाया होता तो वो ऐसे  न मुस्कराते ! उनकी मुस्कराहट बताती है जैसे उनका नाम घोटाले में नहीं, नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया हो- "!
            चौधरी का चेहरा बता रहा था कि वो अभी भी नेता की मुस्कराहट को लेकर चिंतित है!

              ( Sultan bharti journalist)

Friday, 27 October 2023

(व्यंग्य चिंतन)

(व्यंग्य चिंतन)

        "बाकी सब खैरियत है!"

          मैं दिल्ली पहुंच गया हूं ! रास्ते की हाल न पूछो ! सीट रिजर्व तो थी नहीं, मगर टीटी साक्षात धर्मराज युधिष्ठिर की तरह सतयुग से चल कर आए थे! पांच सौ रुपया लेकर थ्री टायर के डिब्बे में सफ़र करने की इजाज़त दे दी थी  ! सीट नहीं, सीट के बीच में सोने की इजाज़त ! सत्तू का  थैला सर के नीचे रख के मैं बेधड़क सो गया, मगर दाएं बायें सीट पर लेटे यात्री रातभर करवट बदल बदल कर जागते रहे ! हर  क्रिया की  प्रतिक्रिया होती है! बेटिकट होकर भी मेरा सोना क्रिया थी और सीट पर लेटकर यात्रियों का जागना प्रतिक्रिया ! यात्रियों को शंका थी कि उनके सोते ही मैं उनका सामान लेकर चलती ट्रेन से कूद जाऊँगा ! ( हालांकि उनके सूटकेस जंजीर में बंधे थे !)  लघुशंका के लिए हडबडी में उतरने की कोशिश में एक सज्जन ने अपना पैर मेरे हाथ पर ही रख दिया था   बाकी सब खैरियत है! 
         दिल्ली सुबह 5 बजे पहुंच गए थे ! डिब्बे से बाहर आते ही धर्मराज युधिष्ठिर  साक्षात  सामने थे!दो सौ मीटर प्लेटफॉर्म पर पूरब की ओर चल कर हम सभी एक टूटी हुई दीवार से बाहर आए! धर्मराज ने अंतिम संदेश दिया, -" बहुतै रिस्की काम होता है भाई तुम्हारा तो सिर्फ पांच सौ गया, हमारी  तो नौकरी चली जाती! लेकिन का करें, किसी की परेशानी हमसे देखी नहीं जाती, इसलिए- नेकी कर दरिया में डाल-! चलिए अब भवसागर पार हुआ-"। सत्तू का  थैला और धर्मराज का ज्ञान पाकर  हम चांदनी चौक की ओर चल पड़े ! रास्ते में आपस की बातचीत से पता चला कि धर्मराज ने किसी भी यात्री को टिकट नहीं दिया था !
            बाकी सब खैरियत है !
               अभी अभी सोकर उठा हूँ ! अखबार खोला तो पता चला कि चौक पर- हिन्दू मुस्लिम भाईचारा को मजबूत करने के लिए सभा का आयोजन हो  रहा है। मैं चाहकर भी खुद को नहीं रोक पाया, क्योंकि ये लाइलाज बीमारी मुझे बचपन से है ! इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति अपनी खाल नोच कर आनंदित होता है ! इस रोग को समाज सेवा भी कहते हैं ! शुक्र है कि ये इन्फेक्शन की श्रेणी में नहीं आता ! इस रोग से पीड़ित व्यक्ति  भूख प्यास की भी परवाह नहीं करते। रोगी पैदल यात्रा करने के मामले में बैल को भी पीछे छोड़ दे! उसे रोटी से ज्यादा ताली की दरकार होती है! मैं गया तो जरूर लेकिन जल्दी ही समझ में आ गया कि किसी को भी भाईचारा मजबूत करने की जल्दी नहीं थी !  एक वक्ता ने साफ साफ कह दिया कि जब तक उसे टिकट नहीं मिलेगा,तब तक इस इलाके में न सड़क मजबूत होगी ने भाईचारा !
         बाकी सब खैरियत है !!
           5 साल से बगैर नौकरी के हूँ, लेकिन खुशी की बात है कि अपना देश दुनियां की पांचवी आर्थिक महाशक्ति बन गया है ! विश्व गुरु होने ही वाले थे कि विधानसभा चुनाव आ गए ! अब 'ई वी एम' को लेकर विपक्ष विलाप शुरू करेगा ! (कोयल अपना अंडा हमेशा दूसरे के घोंसले में रख देती है!) जाने विपक्ष किसी को विश्वगुरु होते क्यों नहीं देख सकता ! हर आत्मनिर्भर गेहूँ के दाने में  'घुन' ढूढ़ना कब बंद करोगे ! पहले सिर्फ पंचायत होती थी, अब महापंचायत होने लगी है ! अब तो दिल्ली में भी पंचायत शुरू हो गई है ! किन्तु पंचायत होने से पहले ही प्रशासन को आकाशवाणी हो जाती है कि किस पंचायत से  'अमृतवर्षा' होगी और किस से शान्ति को डेंगू होने की उम्मीद है ! दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली एक महापंचायत को रद्द कर दिया गया है, बाकी,,,सब खैरियत है!
          और,,,,,का बताएं चचा ! पहले पत्रकार खबरों की खोज के लिए जाने जाते थे, अब इतनी दूर की कौड़ी खोज लाते हैं कि सुनने वाले हफ्तों कोमा से बाहर नहीं आ पाते ! इधर जब से हमास और इजराइल के बीच जंग शुरू हुई एक स्वनामधन्य पत्रकार ने भारत के यादव और यहूदी को एक ही समुदाय  का बताकर दोनों को सकते में डाल दिया है! इतनी बड़ी खोज करने के पीछे उनका लक्ष्य क्या था, अभी ये खोज होना बाकी है! लेकिन देश के यादव समुदाय और उनके नेताओं में से किसी ने भी अभी तक अतीत के कुम्भ में खोए अपने इस नए भाई ( यहूदी) को  गले लगाने का कोई संकेत नहीं दिया है   ! हो सकता है कि आगामी लोकसभा चुनाव के पहले यादव और यहूदी में समानता की कोई नई एतिहासिक खोज और बरामद हो जाए,
      बाकी सब खैरियत है!
             कल से नवंबर शुरू हो रहा है, कई प्रदेशों में चुनाव है! प्रदेश कार्यालयों में विकास का टेंडर खुल रहा है ! कहीं खुशी  कहीँ ग़म ! कई लोग जिनको इस बार विकास  का टेंडर नहीं मिला , भावविह्वल होकर रोते देखे गए! गला  अवरुद्ध और आंखों से गंगा जमुना सरस्वती चालू ! बात ही ऐसी है, जिसने सिर्फ जनसेवा के लिए अवतार लिया हो, उसका टिकट कट जाए तो आत्मा कैसे कलपती है! दिसंबर मे आने वाले सारे सांताक्लॉज इधर नवंबर में ही गठरी लेकर निकलने वाले थे! अब कई लोग जमीन पर लोटपोट होकर अलाप रहे हैँ,- " मेरा सुन्दर सपना टूट गया !"
     सुबह चना खाकर निकला था, छह घंटे बाद घर लौट रहा हूँ! आज भी काम नहीं मिला! मन कर रहा है कि कहीं सेल्फी पॉइंट नजर आए तो किसी भरे पेट वाले के साथ सेल्फी ले लूँ !! भूखे पेट रह कर भी फील गुड वाला मौसम जो चल रहा है। 

बाकी,,,,, सब खैरियत है !!

             ( झुरहू चच्चा )

Friday, 20 October 2023

बाइक

           Sale letter  ( बिक्री प्रपत्र)
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      ताकि सनद रहे,
               मैंने अपनी पुरानी TBS बाइक  
           को मात्र 3000/ रुपये में बेच दिया है!  (only Three thausand rupees)  बाइक को  खरीदने वाले की डिटेल्स निम्नलिखित है,,,,,,,

नाम ( खरीदार),,,,,
आधार कार्ड नंबर,,,
फोन नंबर,,,,,,,,,,,,

विक्रेता का नाम,,   
आधार कार्ड नंबर 
फ़ोन नंबर         

हस्ताक्षर                              हस्ताक्षर 
( विक्रेता)                           ( खरीदार)
( खरीदार)