Friday, 27 October 2023

(व्यंग्य चिंतन)

(व्यंग्य चिंतन)

        "बाकी सब खैरियत है!"

          मैं दिल्ली पहुंच गया हूं ! रास्ते की हाल न पूछो ! सीट रिजर्व तो थी नहीं, मगर टीटी साक्षात धर्मराज युधिष्ठिर की तरह सतयुग से चल कर आए थे! पांच सौ रुपया लेकर थ्री टायर के डिब्बे में सफ़र करने की इजाज़त दे दी थी  ! सीट नहीं, सीट के बीच में सोने की इजाज़त ! सत्तू का  थैला सर के नीचे रख के मैं बेधड़क सो गया, मगर दाएं बायें सीट पर लेटे यात्री रातभर करवट बदल बदल कर जागते रहे ! हर  क्रिया की  प्रतिक्रिया होती है! बेटिकट होकर भी मेरा सोना क्रिया थी और सीट पर लेटकर यात्रियों का जागना प्रतिक्रिया ! यात्रियों को शंका थी कि उनके सोते ही मैं उनका सामान लेकर चलती ट्रेन से कूद जाऊँगा ! ( हालांकि उनके सूटकेस जंजीर में बंधे थे !)  लघुशंका के लिए हडबडी में उतरने की कोशिश में एक सज्जन ने अपना पैर मेरे हाथ पर ही रख दिया था   बाकी सब खैरियत है! 
         दिल्ली सुबह 5 बजे पहुंच गए थे ! डिब्बे से बाहर आते ही धर्मराज युधिष्ठिर  साक्षात  सामने थे!दो सौ मीटर प्लेटफॉर्म पर पूरब की ओर चल कर हम सभी एक टूटी हुई दीवार से बाहर आए! धर्मराज ने अंतिम संदेश दिया, -" बहुतै रिस्की काम होता है भाई तुम्हारा तो सिर्फ पांच सौ गया, हमारी  तो नौकरी चली जाती! लेकिन का करें, किसी की परेशानी हमसे देखी नहीं जाती, इसलिए- नेकी कर दरिया में डाल-! चलिए अब भवसागर पार हुआ-"। सत्तू का  थैला और धर्मराज का ज्ञान पाकर  हम चांदनी चौक की ओर चल पड़े ! रास्ते में आपस की बातचीत से पता चला कि धर्मराज ने किसी भी यात्री को टिकट नहीं दिया था !
            बाकी सब खैरियत है !
               अभी अभी सोकर उठा हूँ ! अखबार खोला तो पता चला कि चौक पर- हिन्दू मुस्लिम भाईचारा को मजबूत करने के लिए सभा का आयोजन हो  रहा है। मैं चाहकर भी खुद को नहीं रोक पाया, क्योंकि ये लाइलाज बीमारी मुझे बचपन से है ! इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति अपनी खाल नोच कर आनंदित होता है ! इस रोग को समाज सेवा भी कहते हैं ! शुक्र है कि ये इन्फेक्शन की श्रेणी में नहीं आता ! इस रोग से पीड़ित व्यक्ति  भूख प्यास की भी परवाह नहीं करते। रोगी पैदल यात्रा करने के मामले में बैल को भी पीछे छोड़ दे! उसे रोटी से ज्यादा ताली की दरकार होती है! मैं गया तो जरूर लेकिन जल्दी ही समझ में आ गया कि किसी को भी भाईचारा मजबूत करने की जल्दी नहीं थी !  एक वक्ता ने साफ साफ कह दिया कि जब तक उसे टिकट नहीं मिलेगा,तब तक इस इलाके में न सड़क मजबूत होगी ने भाईचारा !
         बाकी सब खैरियत है !!
           5 साल से बगैर नौकरी के हूँ, लेकिन खुशी की बात है कि अपना देश दुनियां की पांचवी आर्थिक महाशक्ति बन गया है ! विश्व गुरु होने ही वाले थे कि विधानसभा चुनाव आ गए ! अब 'ई वी एम' को लेकर विपक्ष विलाप शुरू करेगा ! (कोयल अपना अंडा हमेशा दूसरे के घोंसले में रख देती है!) जाने विपक्ष किसी को विश्वगुरु होते क्यों नहीं देख सकता ! हर आत्मनिर्भर गेहूँ के दाने में  'घुन' ढूढ़ना कब बंद करोगे ! पहले सिर्फ पंचायत होती थी, अब महापंचायत होने लगी है ! अब तो दिल्ली में भी पंचायत शुरू हो गई है ! किन्तु पंचायत होने से पहले ही प्रशासन को आकाशवाणी हो जाती है कि किस पंचायत से  'अमृतवर्षा' होगी और किस से शान्ति को डेंगू होने की उम्मीद है ! दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली एक महापंचायत को रद्द कर दिया गया है, बाकी,,,सब खैरियत है!
          और,,,,,का बताएं चचा ! पहले पत्रकार खबरों की खोज के लिए जाने जाते थे, अब इतनी दूर की कौड़ी खोज लाते हैं कि सुनने वाले हफ्तों कोमा से बाहर नहीं आ पाते ! इधर जब से हमास और इजराइल के बीच जंग शुरू हुई एक स्वनामधन्य पत्रकार ने भारत के यादव और यहूदी को एक ही समुदाय  का बताकर दोनों को सकते में डाल दिया है! इतनी बड़ी खोज करने के पीछे उनका लक्ष्य क्या था, अभी ये खोज होना बाकी है! लेकिन देश के यादव समुदाय और उनके नेताओं में से किसी ने भी अभी तक अतीत के कुम्भ में खोए अपने इस नए भाई ( यहूदी) को  गले लगाने का कोई संकेत नहीं दिया है   ! हो सकता है कि आगामी लोकसभा चुनाव के पहले यादव और यहूदी में समानता की कोई नई एतिहासिक खोज और बरामद हो जाए,
      बाकी सब खैरियत है!
             कल से नवंबर शुरू हो रहा है, कई प्रदेशों में चुनाव है! प्रदेश कार्यालयों में विकास का टेंडर खुल रहा है ! कहीं खुशी  कहीँ ग़म ! कई लोग जिनको इस बार विकास  का टेंडर नहीं मिला , भावविह्वल होकर रोते देखे गए! गला  अवरुद्ध और आंखों से गंगा जमुना सरस्वती चालू ! बात ही ऐसी है, जिसने सिर्फ जनसेवा के लिए अवतार लिया हो, उसका टिकट कट जाए तो आत्मा कैसे कलपती है! दिसंबर मे आने वाले सारे सांताक्लॉज इधर नवंबर में ही गठरी लेकर निकलने वाले थे! अब कई लोग जमीन पर लोटपोट होकर अलाप रहे हैँ,- " मेरा सुन्दर सपना टूट गया !"
     सुबह चना खाकर निकला था, छह घंटे बाद घर लौट रहा हूँ! आज भी काम नहीं मिला! मन कर रहा है कि कहीं सेल्फी पॉइंट नजर आए तो किसी भरे पेट वाले के साथ सेल्फी ले लूँ !! भूखे पेट रह कर भी फील गुड वाला मौसम जो चल रहा है। 

बाकी,,,,, सब खैरियत है !!

             ( झुरहू चच्चा )

Friday, 20 October 2023

बाइक

           Sale letter  ( बिक्री प्रपत्र)
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      ताकि सनद रहे,
               मैंने अपनी पुरानी TBS बाइक  
           को मात्र 3000/ रुपये में बेच दिया है!  (only Three thausand rupees)  बाइक को  खरीदने वाले की डिटेल्स निम्नलिखित है,,,,,,,

नाम ( खरीदार),,,,,
आधार कार्ड नंबर,,,
फोन नंबर,,,,,,,,,,,,

विक्रेता का नाम,,   
आधार कार्ड नंबर 
फ़ोन नंबर         

हस्ताक्षर                              हस्ताक्षर 
( विक्रेता)                           ( खरीदार)
( खरीदार)
                                
        
    

Saturday, 14 October 2023

( फिलिस्तीन ) आग के दरिया में डूबता शहर

 (फिलिस्तीन)
       "आग के दरिया में डूबता शहर" 

आसमान से कार्पेट बमबारी, ज़मीन से टैंकों की बढ़ती हुई कतार और सामने 12/41  किलोमीटर का खंडहर मे तबदील होता हुआ एतिहासिक 'गजा' शहर ! नेतन्याहू और वृहत्तर इज़राइल के सपने के मध्य खड़ी 23 लाख की आबादी का अवरोध लगभग खत्म होने को है ! जो बेगुनाह  खंडहर में दफन हो गए वो लोग भी हमास की  लिस्ट मे नत्थी मान लिए जायेंगे ! प्रचंड नफरत के इस दौर में कटे फटे बच्चों के जिस्म की तस्वीरें भी अब सभ्य समाज को आनंद देने लगी हैं  ! नफ़रत की खमीर से बनी बारुद ने मानवीय संवेदनाओं की शक़्ल सूरत ही बदल दिया है ! शायद  नफ़रत में बारूद से  ज्यादा ज़हर उतर आया है ! हाँ  तो नफरत ही विनाश की प्राणवायु है!
    जो इस दौर में भी ईमानदारी से इतिहास को याद रख पाए हैं, उन्हें मालूम होगा कि एडोल्फ हिटलर ने यहूदियों के सामुहिक नरसंहार के पहले जर्मनी को किस क़दर नफरत मे डुबोया था ! उसने एक नारा दिया था,- जूडाह वेरेका -! ( यहूदियों का सर्वनाश हो-!) फिर उसके बाद एक पूरी कौम को खत्म करने का जघन्य अपराध इतिहास ने देखा, जिसमें 60 लाख बेकसूर लोग मारे गए और 30 लाख लोग पूरी दुनियां में छुपने के लिए भागे ! फिर भी ईसाई जगत हिटलर को  आज भी आतंकी नहीं कहता ! उन्हीं दिनों (1943 मे) पानी के एक जहाज से भागे हुए हज़ारों शरणार्थी इजराइली फिलिस्तीन के तट पर जा पहुँचे ! अरब मुस्लिमों ने उन्हें शरण दिया जिन्हें हिटलर के खौफ से फ्रांस ने भी मना कर दिया था,और आज उन्हीं के बंशज़ यहूदी लोग अरबों से कह रहे हैं, - शहर खाली कर दो- और  मिस्र चले जाओ -"! ( बाबा भारती ने डाकू खड़क सिंह से कहा था, -" घोड़ा ले  जाओ मगर इस घटना का जिक्र किसी से मत करना, वर्ना लोग मुसीबत में पड़े आदमी की मदद नहीं करेंगे-"! 
      शायद गाजा के नए तामीर हो रहे कब्रिस्तान पर फिर बस्तियाँ आबाद हों! शायद फिर कोई गाजी सलाहुद्दीन आए ! लगता है कि बैतुल मुकद्दस के इर्द गिर्द की ज़मीन को सदियों से इंसानी लहू  पीने की आदत पड़ चुकी है ! लोग कहते हैं कि हम गुफा युग से निकल कर सभ्यता के माउंट एवरेस्ट पर जा पहुंचे हैं  ! हम नई सभ्यता के ध्वजवाहक हैं, जो शांति के कबूतर उड़ाती है, शांति के लिए नोबेल पुरस्कार देती है और दस्ताने पहन कर मासूमों को कत्ल करती है, ताकि दामन पर लहू के छींटे न दिखाई दें !  हम सभ्य तो हैं मगर न्याय देने मे अदालत नहीं, जिसकी लाठी उसकी भैंस पर ही अमल करते हैं ! लाठी धारी मुल्कों का अपना गैंग,अपनी अदालत है! वो जिसे अपराधी कह दें वही मुज़रिम ! उनके एनकाउन्टर पर कोई सवाल नहीं उठाता ! ये नए मिजाज़ की अदालत है, जहां मानव अधिकार, रेडक्रॉस और इंसाफ़ के नाम पर संयुक्त राष्ट्र संघ सब कुछ है जो एक इशारे पर लकवा ग्रस्त हो जाता है !
        तो,,,,,दुआ करें ! शायद हमारी दुआओं से ऊपर वाला कोई चमत्कार कर दे ! वैसे,,,1948 से आज तक फिलिस्तीन के मसले में कोई आसमानी चमत्कार हुआ नहीं है ! सुना है 57 मुस्लिम देश हैँ, पर पिछले 5 जंगों में फिलिस्तीन की झोली में सिर्फ़ दुआएं ही आती हैं,- बिखरी हुई, दयनीय, मजलूम और पसमांदा दुआएं !!

            Sultan bharti (journalist)

Wednesday, 4 October 2023

सिडबी सम्मान मेला

     "सिडबी" का स्वावलंबन मेला संपन्न 
(  कई हस्तशिल्पी सम्मानित! भव्य समापन !!)

         नई दिल्ली स्थित आगा खान भावन में 'सिडबी' (भारतीय लघुउद्योग विकास बैंक) द्वारा आयोजित ,( 24 सितंबर से 28 सितंबर तक  चलने वाले  5 दिवसीय  स्वावलंबन मेला  के  अंतिम दिन कई उत्कृष्ट हस्तशिल्पियों को  आर्थिक प्रोत्साहन द्वारा सम्मानित किया गया ! विदित रहे कि इस स्वावलंबन मेला में गुजरात और मणिपुर समेत देश के विभिन्न प्रदेशों से आए हुए काफी हस्तशिल्पी स्वनिर्मित हस्त उत्पाद के साथ साथ शामिल हुए थे ! सिडबी की दिल्ली शाखा के कई वरिष्ठ अधिकारी पूरे 5 दिवसीय मेला के दौरान  यहां बने रहे,ताकि सुदूर प्रदेशों से आए हस्तशिल्पियों और उनके  परिश्रम एवं प्रयास को स्वावलंबन  की दिशा दी जा सके!
          हस्तशिल्प हमारी सभ्यता एवं संस्कृति की एक समृद्ध विरासत है जिसे विलुप्त होने से बचाने, खोजने,निखारने और विकसित करने के पीछे विगत सरकारों ( कॉंग्रेस,जनता पार्टी,और जनता दल) की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन इस कला को संपूर्ण विकास, आर्थिक प्रोत्साहन और बड़ा बाजार देने के लिये वर्तमान मोदी सरकार और सिडबी की पेशक़दमी ने बहुत अहम भूमिका निभाई है! नब्बे के दशक में अस्तित्व में आए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक ( सिडबी) ने आर्थिक झटके खा रहे इस हस्तशिल्प कला की दशा और दिशा ही बदल दी ! ऊपर से वर्तमान मोदी सरकार की गहन संजीदा दिलचस्पी ने  शिल्प और शिल्पियों के  प्रयासों को नए जीवन,स्वप्न, और उड़ान का प्लेटफार्म और प्रोत्साहन दिया ! सिडबी ने उनके छोटे सपनों को बड़ा आकाश दिया और आर्थिक स्वावलंबन में बड़ी भूमिका निभाई। आज का आर्टिजन पूरे देश और दुनियां मे अपनी कला के  साथ उड़ान भरने को तैयार है।स्वावलंबन मेला उसी परवाज का एक जरूरी पडाव है। 
       आगा खान भवन ( नई दिल्ली) में आयोजित इस स्वावलंबन मेला में आए हस्तशिल्पियों को आधुनिक बाजार के साथ चलने के कई गुर सिखाये गए  ! इसी में शामिल था- ओ एन डी सी (ओपेन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स)  जिसकी भूमिका आज बड़ी रफ्तार से बढ़ रही है! ये नेटवर्क क्रेता और विक्रेता के बीच एक मजबूत पुल की भूमिका निभाने का काम करता है ! क्योंकि आधुनिक बाजार में वही टिकेगा जो व्यापार के बदलते हुए आयाम से वाकिफ होगा।  सिडबी की  भूमिका अन्य बैंकों से बिल्कुल अलग इसलिए भी है, क्योंकि सिडबी दूर तक व्यापारिक रिश्ते निभाता है , बिल्कुल अपनों की तरह!
        स्वावलंबन मेले के आखिरी दिन कई शिल्पियों को कैश पुरस्कार से नवाजा गया, ताकि उनके जोश को नई गति और  स्थायित्व दिया जा  सके! पुरस्कार और प्रोत्साहन के इन खूबसूरत पलों में उत्साह के रंग भरने के लिए सिडबी की   तरफ से वहाँ मौजूद थे, नई दिल्ली के सिडबी शाखा प्रमुख श्री एन के सोलंकी ( उप महा प्रबंधक) , सुधा परमार ( निदेशक CSCC) और संजय मिश्रा जी। अंत में, पाठकों की जानकारी के लिए ये जानना आवश्यक है कि ये सारा आयोजन " सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ कास्ट एंड कैपिटलिज्म" की तरफ से था, जो सदैव समाज के पिछड़े अति पिछड़े और वंचित समाज के लोगो के पुनरूत्थान के लिए सतत प्रयासरत रहता है!  सिडबी ने इस आयोजन को अर्थिक सहयोग दिया था !
        सबकुछ इतना बेह्तरीन रहा कि दिल्ली से वापस अपने गृह प्रदेश में लौट कर भी स्वावलंबन मेले के ये खुशगवार पल शिल्पियों को लंबे समय तक याद आते रहेंगे !!

                   (   Sultan bharti journalist )

Thursday, 14 September 2023

(व्यंग्य भारती) "हिन्दी दिवस का बर्थ डे केक"

व्यंग्य भारती
          हिन्दी दिवस का बर्थ डे केक 

   मंत्री जी ने कई दिनों पहले कार्ड न्योता भेज  दिया था।  चौदह सितंबर को सभी "गणमान्य" श्रेणी के मेहमान मंत्री जी के आवास पर आ गए! सरकारी आवास के विशाल लान मे लोग कुर्सियों पर  बैठे ! एक बड़ी मेज पर एक बड़ा केक रखा गया।  मंत्री जी के मुहँ लगे उनके निजी कवि ने सबसे पहले हिन्दी मे एक ताजी कविता सुनाई जो हिन्दी दिवस की अपेक्षा मंत्री जी को ज्यादा समर्पित थी,- ----
हिन्दी आज महान  है!
भारत की पहचान  है!!

मंत्री जी के  प्रयासों से !
जन जन की पहचान है !!

आमंत्रित कवि विद्वानों का!
करते    वो   सम्मान    हैं !!

  कविता के तीसरे अंतरे में ही कवि ने  मंत्री जी को याद दिला दिया कि पिछले साल जैसा प्रोग्राम मत करना! ( पिछले हिन्दी दिवस पर अंग वस्त्र के साथ सम्मान राशि नहीं दी गई थी!)
     आमंत्रित मेहमान जहां सम्मान की  कल्पना में मगन थे  वहीं मंत्री चिंतित होकर अपने पी ए के कान मे कह रहे थे,- ' अब गलती मत करना,अगले साल किसी नए कवि को हायर करना "!
       कविता के बाद मंत्री जी के सचिव हिन्दी भाषा की उपयोगिता और महत्व पर प्रकाश डालने लगे, -' हिन्दी लैंग्वेज बोलने में बहुत  इजी है, तभी ये नैशनल लैंग्वेज बन पायी है, यू नो ! हमें इस लैंग्वेज पर प्राउड फील होना चाहिए-! हमारे विद्वान मंत्री जी का गवर्नमेंट से अपील है कि वो हिन्दी को वर्ल्ड लैंग्वेज बनाए ! हम सबको अपने फॅमिली मेंबर्स से सिर्फ हिन्दी में डिस्कशन करना चाहिए-यू नो ! !हिन्दी के ग्लोबल लैंग्वेज बनते ही हमारे विश्वगुरु होने के सारे स्पीड ब्रेकर खत्म हो जायेंगे ! हिन्दी के डेवलपमेंट के लिए मेरे साथ नारा लगायें -

हिन्दी ही अपनायेंगे !
इंग्लिश मार भगाएंगे !! "

      सचिव ने बैठने से पहले बड़ी गर्वित नजरों से उन श्रोताओं पर नजर डाली जो अभी भी इंग्लिश को मार भगाने का आवाहन कर रहे थे! इसके बाद हिन्दी के समर्थन में एक प्रचंड पहलवान ने माइक थाम लिया -" माँ सरस्वती की अपार अनुकंपा से हम हिंदी को राष्ट्रभाषा से विश्व भाषा बनाने के प्रगति पथ पर अग्रसर हैं ! हमारे आदरणीय मंत्री जी और सशक्त राष्ट्र के सतत प्रयास और संघर्ष से  ये संभव हो पाया है !  मंत्री जी  शतायु हों, जिससे पूरे ब्रह्माण्ड में चर अचर सभी जीवों की भाषा हिंदी और केवल हिंदी हो !यही मंत्री जी और सरकार दोनों का संयुक्त प्रयास है! अंतरिक्ष में हिंदी भाषा के विकास के लिए चांद पर हिंदी भाषा विकास संस्थान खोला जाए , - जय हिंदी! जय राष्ट्र भाषा-!"
     अब लोगों की नजरें वक्ताओं पर कम केक पर ज्यादा थी ! लोगों की अगाध श्रद्धाकेंद्र का सही आकलन कर मंत्री जी ने समापन भाषण दिया,-"आप लोगोँ का हिंदी प्रेम देख कर मुझे पूरा यकीन है कि हिंदी देश की राष्ट्रभाषा भले न  बन पाये , यूनिवर्सल भाषा पहले बनेगी ! शायद आप लोग भी देश की अपेक्षा हिंदी को यूनिवर्सल भाषा बनाने के लिये ज्यादा समर्पित हैं ! आपकी उस विलक्षण दूरदृष्टि को सलाम है, हिंदी के विकास के  लिए जिसका प्रथम प्रयास अपने बच्चों को अंगेजी मीडियम से पढ़ाना होता है ! अंग्रेजी भाषा के प्रति इतना प्यार,आकर्षण और समर्पण देख कर मुझे पूरा विश्वास है कि हिंदी को विश्व भाषा बनाने का कितना बड़ा समुद्र मंथन आप  चला रहे हो- ! मेरे परिवार में सारे धार्मिक कर्मकांड निपटाने वाले पंडित जी के दोनों बच्चे भी कॉन्वेंट में पढ़ते हैं! उनको भी सादर प्रणाम है-! आइए अब हिंदी के इस समग्र विकास की खुशी का केक काटते हैं-"!
         आज एक विद्वान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में सवाल पूछा है, - क्या दुनियां में किसी और  भाषा का पखवारा मनाया जाता है ? हो सकता है, मुझे तो नहीं पता! मुझे तो ये भी नहीं पता कि पखवारा मनाने से  हिंदी का कितना विकास होता है ! हिंदी विकास के नाम पर बने सफेद हाथी जैसे संस्थानों की ओर से कोई प्रगति रिपोर्ट आती हो तो मुझे उसका भी पता नहीं! हिंदी भाषी लेखकों का इस पखवारे में कितना विकास हो रहा है, मुझे कुछ नहीं पता! अलबत्ता ये पता है कि हिंदी के अधिकांश लेखक अपने लेखक होने की सज़ा काट रहे हैं! उनके साहित्य और हिंदी समर्पण को इन संस्थानों से कोई ऑक्सीजन नहीं 
मिलती! पेंशन भी नहीं ! ( कर्म और फल के अध्यात्म पर संदेह कैसा!)
       हिन्दी भाषा विकास की सारी औपचारिकता  जिवित हो उठी है !  सरकारी बैंक ने  इंट्री गेट पर हिंदी पखवारे का बैनर लगा दिया है , - कृपया फॉर्म , चैक और  विदड्रॉल  हिंदी  में भरें -!  लेकिन अंदर सारा काम अँग्रेजी में चल रहा था ! जैसे बैनर खुद कह रहा हो- 16 दिन की तो बात है, हंसते हंसते कट जाये रस्ते-! तीस सितंबर के  बाद सरकारी विभाग ये बैनर अगले साल सितंबर के लिए समेट कर आलमारी में रख देंगे ! ऐ राष्ट्रभाषा! हम तेरे लिए  एक पखवारे का बलिदान तो दे ही सकते हैं  न ! इसी से अपने पूरे साल का  हीमोग्लोबिन दुरुस्त कर लेना !
    हिंदी विकास के कथित प्रयास पर एक शे'र पेश करते हैं,,,,,,,
ये तो माना कि  तगाफुल  न करोगे  लेकिन !
खाक हो जायेंगे हम तुमको खबर होने तक !!

     ( Sultan bharti)


Tuesday, 5 September 2023

आगाज तो अच्छा था- अंजाम खुदा जाने

                 " आज का मुस्लिम "
आगाज़ तो अच्छा था- अंजाम,,,,,,,खुदा जाने 

     अवध के एक  जमीनी  शायर  एम जे  सिद्दीकी ने 1965 के इंडिया पाक जंग के हीरो अब्दुल हमीद ( परम वीर चक्र विजेता) की शहादत पर लिखा था _

मुसलामां हिंद का गाजी मुजाहिद !
लहू  में   दौड़ती  'ईमां'  की  धारा !!
शहादत   सुर्खरू  अपनी  रवायत !
वतन ने जब कभी  हमको पुकारा !!

       इसमें कोई दो राय नहीं कि इस्लाम की नीव में इबादत,सखावत, शुजाअत और शहादत की बहुत बड़ी भूमिका है! अपने मजहब और मुल्क के लिए शहादत देने में इस जंगबाज कौम का कोई मुकाबला नहीं है! सातवीं सदी (610 ईस्वी) में उदय और सोलहवीं सदी (1570 ईस्वी) में शौर्य, शासन, सभ्यता और न्याय के शिखर पर चमकते इस्लामी हुकूमत का अगले दो सौ साल में ऐसा पतन हुआ कि दुनियां आज भी हैरान है ! आज उसी शासक कौम के लोग बदहाली के ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां से वापसी के लिए कोई शॉर्ट कट रास्ता नहीं है । अपनी बदहाली के लिए खुदा और नाखुदा दोनों को कोसती ये कौम अपने गिरेबां में झांकने को बिल्कुल तैयार नहीं! इस्लाम के मूलभूत सिद्धांतों से भटक गई ये अपार भीड़ अपनी सियासी और सामाजिक नेतृत्व विहीनता के चलते  राजनैतिक पार्टियों के बीच फुटबाल बन कर  रह गई है! आज इस जमात में आला और पसमांदा दोनों शरीक हैं ! शोषण और दमन की इस फेहरिस्त में इदरीसी बिरादरी अकेली नहीं है! पूरी कौम ए मुस्लिमाँ उनके साथ खड़ी मिलेगी ! आइए,आज हम अपने देश में चल रहे   'प्रचंड' विकास,सामाजिकऔर आर्थिक भागेदारी तथा राजनीतिक भूमिका में  इस ' नेतृत्व विहिन भीड़' की दिशाहीनता और दुर्दशा का आकलन करते हैं!

शिक्षा,,,,,
       2011 के सर्वे के मुताबिक़ मुसलामानों की कुल जनसंख्या का 43% भाग अशिक्षित था ! कैसी विडंबना है कि जिस कौम की पवित्र पुस्तक कुरआन के आगाज का  पहला शब्द ही "इकरा" (यानि - "पढ़") हो, आज उस कौम के अनुयायी शिक्षा के क्षेत्र में इतने उदासीन  क्यों ! आबादी के पहले ब्रिटिश हुकूमत में, आई ए एस IPS जैसे उच्च पदों पर मुस्लिमों की भागीदारी 5% थी, आज इतनी  अधिक आबादी के बावजूद 3% है ! शिक्षा के क्षेत्र में जो लोग मदरसों की भूमिका पर उंगली उठाते हैं, तो उनके लिए हैरान करने वाला आंकड़ा ये है कि मुसलमानों के सिर्फ 4% बच्चे ही मदरसा जाते हैं, बाकी 96% बच्चे सरकारी और प्राइवेट स्कूल्स का रुख करते हैं ! इनमे एक बड़ा तबका उन बच्चों का है जो मिडिल क्लास के बाद आगे जाते ही नहीं! अब खुद सोचो कि ऐसे में अगर कोई  'अब्दुल' के साथ "पंचर" शब्द जोड़ रहा है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है! राजा राम मोहन राय जैसे विश्वविख्यात समाज सुधारक देश को देने वाले मदरसों को पेट्रो डॉलर और आतंकवाद से जोड़ा जा रहा है!

सरकार की भूमिका,,,,,,

          आजादी के बाद जब कॉंग्रेस की सरकार बनी तो देश का पहला केंद्रीय शिक्षा मंत्री एक मुसलामान को बनाया गया ! ( मौलाना अबुल कलाम आजाद) उसके पहले ऊर्दू को मुख्य भाषा का दर्जा हासिल था ! कॉंग्रेस के शासन में ऊर्दू का वो रुतबा और दर्जा खत्म होता रहा! बंटवारे मे  मुस्लिम समुदाय को नेतृत्व दे रही शख्सियत और असरदार लोग पाकिस्तान चले गए और भारत से मुहब्बत करने वाले आला और पसमांदा मुस्लिम यहीं रुक गए ! राष्ट्रनिर्माण और कुर्बानी देने मे अग्रणी रहे इस कौम के अनुयायी आज भी पाकिस्तान के निर्माण के लिए ताने सुन रहे हैं ! इस  कौम को सत्ता और सर्विस मे वो भागीदारी क्यों नहीं दी जाती जिसकी हकदार है! मुस्लिमों का तुष्टिकरण करने का आरोप झेल रही कांग्रेस ने मुसलामानों को आखिर दिया क्या है? जो दिया है, पूरा देश जानता है! मुस्लिमों की दयनीय दुर्दशा को उजागर करने वाली रंगनाथ और सच्चर कमेटी की रिपोर्ट पर आज तक कितना अमल हुआ ?

नेतृत्व की भारी कमी,,,,,

       केन्द्रीय अल्पसंख्यक मंत्री स्मृति ईरानी के अनुसार आज मुसलामानों की आबादी देश की कुल आबादी का 19% है ! ( यह संख्या पाकिस्तान की कुल आबादी से ज्यादा है! पर इस बेहाल और बदहाल कौम के पास आज की तारीख में न कोई एक सर्वस्वीकृत धार्मिक नेता है न सियासी ! इतनी बड़ी आबादी चौराहे पर खड़े उस निरीह चौपाये की तरह है जो भ्रमित है कि किधर जाये ! उसने हमेशा दूसरे धर्म के लोगों को अपना नेता बनाया,फिरभी उसी से देशभक्ति की सनद मांगी जाती है! हर पार्टी चुनाव के वक़्त उससे यही आकांक्षा रखती है कि वो वोटर बन कर  रहे जन प्रतिनिधि नहीं !

हाल क्या है,,,,,,?

 1-   हमें अपने मतभेद बलाए ताक रख कर  एक।       मंच पर आना होगा!
2-     'अशिक्षा'  का कलंक मिटाने के लिए युद्ध             स्तर पर काम करने की जरूरत है! हमारे       नबी का  शिक्षा के लिए जो फरमान था,( शिक्षा     के लिए हिजरत करने का सुझाव) उसे  अपनी जिंदगी में उतारना होगा ! 
3-     हर  मुस्लिम माँ बाप को अहद करना होगा।           कि हमारा बच्चा ऊंची तालीम हासिल।                 करेगा !
4-      सफेद हाथी साबित हो  रहे  बड़ी बड़ी मुस्लिम संगठन अगर स्कूल नहीं खोल रहे तो उनसे दूरी बनाए!
5-        सिर्फ वोटर बनकर मत रहें, सत्ता में अपनी भागीदारी के लिए संघर्ष करें, जागरूक             होकर अपना हक मांगे!
6-       मस्जिद जाना शुरू करें और नमाज के बाद  देश,कौम, समाज और अपने बेहतर भविष्य के लिए  चर्चा करें ! याद  रखें, हमें अपने हक और संवैधानिक अधिकार के लिए खुद संगठित होकर संघर्ष करना होगा ! अल्लामा इकबाल ने कहा था-
7-     हमें अपने बच्चों को वीर अब्दुल हमीद और           ब्रिगेडियर उस्मान बनाना होगा, जो हमारे               मुल्क और कौम का नाम दुनियां में रोशन             करें ! हम सरकार से मांग करते हैं कि वीर            अब्दुल हमीद के नाम से गाजीपुर या दिल्ली        में एक यूनिवर्सिटी खोली जाए !
अपनी हिम्मत अपनी कूवत अपने बाजू तौलकर!
कूचा ए हस्ती में उड़ना है तो उड़  पर खोल कर!!

        इदरीसी समाज संगठित हो रहा है, ये देख कर खुशी होती है ! अब बहुत सी राजनैतिक दलों के लोग आप के पास आयेंगे ! आपको पसमांदा बताकर आपके सर्व विकास का वादा करेंगे! आप  मिलें, सुनें और अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें  ! अपने नेतृत्व की वकालत करें ! अपने संवैधानिक अधिकार को हासिल करना होगा! हमें आरक्षण क्यूँ नहीं मिलता? ये कौन बतायेगा ! देश की आर्थिक शक्ति में रीढ़  की भूमिका निभा रहे इस श्रमजीवी समुदाय मे अब घनघोर जनजागरण शुरू करने का  वक़्त आ गया है ! 
     हमारे आज के हालात को अर्सा पहले विश्व विख्यात शायर और क्रान्तिकारी योद्धा मौलाना अल्ताफ हुसैन "हाली"  ने  हूबहू  कुछ  यूं बयान किया है,,,,,,,

न अहले हुकूमत के हमराज़ हैं हम !
न  दरबारियों  में  सरफराज  हैं हम !!
न रखते हैं कुछ मंजिलत नौकरी में!
न   हिस्सा  हमारा  है  सौदागरी  में !!

 तो,,,,बस तैयार हो जाओ शिक्षित और संगठित होकर हमें इस परिभाषा को बदल देना है ! हमें याद रखना होगा कि,,,,,,,

कोई तन्हा मुसाफिर कारवाँ बन जाता है जिस दिन 
उसी  दिन  मुश्किलों  के  हौसले  भी  टूट जाते  हैं!!

        और,,,खुदा  की   कसम ! आज हम   तन्हा नहीं हैं !!

            ,,,,,,,, अबुल हाशिम ,,,,,,

Friday, 1 September 2023

(व्यंग्य 'भारती') "चंदा मामा या मामू "

व्यंग्य 'भारती'

 "चाँद"- तुझे "मामा" कहूँ - या  "मामू" 

          अब तो पहचान बतानी होगी ! बहुत हो गया छुपा छुपी ! चंदा मामा तुम्हें भी डॉक्यूमेंट दिखाना पड़ेगा ! तुम्हारे धर्म को लेकर बहुतै कन्फ्यूजन है  ! तुम मामा हो या मामू ? कौन से धर्म में आते हो ! बताना पड़ेगा ! मामा और मामू  में से एक को  चुनना पड़ेगा ! एक म्यान  में मामा मामू दोनों नहीं रह सकते ! चन्द्रयान, विक्रम और प्रज्ञान  तीनों नाम सनातनी हैँ ! इसलिए तुम भी मामा बन कर रहो, मामू नहीं ! अब मामा और मामू में से किसी एक को सिलेक्ट कर लो !  शराफत से मान जाओ तो ठीक है मामा, वर्ना चलनी से देखना ही नहीं, चलनी मे पानी भरवाना भी हमें आता है !
              राजधानी दिल्ली के एक संत का सुझाव है कि तुम्हें हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दिया जाए ! क्या हुआ? इतने में ही नर्भसा गए  का ! मामा समझा करो ! यहां हमारे प्लेनेट पर  बहुतै पंगा है ! हम  का  करें, विपक्ष है कि मानता नहीं ! सरकार जनता को हिंदू राष्ट्र देना चाहती है, मगर  विपक्ष  है  कि  टमाटर नींबू और प्याज का रोना रो रहेहैं ! विपक्ष कभी नौकरी मांगता है कभी सस्ता टमाटर ! घोर कलियुग है जी ! स्वर्ग और मोक्ष की जगह उन्हें सस्ता सिलेंडर चाहिए !
         सुनो मामा जी ! आराम से मान जाओ तो बढ़िया है ! वर्ना हम तुम्हारे पूरे ग्रह को दिल्ली के प्रॉपर्टी  डीलरों को 99 साल के लीज पर दे देंगे! उसके बाद तो तुम पूरे ब्रह्माण्ड  में ओरिजिनल काग़ज़ लेकर दौड़ते रहोगे, मगर अपनी ही प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा नहीं  पाओगे ! हमारे ग्रह पर ऐसे ऐसे प्रॉपर्टी डीलर हैँ जो तुम्हें तुम्हारे ग्रह के मालिकाना हक का काग़ज़ उस  वक़्त  का  दिखा देंगे जब तुम्हारे ग्रह का जन्म भी नहीं हुआ था ! अब बताओ क्या करोगे ! घबरा गए न! इसलिए कहता हूं मामा जी अभी समय है ! वैसे  हिन्दू राष्ट्र घोषित होने में तुम्हारा कोई नुकसान भी नहीं है ! सोचो पृथ्वी से कितने श्रद्धालु हम से वीज़ा लेकर तुम्हें देखने आयेंगे !  महिलाएँ चलनी से देख देख कर बोर हो गई हैं ! अब साक्षात दर्शन करेंगी ! रक्षा बंधन पर कितना रश रहा करेगा !
          अब काहे चिंतित हो ! देखो ऐसा है कि  कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है! दोनों हाथों में लड्डू नहीं  होगा ! मामा होने के लिए मामू का मोह छोड़ना पड़ेगा ! हमें तुम्हारी कला और कलाकारी दोनों का पता है ! तुम कब भगवान के माथे पर होते हो कब भाग्यचक्र में -हमें मालूम है! इतना सम्मान रास नहीं आ रहा है  का ! ईद से एक दिन पहले दिखाई देने का मोह छोड़ना पड़ेगा ! अब ये- खाओ ब्रिटानिया फिफ्टी फिफ्टी - नहीं चलेगा !
        अब काहे सोच में पड़ गए ! हिन्दू राष्ट्र घोषित होने से क्या होगा ? ये सब कुछ जनता के लिए होगा ! वैसे,,,,हो सकता है कि जनता को भी न पता हो कि वो हिन्दू राष्ट्र चाहती है ! एक दिन ईंटभट्टा पर काम करने वाले कई मज़दूरों से मैंने भी यही सवाल पूछा था- " आपको क्या चाहिए-'?
  -" अगर ठेकेदार समय पर पैसा दे दे तो इस बार गिरवी रखा खेत छुड़ा लूँगा बाबूजी ! दो साल पहले बेटी की शादी के लिए गिरवीं रखा था!"
    "और तुम ?"
    " एकलौता बेटा सफ़ाई कर्मी था, तीन साल पहले सीवर की सफ़ाई करते वक़्त जहरीली गैस से मर गया था ! हम चाहते हैं कि मुआवजे के साथ किसी एक को नौकरी भी मिल जाए!"
     ' और  आप?' वो एक बुजुर्ग मजदूर था 
     " बाबूजी मेरी नज़र कमज़ोर हो गई है  ! मैं पिछले अट्ठारह साल से ईंट भट्टा पर हूँ। हर साल सर्दी में सोचता हूं कि आंख खुलवा लूँगा, पर इतना बचता ही नहीं! कस्बा भी दूर है यहां से !'
    "और काकी तुम?"
       " आदमी के मरने के बाद पतोहू ने निकाल दिया घर से! जब तक हाथ पाँव चल रहा है , भीख नहीं मांगूंगा- बेटे से न गाँव वालों से "!
     सुन लिया न , तो मामा जी उनमे से तो किसी को हिन्दू राष्ट्र नहीं चाहिए ! हो सकता है कि ये लोग जनता की  गिनती न आते हों ! तो,,,,प्रस्ताव आना शरू है ! चुनाव से पहले तुम्हें  हिन्दू राष्ट्र  बनना होगा ! और हाँ,  फिर पूछ रहा हूँ- कहीं किसी और मजहब का ऑफर तो नहीं पकड़ा न ! पहले कोई नील आर्म स्ट्रॉन्ग और बज एल्डरिन आए थे ! वैसे तो पहले पूरा ब्रह्मांड सनातनी था ! तलवार के डर से बीच में कुछ लोग फिसल गए थे ! तो क्या हुआ, अब घर वापसी कर लो  ! ऐसा कुछ हो  गया हो तो बता देना, संपूर्ण शुद्धीकरण के लिए तुलसी पत्र, गंगाजल और गौमूत्र की  कोई  कमी नहीं है l