Saturday, 28 January 2023

(व्यंग्य भारती) "गुड मैन बनाम बैड मैन"

(व्यंग्य भारती)

     'शरीफ आदमी'- 'बदमाश आदमी'  
             (गुडमैन बनाम बैडमैन)

           आज सुबह पड़ोस के वर्मा जी के घर से  केएल सहगल की आर्तनाद करती आवाज आ रही थी, -  जब दिल ही टूट गया,,, तो जी के क्या करेंगे- ! मैंने यह सोचकर चैन की साँस ली, कि शायद वर्मा जी ख़ुदकुशी करने वाले हैं  !  फिर भी कन्फर्म करने के लिए मैंने उनसे पूछ लिया,-  ' लगता है कि विगत चुनाव परिणाम ने आपको ख़ुदकुशी की प्रेरणा दी है '! वो गुस्से में बोले, - 'अब लोगों में नैतिकता नहीं रही ! मोहल्ले भर के वोट दिलाने के बदले में प्रत्याशी ने मुझे र एक 'एसी' देने का वादा किया था ! वोट ले लिया , अब नेता फ़ोन ही नहीं उठा  रहा,- बैडमैन कहीं का- !' 
    मैं सोचने लगा कि दुनियां में बैड मैन ज़्यादा हैं या गुडमैन ? जवाब सब जानते हैं ! कलियुग में पापियों ने नैतिकता की शॉल लपेट रखी है ! हर गुनहगार बेगुनाह को उपदेश देने में लगा है, - 'पाप का रास्ता नर्क का गेट पास है -'! झूठा आदमी सत्यवादिता  की कोचिंग खोले बैठा है, - ' सत्यमेव जयते ! सतयुग लौट आया है  -'!  बलात्कार की सजा काट रहा बाबा जमानत पा कर दुबारा आश्रम में अंध भक्तो को समझा रहा है, - ' मोह माया हमें पथभ्रष्ट करते हैं ! इन्हें घर में नही रखना चाहिए ! अत : अपने घर की 'माया' को यहां सत्संग में लाया करो - '! जेबकतरा  पुलिस  को  बता  रहा है,  - ' बस में बहुत भीड़ थी, मुझे अपनी जेब कट जाने की फिक्र लगी थी , मैने अपनी समझ कर जब हाथ डाला तो पता चला कि वो किसी और की जेब थी -! सरासर भीड़ की गलती थी, मेरी नहीं -'! शहर में दंगा कराने वाला नेता डिबेट में  प्रवचन दे रहा है ,- ' हमारी सोच- विश्ववत कुटुम्बकम -वाली होनी चाहिए ! सत्ता और सुन्दरी के शुद्धिकरण मेें  लगा टेबल बाबा चरित्र पर नया तर्क दे रहा है,-' उसे पाप नही शुद्धिकरण कहिए -'! 
    विडंबना देखिये ,  बैडमैन पर लगाम लगाने के लिए कानून बनाए गए, लेकिन चंगुल में फंसता अक्सर गुडमैन है ! जुडीसरी  कहती  है  कि - सौ गुनहगार बेशक छूट जाएं, पर किसी गुनहगार को सजा न मिले !  (जुडिसरी ऐसा क्यों कहती है, मुझे नहीं मालूम !)  इसी सोच के चलते अक्सर गुनहगारों को जेल में ऑक्सीजन मिल जाती है,और बेगुनाह शख्स दस  साल बाद 'बाइज्जत' बरी होता है ! ( उसके  'बा इज्जत'  बरी होने के पहले घर के खेत और गहने बेइज्जत लोग हड़प चुके होते हैं !) गुडमैन के लिए जेल नर्क है और बैडमैन के लिए स्वर्ग ! ऐसा स्वर्ग जहां वो अपराध में डिप्लोमा लेता है !जेल में बैठा बैडमैन शासक होता है और गुडमैन उसका सेवक ! कुछ बड़े बैडमैन  जेल से ही अपनी सल्तनत और व्यापार चलाते हैं ! इसलिए महापुरुषों ने कहा है कि किसी भी बैडमैन ( पापी) को कभी बैडमैन नहीं कहना चाहिए ,  क्या पता  अदालत  कब उसे 'गुडमैन'  मान  कर  बरी कर दे!  ( यक़ीन नहीं तो सतयुग का केटलाग देख लो  ! तभी तो  गांधी जी ने  साफ साफ कहा  है  कि -  '' पाप से नफरत करो- पापी से  नहीं' - ! क्या पता पापी कब  'संत अंगुलिमाल' साबित हो जाये -!  संतों की इस वाणी का मर्म  सिर्फ बाबा रामरहीम समझते हैं  या  फ़िर हमारी भारतीय पुलिस !
     जब  कभी  दुर्भाग्य से  कोई 'गुडमैन' पुलिस थाने के  चक्कर में फंसता है, तब उसे मुहल्ले का बैडमैन ही  याद आता है ! क्योंकि पूरे मुहल्ले में वहीं एक है जो पूरे आत्मविश्वास के साथ थाने में घुस सकता है ! गुडमैन तो ख्वाब में भी थाने का फोटो  देख  ले  तो  पसीना पसीना हो जाता है !  पुलिस जानती है कि 'बैडमैन' ही  गुडमैन से पेमेंट  करवा सकता हैं ! वर्ना गुडमैंन तो  पेमेंट की जगह पुलिस को अपना दुखड़ा सुनाने लगेगा,- 'दो महीने से पेंशन भी नही आयी, बस से जाने के पैसे भी जेब में नहीं बचे- ! मुझे मुफ्त में जाने दो, घर में राशन के नाम पर सिर्फ सत्तू रखा है ! तुम को रक्खे राम तुमको अल्लाह रक्खे-'!
       युवा महिलाओं को जिन्न खब्बीस और प्रेत से मुक्ति दिलाने वाले बाबा 'कोरोनाशाह' बंगाली युवा महिलाओ के पीठ पर देर तक हाथ फ़ेर कर जिन्न और प्रेत से मुक्ति  दिलाते हैं ! (कुछ बंगाली बाबा तो महिलाओं के कूल्हे पर हाथ मार कर ही  प्रेत भगा देते  हैं !) कमाल तो ये है पीड़ित महिला को भी  पता नहीे होता  कि जिन्न ने उसके जिस्म में कहां कहा  ठिकाना बनाया है !   'अतृप्त' आत्माओं को परम शांति देने वाला ' कालाजादू' का  सलीका बैडमैन  के अलावा किसी गुडमैंन को आता भी  कहाँ  है  !
      'गुडमैन' अनैतिकता और नाजायज कमाई के खिलाफ है, इसलिए मोहल्ले में अकेला है ! बैडमैन के साथ समाज खडा है !उसकी अप्रोच ऊपर तक है ! गाँव की पंचायत में उसकी उपस्थिति से  फैसले होते हैं !  गाँव की शादी मे  मैंने देखा है कि लगभग हर गुडमैन अपने घर में होने वाली शादी में बैडमैन की उपस्थिति ज़रूरी समझता है ! बैडमैन  की आवभगत मे गुडमैन खुद भी मौजूद होता है ! गुडमैन मुस्करा कर बैड मैन का आभार व्यक्त करता है,- ' आपके आने से शादी की शोभा चार गुना बढ़ गई ! अगले चुनाव में मेरे परिवार का वोट आपको ही जाएगा-"!
     
      समय चक्र चल रहा है- गुडमैन कमा रहा है, बैडमैन खा रहा है! गुड मैन बच्चे की फीस भरने के लिए सूदखोर से पैसा माँग रहा है, बैडमैन का बेटा विदेश मे  पढ़ रहा है ! गुडमैन फावड़ा चलाता है, बैडमैन पेमेंट करता है! गुडमैन वोट देता है,बैडमैन आश्वासन देता है ! गुडमैन मेहनत करता है, बैड मैन बड़ा आदमी बनता है! गुडमैन के लिए सच बोलना धर्म  है, बैड मैन पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं है ! चरित्र की साफ-सफाई के लिए गुडमैन अक्सर 'बाबा बैडमैन' के आश्रम जाता रहता है ! (क्योंकि गुडमैन अपने 'अज्ञात' पापों से बहुत भयभीत रहता है ! ) वो डरा हुआ है कि कहीं अज्ञात पाप उसे स्वर्ग से वंचित न कर दें !

     गुडमैन ने दुनियाँ में डरने के लिए ही जन्म लिया है और बैडमैन ने डराने के लिए ! गुड मैन वोट देकर  4 जून के इन्तेज़ार में सूख रहा है, और बैड मैन आने वाली सरकार में मिलने वाले सरकारी ठेकों की जुगाड़ कुंडली बना रहा है ! गुडमैन 5 किलो अनाज, सुचरित्र, सुशासन, सतयुग और  स्वर्ग को लेकर चिंतित है  और बैडमैन सपरिवार स्विटजरलैंड में छुट्टियों बिता  रहा  है  !

             भाग्य चक्र देखिये -  गुडमैन घर का गेहूं बेंच कर तीर्थ यात्रा पर जा रहा है, और बैडमैन बैंक लूट कर विदेश यात्रा पर !!
                  ( ,,,,,सुलतान 'भारती' ,,,,,,)

   

Tuesday, 24 January 2023

(व्यंग्य भारती) वेलेंटाइन डे हंगामा है क्यूं बरपा !

                (व्यंग्य भारती)

       वेलेंटाइन डे - बनाम रक्षा बंधन 

          अब क्या बताऊं कि फरवरी आते ही दिल पर क्या गुजरती है!  31 जनवरी की सुबह ही मेरे दिल ने मुझसे पूछ लिया, " चौदह फरवरी को क्या करोगे"?
          'अभी तो पंद्रह दिन बाकी हैं, क्यों ?'
    " बाद में बताऊंगा, फरवरी में क्या करोगे?'
  "अच्छा हुआ याद दिला दिया! सबसे पहले जूता सिलवाना है नए तल्ले डालवाना है! '
दिल ने दांत पीसते हुए बददुआ दी,-' सत्यानाश हो तुम्हारा, ऊपरवाले ने मुझे किस शख्स की बॉडी में फिट कर के भेज दिया , फरवरी में भी फकीरी कर रहा है !'
       " क्यों क्या हुआ ! काहे स्पेनिश सांड की तरह भड़क रहे हो?'
" और क्या करूं! दिल तो कहता है कि सुसाइड कर लूं, पर ऊपर से सजा काटना लिखा है, छुटकारा नहीं ! फरवरी के बारे में तुम्हें कुछ भी याद नहीं?"
     ' अरे तो मिर्च की तरह सुलगने से अच्छा है कि बता दो न !'
   " बता बता के पक गया, दो हजार बीस के बाद से तुम्हारा दिमाग़ क्वारेंटाइन हो गया लगता है.! लेखक होकर कैसे भूल सकते हो कि फरवरी में वेलेंटाइन आता है "!
      " हां तो तुम्हे वेलेंटाइन से क्या लेना !"
  " वेलेंटाइन का सिर्फ और सिर्फ दिल से लेना देना है, किसी जूते से नहीं ! दिल कभी इतना नहीं गिर सकता !" 
      " जूते को अंडर इस्टीमेट मत करो ! कई मायनों में जूता दिल से ज्यादा वफादार होता है"!
    " वो कैसे "?
" जूता कितना भी घिस जाए, कभी शिकायत नहीं करता, और एक तुम हो कि साठ साल के बाद भी वेलेंटाइन के इन्फेक्शन से मुक्त नहीं हो ! इस उम्र में कैरेक्टर का घुटनों के नीचे आना ठीक नहीं है"!
    " दिल और जूते में काफी समानता भी होती है, मसलन, दोनों को लोग बिना ज़बान का समझते हैं।दोनों के लिए ड्यूटी बेलगाम है। आराम तभी है जब जूता फट जाये और दिल फेल हो  जाये "। 
       "कहां से कहां चले गए ! बात वेलेंटाइन की चल रही थी, तुमने दिल पर नींबू निचोड़ दिया है। "
 दिल ने चेतावनी दी, -" आखिरी बार समझा रहा हूं कि अभी बैरागी मत बनो ! मैं तमन्नाओं से बंजर बॉडी मे नही  धड़क सकता "।
    तभी चौधरी आ गया,-" उरे कू सुन भारती ! कल ते चौदह फरवरी तक घर में रहना सै तमै ! पास वाड़े पार्क में  वेलेंटाइन के धौरे मत नै जाना "!
        " मैं किसी वेलेंटाइन को नहीं  जानता!"
   " अंदर ते लार टपक रही थारी, बाहर ते स्वामी रामदेव बना बैठो सै "!
      " मेरी उम्र साठ साल हो गई है !" 
" पर  तेरो कैरेक्टर घना गीला सै, ध्यान ते सुन ले! भनक लगी है अक वेलेंटाइन आने वाड़ी सै ! कदी उतै पार्क की झाड़ियन में वेलेंटाइन के गैल तू बरामद होया, ता फिर मैं कछु न  कर सकूं "!
     " मेरा बसंत जा चुका है और वेलेन्टाइन में मेरी कोई आस्था नहीँ है "!
    "अच्छा ! तो  पिछले साड़ पार्क मे क्यों बरामद हुआ हा, एक कम उमर की वेलेंटाइन के गैल "!
    " तौबा तौबा ! किसने कहा "!
" वर्मा जी ने "!
     " ओह अब समझा ! दरअसल इस  बार  वो  मुझे बुद्धा गार्डन चलने की  सलाह दे रहे थे, मगर मैंने  उन्हें समझाया कि चौधरी वेलेंटाइन के सख्त खिलाफ है, पर  वर्मा जी ने उल्टे मेरे कैरैक्टर का सत्तू बना दिया "।
    नाराज होने की जगह चौधरी पूछ बैठा "भारती, वेलेन्टाइन इतै भारत में  क्यूँ  हांडने आ  ज्या ?"
     " ताकि हमारी सभ्यता और संस्कृति कू खराब  कर सके "!
      "वेलेंटाइन ते किस तरह संस्कृति ख़राब हो ज्या ! मोय समझा दे "।
    " इतना तो मुझे नहीं मालूम! मैं तो जानता था कि तुम्हें पता है तभी विरोध करते हो "!
 " मुझे बताया गया कि वेलेंटाइन घनी बड़ी बीमारी सै, बर्ड फ्लू  अर  स्वाइन फ्लू की  तरह! !"
     "बस  इतना समझ ले  कि इस   बीमारी को प्यार का नाम देकर हमारी  नई पीढ़ी को  बरगलाया जा रहा है ! ये हमारी युवा पीढ़ी को अपनी परम्परा और तहजीब से भटकाने  का सांस्कृतिक षड्यंत्र है "!
      " अर  नई पीढ़ी नू कह रही  अक  वेलेन्टाइन के गैल  झाड़ी में बैठना  अभिव्यक्ति  की आजादी सै ! यू आज़ादी कद मिली देश कू ?"
      ' बहुत सी चीजें हम खुद लेेते हैँ, ये अभिव्यक्ति की आजादी भी उसी मे से है ! इस  कटेगरी मे अधिकतर पश्चिम से बहकर आया हुआ कचरा ही होता है।  इस अभिव्यक्ति की आजादी ने हमें  बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू,नंगापन,एडस आदि जाने कितने 'उपहार' दिए हैँ! पहले गाँव के अंदर फरवरी में बसंत आता था, गाँव में मनरेगा आता है और शहर में   वैलेंटाइन ! पहले गाँव के बुजुर्ग हुक्का पीते थे, अब नई पीढ़ी हुक्का पार्लर जाकर संस्कार का सुट्टा लगा कर गाती है, - पापा कहते हैं बड़ा काम करेगा-!"
     " कान खोल कर सुन ले, इस  काड़ोनी मे अभिव्यक्ति की आजादी अर् वेलेंटाइन दोनों कू     घुसने न दूँगा '!
          चेतावनी देकर चौधरी चला गया ! 
      आज बारह फरवरी है, पार्क की झाड़ियां में  धर्मयोद्धा त्रिशूल से टटोल कर जांच  रहे हैं  कि कहीं संस्कार पर  मट्ठा डालने वाले छुप कर बैठे तो नहीं ! 'वेलेन्टाइन जोड़े' के बरामद होते ही शुद्धीकरण शुरू ! प्रेमी को  प्रेमिका द्वारा राखी बंधवा कर भाई बहन के  पवित्र बंधन में बांध देने की तैयारी है ! इस से वेलेंटाइन का  इंडेक्स गिरेगा और हमारी सभ्यता तथा संस्कृति का  फाइबर बढ़ेगा  ! इस अनुष्ठान से देश एक बार फिर विदेशी षड्यंत्र से सुरक्षित होकर विश्व गुरु होने की दिशा थोड़ा आगे बढ़ जायेगा !

                    14 फरवरी के सुर्यास्त होते ही ये संस्कृतिक धर्मयुद्ध खत्म हो जाएगा और समस्त धर्मयोद्धा अगले फरवरी आने तक शीत निद्रा मे चले जायेंगे !!





Sunday, 1 January 2023

(व्यंग्य भारती) ,,,, कि मैं कोई झूठ बोल्या !

(व्यंग्य भारती)

,,,,,, कि मैं कोई झूठ बोल्या !!

       मैं कैसे मान लूं कि झूठ में प्रोटीन नही होता !आप कहीं भी खड़े होकर देख लो, झूठ हंसता मुस्कुराता खुशहाल नज़र आएगा, और सच दयनीय होकर अपनी मार्केटिंग करता हुआ, सत्यमेव जयते - को  ऑक्सीजन संतोष प्राप्त करेगा !झूठ घातक हो कर भी कितना मधुर नजर आता है ! सिगरेट की दुकान देखिए, दुकान से बड़ा उसके विज्ञापन  का  बोर्ड होता है, ' ज़िंदगी के शाही मजे लीजिए -'! उसी सिगरेट के पैकेट पर सच का विज्ञापन इतना बारीक होता है कि चश्मा लगाकर भी न पढ़ा जाए - सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है -! सामाजिक जिंदगी में झूठ को शाही मज़ा साबित करने के लिए सच को उपवास पर रखना पड़ता है ! सच जितना, मरियल होता जाएगा , झूठ का विटामिन प्रोटीन और फाइबर बढ़ता जाएगा,यही व्यवस्था का विधान है!
             सच का साथ कोई दे तो कैसे दे, सच कड़ुआ होता है, और झूठ कलाकंद! विडंबना देखिए ! सफेद रंग को सादगी, सच्चाई और गरिमा का प्रतीक बता कर उसे झूठ के हवाले कर दिया गया, - " सफेद झूठ"! तब से झूठ सफेदपोश हो गया और सच संदेहास्पद ! सच को शक और संदेह के दायरे में खड़ा कर सच के पैरोकारों को अदालत में कुरान और गीता पकड़ाई गईं, - पवित्र किताब छूकर कहो कि जो कहोगे सच कहोगे- सच के अलावा कुछ नहीं कहोगे -! जज पुलिस और वकील तीनों सच की नाकेबंदी से संतुष्ट हैं ! अब झूठ के हक में फैसला आना तय है और धृतराष्ट्र मीडिया इसे सत्यमेव जयते बताएगा !
         सच का साथ - बहुत कठिन है डगर पनघट की ! सच को कृषकाय बना कर व्यवस्था ने झूठ को कलेजे से लगा लिया !अब सच सिर्फ नेता,नारा और नोटिस बोर्ड तक सीमित है और झूठ ईश्वर की तरह सर्वत्र विराजमान सर्व शक्तिमान हो चुका है ! धर्माधिकारी ने सफेद चादर ओढ़ कर झूठ को धंधे में उतार लिया है ! बाबा कोरोना शाह बंगाली अपने ग्राहक को झूठ के तिलिस्म मेंजकड़रहे हैं - ' घर में जिन्न, खबीस और ब्रम्हराक्षस इंट्री ले चुके हैं! छोटी बहु को किसी दिन यहां लेकर आओ,उससे कुश्ती लड़नी होगी -'!
      ' बहु से ? '
' बहू पर आशिक हो चुके जिन्न से '! 
    सच का लंबा तिलक लगा कर सड़क के किनारे बैठा ज्योतिषी अपनी छोड़ दूसरों की कुंडली से शनि दूर करता है ! उसने कठिन परिश्रम कर के अपने पालतू तोते को भी झूठ बोलना सिखा दिया है ! ग्राहक देखते ही तोता चिल्लाता है,- 'कच्ची घानी! कच्ची घानी -'!
कस्टमर घबराकर पूछता है, -' महाराज ! इसने मुझे देखते ही कच्ची घानी क्यों कहा? मुझे सरसों समझ रहा है क्या !!'
      " तोते ने तुम्हारा मस्तक देखते ही तुम्हारी ग्रहदशा पढ़ लिया है! हालात के कोल्हू ने तुम्हें सरसों समझ लिया था !पता नहीं अब तुम्हारे अंदर कुछ तेल बचा है या नहीं -! खैर तुम बिल्कुल ठीक जगह आए हो ! तीन बज गए अभी तक बोहनी नहीं हुई ! काहे का हैप्पी न्यू ईयर '!
      मां बाप अपने बच्चे को बचपन में ही कान में ठूंस देते हैं, - सदा सच बोलो -! स्कूल में "मास्साब"
छड़ी से सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए चेतावनी देते थे, - झूठ बोले तो खाल उधेड़ दूंगा -! आगे कुआं पीछे खाई ! डिग्री लेकर नौकरी ढूंढने निकले तब पता चला कि झूंठ के बारे में कितना मिसगाइड किया गया था ! संस्थान का चपरासी तक झूठे कागज़ात के भरोसे भर्ती था ! तब मेरे समझ में आया कि कॉरपोरेट ऑफिस से  एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के ऑफिस तक दरवाज़े पर ये क्यूं लिखा होता है, - बिना "इजाज़त" अंदर आना मना है- ! ( 'इजाज़त' का असली मतलब टेंडर पाने वाला ठेकेदार बहुत अच्छी तरह जानता है। ) हम जैसे अनाड़ी गांव से शहर आते वक्त आत्मनिर्भर होने की जल्दी में डिग्री लेकर आ गए, लिफाफे में "इजाजत" लाए ही नहीं !
    धंधे में सच कितना घातक होता है, ये बिखारी और दूध बेचने वाले अच्छी तरह जानते हैं! वो कभी सच के नजदीक नहीं जाते!  एक कामयाब भिखारी के पास पेशेंस के अलावा कुछ भी सच नहीं होता ! उसकी दर्द में रची बसी आवाज़, वेशभूषा,बदन पर पट्टी, घायल जानवर जैसी कराह और कृत्रिम आपदा आहत आत्मा,,,,! ज्यादातर भिखारी का प्रोफेशन  झूठ के मजबूत कवच मे सुरक्षित और कामयाब है ! एक बार तो मेरा सामना ऐसे मास्टरपीस भिखारी से हुआ कि उनकी दर्द भरी आवाज सुनकर मैंने अपना स्वेटर उतार कर उसे दे दिया ! वो तो भला हो उसके प्रतिद्वंदी भिखारी का, जिसने मुझे तुरंत बताया ,-' शाम तक वो स्वेटर बेच देगा ! उसके पास इतना पैसा है कि तुम्हारे जैसे दस पत्रकार को दिहाड़ी पर रख ले! आपको सही गलत की पहचान नहीं है "!
      ज्यादातर प्राइवेट डॉक्टर का धंधा झूठ पर टिका है ! प्रिस्क्रिप्शन लिखने की टेबल पर वो 'सत्यमेव जयते ' की तख्ती लगा कर झूठ का धंधा
करते हैं! ऐसा करने से अपराध बोध नहीं होता और कॉन्फिडेंस मजबूत रहता है। सरकारी डॉक्टर बेचारा सैलरी को ही , - तुम्हीं हो माता पिता तुम्ही हो-. समझता है , इसलिए वो गरीब मरीजों को नाशवान और युवा नर्सों को पकवान समझने लगता है ! दोनों  सुविधाओं   से  महरूम  हॉस्पिटल  की   "अव्यवस्था" से क्रोधित डॉक्टर कभी कभी मरीज के पेट में कैंची और तौलिया छोड़ देता है ! 
          हरि अनंत हरि कथा अनंता,,,,! थानों के दरवाजों पर लिखा होता है,शांति, सुरक्षा और न्याय! लोग बड़े टूटे मन से पढ़ कर आगे बढ़ जाते है ! उन्हें तीनो शब्दों में छुपे झूठ पर यकीन है! पांचू सेठ ने बरसों धनिया और हल्दी में अपने पालतू घोड़े की लीद मिला कर बेचा था! सावधानी इतनी कि घोड़े को बरसों बाद भनक लगी ! एक दिन वो इस दिव्य मसाले के बारे में एक कस्टमर को समझा रहे थे कि घोड़े ने विरोध में हिनहिनाना शुरू कर दिया! ग्राहक बोला,- ' घोड़ा नाराज़ लगता है-'
     पांचू सेठ मुस्कराए, -'  इस धनिया मसाला से मेरे घोड़े का जाने क्या रिश्ता है कि जब भी कोई ग्राहक इस दिव्य धनिया के गुण और धर्म पर  शक करता है, घोड़ा नाराज़ हो जाता है--' ! 

   ग्राहक ने फौरन धनिया मसाला खरीद लिया !!



       

Monday, 26 December 2022

(व्यंग्य भारती) "फिर भी,,,,, हैप्पी न्यू ईयर"

(व्यंग्य भारती)

"फिर भी हैप्पी न्यू ईयर "

          आप सबको हफ़ता भर पहले कैसे मालूम हो जाता है कि आने वाला साल हैप्पी होने जा रहा है ? हम बाइस साल की उम्र तक गांव में में रहे ! इस दौरान कभी नए साल को हैप्पी होकर आते नहीं देखा ! एक जानवरी को भी दुखीराम हैप्पी होने की जगह रोआंसे ही नज़र आते थे, " का बताई भइया  ! गेहूं तौ ठीक है, लेकिन सरसों मा "माहू" लाग गवा"!  कमबख्त माहू को भी यही खेत मिलता है, हर साल दुखीराम के खेत में घुस जाता था ! बगल पांचू लाला की दूकान में माहू कभी नहीं लगा ! पांचू लाला तांगा लेकर गेहूं खरीदने गांव गांव घूमते थे, जब वो लाला से सेठ हो गए तो  गांव खुद पांचू लाला के पास जाने लगा ! दुखी राम की लाइफ में नया साल कभी हैप्पी नहीं हुआ ! उसकी और पांचू सेठ के घोड़े की कुंडली एक जैसी थी ! दोनों अपनी अपनी दुर्भाग्य को ढो रहे थे ! घोड़ा पांच साल में मरा और दुखीराम पचास साल में ! सुविधा भोगी संत और विचारक कहते हैं कि परिश्रम करने से आदमी महान हो जाता है ! दुखीराम दिन के बारह घंटे फावड़ा चला कर भी पचास साल में महान नहीं हो पाए, पांचू सेठ विधवा आश्रम खोल कर पांच साल में महान हो गए! लगता है, आदमी होने से महान होना कहीं ज़्यादा आसान है!
    ज़माना कितना बदल गया, लोग उस  सांता क्लाज को भी लूट लेते हैं, जो कभी नियति के हाथों लुटे आदमी के आंसू पोछता था । फरवरी 2020 से कोरोना स्वच्छ भारत आभियान में लगा हुआ है ! तब से बुद्धिलाल जी फेसमास्क लगाकर गुटखा खाते हैं ! वो एक कवि हैं, कोरोना काल कवियों के लिए किसी पतझड़ से कम पीड़ादायक नहीं रहा !    'दो गज की दूरी ' मास्क ज़रूरी - का अर्थ अब जाकर समझ में आया ! बहादुर शाह ज़फ़र का एक शेर है,- दो गज जमीन भी न मिली कूचे यार में '- । दो गज का नारा "कब्र" (मौत) के लिए है ! कोरोना कहता है - मास्क ख़रीद कर पहनो नहीं तो कब्र में जाना तय है -! मौलाना साहब ये नहीं बता रहे कि कोरोना से वीरगति को प्राप्त होने पर जन्नत मिलेगी या दोजख ! कोरोना को कॉरपोरेट देवताओं ने मास्क का ब्रांड एंबेसडर बना कर अरबों डॉलर कमाए ! ज़िंदा लोग सदियों से मुर्दों का कारोबार संभालते आए हैं ! बहुत से विद्वान तो कोरोना को पूज्यनीय बनाना चाहते थे, पर इस असमंजस में आस्था दिग्भ्रमित थी कि 'वो' स्त्रीलिंग में आता है  या पुलिंग में ! ताली,थाली और गाली में से जाने उसे क्या सूट करता है !! 
        सही बोलूं तो कोरोना जैसी महान उपलब्धि के सामने 'मंदिर मस्जिद' का राग भी छोटा पड़ गया था ! इससे दुखी होकर कुछ महापुरुषों ने कोरोना का पीछा किया और  ' जमातियों' में उनका डीएनए ढूंढ लिया ! आंख और मुंह से गांधी जी का बंदर बन चुकी देश की मीडिया को भी मरकज और जमाती साक्षात कोरोना बम नज़र आने लगे थे !
जमातियों की शक्ल में कुछ लोगों को कोरोना के फूफा नजर आने लगे थे। कोरोना लाइलाज़ था, लेकिन फूफा जी का इलाज था ! पुलिस जमातियो को पकड़ पकड़ कर थाने ले जाने लगी! फिर पुलिस वालों ने गुहार लगाई कि फूफा जी बिरयानी मांग रहे हैं ! बिरयानी खिलाई गई तो पुलिस वालों ने बयान दिया कि फूफा जी थाली में थूक रहे हैं !  (गमीमत थी कि वो थाली में छेद करते नहीं पाए गए! ) सभ्य पुलिस वाले अतिथि देवो भव - का पालन करते हुए बिरयानी खिला रहे थे, और जनता घरों में कैद आर्तनाद कर रही थी, - ' कोरोना  तुम  कब जाओगे' ! 
        पिछले तीन साल भुगत चुका हूं, अब मैं किसी को नए साल के लिए - हैप्पी न्यू ईयर - का अभिशाप नहीं देने वाला ! साल 2021 में मुझे लोगों ने हैप्पी न्यू ईयर की बद्दुआ दी थी, 14 अप्रैल को कोरोना ने मुझे धर दबोचा , उस दिन पहला रोजा था ! खैर, ऑक्सीजन लेवल 80 और 83 के बीच पींग मारता रहा मगर मैं शायद अस्पताल न जाने की वजह से जिंदा बच गया ! या फिर इसलिए, क्योंकि कोरोना को जब पता चला कि मैं हिंदी का लेखक हूं तो वो खुद मुझे छोड़ कर चलता बना ! सोचा होगा, - हिंदी के लेखक को मरने के लिए कोरोना की जरूरत नहीं है ! जाते  हुए  ज़रूर  पाश्चाताप   किया  होगा, -' हम से भूल हो गई, हम का माफी दई दो , गलत घर में दाखिल हो गया यजमान '- !! 
        इधर सांताक्लॉज़ के साथ ट्रेजडी हो गई !नए साल से ठीक 6 दिन पहले हिरणों की स्लेज गाड़ी में बैठ कर 'जिंगल बेल' गाते हुए बस्ती की ओर जा रहे थे कि रास्ते में पुलिस ने रोक लिया ' कित जा रहो ताऊ?"
     " बस्ती में बच्चों को तोहफ़ा देना है और उनके साथ जिंगलबेल  गाना है "!
  " घनी जल्दी है  के !  थोड़ा 'जिंगल बेल' मन्ने भी दे दे।     
         " मैं समझा नहीं "?
    पुलिस वाले कोgu" समझदारी ने परे कर, अर नु  बता- ये गायों कू ठा कर कितै  जा रहो?"
           गाय का नाम  सुनते ही सांता क्लॉज़ कांप उठा-"गाय! मेरे पास तो बछड़ा भी नहीं है!"
     पुलिस वाले ने हिरणों की ओर उंगली उठाते हुए कहा-' तो फिर ये क्या है! आंखों में धूल झोंकते हो! के  करूँ थारा , "जिंगल बेल"  भी देने कू  त्यार न दीखे ताऊ -"!
     सांता थर्रा उठा ! बस्ती दूर और एनकाउंटर नज़दीक नजर आने लगा ! सांता ने हाथ जोड़ लिया- ' आप अफसर हैं, हिरण को  गाय भी साबित कर सकते हैं "
    " तो फिर जल्दी कर  ताऊ,  ' जिंगल बेल' दे दे-'तुष्टिकरण'  लेले ! ताउ समझा करो-'!
     मेरी समझ में नहीं आता कि नए साल के आने में  मुबारक जैसी क्या चीज होती है ! हमारे देश में तो मुसीबतों का आना जाना लगा ही रहता है, इसमें हैप्पी होने की क्या बात ! कभी बर्ड फ्लू तो कभी स्वाइन फ्लू ! अब तो हम आपदा को अवसर बनाने में विश्वगुरु होने के करीब हैं ! हमीं हैं जो बर्ड फ्लू से ग्रसित मुर्गे को  खाकर प्रोटीन प्राप्त करते हैं ! गनीमत है कि कोरोना कभी सशरीर सामने नहीं आया , वरना झुरहू चच्चा महुआ की दारू के साथ "चखना" के तौर पर नया प्रयोग कर डालते ! 
        राहुल गांधी जैसे ही राजस्थान से दिल्ली की ओर चले, वैसे ही मीडिया ने चीन से भारत की ओर पदयात्रा करते कोरोना को देख लिया ! वो भी भारत जोड़ो के समर्थन में चल पड़ा है! मानसून परख कर दूरदर्शी दुकानदारों ने  फेसमास्क से लेकर  अर्थी का सामान तक स्टॉक करना शुरू कर दिया है ! पांचू सेठ पंडित भगौतीदीन से कन्फर्म करने के लिए पूछ रहे हैं, - पंडित जी, आपका जंत्री क्या कहता है, अफवाह है या सचमुच कोरोन चल पड़ा है?' पंडित जी जानते थे कि सेठ को कौन सी चिंता खाए जा रही है ! उन्होंने फ़ौरन गंभीरता ओढ़ ली,- 'दुखद सूचना है यजमान ! कोरोना की कुंडली से शनि की साढ़े साती दूर हो चुकी है! मंगल खुद लालटेन हाथ में लेकर कोरोना को इधर आने का रास्ता दिखा रहा है ! देख लेना, इस बार गेहूं में बाली की जगह कोरोना ही नज़र आएगा ! नया साल मुबारक हो यजमान "!!

     इस "दुखद" भविष्यवाणी पर पांचू सेठ ने पहली बार पंडित जी को 11 रुपये की जगह  21 रुपए की दक्षिणा दी थी ! 
                                    Sultan bharti 
                                       (journalist )
 
          

Saturday, 24 December 2022

शायरी 1992

शायरी 1992         " तब्दीली"

ये  कैसी  रोशनी आने लगी  है!
अंधेरा  साथ  में  लाने  लगी है !!

नया  किरदार  देखा  बागबां का!
कली खिलने से डर जाने लगी है !!

धुआं है आग है नफ़रत तबाही !
नई  दुनियां नजर आने लगी है !!

कहीं मज़दूर की बस्ती जली है !
वो देखो चील मंडराने लगी  है !!

हमारी  मौत  पर  कोई  न रोया  !
नमी आंखों से उड़ जाने लगी है !!

बहुत हमदर्द है हाकिम हमारा !
हिफाजत लाश की होने लगी है

वफ़ा  खुद्दारी  ईमानो  हया अब!
ये दौलत कम नजर आने लगी है !!

सियासत की हया को देख कर अब !
तवायफ  को   शरम  आने  लगी है !!

सभी के वास्ते जो घर खुला था !
उसी पर बिजलियां गिरने लगी है !!
             

कोई "सुलतान" को अदना बना दे !
बुलंदी  खार   सी  चुभने  लगी  है !!

Monday, 19 December 2022

healthy heart

Healthy heart
Darood +११ baar " या कबी यो" +दरूद 

Sunday, 18 December 2022

(व्यंग्य भारती) शर्म इनको मगर नहीं आती

(व्यंग्य भारती)

"शर्म इनको मगर नहीं आती "

     अपने अपने तरीके से हर कोई आत्मनिर्भर होने में लगा है! लेकिन इस कालिकाल में उम्मीदों में बौर आने से पहले ही लसिया जाते हैं! जब कामयाब होने वाले कम हों और बेकारी के शिकार ज़्यादा, तो विरोध और विद्रोह में से कुछ भी हो सकता है! जहां संतोषम परम सुखम है, वो जगह क्रांति के लिए बंजर है ! क्रांति का अर्थव्यवस्था से भी गहरा नाता है ! रोटी की फिक्र आदमी को मेंदा से मस्तिष्क की ओर नहीं जाने देती ! धीरे धीरे आदमी पेट से सोचने लगता है ! ऐसी सिचुएशन में बहुमत के दिमाग को कुछ लोग हाइजैक कर नर्सरी बना लेते हैं ! अब वहां मनपसंद विचारधारा रोपी जाती है ! सर्वहारा वर्ग विचारधारा को ही गेहूं और धान समझकर आत्मनिर्भरता की ओर चल पड़ता है ! ऐसी नर्सरी का आविष्कार सबसे पहले कांग्रेस ने ही किया था, आज छोटे भाई ने संभाल लिया है!
रंग पर रिसर्च शुरु हो गया है !
       ये पहली बार है कि "रंग" बेशर्म नज़र आया है! कुछ लोग आहत होने वालों से पूछ रहे हैं कि अक्षय कुमार और मनोज तिवारी की फिल्मो से आस्था को इंफेक्शन क्यों नहीं हुआ था ! यहां तो फ़िल्म के नाम ( पठान) से ही आस्था आहत गैंग सड़क पर उतर आया  ! बुनियाद देख कर ही आत्मा आहत होने लगती है,ऊपर से जेएनयू में आस्था रखने वाली हीरोइन ! इस फिल्म को तो देखना भी महापाप है ! विरोध जायज है, जब इंडस्ट्री में कंगना जी जैसी संस्कारी और सात्विक विचार वाली हीरोइन साक्षात मौजूद है तो दीपिका को क्यों साइन किया गया ! किसने  ऐसी बेशर्मी की ! बहुत नाइंसाफी है यह! इसकी सजा मिलेगी ! ऐसे गानों को देख देख कर आठ आठ साल के बच्चे भी गुल्लक फोड़ कर फ़िल्म देखने भागेंगे ! ऐसे गानों से संस्कार को पाला मार सकता है !
         बायकॉट के विरोध में विपक्ष अड़ गया है, काहे बहिष्कार करें, अक्षय कुमार और निरहुआ के गाने का विरोध काहे नहीं किया । उस गाने में तो ज़्यादा वायरस थे , तब आस्था काहे नहीं आहत हुई ! अब तो आटा बेच कर फ़िल्म देखना है! फ़िल्म नहीं देखूंगा तो विपक्ष धर्म का पालन कैसे होगा ! फिल्म नहीं देखा तो दीपिका और शाहरुख के घर वाले भूखों मर जाएंगे । तुम्हारी आस्था को चोट पहुंच रही है,इधर मेरी आस्था को इसी गाने से फाइबर हासिल हो रहा है ! अब आस्था का ध्यान तो रखना होगा ! परिवार का ध्यान रखने के लिए 5 किलो गेहूं है न ! आस्था का ध्यान कौन रखेगा !  पहले तो लोग ही एक दूसरे की आस्था का ध्यान रखते थे ! तब वाली आस्था इतनी कुपोषित भी नहीं थी कि पीली धूप देख कर मुरझाने लगे !
         आज दोपहर होते होते आस्था आहत गैंग के वर्मा जी ने चौधरी के कान भर दिए! चौधरी सीधा मेरे पास आकर बोला, -" उरे कू सुण भारती ! कितै जा रहो आज फिल्मी छोरी के गैल"!
      " कौन छोरी?" 
" वही छोरी, जो पीला लंगोट बांध कर आस्था आहत कर रही है ! के नाम सै बेशर्म छोरी कौ "?
       " दीपिका पादुकोण"!
"घणी जल्दी याद आ गयो नाम ! कितै छुपा रख्या सै छोरी नै!!"
   " मैं शादीशुदा आदमी हूं, क्यों मेरी आस्था को आहत कर रहे हो?"
     "वर्मा नू बता रहो अक तू फिलम देखने कू तावला सै ?"
      " तौबा तौबा ! मैने आज तक तुम्हारे बगैर कोई फ़िल्म कभी देखी"?
   " नू बता, कूण सी फिलम आई है " बेशरम रंग" ।
       " गाना है, फ़िल्म नहीं "!
" गाने ते आस्था आहत हो रही, या फिल्म ते?"         "हीरोइन ने जो लंगोट बांध कर गाना गाया है, उस के रंग से ! अगर लंगोट का रंग हरा होता तो आस्था नॉर्मल होती!"
        चौधरी का दिमाग़ घूम गया, - " पर हीरोइन कू लंगोट पहनने की के जरूरत थी ! बाकी कपड़े चोरी हो गए  के "?
      चौधरी का सवाल जायज़ है! बात रंग की छोड़ दें तो सवाल है ये है कि हीरोइनों के बदन पर कपड़े सिमट क्यों रहे हैं? हालत ये है कि सूट सलवार और साड़ी जैसे गरिमापूर्ण भारतीय परिधान लगभग विलुप्त हो गए ! इस नंगेपन से हमारी आस्था क्यों नहीं आहत होती ! बेकारी और मंहगाई से आहत होने के लिए पब्लिक को लावारिस छोड़ दिया गया है ! प्रशासन कभी आहत नही होता ! करप्शन,सांप्रदायिकता और नफरत की आंच भी उनकी आस्था तक नहीं जाती । कितनी मोटी खाल है !! "बेशर्म रंग" कितना गाढ़ा चढ़ा हुआ है किरदार पर ! ज़िंदगी से थपेड़े मारती अभाव,संघर्ष और गुरबत की लहरें कहीं किसी दिन अपना रास्ता न बदल दें! भूख और बेकारी की समस्या को समाधान चाहिए, शब्द नही।
           सोशल मीडिया के समर्पित योद्धा आग बबूला हैं! संस्कार और संस्कृति को बचाने की सारी जिम्मेदारी इन्ही के कंधो पर है ! पिछले आठ सालों में एक से बढ़कर एक  क्रांति आई है! कोराेना भले जनता के लिए लाभदायक न रहा हो, लेकिन कुछ लोगो ने उस बंजर आपदा में भी नफरत उगाने का अवसर पैदा कर लिया ! कोरोना से मरे बाप की अर्थी को कंधा  न  देकर भी इनकी आस्था कभी शर्मिन्द न हुई  !  संप्रदाय विशेष के कंधों पर बाप चिता पर जाता रहा और बेटा अर्थी ढोने वालों के थूक में कोरोना की नर्सरी ढूंढता रहा। गंगा में लावारिस बहते रिश्ते सहारा ढूंढते रहे और  बेशर्म लोग रंग में नफरत !

       कबीर की एक उलटबांसी थी, - बरसे कंबल भीगे पानी -! सच को झुठलाने और झूठ को पुनर्जीवित करने का इतना बड़ा समुद्र मंथन पहले कभी नहीं हुआ !!