Thursday, 23 June 2022

(व्यंग्य भारती) ,"नेता गिरा तराज़ू में "

"व्यंग्य भारती "

       "नेता गिरा तराजू में"

        मानसून घर से निकल चुका है! इधर मानसून निकला उधर एकनाथ शिंदे ने पिंजरा उठाया, बागी नेताओं को पिंजरे में डाला और मिल्खा सिंह की रफ्तार से सूरत निकल भागे ( नज़दीक में और कोई अभयारण्य नही नज़र आया!) जैसे ही 'गढ़ आला ' की खबर मिली, मीडिया मुगल सोहर गाने लगे, दुख भरे दिन बीते रे भैया, सतयुग आयो रे ! बाला साहेब वाला। हिंदुत्व लायो रे '! शिन्दे के इस महान् कृत्य पर छाती पीटने वालों के खिलाफ फेसबुकिया योद्धाओं की पूरी पलटन सोशल मीडिया पर उतर आई! महाराष्ट्र और रामराज के बीच की दूरी घटती देख सारे 'देवता' वरदान देने को आतुर थे ! 
       दिव्य मीडिया उद्घव ठाकरे के कर्मपत्र पर टिप्पणी कर रही थी,- ' महाराष्ट्र में कोरोना और कानून व्यवस्था दोनों की हालत खराब हो गई थी '!
उधर एकनाथ शिंदे ने सच्चे समाज सुधारक होने का परिचय देते हुए बयान दिया,- मैं महाराष्ट्र में बाला साहेब ठाकरे वाला हिंदुत्व लाना चाहता हूं "!
और क्या चाहिए! (इसके बाद विकास के लिए और कुछ बचता ही नहीं !) अज्ञातवास काट रहे पांडव प्रमुख मीडिया को बयान देने लगे, - सत्य परेशान हो सकता है, पर सिंहासन से दूर नहीं रह सकता! अब सतयुग आएगा कलियुग जायेगा -!!
     विपक्ष विलाप कर रहा है ! वह हृदय परिअर्तन को हॉर्स ट्रेडिंग कह रहा है! हृदय परिवर्तन पर इतनी हाय तौबा क्यों! ऐसा मानसून तो तुम्हें भी खूब रास आता था ! परिभाषा तो आपने ही सिखाई थी भ्राता श्री -समरथ को नहिं दोष गुसाईं-!
ये जो हृदय है न, i समर्थन के लिए काम, परिवर्तन के लिए ज़्यादा व्याकुल रहता है । अनुकूल मानसून पाते ही प्राणी की आस्था समर्थन के पलड़े से कूदकर  विरोधी  से  गलबहियां होकर गाने लगती है, - ' तुमसे मिलने को जी करता है रे बाबा -' अब चाहे मां रूठे या पापा यारा मैंने तो हां कर ली '!
     सियासत में हृदय परिवर्तन एक शाश्वत परंपरा है! पक्ष विपक्ष दोनों चुनाव के बाद तराजू लटका कर ऑफर वायरल कर देते हैं, ' खुला है मेरा पिंजरा आ मोरी मैना -'! मैना सूटकेस का साइज देखती है और आत्मा की आवाज़ से टेली करती है! आत्मा पर चढ़ी कार्बन की मोटी परत से आवाज़ आती है, - ' साक्षात गंगा स्नान का ऑफर है, स्वीकार कर ले !पाप धुल जाएंगे '-!! प्राणी का फौरन हृदय परिवर्तन हो जाता है, और एक घंटे बाद वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताता है, ". उस पार्टी में अभिव्यक्ति की आज़ादी का ऑक्सीजन लेवल बहुत कम था , सांस घुट रही थी ! अब ऑक्सीजन की मात्रा और आत्मसंतुष्टि दोनों में आत्मनिर्भर हो चुका हूं! गोवा है तो भरोसा है!"
         सोशल मीडिया यूनिवर्सिटी में चहल पहल बढ़ गई है । पक्ष विपक्ष के वीर विद्वान ज्ञान पंजीरी बांट रहे हैं! ज्यादातर विद्वान  महाराष्ट्र में कोरोना और कलियुग के लिए उद्धव ठाकरे को दोषी मान रहे हैं! कुछ सोशल मीडिया इतिहासकार कंगना रनौत के ऊपर हुए जुल्म को इस बगावत से जोड़ रहे हैं!. ऐसा लग रहा है किअगर अब भी बगावत न होती तो महाराष्ट्र गुफा युग में चला जाता ! शुभ मुहूर्त में हुए शिंदे के हृदय परिवर्तन से सत्य और न्याय का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो पाया, और बाला साहेब  वाले हिंदुत्व की वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ ! आगे  का काम  'मार्ग दर्शक'  महापुरुषों  का है !
     
     हृदय परिवर्तन हो चुका है, अब आत्मा परमात्मा से मिलने के लिए व्याकुल है! आत्मा ही स्वामिभक्ति या बगावत के लिए ज़िम्मेदार है। आत्मा ही हृदय परिवर्तन कराती है और आत्मा ही बगावत ! इतनेअपराध करने वाली आत्मा को न तो आग जला सकती है न सुनामी डुबा सकती है ! क्योंकि आत्मा तो अजर अमर है! प्राणी नश्वर है ।(इन्ना लिल्लाहे वा इन्ना इलैहे राजेऊन) जो नश्वर है उसकी कोई गलती नहीं, जो सारी खुराफात की जड़ है उस आत्मा का कोई दोष नहीं।

             क्या करें, आत्मा है कि मानती नहीं !!

       

Thursday, 16 June 2022

"नफ़रत के सलीब पर टंगा इंसाफ"

"अग्नि दृष्टि"

   "नफरत के सलीब पर टंगा भाईचारा"

        आखिर 'एक जुर्म' के दो मापदण्ड कैसे हो सकते हैं ! संविधान सम्मत सजा तो एक ही होनी चाहिए, बेशक गुनहगार किसी भी जाति या संप्रदाय का क्यों न हो ! सबके खून का रंग एक है तो नागरिक मूलभूत अधिकार और सुविधाएं भी सबके लिए एक जैसी हैं ! न्याय भी सबके लिए एक तरह का है । लेकिन लगता है कि न्याय पालिका,कार्यपालिका, विधायिका और ( अधिक तर) मीडिया की सोच और संवेदनाएं इस न्यायिक अधिकार से मेल नहीं खाती!
          नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल की जहरीली सोच और जबान ने पूरे देश और दुनियां मे बारूद छिड़क दिया है! सामाजिक और राजनैतिक रिश्तों की अग्नि परीक्षा शुरू हो चुकी है! चैनलों पर बैठे गैर जिम्मेदार लोगों ने आखों पर धृतराष्ट्र का चश्मा लगा लिया है ताकि सच से दामन बचा रहे ! नूपुर शर्मा और जिंदल के गुनाह पर चुप्पी और पत्थरबाजी पर तुरंत बुलडोजर की हिमायत करने वाले मीडिया महावीर मासूम लोगों के कत्ल पर भी मुंह सिले बैठे हैं! सचमुच प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ अपने सबसे बुरे संक्रमणकाल से गुजर रहा है।!
          देश से विदेश तक बवाल और नमाजियों पर ड्रोन की नज़र ! आस्था कही इतनी संवेदनशील कि प्रोफेसर रतनलाल को जेल के अंदर पहुंचा दे, तो,,,, वही आस्था कहीं इतनी कुपोषित हो जाती है  कि ' अल्लाहु अकबर' कीआवाज उठाने पर गोली,जेल और बुल्डजर का तोहफा दिया जाता है ! दूसरी तरफ,,,सच न बोलने की शपथ लेकर चैनल्स पर बैठे नफ़रत के तीरंदाज सिर्फ चारण बन कर रह गए हैं!
        और अब अग्निवीर ! चार दिन में खरबों रुपए की सरकारी  संपत्ति राख कर देने वाले भावी अग्निवीरो के 'मासूम गुनाह' देख कर बुल्डोजर कोमा में पड़ा है ! चैनलों पर बैठे जिम्मेदार वीर पुरुष इन "भटके हुए"."अपने बच्चों"  की घर वापसी के लिए घनघोर चिंतित हैं ! समझ में नहीं आ रहा है कि अग्निपथ के लिए कांग्रेस को किस तरह जिम्मेदार ठहराया जाए ! सच की बिल्ली देखकर कबूतर की तरह आंख बंद कर लेने वाला मीडिया आग में जलती रेल की जगह. कैमरा राहुल गांधी पर फोकस किए बैठा है ! राहुल गांधी का जुर्म जलती रेल से भी कहीं ज़्यादा बड़ा है !
        तीन दिन बाद अग्निवीर भरती के लिए खड़े मिलेंगे ! अग्निपथ पर चलकर अग्नि (कांड) कर चुके अनुशासित अग्निवीर प्रैक्टिकल में पास हो चुके है ! रहा उनके स्वर्णिम भविष्य का सवाल तो वो चार साल बाद देखा जायेगा।.( अभी से इस योजना में घुन तलाशना ठीक नहीं होगा)!.  वैसे अग्निपथ के कार्पेट पर हुए अग्निकांड के दौरान पुलिस और प्रशासन को कहीं भी "पत्थरबाजी" जैसा "अक्षम्य अपराध" नहीं नज़र आया जिसके लिए बुल्डोज की जरूरत पड़ती !
       बीस जून को अग्निपथ के विरोध में भारत बंद रहा ! (विपक्ष इस बंद में भीअपने लिए ऑक्सीजन तलाशता रहा ! ) इस तरह की राष्ट्रीय समस्याओं पर सर्व दलीय मीटिंग बुला कर सर्व सम्मति से समाधान पर सहमति तलाशी जाए ! 
    आखिर में, सवाल नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल पर आस्था का दोहरा माप दंड और दर्द को देखने का दोहरा अंदाज़ पर न्यायपालिका कब अपनी चुप्पी तोड़ेगी! बाबरी मस्जिद पर आए सुप्रीम फैसले में स्वीकार किया गया कि मस्जिद के नीचे कोई मंदिर नही था ! फिर भी मुस्लिम कानून का एहतराम करते हुए सब्र कर गए ! और अब,,,, पैगंबर मुहम्मद ( स अ स) की शान में गुस्ताखी!! इसे संयोग समझा जाए या  मुसलमानों की सहनशीलता नापने का) प्रयोग ! इस्लाम और उनके अज़ीम पैगंबर पर अभद्र टिप्पणी से आख़िर हासिल क्या होता है !!
         मुसलमान होने के एक बेसिक शर्त है कि ,- ' मुहम्मद से मुहब्बत दीन ए  हक़ की शर्ते अव्वल है ! इसी में हो अगर खामी तो सब कुछ  'लामुकम्मल' है -'!!
      धार्मिक  आस्था में वैराईटी नही होती,हर धर्म के अनुयाई की आस्था का सम्मान होना चाहिए ! लकुम दीनकुम वल्या दीन-.का पालन करने वाले मुस्लिम यही अपेक्षा दूसरों से भी रखते हैं। सच्चाई,सहस्तित्व,सौहार्द, शुजाअत (शूरवीरता) हुब्बलवतनी।( देशप्रेम) और शहादत के लिए विश्व भर में विख्यात कौम 
हर जुल्म को इम्तिहान समझ कर सब्र कर सकती है पर पैगंबर ए इस्लाम की शान में गुस्ताखी कभी बर्दाश्त नहीं होगी।

इसलिए,आस्था और दर्द के लिए दो अलग अलग मापदण्ड नही होने चाहिए.!!

 ।।।    ( सुलतान भारती)   ।।।
      

Tuesday, 17 May 2022

हास्य व्यव्यंग्य ( कविता एक कटी हुई नाक)

             * एक कटी हुई नाक *
****"""""******"""""""*********

मौसम बड़ा सख्त था।
दोपहर  का  वक्त था!

अशोक वाटिका में लंच ब्रेक चल रहा था!
लैपटॉप में रावन बजरंगी भाईजान देख रहा था !!

तभी उसके फोन पर मिस्काल आया !
उधर से शूर्पनखा के फिवरेट कॉलर ट्यून 

मुश्किल कर दे जीना ! इश्क कमीना!!

फिर उधर से  शूर्पनखा  की आवाज़ आई!
उसने रोते हुए नाक कटने की व्यथा सुनाई!


दुश्मन की तलवार दुधारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!! 


रावण अवाक था ! ये तो माथे पर दाग था!!
वैसे रावण निडर था पर सोशल मीडिया का,,,!

नाक  की  न्यूज  नेशनल   ना  हो ।जाए ।
कटी नाक का विडियो वायरल न हो जाए !!

        रावण ने दिमाग़ लगाया
पहला फ़ोन जो वाइडन को लगाया! !

रावण बोला अंकल सैम आज तो बाज़ी पलट गई!
दिन दहाड़े बहन की नाक कट गई !!

सुन कर widon ने अप उप ठहाका लगाया।
फिर रावण को हिन्दी में समझाया !!

भतीजे तुम अक्ल मंद नही खोते हो !
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

वैसे सौ पर भारी हो पर कितने पिछड़े प्राणी हो !
एक नाक ही काटी थी,,,,,,,,,,,,, !

नई  सभ्यता  वरण  करो !
पश्चिम का अनुशरन करो !

अमेरिका में महिलाओं की रफ्तार,,,,,,,,। !

जानता हूं नाक का कटना अपमान का फसाना है !
पर यह तो लक्ष्मी बाई का नहीं,,,,,,,,,!!

Vidon की बात सुन रावण खिन्न था !
नाक का इशू अब सतयुग से भिन्न था !!

              (  2 )
तभी उसे अपने गुरु की याद आईं!
अगली कॉल जेल में बंद एक संत को लगाई !

रावण ने नाक कटने की व्यथा सुनाई !
उधर से संत बोले इतना सन्नाटा,,,,,,,,,,!!

रावण झुंझलाया, सन्नाटा नहीं तो क्या थहाका लगाऊं
नाक कटी है तो क्या जश्न मनाऊं!!

हमे तो अपनो ने लूटा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, उस्तरा बहुत,,,,,!!

खैर तुम शूर्पनाखा को मेरे पास भेज दो !
मैं उसको योगा सिखाऊंगा!
जमानत मिली तो अगला वैलेंटाइन!
श्री लंका में मनाऊंगा !!

दुनियां हमें देख कर जलेगी! शूर्पनाखा तो,,,,,,,,,!!

ईश्वर ने कितनी सुंदर जोड़ी, बनाई है,!
कुंडली का मैच देखो हम दोनों ने ही,,,,,,,,,,,,,,!!

संत का  प्रलाप सुन रावण हताश था !
कुंडली में शायद आज शनि का निवास था!

   ।।।।          (   3  )      ।।।।।

अचानक उसे अपना फैमिली फ्रेंड याद आया !
आखिरी फ़ोन उसने इमरान खान को लगाया !!

उधर से हिंदी में गाने की आवाज़ आई -
' मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रेट '!

रावण ने हैरत से पूछा - सारी पाक जनता
हिंदी गाने दोहराती है!
इमरान भाई आपको शर्म नहीं आती है!!

फिर रावण ने अपने दर्दे दिल की वजह बताई,
शूर्पणखा की नाक कट गई क्या करूं इमरान भाई!

इमरान खान बोले, ' बहन ने हादसे का दर्द तो
बाटा होगा!
नाक तो ज़रूर किसी इंडियन ने काटा होगा !!

रावण उछल पड़ा, वाह भ्राता श्री! क्या आला दिमाग़
पाया है!
आख़िर ये आइडिया आपको कैसे आया है!!

इमरान खान धीरे से बोले, बात शर्म की है 
इसलिए अब तक नहीं बताया है !!
अरे, काश्मीर से कारगिल तक हमने
नाक ही कटाया है!!

तुमने पहली बार कटाया,,,,,,,,,,,
,,,,,,,,,,,,।   N,,,,,,,,,,।    ,,,,,,,,,,!!

भारत के हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई
आपस में लाठियां चलाते हैं!
लेकिन पाकिस्तान की नाक काटनी हो
तो सारे एक हो जाते हैं !!

उनकी इसी विभिन्नता की एकता से
हम अपनी नाक कटा बैठे !
कश्मीर हड़पना दूर पूर्वी पाकिस्तान
गवां बैठे!!

ताकत वर दुश्मन को फौरन दोस्त बना लो
अच्छा है !
बार बार न कटे नाक- एक बार कटी है
अच्छा है!!

अब ऑप्शन खत्म हो चुके थे, रावण ने हताश होकर शूर्पनाखा को फोन मिला कर समझाया -

बहन   नाक  का  निवारण  नही है मेरे बस की !
यूं समझो कि - बहुत कठिन है डगर पनघट की !!

          ( सुलतान भारती) 



Friday, 13 May 2022

( व्यंग्य भारती) " भोर का सपना"

(व्यंग्य भारती)          "भोर का सपना"

             अब क्या बताएं कि बेकारी में कैसे कैसे ख़्वाब आते हैं! दिन में याद कर लूं तो हीनता आ जाती है! कोरोना काल के बाद आज तक कभी आत्म निर्भर ख़्वाब नहीं देखा! जबकि मेरे दोनों पड़ोसी ( चौधरी और वर्मा जी) ऐसे ऐसे ख़्वाब देखते हैं जिसमें मेरी सिचुएशन हमेशा दयनीय होती है! ये पहली बार है कि तीन साल में  मैंने कोई ढंग का ख़्वाब देखा था ! इस बार वर्मा जी का सारा मनोबल पंचर होना था ! सपना भोर का था, और उसके सच होने की पूरी उम्मीद थी ! इस बार का ख़्वाब इतना ताकतवर था कि वर्मा जी को महीनों ख़्वाब नहीं आना था! मेरे ख्वाब में वह शाहजहां के दरबार में भिश्ती बने दरबार में पानी छिड़कते नज़र आए थे! उन्हें इस रोल में देख कर मैं काफी खुश था  !
     अब पूरे ख़्वाब को डिटेल में बताता हूं!
          ताज महल बनाम तेजो महालय के विवाद पर फेस बुकिया विद्वानों की ख़ोज पूर्ण रिपोर्ट पढ़ पढ़ कर मैं देशहित में तीन बजे रात तक जागता रहा ! आज़ कल अचानक मुझे लगने लगा है कि अगर मैने एक भी पोस्ट छोड़ दिया तो ताज महल हाथ से निकल जायेगा ! केस खराब हो, इसके लिए वर्मा जी आज कल दिन में एक बार आकर मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ा जाते हैं! कल भी आकर उन्होंने बड़ी गंभीरता से कहा था, - " अब कुछ नहीं हो सकता ! जिस ने शाहजहां को लोन दिया था , वो  दावेदार पार्टी सामने आ गई है ! वो ताज महल नहीं, तेजो महालय है ! सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के उसूलों से ! ताज महल के निर्माण में लगा सारा मैट्रियल इसी पार्टी ने सप्लाई किया था । शाहजहां ने इसी पार्टी से लोन लिया था!
      "  आपके सामने लोन लिया था क्या ?"
 " तेरा दुख मैं समझ सकता हूं! पर अब कुछ नहीं हो सकता! तहखाने के बंद कमरे खुलेंगे तो देख लेना लोन और पॉवर ऑफ एटॉर्नी के काग़ज़ बरामद हो जाएंगे ! शाहजहां को कभी तेजो महालय को ताजमहल का नाम नहीं देना था "! 
         " सबूत क्या है?"
 " नाम ही सबूत है! तेजोमहालय का अर्थ है, ' ऐसा घर जिससे तेज़ निकलता हो - ! चांदनी रात में जाकर देख इमारत से कैसी दिव्य रोशनी फूटती है! उसे बनाने में ऋषि मुनियों का भारी योगदान था "!
         " शाहजहां का क्या रोल था ?"
" जब मंदिर बन गया तो शाहजहां ने उस पर अपना बोर्ड लगा दिया ! उनकी इस साजिश में कांग्रेस पार्टी भी शामिल थी ! तहखाने के कमरे से इस बात के सबूत मिल जायेंगे कांग्रेस पार्टी मुगलों से मिल गई थी!"।          
        "पर शाहजहां के शासन काल में कांग्रेस पार्टी कहां थी?"
   " बिलकुल थी, तुष्टिकरण के कारण असली इतिहास छुपाया गया था! अब सारे घर के बदल डालूंगा ! सच तो ये है कि मुगल काल में इतनी सुंदर इमारत बनाने की तकनीकि ही नहीं थी !" 
     "और,,,,लाल क़िला, कुतुब मीनार और जमा मस्जिद?"
        वर्मा जी मुस्कराए, -" धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ! कहा न, शाहजहां ने सिर्फ बोर्ड लगाया है, बनाया कुछ भी नहीं ! इन सारी इमारतों को गिराकर साक्ष्य खोदने की ज़रूरत है "!!      
          रात में तीन बजे सोया तो ख्वाब में शाहजहां के दरबार में खुद को मौजूद पाया! भव्य दरबार में शहंशाह साढ़े बाइस मन शुद्ध सोने के तख्ते ताऊस पर बैठे थे ! पास में उनकी बेगम मुमताज महल बैठी थीं ! ख़स की झाड़ पर पानी छिड़क रहे वर्मा जी को मैने फ़ौरन पहचान लिया ! सूचना मंत्री से शाहजहां पूछ रहे थे, हम अपनी बेगम के साथ ताज देखने जाना चाहते हैं, कब तक जा सकते हैं?"
      मंत्री ने हाथ जोड़कर कहा, -' हिज हाईनेस ! अब आप तब तक नहीं जा सकते , जब तक ताज महल के मालिकाना हक़ का फ़ैसला नहीं हो जाता -!"
    " क्या बकते हो! शहंशाह को बताना पड़ेगा कि ताजमहल का मालिक कौन है "?
     " जान की माफ़ी हो आलीजाह ! अब उसके दर्जनों दावेदार हैं! लेटेस्ट दावेदार का कहना है कि जिस पर ताजमहल खड़ा है, उस जमीन का भुगतान अभी पेंडिंग है! प्रॉपर्टी के कागजों की चेन उसी पार्टी के पास है !"
    मैंने मार्क किया कि बादशाह की प्रॉब्लम बढ़ती देख कर वर्मा जी बहुत खुश नज़र आ रहे थे ! मंत्री हाथ जोड़ कर कह रहा था, " एक बाबा करीब करीब सिद्ध कर चुका है कि ताज महल एक मंदिर को तोड़ कर बना हुआ मकबरा है! हो सकता है कि अन्दर के बंद कमरों से बाबा जी के नाम से लिखा गया कोई प्रोनोट भी बरामद हो जाए ! आपको याद भी कहां होगा?"
     शाहजहां को डांटने के लिए मुमताज़ महल को मौका मिल गया, - " कितनी बार कहा है कि इतना मत पिया करो! अब भुगतो!"
                शाहजहां ने इशारे से मुझे अपनी ओर बुलाया, -'' आप बताओ मिस्टर भारती! इस के पीछे किसका हाथ है ?"
मैं जाने कब से वर्मा जी को रगड़ने की फ़िराक में था! आज आया था ऊंट पहाड़ के नीचे! मैंने पूरी गंभीरता से कहा," आप ने मुझ जैसे इंवेस्टीगैटर पत्रकार को मौका देकर सम्मानित किया है! मुझे पूरा शक है कि इसके पीछे आपके ही किसी दरबारी का हाथ है!"
      " कौन है वो! मैं उसकी खाल खींच कर उसी पर बैठ कर योगा  करूंगा ! आजकल ब्लड प्रेशर ठीक नहीं है!"
       " ये जो पानी छिड़कने वाला नया भिश्ती आया है, मुझे इस पर शक है ! हो न हो, ताजमहल के विवाद को इसी ने हवा दी है !"
  " फौरन इसे हाथी के पैरों के नीचे डाला जाए"!
     " ये सज़ा पुरानी हो चुकी है गरीब परवर! कोई तगड़ी सजा दो "!
        " कौन सी "? 
     " आपकी खिदमत में लगी हूरों में से दो की शादी इनके साथ कर दो ! इनकी एक धर्मपत्नी आल रेडी पहले से है! एक हाथी से सर कुचलवाने से बेहतर है कि तीन बीबियो के बीच छोड़ दिया जाए - उम्र इन्हें मरने नहीं देगी और तीन बीवियां उसे जीने नहीं देंगी "! 
                     इतनी कठोर सजा के सुझाव पर बबादशाह मुस्कराए,मगर मुमताज़ महल ने उनके कान में कहा,- "  इस पत्रकार को दरबार से बाहर करो! इतनी खतरनाक सजा इसे सूझी कैसे ! !"
       " भिश्ती का क्या करें?"
" उसकी कठोर सज़ा में कुछ कटौती कर दो, ज़िंदगी को दोजख बनाने के लिए तीन की जगह दो बीवियां ही काफ़ी हैं"! 
      मैंने फरियाद की, -" दो बीवियां चलेंगी, इससे कम मत करना "!
   तभी कोई और चिल्लाया, " इस उमर में भी दो बीबियां चाहिए ! पगला गए हो क्या !!"
        मेरी आंख खुल गई ! सामने बेगम खड़ी मुझे घूर रही थी ! उन्हें ख्वाब की हकीकत समझाने में पूरा दिन निकल गया!

               ( सुलतान भारती)

Monday, 9 May 2022

(व्यंग्य भारती) " बुल्डोजर का अमृत महोत्सव"

(व्यंग्य 'भारती' )

               "बुल्डोजर का अमृत महोत्सव"

       आज़ादी का अमृत महोत्सव चल रहा है!  हर कोई अमृत खोज  रहा है ! हमारे एक प्रकाशक मित्र कवि सम्मेलन के लगातार आयोजन के मंथन में अमृत निकाल रहे हैं ! देश में 1947 के बाद पहली बार आज़ादी की फीलिंग आई है ! आज़ादी मिलना और फीलिंग आना अलग अलग अनुभूति है! कभी कभी उपलब्धि हासिल हो जाती हैं पर फीलिंग ही नहीं आती ! जैसे पत्नी के सामने कॉलेज के ज़माने की गर्लफ्रेंड आ जाए  तो फीलिंग फौरन फ्रीज हो जाती है ! देश तो बहुत पहले से आज़ाद है , पर जाने क्यों  फीलिंग नहीं आ रही थी ! 
       और आज़,,,अब जा के आया मेरे बेचैन दिल को करार ! आज़ आज़ादी से ज़्यादा फीलिंग है ! इस फीलिंग ने कई जगह आज़ादी के हिस्से की ऑक्सीजन भी हथिया लिया है ! फीलिंग इतनी प्रचंड है कि संविधान खुद को असहाय महसूस करता है! पहले आज़ादी सबके पास थी !  अब आज़ादी की जगह उसकी फीलिंग सबके पास है ! महसूस कीजिए और आनंदित रहिए ! देश को आज़ादी मिली है और पब्लिक को उसकी फीलिंग ! ये समझदारी का काम है, पब्लिक दोनों चीजें संभाल नहीं सकती! देश ७४ साल से आज़ाद था लेकिन पब्लिक में आजादी की फीलिंग ही नहीं थी! 15 अगस्त या 26 जनवरी को लाउड स्पीकर पर गाना बजता तो थोड़ी देर के लिए फीलिंग आ जाती थी! आज 75 साल का कोटा पूरा हो गया ! पूरा साल आज़ादी का अमृत छकिए,और फीलिंग को आत्मनिर्भर बनाइए !
      इस अमृत महोत्सव की फीलिंग को बुल्डोजर ने काफ़ी मजबूती दी है ! कई जगह ऐसी थी जहां आज़ादी की फीलिंग का पता लोगों को नहीं था, वहां बुल्डोजर ने जाकर अपनी आज़ादी की जो झांकी निकाली कि लोग बाकी जिंदगी उस 'अमृत महोत्सव' की फीलिंग में ही गुज़ार देंगे ! आज़ बुल्डोजर के साथ हम आज़ादी की हीरक जयंती मना रहे हैं! इसका आनंद और फीलिंग अदभुत है ! किंतु आश्चर्य है कि विपक्ष बुल्डोजर को देख कर विलाप करता है जब कि सत्ता पक्ष हर्षनाद ! भक्त गण कह रहे हैं, - जाकी  रही  भावना  जैसी - वाली बात है !! आज़ादी और अमृत सबको रास नहीं आती ! बुल्डोजर आज़ाद है, इसलिय वो अपनी फीलिंग के हिसाब से अमृत बांटता है ! वह अपने और आज़ादी के बीच में  ' स्टे ' का दख़ल नहीं देखना चाहता ! 
          यूपी से निकला बुल्डोजर एमपी में काफ़ी पसंद किया गया! प्रशासन अदालतों का सारा पचड़ा बुल्डोजर को सौंपना चाहता है ! बुल्डोजर माने न्याय पालिका ! आज़ादी का पूरा अमृत महोत्सव !! अपराध और विरोध मुक्त भारत !! बुल्डोजर को पहले गंभीरता से नहीं लिया गया था तो आज़ादी कितनी फीकी थी ! आज बुल्डोजर की महती कृपा से मई और जून में भी चारों  ओर कितनी हरियाली है ! लेकिन कांग्रेस को क्या हो गया है जो वह विकास और बुल्डोजर का विरोध कर रही है !.उनके अंदर न अमृत बचा- न फीलिंग !! जहां भी हमारा आजादी  वाला बुल्डोजर देखते हैं, आगे आकर लेट जाते हैं- 'विकास' होने ही नहीं देते !! नौ मई को शाहीन बाग में इन्होंने यही किया, बुल्डोजर के आगे लेट कर '' अमृत महोत्सव" का मज़  किरकिरा कर दिया ! !
       अब हम विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहे हैं! कुछ  पाने के  लिए  कुछ खोना  पड़ता! ( खोना वर्तमान है और पाना भविष्य!) सिलेंडर का बढ़ा हुआ दाम वर्तमान है, स्वर्णिम भविष्य पाने के लिए मंहगाई जैसी अकिंचन चीज को भूलना होगा ! विश्व गुरू होने के लिए किचन विधवा भी हो जाए तो भी परवाह नहीं !!ये एलपीजी गैस,  गबन, मंहगाई, बेकारी या रुपए का अवमूल्यन सब तुम्हारे कर्म हैं! जैसा करम करोगे वैसा फल देगा भगवान.! ये सब भगवान और भक्त के बीच का मैटर है! इसमें सत्ता पक्ष का कोई दोष नहीं ! उल्टे सत्ता पक्ष तो ईश्वर के अलावा और किसी की तरफ़ ध्यान ही नहीं  दे रहा है! पहला फ़ोकस इस पर है कि कहां कहां ईश्वर से उनका निवास स्थान छीना गया है , पहले वहां बुल्डोजर का अमृत महोत्सव मनाया जाएगा ! सर्वे जारी है,ताकि इस बार ईश्वर को न्याय मिलने में विलम्ब न हो !
            कल नौ मई थी ! शाहीन बाग में बुल्डोजर का अमृत महोत्सव होना था़ ! भारी पुलिस बल के साथ बुल्डोजर रवाना हुआ ! कई मीडिया के चारण बुल्डोजर की विरुदावली गाते हुए आगे आगे चल रहे थे! एक बड़े चैनल की चर्चित मोहतरमा हांफती हुई बोल रही थीं ! उनकी खुशी और उत्साह देख कर लगता था कि सिर्फ "हिन्दू मुस्लिम" करने से ही उन्हें प्रोटीन हासिल हो जाता है! डिमोलिशन निरस्त होने पर उनके चेहरे पर जो मायूसी मैने देखी, उससे लगता था़ गोया शाहीन बाग में किसी ने उनकी किडनी निकाल ली हो ! प्रशासन और बुल्डोजर भी उतने दुखी नहीं थे ! 
                हीरे की परख जौहरी को होती है ! जौहरियों ने बुल्डोजर की नाभि में छुपे ' अमृत ' को पहचान लिया है ! सुबह उठते ही बुल्डोजर पूछ लेता है, - ' क्या हुक्म है मेरे आका ! आज़ कहां कहां आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाना है ?  अब तो इसके बगैर - दिल है कि मानता नहीं - !!

                           ( सुलतान भारती)

Tuesday, 3 May 2022

बचपन के घरौंदे में रखी " ईद'' !

                "बचपन के घरौंदे में रखी ईद "!

       आज़ ईद है ! मुस्लिम बहुल इलाकों में लोग तीन दिन तक ईद मनाते हैं! दिल्ली का शाहीन बाग ऐसे ही इलाके में शुमार होता है ! इस वक्त रात के साढ़े नौ बजे है! शाहीन बाग की बडी मस्जिद में ईद की नमाज़ सुबह सात बजे हो चुकी है! लोगों के ज्यादातर मेहमान और दोस्त अहबाब पकवान डकार कर जा चुके हैं,फिर भी आज़ ईद है! कल चांद रात को शाहीन बाग की रोशनी, रश और रौनक देखने लायक थी। मेन रोड, चालीस फुटा मार्केट और हाई टेंशन रोड पर खरीदारो की सुनामी आई हुई थी ! नानवेज के शौकीनो का नया मरकज है शाहीन बाग ! चांद रात तड़के तीन बजे तक शाहीन बाग खरीदारों से गुलज़ार रहा ! 
              अभी एक घंटे पहले जब मै बॉल्कनी में बैठा गांव में फ़ोन मिला रहा था तो मेरा बिल्ला निम्बस पास आकर अपना शरीर मेरे पैर से रगड़ने लगा ! ऐसा वो तभी करता है जब उसे नीचे घूमने जाना होता है या मेरे साथ खेलना होता है ! मैं उसे लेकर बाहर गली में आया जहां तीन आवारा कुत्ते बैठे हुए थे ! निम्बस को देख कर कुत्तों का मुखिया धीरे से गुर्राया, जैसे कह रहा हो - अबे मर्द बिल्ला है तो कभी अकेले निकल कर दिखा ! तुझे रसगुल्ला समझ कर निगल जाऊंगा "! बाहर मैने इन कुत्तों के लिए मिट्टी के एक बर्तन में पानी भर कर रखता हूं ! कुत्ते जानते हैं कि ये नेक काम कौन करता है, तभी वो बिल्ले को अब तक झेल रहे हैं ! आज सुबह गैंग का मुखिया कुत्ता मुझे देख कर पूंछ हिलाते हुए हल्के से गुर्राया था, मुझे लगा कि पूछ रहा है, - '  गोद में लेकर घूमना ही है तो किसी सेलिब्रिटी को चुनो भ्राता श्री ! मेरे बारे में क्या ख़्याल है !! '
         तीन बजे मेरे अजीज़ दोस्त ( इब्राहीम) का गांव से फोन आया ! वो ईदगाह से लौट कर फोन कर रहे थे ! एक घंटा लम्हे की तरह निकल गया ! हम बचपन की खूबसूरत यादों को दिल और दिमाग़ से खुरच खुरच कर वर्तमान के खुरदरे दस्ताबेज की विरासत बनाते रहे ! एक  ईद आज़ थी जो तमाम व्यूह  से घिरकर दो साल बाद लोगो को हासिल हुई थी ! पिछली दो ईद की सिवइयां कोरोना पी चुका था ! ईद राष्ट्रीय पर्व पर है, इस बार का रमजान - रामनवमी, पथराव, हनुमान चालीसा और लाउड स्पीकर से ओतप्रोत रहा ! अज़ान और हनुमान चालीसा के बीच खड़ी ईद अपनी शिनाख्त ढूंढती हुई  सकते में खड़ी थी।
      एक मेरे बचपन की ईद थी ! रोज़ा बेशक नहीं रखते थे पर ईद की खुशी पर दावा हम बच्चों का ही था ! अब्बा और अम्मा दोनों से ईदी लेते थे और पूरी कोशिश होती थी कि ईदगाह में हमें अपना पैसा ना खर्च करना पड़े,और अब्बा हम दोनों भाईयों की पसंद की हर चीज़ अपने पैसे से खरीद कर घर ले आएं। अब्बा कलकत्ते में नौकरी करते थे और हमारा खाता पीता परिवार था । ईद के रोज नया कुर्ता पजामा पहन कर हम फूले न समाते ! ईदगाह जाते वक्त हम सभी हम उम्र बच्चे आपस में इंक्वायरी कर पता कर लेते थे कि किसके पास सबसे ज्यादा ईदी है ! उस दिन हर  कोई मेरा बेस्ट फ्रेंड साबित होने की कोशिश करता था! ( ईद के दूसरे दिन उनके तेवर अलग होते थे! ) तारा की अम्मा के ठेले पर लगा टिक्की चाट  हमारी सबसे फेवरेट चाट थी ! उनकी मिर्च मसाला  वाली चाट ज़हर से कुछ डिग्री नीचे थी ! खाते ही आंख और मुंह से गंगा जमुना छूट जाती थी !
        चांद रात को हम खुले छत पर बातें करते हुए देर रात तक अगले दिन मिलने वाली ईदी की बातें करते रहते ! तब बिजली नहीं थी लेकिन रिश्तों में गन्ने जैसी मिठास थी! ईद से दो दिन पहले ठाकुर अभिलाष सिंह के हाता से मेंहदी की पत्तियां तोड़ कर लड़कियां लाती, ताकि हाथ में मेंहदी लगाई जाए! अभिलाष सिंह हाथी नशीन जमींदार थे! तब कॉस्मेटिक मेहंदी कहां थी !  ईदगाह में दो तीन रुपए में हम अपने सपनों की कायनात खरीद लेते थे! घर से कारूं का ये खज़ाना जेब में डाल कर हम जब ईदगाह के लिए रवाना होते तो अम्मा नसीहत देती, -" फ़िज़ूल मत खर्च करना "! उस महान गुरु की वही नसीहत आज़ मैं अपने बेटे को देता हूं!
         ईद हो या दीवाली, खुशियों पर बच्चों का ही आधिपत्य होता है ! हम जाने क्यों बड़े होते हैं? बड़े होते ही हमारे होठों से मुस्कराहट और आखों से नींद छिन जाती है ! अपनी पलकों में खुशियों की सारी कहकशां भर कर जब बच्चे सो रहे होते हैं, तो उनके मां बाप अगले दिन भी यही खुशी बरकरार रखने के लिए जाग रहे होते हैं ! हम हमेशा अपने मां और बाप के उस फिक्र के कर्जदार रहेंगे! 
         आज बेटे को ईदी दिया तो मुझे अपने वालिद और वाल्दा याद आ गए ! वालिद साहब पढ़े लिखे नहीं थे, लेकिन अंग्रेजों के शासन में सबको नौकरी मिल जाती थी! मेरी मां ने अपने चारों बेटों को पढ़ाया! उन्होंने अपनी सारी खुशियों को हमारे ख्वाबों में पिरो दिए ! शायद दुनियां की हर मां ऐसी ही होती है ! वो हिन्दू और मुसलमान नहीं होती !
     आखिरी लाइन लिखते लिखते मैं जैसे ईद के रोज अपने बचपन में खड़ा था - मां के सामने ! लगा जेसे मां कह रही हो, -  "जिम्मी ! (मेरा प्यार का नाम) सबको सलाम करना, और  फिजूल खर्ची मत करना '' !

     फिर,,,,फिर मैं बड़ा हो गया, और आज तक वो ईद पलट कर दोबारा  नहीं आई! कभी नहीं !!

          ( सुलतान भारती)

Wednesday, 27 April 2022

( व्यंग्य भारती) "अज़ान से इंफेक्शन "

  ( व्यंग्य भारती)

           "अज़ान से इंफेक्शन"

       अपने देश में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है कि दुनियां हमारी प्रतिभा देख कर सकते में है! जहां दुनियां के क्षुद्र
वैज्ञानिक परमाणु अस्त्र से निजात पाने, ओजोन की क्षतिग्रस्त परत की मरम्मत करने, ग्लेशियर के पिघलने को रोकने, पेय जल संकट  दूर करने और अंतरिक्ष में बस्तियां बसाने जैसे बेकार के कामों में लगे हुए हैं, वहीं हम इन छोटे मोटे पचडो में पड़ने की बजाय सीधे  "हिन्दू मुस्लिम"  के अखंड कीर्तन में लगे हैं - एकहि साधे सब सधे -! विश्व गुरु होने के लिए सुरंग यहीं से खोदनी है! इस काम में अभी कंपटीशन भी नही  है! पता नहीं क्यों, कोई और देश विश्व गुरू होने को आतुर नहीं है !! हमारा लक्ष्य है कि एक बार विश्व गुरु बन  जाएं ,फिर तो किसी भी  'एकलव्य'  से उसका अंगूठा ले लेंगे ! इसलिए हम इसके अलावा और कुछ  बनना भी नहीं चाहते! उधर अमेरिका विश्व गुरु बनने की बजाय चौधरी बन कर परेशान है ! पैसा बांट बांट कर आज कंगाल होने की कगार पर है ! उसे नाटो के देशों को दक्षिणा देनी पड़ती है । विश्व गुरु बनता तो देने की बजाय दक्षिणा से मालामाल हो जाता !
          खैर छोड़िए ! तो,,,,,, हमारे देश में आज कल कुछ विलक्षण सोशल वैज्ञानिक उग आए हैं! वह जनहित में कल्याणकारी खोज कर रहे हैं !  आए दिन एक नई खोज से जनता और जनार्दन को सकते में डाल रहे हैं ! उनकी डिमांड है,- ' हिंदुस्तान में रहना होगा ! तो वंदे मातरम् कहना होगा -!!' ( कुछ लोगों के अड़ जाने के कारण विश्व गुरू बनने में इतना विलंब हो रहा है !) जब कभी देश हित में ऐसी खोज होती है तो टीआरपी का अकाल झेल रही मीडिया का ऑक्सीजन लेवल एकदम से  आत्म निर्भर हो जाता है !  सुबह शाम नफ़रत का समुद्र मंथन तेज हो जाता  है ! बताया जाता है कि इस कोलाहल से प्रजा को कन्फ्यूजन  और  प्रजातंत्र को मजबूती मिलती है ! हम संकल्प ले चुके सनम !!
          इन क्रांतिकारी सोशल वैज्ञानिकों ने दूसरे धर्मों के गेहूं में घुन ढूढने का बीड़ा उठा लिया है , - सारे घर के बदल डालूंगा - की तैयारी चल रही है ! धर्म को समझने का काम बुद्धिजीवी से छीन कर बुलडोजर को दे दिया गया है ! न्याय पालिका में आई क्रांति का श्रेय भी बुल्डोजर को ही जाता है ! वादी प्रतिवादी जितनी देर में एफआईआर की सोचते हैं, उतनी देर में सजा पर अमल हो जाता है , कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे -!
    इन्ही सामाजिक वैज्ञानिकों की ताज़ा खोज अजान से होने वाला "घातक इंफेक्शन"  है ! इस इंफेक्शन से आज 75 साल बाद अचानक बच्चों की पढ़ाई बाधक हो गई है, और देश आगे नहीं बढ़ पा रहा है ! इतना ही नहीं, इसी तीन चार मिनट की लाउड स्पीकर से दी गई अजान की वजह से कुछ लोगों की नींद जा रही है, सरदर्द आ रहा है! हवा की गुणवत्ता ख़त्म हो रही है और स्वास्थ्य और भाईचारे पर बुरा असर पड़ रहा है -! अज़ान  के इतने दुष्परिणाम ढूंढने वाले महापुरुष उसका दो  समाधान बता रहे हैं! ध्वनि प्रदूषण दूर करने का पहला समाधान है कि मस्जिदों से लाउड स्पीकर उतार दिया जाए !  दूसरा सुझाव और भी दिव्य है,- हर मस्जिद के सामने लाउड स्पीकर लगा कर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए-! आशा है कि इस प्रयोग के बाद भाईचारा बढ़ जाएगा और सम्पूर्ण पृथ्वी  ध्वनि प्रदूषण से  से मुक्त हो जाएगी ! ( इस खोज से पूरी  दुनियां  में हमारी  जय जयकार हो  रही। है !  "नासा" तक के वैज्ञानिक सकते में आ गए हैं !)
              ज़िंदगी के खूबसूरत 24 साल मैंने यूपी के अपने गांव में गुजारे ! हिंदू मुस्लिम की आबादी वाला माहौल ! गांव तो जागता ही था सुबह फजर की अज़ान से ! हर हिंदू और मुसलमान किसान का रूटीन इसी अज़ान से शुरु होता था ! तब बिजली नहीं थी , घरों में घड़ी बहुत कम थी इसलिए इशा की अज़ान  से लोग रात का खाना और सोने की तैयारी शुरू करते थे! जिस दिन अज़ान की आवाज़ सुबह नही सुनाई पड़ती थी, कई लोगों का रूटीन डिस्टर्ब हो जाता था! बगल कई हिंदू बाहुल्य गांव थे, जहां से सुबह शाम मंदिर की सुमधुर घंटियों की आवाजें आया करती थीं! उन गांवों में आज़ भी मेरे बेहतरीन दोस्त हैं! हमने किसी के मुंह से कभी अज़ान के लिए ऐसे इल्जाम नहीं सुने ! आज़ भी शाम की नमाज़ के बाद हिंदू मुस्लिम औरतें अपने नवजात और बीमार शिशुओं को नमाजियों से फूंक डलवाने के लिए मस्जिद के सामने खड़ी नज़र आती है ! ये तस्वीरें ही हमारी गंगा जमुनी रवायत की मजबूत मिसाल और रोशन मशाल हैं!
              तो,,,, ख़ोज चालू है ! लाउड स्पीकर से अज़ान देने पर अभी अंत्याक्षरी अभी चल ही रही थी कि एक नई ख़ोज आ गई! इस बार अज़ान की दो बुनियादी लाइनों पर ज्ञान उड़ेलते हुए इसे ' समस्त धर्मों का घोर अपमान' बता दिया ! नई ख़ोज ने खुलासा कर दिया कि लक्ष्य लाउड स्पीकर नहीं अज़ान है ! ये इंफेक्शन किस दवा से ठीक होगा , देवो न जानति कुतो मनुष्य: ! इस बीमारी पर आकर  विकास के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा खड़ा हो गया है ! धर्म योद्धा सतयुग लाने के लिए कमर कस चुके हैं और नेपथ्य में धर्मयुद्ध का आवाहन जारी है! कभी धर्म ने इंसानियत की परिभाषा तय की थी, आज लहूलुहान इन्सानियत धर्म को देख कर सदमे में है! 
        धर्म योद्धा अब धर्म युद्ध को तैयार है! उसका घोड़ा खड़ा हिनहिना रहा है, पीछे अक्षौहिणी सेना का कोलाहल है ! बीच में जनता चीख रही है --

 'रोटी  कपड़ा और मकान ! 
 कब तक दे  देंगे   श्री मान !!' 

            
 धर्म योद्धा जवाब  दे रहे हैं _

 'राज तिलक की करो तयारी ! 
 आ   रहे   हैं   भगवा धारी '!!

       यानि  इंतज़ार करना पड़ेगा, विकास की बाली अभी पूरी तरह से पकी नहीं है !!

                                     (सुलतान भारती)