Friday, 13 May 2022

( व्यंग्य भारती) " भोर का सपना"

(व्यंग्य भारती)          "भोर का सपना"

             अब क्या बताएं कि बेकारी में कैसे कैसे ख़्वाब आते हैं! दिन में याद कर लूं तो हीनता आ जाती है! कोरोना काल के बाद आज तक कभी आत्म निर्भर ख़्वाब नहीं देखा! जबकि मेरे दोनों पड़ोसी ( चौधरी और वर्मा जी) ऐसे ऐसे ख़्वाब देखते हैं जिसमें मेरी सिचुएशन हमेशा दयनीय होती है! ये पहली बार है कि तीन साल में  मैंने कोई ढंग का ख़्वाब देखा था ! इस बार वर्मा जी का सारा मनोबल पंचर होना था ! सपना भोर का था, और उसके सच होने की पूरी उम्मीद थी ! इस बार का ख़्वाब इतना ताकतवर था कि वर्मा जी को महीनों ख़्वाब नहीं आना था! मेरे ख्वाब में वह शाहजहां के दरबार में भिश्ती बने दरबार में पानी छिड़कते नज़र आए थे! उन्हें इस रोल में देख कर मैं काफी खुश था  !
     अब पूरे ख़्वाब को डिटेल में बताता हूं!
          ताज महल बनाम तेजो महालय के विवाद पर फेस बुकिया विद्वानों की ख़ोज पूर्ण रिपोर्ट पढ़ पढ़ कर मैं देशहित में तीन बजे रात तक जागता रहा ! आज़ कल अचानक मुझे लगने लगा है कि अगर मैने एक भी पोस्ट छोड़ दिया तो ताज महल हाथ से निकल जायेगा ! केस खराब हो, इसके लिए वर्मा जी आज कल दिन में एक बार आकर मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ा जाते हैं! कल भी आकर उन्होंने बड़ी गंभीरता से कहा था, - " अब कुछ नहीं हो सकता ! जिस ने शाहजहां को लोन दिया था , वो  दावेदार पार्टी सामने आ गई है ! वो ताज महल नहीं, तेजो महालय है ! सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के उसूलों से ! ताज महल के निर्माण में लगा सारा मैट्रियल इसी पार्टी ने सप्लाई किया था । शाहजहां ने इसी पार्टी से लोन लिया था!
      "  आपके सामने लोन लिया था क्या ?"
 " तेरा दुख मैं समझ सकता हूं! पर अब कुछ नहीं हो सकता! तहखाने के बंद कमरे खुलेंगे तो देख लेना लोन और पॉवर ऑफ एटॉर्नी के काग़ज़ बरामद हो जाएंगे ! शाहजहां को तेजो महालय को ताजमहल का नाम नहीं देना था "! 
         " सबूत क्या है?"
 " नाम ही सबूत है! तेजोमहालय का अर्थ है, ' ऐसा घर जिससे तेज़ निकलता हो - ! चांदनी रात में जाकर देख इमारत से कैसी दिव्य रोशनी फूटती है! उसे बनाने में ऋषि मुनियों का भारी योगदान था "!
         " शाहजहां का क्या रोल था ?"
" जब मंदिर बन गया तो शाहजहां ने उस पर अपना बोर्ड लगा दिया ! उनकी इस साजिश में कांग्रेस पार्टी भी शामिल थी ! तहखाने के कमरे से इस बात के सबूत मिल जायेंगे कांग्रेस पार्टी मुगलों से मिल गई थी!"।          
        "पर शाहजहां के शासन काल में कांग्रेस पार्टी कहां थी?"
   " बिलकुल थी, तुष्टिकरण के कारण असली इतिहास छुपाया गया था! अब सारे घर के बदल डालूंगा ! सच तो ये है कि मुगल काल में इतनी सुंदर इमारत बनाने की तकनीकि ही नहीं थी !" 
     "और,,,,लाल क़िला, कुतुब मीनार और जमा मस्जिद?"
        वर्मा जी मुस्कराए, -" धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ! कहा न, शाहजहां ने सिर्फ बोर्ड लगाया है, बनाया कुछ भी नहीं ! इन सारी इमारतों को गिराकर साक्ष्य खोदने की ज़रूरत है "!!      
          रात में तीन बजे सोया तो ख्वाब में शाहजहां के दरबार में खुद को मौजूद पाया! भव्य दरबार में शहंशाह साढ़े बाइस मन शुद्ध सोने के तख्ते ताऊस पर बैठे थे ! पास में उनकी बेगम मुमताज महल बैठी थीं ! ख़स की झाड़ पर पानी छिड़क रहे वर्मा जी को मैने फ़ौरन पहचान लिया ! सूचना मंत्री से शाहजहां पूछ रहे थे, हम अपनी बेगम के साथ ताज देखने जाना चाहते हैं, कब तक जा सकते हैं?"
      मंत्री ने हाथ जोड़कर कहा, -' हिज हाईनेस ! अब आप तब तक नहीं जा सकते , जब तक ताज महल के मालिकाना हक़ का फ़ैसला नहीं हो जाता -!"
    " क्या बकते हो! शहंशाह को बताना पड़ेगा कि ताजमहल का मालिक कौन है "?
     " जान की माफ़ी हो आलीजाह ! अब उसके दर्जनों दावेदार हैं! लेटेस्ट दावेदार का कहना है कि जिस पर ताजमहल खड़ा है, उस जमीन का भुगतान अभी पेंडिंग है! प्रॉपर्टी के कागजों की चेन उसी पार्टी के पास है !"
    मैंने मार्क किया कि बादशाह की प्रॉब्लम बढ़ती देख कर वर्मा जी बहुत खुश नज़र आ रहे थे ! मंत्री हाथ जोड़ कर कह रहा था, " एक बाबा करीब करीब सिद्ध कर चुका है कि ताज महल एक मंदिर को तोड़ कर बना हुआ मकबरा है! हो सकता है कि अन्दर के बंद कमरों से बाबा जी के नाम से लिखा गया कोई प्रोनोट भी बरामद हो जाए ! आपको याद भी कहां होगा?"
     शाहजहां को डांटने के लिए मुमताज़ महल को मौका मिल गया, - " कितनी बार कहा है कि इतना मत पिया करो! अब भुगतो!"
                शाहजहां ने इशारे से मुझे अपनी ओर बुलाया, -'' आप बताओ मिस्टर भारती! इस के पीछे किसका हाथ है ?"
मैं जाने कब से वर्मा जी को रगड़ने की फ़िराक में था! आज आया था ऊंट पहाड़ के नीचे! मैंने पूरी गंभीरता से कहा," आप ने मुझ जैसे इंवेस्टीगैटर पत्रकार को मौका देकर सम्मानित किया है! मुझे पूरा शक है कि इसके पीछे आपके ही किसी दरबारी का हाथ है!"
      " कौन है वो! मैं उसकी खाल खींच कर उसी पर बैठ कर योगा  करूंगा ! आजकल ब्लड प्रेशर ठीक नहीं है!"
       " ये जो पानी छिड़कने वाला नया भिश्ती आया है, मुझे इस पर शक है ! हो न हो, ताजमहल के विवाद को इसी ने हवा दी है !"
  " फौरन इसे हाथी के पैरों के नीचे डाला जाए"!
     " ये सज़ा पुरानी हो चुकी है गरीब परवर! कोई तगड़ी सजा दो "!
        " कौन सी "? 
     " आपकी खिदमत में लगी हूरों में से दो की शादी इनके साथ कर दो ! इनकी एक धर्मपत्नी आल रेडी पहले से है! एक हाथी से सर कुचलवाने से बेहतर है कि तीन बीबियो के बीच छोड़ दिया जाए - उम्र इन्हें मरने नहीं देगी और तीन बीवियां उसे जीने नहीं देंगी "! 
                     इतनी कठोर सजा के सुझाव पर बबादशाह मुस्कराए,मगर मुमताज़ महल ने उनके कान में कहा,- "  इस पत्रकार को दरबार से बाहर करो! इतनी खतरनाक सजा इसे सूझी कैसे ! !"
       " भिश्ती का क्या करें?"
" उसकी कठोर सज़ा में कुछ कटौती कर दो, ज़िंदगी को दोजख बनाने के लिए तीन की जगह दो बीवियां ही काफ़ी हैं"! 
      मैंने फरियाद की, -" दो बीवियां चलेंगी, इससे कम मत करना "!
   तभी कोई और चिल्लाया, " इस उमर में भी दो बीबियां चाहिए ! पगला गए हो क्या !!"
        मेरी आंख खुल गई ! सामने बेगम खड़ी मुझे घूर रही थी ! उन्हें ख्वाब की हकीकत समझाने में पूरा दिन निकल गया!

               ( सुलतान भारती)

Monday, 9 May 2022

(व्यंग्य भारती) " बुल्डोजर का अमृत महोत्सव"

(व्यंग्य 'भारती' )

               "बुल्डोजर का अमृत महोत्सव"

       आज़ादी का अमृत महोत्सव चल रहा है!  हर कोई अमृत खोज  रहा है ! हमारे एक प्रकाशक मित्र कवि सम्मेलन के लगातार आयोजन के मंथन में अमृत निकाल रहे हैं ! देश में 1947 के बाद पहली बार आज़ादी की फीलिंग आई है ! आज़ादी मिलना और फीलिंग आना अलग अलग अनुभूति है! कभी कभी उपलब्धि हासिल हो जाती हैं पर फीलिंग ही नहीं आती ! जैसे पत्नी के सामने कॉलेज के ज़माने की गर्लफ्रेंड आ जाए  तो फीलिंग फौरन फ्रीज हो जाती है ! देश तो बहुत पहले से आज़ाद है , पर जाने क्यों  फीलिंग नहीं आ रही थी ! 
       और आज़,,,अब जा के आया मेरे बेचैन दिल को करार ! आज़ आज़ादी से ज़्यादा फीलिंग है ! इस फीलिंग ने कई जगह आज़ादी के हिस्से की ऑक्सीजन भी हथिया लिया है ! फीलिंग इतनी प्रचंड है कि संविधान खुद को असहाय महसूस करता है! पहले आज़ादी सबके पास थी !  अब आज़ादी की जगह उसकी फीलिंग सबके पास है ! महसूस कीजिए और आनंदित रहिए ! देश को आज़ादी मिली है और पब्लिक को उसकी फीलिंग ! ये समझदारी का काम है, पब्लिक दोनों चीजें संभाल नहीं सकती! देश ७४ साल से आज़ाद था लेकिन पब्लिक में आजादी की फीलिंग ही नहीं थी! 15 अगस्त या 26 जनवरी को लाउड स्पीकर पर गाना बजता तो थोड़ी देर के लिए फीलिंग आ जाती थी! आज 75 साल का कोटा पूरा हो गया ! पूरा साल आज़ादी का अमृत छकिए,और फीलिंग को आत्मनिर्भर बनाइए !
      इस अमृत महोत्सव की फीलिंग को बुल्डोजर ने काफ़ी मजबूती दी है ! कई जगह ऐसी थी जहां आज़ादी की फीलिंग का पता लोगों को नहीं था, वहां बुल्डोजर ने जाकर अपनी आज़ादी की जो झांकी निकाली कि लोग बाकी जिंदगी उस 'अमृत महोत्सव' की फीलिंग में ही गुज़ार देंगे ! आज़ बुल्डोजर के साथ हम आज़ादी की हीरक जयंती मना रहे हैं! इसका आनंद और फीलिंग अदभुत है ! किंतु आश्चर्य है कि विपक्ष बुल्डोजर को देख कर विलाप करता है जब कि सत्ता पक्ष हर्षनाद ! भक्त गण कह रहे हैं, - जाकी  रही  भावना  जैसी - वाली बात है !! आज़ादी और अमृत सबको रास नहीं आती ! बुल्डोजर आज़ाद है, इसलिय वो अपनी फीलिंग के हिसाब से अमृत बांटता है ! वह अपने और आज़ादी के बीच में  ' स्टे ' का दख़ल नहीं देखना चाहता ! 
          यूपी से निकला बुल्डोजर एमपी में काफ़ी पसंद किया गया! प्रशासन अदालतों का सारा पचड़ा बुल्डोजर को सौंपना चाहता है ! बुल्डोजर माने न्याय पालिका ! आज़ादी का पूरा अमृत महोत्सव !! अपराध और विरोध मुक्त भारत !! बुल्डोजर को पहले गंभीरता से नहीं लिया गया था तो आज़ादी कितनी फीकी थी ! आज बुल्डोजर की महती कृपा से मई और जून में भी चारों  ओर कितनी हरियाली है ! लेकिन कांग्रेस को क्या हो गया है जो वह विकास और बुल्डोजर का विरोध कर रही है !.उनके अंदर न अमृत बचा- न फीलिंग !! जहां भी हमारा आजादी  वाला बुल्डोजर देखते हैं, आगे आकर लेट जाते हैं- 'विकास' होने ही नहीं देते !! नौ मई को शाहीन बाग में इन्होंने यही किया, बुल्डोजर के आगे लेट कर '' अमृत महोत्सव" का मज़  किरकिरा कर दिया ! !
       अब हम विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहे हैं! कुछ  पाने के  लिए  कुछ खोना  पड़ता! ( खोना वर्तमान है और पाना भविष्य!) सिलेंडर का बढ़ा हुआ दाम वर्तमान है, स्वर्णिम भविष्य पाने के लिए मंहगाई जैसी अकिंचन चीज को भूलना होगा ! विश्व गुरू होने के लिए किचन विधवा भी हो जाए तो भी परवाह नहीं !!ये एलपीजी गैस,  गबन, मंहगाई, बेकारी या रुपए का अवमूल्यन सब तुम्हारे कर्म हैं! जैसा करम करोगे वैसा फल देगा भगवान.! ये सब भगवान और भक्त के बीच का मैटर है! इसमें सत्ता पक्ष का कोई दोष नहीं ! उल्टे सत्ता पक्ष तो ईश्वर के अलावा और किसी की तरफ़ ध्यान ही नहीं  दे रहा है! पहला फ़ोकस इस पर है कि कहां कहां ईश्वर से उनका निवास स्थान छीना गया है , पहले वहां बुल्डोजर का अमृत महोत्सव मनाया जाएगा ! सर्वे जारी है,ताकि इस बार ईश्वर को न्याय मिलने में विलम्ब न हो !
            कल नौ मई थी ! शाहीन बाग में बुल्डोजर का अमृत महोत्सव होना था़ ! भारी पुलिस बल के साथ बुल्डोजर रवाना हुआ ! कई मीडिया के चारण बुल्डोजर की विरुदावली गाते हुए आगे आगे चल रहे थे! एक बड़े चैनल की चर्चित मोहतरमा हांफती हुई बोल रही थीं ! उनकी खुशी और उत्साह देख कर लगता था कि सिर्फ "हिन्दू मुस्लिम" करने से ही उन्हें प्रोटीन हासिल हो जाता है! डिमोलिशन निरस्त होने पर उनके चेहरे पर जो मायूसी मैने देखी, उससे लगता था़ गोया शाहीन बाग में किसी ने उनकी किडनी निकाल ली हो ! प्रशासन और बुल्डोजर भी उतने दुखी नहीं थे ! 
                हीरे की परख जौहरी को होती है ! जौहरियों ने बुल्डोजर की नाभि में छुपे ' अमृत ' को पहचान लिया है ! सुबह उठते ही बुल्डोजर पूछ लेता है, - ' क्या हुक्म है मेरे आका ! आज़ कहां कहां आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाना है ?  अब तो इसके बगैर - दिल है कि मानता नहीं - !!

                           ( सुलतान भारती)

Tuesday, 3 May 2022

बचपन के घरौंदे में रखी " ईद'' !

                "बचपन के घरौंदे में रखी ईद "!

       आज़ ईद है ! मुस्लिम बहुल इलाकों में लोग तीन दिन तक ईद मनाते हैं! दिल्ली का शाहीन बाग ऐसे ही इलाके में शुमार होता है ! इस वक्त रात के साढ़े नौ बजे है! शाहीन बाग की बडी मस्जिद में ईद की नमाज़ सुबह सात बजे हो चुकी है! लोगों के ज्यादातर मेहमान और दोस्त अहबाब पकवान डकार कर जा चुके हैं,फिर भी आज़ ईद है! कल चांद रात को शाहीन बाग की रोशनी, रश और रौनक देखने लायक थी। मेन रोड, चालीस फुटा मार्केट और हाई टेंशन रोड पर खरीदारो की सुनामी आई हुई थी ! नानवेज के शौकीनो का नया मरकज है शाहीन बाग ! चांद रात तड़के तीन बजे तक शाहीन बाग खरीदारों से गुलज़ार रहा ! 
              अभी एक घंटे पहले जब मै बॉल्कनी में बैठा गांव में फ़ोन मिला रहा था तो मेरा बिल्ला निम्बस पास आकर अपना शरीर मेरे पैर से रगड़ने लगा ! ऐसा वो तभी करता है जब उसे नीचे घूमने जाना होता है या मेरे साथ खेलना होता है ! मैं उसे लेकर बाहर गली में आया जहां तीन आवारा कुत्ते बैठे हुए थे ! निम्बस को देख कर कुत्तों का मुखिया धीरे से गुर्राया, जैसे कह रहा हो - अबे मर्द बिल्ला है तो कभी अकेले निकल कर दिखा ! तुझे रसगुल्ला समझ कर निगल जाऊंगा "! बाहर मैने इन कुत्तों के लिए मिट्टी के एक बर्तन में पानी भर कर रखता हूं ! कुत्ते जानते हैं कि ये नेक काम कौन करता है, तभी वो बिल्ले को अब तक झेल रहे हैं ! आज सुबह गैंग का मुखिया कुत्ता मुझे देख कर पूंछ हिलाते हुए हल्के से गुर्राया था, मुझे लगा कि पूछ रहा है, - '  गोद में लेकर घूमना ही है तो किसी सेलिब्रिटी को चुनो भ्राता श्री ! मेरे बारे में क्या ख़्याल है !! '
         तीन बजे मेरे अजीज़ दोस्त ( इब्राहीम) का गांव से फोन आया ! वो ईदगाह से लौट कर फोन कर रहे थे ! एक घंटा लम्हे की तरह निकल गया ! हम बचपन की खूबसूरत यादों को दिल और दिमाग़ से खुरच खुरच कर वर्तमान के खुरदरे दस्ताबेज की विरासत बनाते रहे ! एक  ईद आज़ थी जो तमाम व्यूह  से घिरकर दो साल बाद लोगो को हासिल हुई थी ! पिछली दो ईद की सिवइयां कोरोना पी चुका था ! ईद राष्ट्रीय पर्व पर है, इस बार का रमजान - रामनवमी, पथराव, हनुमान चालीसा और लाउड स्पीकर से ओतप्रोत रहा ! अज़ान और हनुमान चालीसा के बीच खड़ी ईद अपनी शिनाख्त ढूंढती हुई  सकते में खड़ी थी।
      एक मेरे बचपन की ईद थी ! रोज़ा बेशक नहीं रखते थे पर ईद की खुशी पर दावा हम बच्चों का ही था ! अब्बा और अम्मा दोनों से ईदी लेते थे और पूरी कोशिश होती थी कि ईदगाह में हमें अपना पैसा ना खर्च करना पड़े,और अब्बा हम दोनों भाईयों की पसंद की हर चीज़ अपने पैसे से खरीद कर घर ले आएं। अब्बा कलकत्ते में नौकरी करते थे और हमारा खाता पीता परिवार था । ईद के रोज नया कुर्ता पजामा पहन कर हम फूले न समाते ! ईदगाह जाते वक्त हम सभी हम उम्र बच्चे आपस में इंक्वायरी कर पता कर लेते थे कि किसके पास सबसे ज्यादा ईदी है ! उस दिन हर  कोई मेरा बेस्ट फ्रेंड साबित होने की कोशिश करता था! ( ईद के दूसरे दिन उनके तेवर अलग होते थे! ) तारा की अम्मा के ठेले पर लगा टिक्की चाट  हमारी सबसे फेवरेट चाट थी ! उनकी मिर्च मसाला  वाली चाट ज़हर से कुछ डिग्री नीचे थी ! खाते ही आंख और मुंह से गंगा जमुना छूट जाती थी !
        चांद रात को हम खुले छत पर बातें करते हुए देर रात तक अगले दिन मिलने वाली ईदी की बातें करते रहते ! तब बिजली नहीं थी लेकिन रिश्तों में गन्ने जैसी मिठास थी! ईद से दो दिन पहले ठाकुर अभिलाष सिंह के हाता से मेंहदी की पत्तियां तोड़ कर लड़कियां लाती, ताकि हाथ में मेंहदी लगाई जाए! अभिलाष सिंह हाथी नशीन जमींदार थे! तब कॉस्मेटिक मेहंदी कहां थी !  ईदगाह में दो तीन रुपए में हम अपने सपनों की कायनात खरीद लेते थे! घर से कारूं का ये खज़ाना जेब में डाल कर हम जब ईदगाह के लिए रवाना होते तो अम्मा नसीहत देती, -" फ़िज़ूल मत खर्च करना "! उस महान गुरु की वही नसीहत आज़ मैं अपने बेटे को देता हूं!
         ईद हो या दीवाली, खुशियों पर बच्चों का ही आधिपत्य होता है ! हम जाने क्यों बड़े होते हैं? बड़े होते ही हमारे होठों से मुस्कराहट और आखों से नींद छिन जाती है ! अपनी पलकों में खुशियों की सारी कहकशां भर कर जब बच्चे सो रहे होते हैं, तो उनके मां बाप अगले दिन भी यही खुशी बरकरार रखने के लिए जाग रहे होते हैं ! हम हमेशा अपने मां और बाप के उस फिक्र के कर्जदार रहेंगे! 
         आज बेटे को ईदी दिया तो मुझे अपने वालिद और वाल्दा याद आ गए ! वालिद साहब पढ़े लिखे नहीं थे, लेकिन अंग्रेजों के शासन में सबको नौकरी मिल जाती थी! मेरी मां ने अपने चारों बेटों को पढ़ाया! उन्होंने अपनी सारी खुशियों को हमारे ख्वाबों में पिरो दिए ! शायद दुनियां की हर मां ऐसी ही होती है ! वो हिन्दू और मुसलमान नहीं होती !
     आखिरी लाइन लिखते लिखते मैं जैसे ईद के रोज अपने बचपन में खड़ा था - मां के सामने ! लगा जेसे मां कह रही हो, -  "जिम्मी ! (मेरा प्यार का नाम) सबको सलाम करना, और  फिजूल खर्ची मत करना '' !

     फिर,,,,फिर मैं बड़ा हो गया, और आज तक वो ईद पलट कर दोबारा  नहीं आई! कभी नहीं !!

          ( सुलतान भारती)

Wednesday, 27 April 2022

( व्यंग्य भारती) "अज़ान से इंफेक्शन "

  ( व्यंग्य भारती)

           "अज़ान से इंफेक्शन"

       अपने देश में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है कि दुनियां हमारी प्रतिभा देख कर सकते में है! जहां दुनियां के क्षुद्र
वैज्ञानिक परमाणु अस्त्र से निजात पाने, ओजोन की क्षतिग्रस्त परत की मरम्मत करने, ग्लेशियर के पिघलने को रोकने, पेय जल संकट  दूर करने और अंतरिक्ष में बस्तियां बसाने जैसे बेकार के कामों में लगे हुए हैं, वहीं हम इन छोटे मोटे पचडो में पड़ने की बजाय सीधे  "हिन्दू मुस्लिम"  के अखंड कीर्तन में लगे हैं - एकहि साधे सब सधे -! विश्व गुरु होने के लिए सुरंग यहीं से खोदनी है! इस काम में अभी कंपटीशन भी नही  है! पता नहीं क्यों, कोई और देश विश्व गुरू होने को आतुर नहीं है !! हमारा लक्ष्य है कि एक बार विश्व गुरु बन  जाएं ,फिर तो किसी भी  'एकलव्य'  से उसका अंगूठा ले लेंगे ! इसलिए हम इसके अलावा और कुछ  बनना भी नहीं चाहते! उधर अमेरिका विश्व गुरु बनने की बजाय चौधरी बन कर परेशान है ! पैसा बांट बांट कर आज कंगाल होने की कगार पर है ! उसे नाटो के देशों को दक्षिणा देनी पड़ती है । विश्व गुरु बनता तो देने की बजाय दक्षिणा से मालामाल हो जाता !
          खैर छोड़िए ! तो,,,,,, हमारे देश में आज कल कुछ विलक्षण सोशल वैज्ञानिक उग आए हैं! वह जनहित में कल्याणकारी खोज कर रहे हैं !  आए दिन एक नई खोज से जनता और जनार्दन को सकते में डाल रहे हैं ! उनकी डिमांड है,- ' हिंदुस्तान में रहना होगा ! तो वंदे मातरम् कहना होगा -!!' ( कुछ लोगों के अड़ जाने के कारण विश्व गुरू बनने में इतना विलंब हो रहा है !) जब कभी देश हित में ऐसी खोज होती है तो टीआरपी का अकाल झेल रही मीडिया का ऑक्सीजन लेवल एकदम से  आत्म निर्भर हो जाता है !  सुबह शाम नफ़रत का समुद्र मंथन तेज हो जाता  है ! बताया जाता है कि इस कोलाहल से प्रजा को कन्फ्यूजन  और  प्रजातंत्र को मजबूती मिलती है ! हम संकल्प ले चुके सनम !!
          इन क्रांतिकारी सोशल वैज्ञानिकों ने दूसरे धर्मों के गेहूं में घुन ढूढने का बीड़ा उठा लिया है , - सारे घर के बदल डालूंगा - की तैयारी चल रही है ! धर्म को समझने का काम बुद्धिजीवी से छीन कर बुलडोजर को दे दिया गया है ! न्याय पालिका में आई क्रांति का श्रेय भी बुल्डोजर को ही जाता है ! वादी प्रतिवादी जितनी देर में एफआईआर की सोचते हैं, उतनी देर में सजा पर अमल हो जाता है , कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे -!
    इन्ही सामाजिक वैज्ञानिकों की ताज़ा खोज अजान से होने वाला "घातक इंफेक्शन"  है ! इस इंफेक्शन से आज 75 साल बाद अचानक बच्चों की पढ़ाई बाधक हो गई है, और देश आगे नहीं बढ़ पा रहा है ! इतना ही नहीं, इसी तीन चार मिनट की लाउड स्पीकर से दी गई अजान की वजह से कुछ लोगों की नींद जा रही है, सरदर्द आ रहा है! हवा की गुणवत्ता ख़त्म हो रही है और स्वास्थ्य और भाईचारे पर बुरा असर पड़ रहा है -! अज़ान  के इतने दुष्परिणाम ढूंढने वाले महापुरुष उसका दो  समाधान बता रहे हैं! ध्वनि प्रदूषण दूर करने का पहला समाधान है कि मस्जिदों से लाउड स्पीकर उतार दिया जाए !  दूसरा सुझाव और भी दिव्य है,- हर मस्जिद के सामने लाउड स्पीकर लगा कर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए-! आशा है कि इस प्रयोग के बाद भाईचारा बढ़ जाएगा और सम्पूर्ण पृथ्वी  ध्वनि प्रदूषण से  से मुक्त हो जाएगी ! ( इस खोज से पूरी  दुनियां  में हमारी  जय जयकार हो  रही। है !  "नासा" तक के वैज्ञानिक सकते में आ गए हैं !)
              ज़िंदगी के खूबसूरत 24 साल मैंने यूपी के अपने गांव में गुजारे ! हिंदू मुस्लिम की आबादी वाला माहौल ! गांव तो जागता ही था सुबह फजर की अज़ान से ! हर हिंदू और मुसलमान किसान का रूटीन इसी अज़ान से शुरु होता था ! तब बिजली नहीं थी , घरों में घड़ी बहुत कम थी इसलिए इशा की अज़ान  से लोग रात का खाना और सोने की तैयारी शुरू करते थे! जिस दिन अज़ान की आवाज़ सुबह नही सुनाई पड़ती थी, कई लोगों का रूटीन डिस्टर्ब हो जाता था! बगल कई हिंदू बाहुल्य गांव थे, जहां से सुबह शाम मंदिर की सुमधुर घंटियों की आवाजें आया करती थीं! उन गांवों में आज़ भी मेरे बेहतरीन दोस्त हैं! हमने किसी के मुंह से कभी अज़ान के लिए ऐसे इल्जाम नहीं सुने ! आज़ भी शाम की नमाज़ के बाद हिंदू मुस्लिम औरतें अपने नवजात और बीमार शिशुओं को नमाजियों से फूंक डलवाने के लिए मस्जिद के सामने खड़ी नज़र आती है ! ये तस्वीरें ही हमारी गंगा जमुनी रवायत की मजबूत मिसाल और रोशन मशाल हैं!
              तो,,,, ख़ोज चालू है ! लाउड स्पीकर से अज़ान देने पर अभी अंत्याक्षरी अभी चल ही रही थी कि एक नई ख़ोज आ गई! इस बार अज़ान की दो बुनियादी लाइनों पर ज्ञान उड़ेलते हुए इसे ' समस्त धर्मों का घोर अपमान' बता दिया ! नई ख़ोज ने खुलासा कर दिया कि लक्ष्य लाउड स्पीकर नहीं अज़ान है ! ये इंफेक्शन किस दवा से ठीक होगा , देवो न जानति कुतो मनुष्य: ! इस बीमारी पर आकर  विकास के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा खड़ा हो गया है ! धर्म योद्धा सतयुग लाने के लिए कमर कस चुके हैं और नेपथ्य में धर्मयुद्ध का आवाहन जारी है! कभी धर्म ने इंसानियत की परिभाषा तय की थी, आज लहूलुहान इन्सानियत धर्म को देख कर सदमे में है! 
        धर्म योद्धा अब धर्म युद्ध को तैयार है! उसका घोड़ा खड़ा हिनहिना रहा है, पीछे अक्षौहिणी सेना का कोलाहल है ! बीच में जनता चीख रही है --

 'रोटी  कपड़ा और मकान ! 
 कब तक दे  देंगे   श्री मान !!' 

            
 धर्म योद्धा जवाब  दे रहे हैं _

 'राज तिलक की करो तयारी ! 
 आ   रहे   हैं   भगवा धारी '!!

       यानि  इंतज़ार करना पड़ेगा, विकास की बाली अभी पूरी तरह से पकी नहीं है !!

                                     (सुलतान भारती)

Monday, 18 April 2022

(अग्नि दृष्टि) " असहिष्णुता का खौलता लावा"!

"अग्नि दृष्टि"
( संपादकीय)

असहिष्णुता का खौलता लावा

     राम चरित मानस में एक अर्धाली है, - ' जाकी रही भावना जैसी ! प्रभु मूरत देखी त्यों तैसी-' ! अर्थात् हमारी भावना ही हमारी आस्था का मापदंड तय करती है ! आस्था चूंकि संपूर्णता चाहती है और संपूर्णता के लिए समर्पण पहली शर्त है! समर्पण में निश्छलता का समावेश न हो तो आस्था कालांतर में व्यवसायिक हो जाती है! यदि इबादत में समर्पण न हो तो धर्म व्यवसाय बन जाता है! लोक कल्याण की भावना धर्म से डिलीट होते ही विश्वत  कुटुंबकम की भावना खत्म हो जाती है ,।और प्राणी धर्म को अपने हिसाब से चलाने लगता है !  धर्म से दूरी बढ़ते ही इंसान की आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का ह्रास होने लगता है , जिनकी पूर्ति के लिए व्यक्ति  अपना आभामंडल बनाने और बचाने के लिए हर अनैतिक और अमानवीय हथकंडा अपना लेता है ! आस्था में एकाग्रता की कमी चारित्रिक संक्रमण का संकेत है, धर्म चाहे कोई भी हो ! आज चारों तरफ़ धर्म को लेकर हाहाकार है! करता इंसान है और इल्जाम धर्म और ईश्वर पर रख देता है !
                   इंसान को कुरान में "अशराफल मखलूक'' ( सर्वश्रेष्ठ प्राणी) कहा गया है ! कुरआन में ईश्वर कहता है - लकद  खलकनल इंसाने फी  अहसने  तकवीम - ! यानि (हमने मनुष्य को सर्वोत्तम तरीक़  से बनाया है!) लेकिन वही इंसान जमीन पर आकर अपना बुद्धि वैभव और विशेषता का प्रयोग निर्माण की अपेक्षा विध्वंस में लगाने लगता है ! हर धर्म को बढ़िया बताने वाला इंसान आज एक दूसरे के धर्म को समाप्त करने को ही सबसे बड़ा धर्म बता रहा है ! सब एक दूसरे के गेहूं में घुन ढूंढने में लग गए हैं ! और इस अधर्म में धर्मगुरु सबसे आगे हैं ! कोई अपनी गलती मानने को राज़ी नहीं ! सदियों से प्यार मुहब्बत भाईचारे का अलमदार बना हमारा देश इसी धार्मिक उन्माद का इस वक्त दंश झेल रहा है ! इसका ताज़ा ज़ख्म इसी राम नवमी को कई जगह देखा गया !
                इस बार की रामनवमी सदियों से चली आ रही रामनवमी से बिलकुल अलग थी !. शांत, स्निग्ध, आस्था से ओतप्रोत होने की जगह एक संप्रदाय विशेष के प्रति नफरत और आक्रामक इरादों से भरी हुई ! आस्था की जगह आक्रामकता से लबरेज़ नारे - ' हिंदुस्तान में रहना होगा ! तो वंदे मातरम् कहना होगा -!' ये नारे एक इंडिकेटर थे कि इस रामनवमी के केंद्र बिंदु में आस्था नहीं आक्रामकता है ! शांति और सद्भाव नहीं शरारत है। रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों पर रुकने की बजाय सिर्फ़ मस्जिद पर पहुंच कर 'आस्था' प्रस्फुटित होती रही ! शायद आज़ अगर खुद मर्यादा पुरुषोत्तम वहां होते तो गुनहगार को अपने हाथ से दंड देते! 
          हर जगह एक जैसी घटना देखी गई ,- जलूस का मस्जिद पर आकर रुक जाना, उत्तेजक नारे बाजी करके एक  संप्रदाय  विशेष को टकराव पर विवश कर देना  !  पुलिस का तब तक तमाशाई बनकर खड़े रहना, जब तक कि जुलूस के सशस्त्र लोग अपने मंसूबों में कामयाब न हो जाएं! बाद में पीड़ित पक्ष पर पुलिस और प्रशासन द्वारा एक तरफा कार्रवाई ! और,,,,इन सब में मीडिया की भूमिका सबसे ज्यादा शर्मनाक देखी जा रही है! ज्यादातर चैनल पीड़ित पक्ष के लोगों को ही दंगाई, आतंकी और साजिशकर्ता साबित करने में पसीना बहा देते हैं ! दो एक चैनल जो सच बोलते हैं वो नक्कारखाने में तूती की आवाज़ से ज़्यादा अहमियत नहीं रखता ! आज़ अगर सोशल मीडिया न होती तो जाने क्या होता!
         मैं योगी जी की तारीफ़ करूंगा इस विषय में ! देश के सबसे बडे़ और सबसे संवेदनशील प्रदेश में रामनवमी के मौके पर कहीं भी तशद्दुद का कोई वाक्या नज़र नहीं आया, बल्कि कई संवेदन शील इलाकों में मुस्लिम समुदाय अपने हिंदू भाईयों पर फूल की बारिश करते नज़र आए ! ये योगी आदित्यनाथ जैसे सख्त
  प्रशासक ही ऐसा करिश्मा कर सकते हैं ! सुनकर और देख कर यकीन पुख्ता हो जाता है कि प्रशासन अगर सख्त और संजीदा हो तो अपराधी का मंसूबा  कभी कामयाब नही हो सकता !!
           बहुत पहले देवानंद और जीनत अमान की एक फिल्म आई थी - हरे रामा हरे कृष्णा -! उसका एक गीत याद आ रहा है, - ' देखो वो दीवानों ऐसा काम ना करो! राम का नाम बदनाम न करो -'! शायद आज इस गीत पर सबसे ज्यादा अमल करने की ज़रूरत है ! इन्हीं पंक्तियों के साथ - समानता , सहिष्णुता,सौहार्द, सामाजिक संवाद,और सामप्रदायिक एकता की हम कामना करते हैं  !! आओ, हम सब  मिल कर  नई सोच के साथ एक नए  सूरज  का इस्तकबाल करें !! 
       अवध के शायर एम के  ''राही" का एक शे'र है ---

हिंदू है अगर जिस्म तो धड़कन है मुसलमान!
दोनों  के  इत्तेहाद  से कायम  है  "हिंदुस्तान"!!

              ( सुलतान भारती)

Tuesday, 12 April 2022

(व्यंग्य भारती)। निंबुडा निंबुड़ा निंबुडा !

(व्यंग्य भारती)   " निंबुड़ा निंबुड़ा निंबुड़ा"!!!

            मैं निंबू का विरोधी नहीं हूं ! निंबू शायद मेरी फूड चेन में सबसे ऊपर है! मैं निंबू रोज़ इस्तेमाल करता था, पर विगत तीन दिन से नींबू  मुझे निचोड़ रहा है ! वैसे आत्मनिर्भर तो मैं तीन साल पहले ही हो गया था, लेकिन इधर रमजान और नवरात्रि के संगम में निंबू ऐसे टपका कि मंहगाई विश्वगुरु होते होते बची। फिर भी मैं निंबू की निन्दा नही करना चाहता था, क्योंकि मंहगाई तो आत्मा की तरह अजर अमर है!  न आग इसे जला सकती है, न पानी इसे डुबो सकता है! ( बल्कि कई सरकारें इसमें खामखा डूब गई हैं! ) ऐसा भी नहीं है कि देश पहली बार मंहगाई की मुंह दिखाई दे रहा है! हकीकत तो ये है कि महंगाई विपक्षी दलों के लिए जीवनदायिनी ऑक्सीजन की तरह है! इसलिए हे पार्थ ! नींबू के महंगा होने का शोक मत करो ! कभी तुम नींबू को लटकाते थे -आज़ नींबू ने तुम्हें लटका दिया है!
         विचित्र खबरें आ रही हैं , गिनीज़ बुक वाले सकते में हैं! यूपी की एक सब्ज़ी मंडी की ख़बर है, चोरों ने पूरे पचास किलो नींबू का बोरा चुरा लिया ! पूरा प्रदेश सकते में है - गजब भयो रामा जुलम भयो रे। भरे अप्रैल में कलियुग आ गया !! प्रशासन सकते में है, बुलडोजर खुद बाबा से पूछ रहा है,.. ' किसके गोदाम की कपाल क्रिया करनी है?' प्रदेश के निंबू व्यापारी अपना अपना गोदाम टटोल रहे हैं कि कहीं चोर ने निंबू का बोरा इधर ना छुपा दिया हो! बुलडोजर ने व्यापारी को भी सात्विक बना दिया है ! कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था कि नींबू का दाम सुनकर एक दिन आदमी का चेहरा पीला पड़ जाएगा ! अगर यही स्थिति रही तो कुछ दिन बाद लोग निंबू को लॉकर  में  रखने  लगेंगे  और अखबारों में खबरें  कुछ  इस  तरह होंगी,--' एयरपोर्ट पर अमेरिका से आए एक तस्कर के पाजामे से आधा किलो नींबू बरामद -!' ब्रेकिंग खबर ये भी हो सकती है , - ' चीन से आए नकली नींबू के पचास कंटेनर पकडे गए ! भारतीय अधिकारियों ने चीन के राजदूत को कसकर फटकार लगाई ! राजदूत ने घिघियाते  हुए सफाई दी, - ' क्या करूं सर ! दिल है कि मानता नहीं ! "
           परसों वर्मा जी नाराज़ होकर मुझसे कह रहे थे, -'' अभी तक दुनियां यही जानती थी कि निंबू सिर्फ दूध फाड़ता है , लेकिन आज सबको पता चल गया कि नींबू का दाम सुनकर  भी बहुत कुछ फट जाता  है !" मेरा अपना सरदर्द है, वर्मा जी का अपना ! रमज़ान में निंबू करैले की तरह नीम पर चढ़ा बैठा है ! ऐश्वर्या राय ने 'निंबुड़ा निंबुड़ा' गाकर नींबू का भाव बढ़ा दिया ! जानें कौन सा निगोड़ा नींबू था़ जिसे बेचने के लिए  ऐश्वर्या ने ऐसा गाना गाया था ! आज़ मंडी में नींबू ऐश्वर्या राय की तरह सेलेब्रिटी हुआ पड़ा है और आदमी टूटे मनोबल के साथ सकुचाया हुआ दुकानदार से पूछ रहा है,- ' निंबू क्या भाव है?'' निंबू से ज़्यादा दुकानदार का पारा चढ़ा हुआ है,- ," दो सौ सत्तर रुपए हैं जेब में !!"  दाम सुनकर ग्राहक को लगता है कि सायकल का पिछला पहिया पंचर हो गया है ! वो धीरे से पीछे हटता है और  दुकानदार अपराजेय  होकर पीछे से बोली बोलता है ,- ' घर में नहीं दाने , अम्मा चली भुनाने -''!
        चार दिन पहले अवध ( सुल्तानपुर) के पत्रकार सनाउद्दीन ने निंबू के नेशनल रुतबे के हिसाब से अपने पत्रकार मित्रों से रेट जानना चाहा तो सारे देश की मंडियों का जो तापमान नापा गया, उसके मुताबिक स्वस्थ हिमोग्लोबिन  वाले  नींबू  280/ से  300/ रुपए प्रति किलो ! विकलांग नींबू 200/ से 230/रुपए प्रति किलो, और गन्ने  के जूस में इस्तेमाल होने वाले सूखा पीड़ित नींबू का रेट दस रुपया प्रति नींबू पता लगा।! लगता है जैसे विश्व गुरु होने की सबसे ज्यादा जल्दी "नींबू" को ही है !

वो गाना याद आ रहा है - प्यास भड़की है सरे शाम है जलता है जिगर -! प्यास भड़की है तो जिगर पर एक चुटकी नमक डाल दो ! जिगर से कह दो कि नींबू से दूर रहे, दिल जलता है तो जलने दे,,,,,,,! बारह रोजे निकल गए ,  तेरहवे रोजे की पूर्व संध्या पर बेगम ने पंद्रह रुपए देते हुए मुझे आदेश दिया, - " मिस्टर भारती ! कहीं से भी तीन  नींबू खरीद कर लाओ "! तब से ऐसा लग रहा है गोया किसी ने कांग्रेस के डैमेज कंट्रोल करने का काम मुझे दे दिया है ! इतना पसीना तो हातिमताई को भी उस दिन  न आया होगा, जब हुस्न बानो ने उन्हें सात सवालों का जवाब लाने को कहा था !

          काश ! आज़ मेरे हाथ में अलादीन का चिराग होता !! ओ भूमंडल के सस्ते निंबुओं - आवाज़ दो कहां हो !! त्राहिमाम दोस्तों ! मैं अभी भी सब्जी मंडी में घूम रहा हूं ! बगैर नींबू  खरीदे घर जाऊं कैसे !!

                       ( सुलतान भारती)

Sunday, 10 April 2022

प्राक्कथन

                       प्राक्कथन

          (    जीस्त    ए    डॉली    )

            मैं शायद डॉली को दो साल से जानता हूं ! वैसे मुलाकात छे सात महीने पहले गांव जाने पर हुई ! बेहतरीन सोच, शब्द, संवाद, सादगी और,,,, शायरी! मिलने पर यकीन करना मुश्किल था कि ये खूबसूरत छोटी बच्ची इतनी कम उम्र में अल्फाजों की इतनी आकाशगंगा  तामीर कर सकती है!! उसके अशआर में  उर्दू भाषा के कई शब्द मुझे हैरत में डाल देते थे ! फिर मुझे पत्रकार इम्तियाज़ खान मिले तो पता चला कि किसान की इस बेटी ने उर्दू इम्तियाज़ खान साहब से सीखी थी !सुन कर मुझे अपने उस्ताद मरहूम डी पी पांडेय जी याद आ गए, जिन्होंने मुझे. 'सुलतान भारती' बनाने में एक अहम किरदार निभाया था ! अवध की जरखेज़ साहित्यिक मिट्टी की यही समुदायिक खासियत है जो गंगा जमुनी रवायत की जड़ों को रूहानी ताक़त बख्शती है !
          सात महीने पहले मैं जब पहली बार डॉली से मिला , तभी मैने उसे अपना संकलन निकालने की सलाह दी थी, क्यों कि मैं चाहता था कि उसकी रचनाओं को पंख मिलें और उसके ख्वाब बिसुहिया (उनका गांव) से निकल कर विश्व भर में परवाज़ करें!
      डॉली की रचनाओं में कई भाषाओं के शब्द सितारे मिल जाएंगे ! उसके रचनाओं की कायनात  दर्द ज़ख्म सिसकियों की आहट से भरी हैं ! डॉली दर्द के इस कायनात के बारे में बेबाकी से लिखने में अपनी उम्र से भी कहीं आगे निकल जाती हैं ---

गमज़दा ख़्वाब ढोते रहे उम्र भर !
मौत के बाद भी कोई राहत नहीं !!

      वह आंसू और उम्मीद की अलमबरदार हैं!  अपनी रचनाओं में हालाते हाजरा पर सवाल उठाते हुए डॉली बड़ी कद्दावर नज़र आती हैं ---  

हर शख़्स को है एक ही मंज़िल की जुस्तजू !
'वाइज'  बताए   रास्ते  क्यूं   हैं  जुदा  जुदा !!

      "जीस्त ए डॉली" पाठकों की अदालत में है!   देख कर अच्छा लगा कि डॉली के पहली ही किताब को साहित्य और सियासत जगत के कई चमकते सितारों के सशक्त भावात्मक आशीर्वाद मिलें हैं ! आगे डॉली को इसी कहकशां का एक सितारा बनना है !  डॉली की हिम्मत, साहित्यिक प्रतिभा,  आसमान छूने की आशावादिता , बेखौफ अंदाज़ और सतत संघर्ष के हौंसले को सलाम करते हुए मैं उसे यकीन दिलाना चाहूंगा,,,,,,, कि 

अकेला ही मुसाफ़िर कारवां बन जाता है जिस दिन !
उसी  दिन  मुश्किलों  के  हौंसले  भी  टूट  जाते  हैं !!

                           (  सुलतान भारती )