Monday, 18 April 2022

(अग्नि दृष्टि) " असहिष्णुता का खौलता लावा"!

"अग्नि दृष्टि"
( संपादकीय)

असहिष्णुता का खौलता लावा

     राम चरित मानस में एक अर्धाली है, - ' जाकी रही भावना जैसी ! प्रभु मूरत देखी त्यों तैसी-' ! अर्थात् हमारी भावना ही हमारी आस्था का मापदंड तय करती है ! आस्था चूंकि संपूर्णता चाहती है और संपूर्णता के लिए समर्पण पहली शर्त है! समर्पण में निश्छलता का समावेश न हो तो आस्था कालांतर में व्यवसायिक हो जाती है! यदि इबादत में समर्पण न हो तो धर्म व्यवसाय बन जाता है! लोक कल्याण की भावना धर्म से डिलीट होते ही विश्वत  कुटुंबकम की भावना खत्म हो जाती है ,।और प्राणी धर्म को अपने हिसाब से चलाने लगता है !  धर्म से दूरी बढ़ते ही इंसान की आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का ह्रास होने लगता है , जिनकी पूर्ति के लिए व्यक्ति  अपना आभामंडल बनाने और बचाने के लिए हर अनैतिक और अमानवीय हथकंडा अपना लेता है ! आस्था में एकाग्रता की कमी चारित्रिक संक्रमण का संकेत है, धर्म चाहे कोई भी हो ! आज चारों तरफ़ धर्म को लेकर हाहाकार है! करता इंसान है और इल्जाम धर्म और ईश्वर पर रख देता है !
                   इंसान को कुरान में "अशराफल मखलूक'' ( सर्वश्रेष्ठ प्राणी) कहा गया है ! कुरआन में ईश्वर कहता है - लकद  खलकनल इंसाने फी  अहसने  तकवीम - ! यानि (हमने मनुष्य को सर्वोत्तम तरीक़  से बनाया है!) लेकिन वही इंसान जमीन पर आकर अपना बुद्धि वैभव और विशेषता का प्रयोग निर्माण की अपेक्षा विध्वंस में लगाने लगता है ! हर धर्म को बढ़िया बताने वाला इंसान आज एक दूसरे के धर्म को समाप्त करने को ही सबसे बड़ा धर्म बता रहा है ! सब एक दूसरे के गेहूं में घुन ढूंढने में लग गए हैं ! और इस अधर्म में धर्मगुरु सबसे आगे हैं ! कोई अपनी गलती मानने को राज़ी नहीं ! सदियों से प्यार मुहब्बत भाईचारे का अलमदार बना हमारा देश इसी धार्मिक उन्माद का इस वक्त दंश झेल रहा है ! इसका ताज़ा ज़ख्म इसी राम नवमी को कई जगह देखा गया !
                इस बार की रामनवमी सदियों से चली आ रही रामनवमी से बिलकुल अलग थी !. शांत, स्निग्ध, आस्था से ओतप्रोत होने की जगह एक संप्रदाय विशेष के प्रति नफरत और आक्रामक इरादों से भरी हुई ! आस्था की जगह आक्रामकता से लबरेज़ नारे - ' हिंदुस्तान में रहना होगा ! तो वंदे मातरम् कहना होगा -!' ये नारे एक इंडिकेटर थे कि इस रामनवमी के केंद्र बिंदु में आस्था नहीं आक्रामकता है ! शांति और सद्भाव नहीं शरारत है। रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों पर रुकने की बजाय सिर्फ़ मस्जिद पर पहुंच कर 'आस्था' प्रस्फुटित होती रही ! शायद आज़ अगर खुद मर्यादा पुरुषोत्तम वहां होते तो गुनहगार को अपने हाथ से दंड देते! 
          हर जगह एक जैसी घटना देखी गई ,- जलूस का मस्जिद पर आकर रुक जाना, उत्तेजक नारे बाजी करके एक  संप्रदाय  विशेष को टकराव पर विवश कर देना  !  पुलिस का तब तक तमाशाई बनकर खड़े रहना, जब तक कि जुलूस के सशस्त्र लोग अपने मंसूबों में कामयाब न हो जाएं! बाद में पीड़ित पक्ष पर पुलिस और प्रशासन द्वारा एक तरफा कार्रवाई ! और,,,,इन सब में मीडिया की भूमिका सबसे ज्यादा शर्मनाक देखी जा रही है! ज्यादातर चैनल पीड़ित पक्ष के लोगों को ही दंगाई, आतंकी और साजिशकर्ता साबित करने में पसीना बहा देते हैं ! दो एक चैनल जो सच बोलते हैं वो नक्कारखाने में तूती की आवाज़ से ज़्यादा अहमियत नहीं रखता ! आज़ अगर सोशल मीडिया न होती तो जाने क्या होता!
         मैं योगी जी की तारीफ़ करूंगा इस विषय में ! देश के सबसे बडे़ और सबसे संवेदनशील प्रदेश में रामनवमी के मौके पर कहीं भी तशद्दुद का कोई वाक्या नज़र नहीं आया, बल्कि कई संवेदन शील इलाकों में मुस्लिम समुदाय अपने हिंदू भाईयों पर फूल की बारिश करते नज़र आए ! ये योगी आदित्यनाथ जैसे सख्त
  प्रशासक ही ऐसा करिश्मा कर सकते हैं ! सुनकर और देख कर यकीन पुख्ता हो जाता है कि प्रशासन अगर सख्त और संजीदा हो तो अपराधी का मंसूबा  कभी कामयाब नही हो सकता !!
           बहुत पहले देवानंद और जीनत अमान की एक फिल्म आई थी - हरे रामा हरे कृष्णा -! उसका एक गीत याद आ रहा है, - ' देखो वो दीवानों ऐसा काम ना करो! राम का नाम बदनाम न करो -'! शायद आज इस गीत पर सबसे ज्यादा अमल करने की ज़रूरत है ! इन्हीं पंक्तियों के साथ - समानता , सहिष्णुता,सौहार्द, सामाजिक संवाद,और सामप्रदायिक एकता की हम कामना करते हैं  !! आओ, हम सब  मिल कर  नई सोच के साथ एक नए  सूरज  का इस्तकबाल करें !! 
       अवध के शायर एम के  ''राही" का एक शे'र है ---

हिंदू है अगर जिस्म तो धड़कन है मुसलमान!
दोनों  के  इत्तेहाद  से कायम  है  "हिंदुस्तान"!!

              ( सुलतान भारती)

Tuesday, 12 April 2022

(व्यंग्य भारती)। निंबुडा निंबुड़ा निंबुडा !

(व्यंग्य भारती)   " निंबुड़ा निंबुड़ा निंबुड़ा"!!!

            मैं निंबू का विरोधी नहीं हूं ! निंबू शायद मेरी फूड चेन में सबसे ऊपर है! मैं निंबू रोज़ इस्तेमाल करता था, पर विगत तीन दिन से नींबू  मुझे निचोड़ रहा है ! वैसे आत्मनिर्भर तो मैं तीन साल पहले ही हो गया था, लेकिन इधर रमजान और नवरात्रि के संगम में निंबू ऐसे टपका कि मंहगाई विश्वगुरु होते होते बची। फिर भी मैं निंबू की निन्दा नही करना चाहता था, क्योंकि मंहगाई तो आत्मा की तरह अजर अमर है!  न आग इसे जला सकती है, न पानी इसे डुबो सकता है! ( बल्कि कई सरकारें इसमें खामखा डूब गई हैं! ) ऐसा भी नहीं है कि देश पहली बार मंहगाई की मुंह दिखाई दे रहा है! हकीकत तो ये है कि महंगाई विपक्षी दलों के लिए जीवनदायिनी ऑक्सीजन की तरह है! इसलिए हे पार्थ ! नींबू के महंगा होने का शोक मत करो ! कभी तुम नींबू को लटकाते थे -आज़ नींबू ने तुम्हें लटका दिया है!
         विचित्र खबरें आ रही हैं , गिनीज़ बुक वाले सकते में हैं! यूपी की एक सब्ज़ी मंडी की ख़बर है, चोरों ने पूरे पचास किलो नींबू का बोरा चुरा लिया ! पूरा प्रदेश सकते में है - गजब भयो रामा जुलम भयो रे। भरे अप्रैल में कलियुग आ गया !! प्रशासन सकते में है, बुलडोजर खुद बाबा से पूछ रहा है,.. ' किसके गोदाम की कपाल क्रिया करनी है?' प्रदेश के निंबू व्यापारी अपना अपना गोदाम टटोल रहे हैं कि कहीं चोर ने निंबू का बोरा इधर ना छुपा दिया हो! बुलडोजर ने व्यापारी को भी सात्विक बना दिया है ! कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था कि नींबू का दाम सुनकर एक दिन आदमी का चेहरा पीला पड़ जाएगा ! अगर यही स्थिति रही तो कुछ दिन बाद लोग निंबू को लॉकर  में  रखने  लगेंगे  और अखबारों में खबरें  कुछ  इस  तरह होंगी,--' एयरपोर्ट पर अमेरिका से आए एक तस्कर के पाजामे से आधा किलो नींबू बरामद -!' ब्रेकिंग खबर ये भी हो सकती है , - ' चीन से आए नकली नींबू के पचास कंटेनर पकडे गए ! भारतीय अधिकारियों ने चीन के राजदूत को कसकर फटकार लगाई ! राजदूत ने घिघियाते  हुए सफाई दी, - ' क्या करूं सर ! डुप्लीकेट माल  बनाने के लिए दिल है कि मानता नहीं ! "
           परसों वर्मा जी नाराज़ होकर मुझसे कह रहे थे, -'' अभी तक दुनियां यही जानती थी कि निंबू सिर्फ दूध फाड़ता है , लेकिन आज सबको पता चल गया कि नींबू का दाम सुनकर  भी बहुत कुछ फट जाता  है !" मेरा अपना सरदर्द है, वर्मा जी का अपना ! रमज़ान में निंबू करैले की तरह नीम पर चढ़ा बैठा है ! ऐश्वर्या राय ने 'निंबुड़ा निंबुड़ा' गाकर नींबू का भाव बढ़ा दिया ! जानें कौन सा निगोड़ा नींबू था़ जिसे बेचने के लिए  ऐश्वर्या ने ऐसा गाना गाया था ! आज़ मंडी में नींबू ऐश्वर्या राय की तरह सेलेब्रिटी हुआ पड़ा है और आदमी टूटे मनोबल के साथ सकुचाया हुआ दुकानदार से पूछ रहा है,- ' निंबू क्या भाव है?'' निंबू से ज़्यादा दुकानदार का पारा चढ़ा हुआ है,- ," दो सौ सत्तर रुपए हैं तुम्हरी े जेब में !!"  दाम सुनकर ग्राहक को लगता है कि सायकल का पिछला पहिया पंचर हो गया है ! वो धीरे से पीछे हटता है और  दुकानदार अपराजेय  होकर पीछे से बोली कसता है ,- ' घर में नहीं दाने , अम्मा चली भुनाने -''!
        चार दिन पहले अवध ( सुल्तानपुर) के एक पत्रकार इम्तियाज ने निंबू के नेशनल रुतबे के हिसाब से अपने पत्रकार मित्रों से रेट जानना चाहा तो सारे देश की मंडिया का जो तापमान नापा गया, उसके मुताबिक स्वस्थ हिमोग्लोबिन  वाले  नींबू  280/ से  300/ रुपए प्रति किलो ! विकलांग नींबू 200/ से 230/रुपए प्रति किलो, और गन्ने  के जूस में इस्तेमाल होने वाले सूखा पीड़ित नींबू का रेट दस रुपया प्रति नींबू पता लगा! लगता है जैसे विश्व गुरु होने की सबसे ज्यादा जल्दी "नींबू" को ही है !

वो गाना याद आ रहा है - प्यास भड़की है सरे शाम है जलता है जिगर -! प्यास भड़की है तो जिगर पर एक चुटकी नमक डाल दो ! जिगर से कह दो कि नींबू से दूर रहे, दिल जलता है तो जलने दे,,,,,,,! बारह रोजे निकल गए ,  तेरहवे रोजे की पूर्व संध्या पर बेगम ने पंद्रह रुपए देते हुए मुझे आदेश दिया, - " मिस्टर भारती ! कहीं से भी तीन  नींबू खरीद कर लाओ "! तब से ऐसा लग रहा है गोया किसी ने कांग्रेस के डैमेज कंट्रोल करने का असंभव काम मुझे दे दिया है ! इतना पसीना तो हातिमताई को भी उस दिन  न आया होगा, जब हुस्न बानो ने उन्हें सात सवालों का जवाब लाने को कहा था !

          काश ! आज़ मेरे हाथ में अलादीन का चिराग होता !! ओ भूमंडल के सस्ते निंबुओं - आवाज़ दो कहां हो !! त्राहिमाम दोस्तों ! मैं अभी भी सब्जी मंडी में घूम रहा हूं ! बगैर नींबू  खरीदे घर जाऊं तो जाऊ  कैसे !!

                       ( सुलतान भारती)

Sunday, 10 April 2022

प्राक्कथन

                       प्राक्कथन

          (    जीस्त    ए    डॉली    )

            मैं शायद डॉली को दो साल से जानता हूं ! वैसे मुलाकात छे सात महीने पहले गांव जाने पर हुई ! बेहतरीन सोच, शब्द, संवाद, सादगी और,,,, शायरी! मिलने पर यकीन करना मुश्किल था कि ये खूबसूरत छोटी बच्ची इतनी कम उम्र में अल्फाजों की इतनी आकाशगंगा  तामीर कर सकती है!! उसके अशआर में  उर्दू भाषा के कई शब्द मुझे हैरत में डाल देते थे ! फिर मुझे पत्रकार इम्तियाज़ खान मिले तो पता चला कि किसान की इस बेटी ने उर्दू इम्तियाज़ खान साहब से सीखी थी !सुन कर मुझे अपने उस्ताद मरहूम डी पी पांडेय जी याद आ गए, जिन्होंने मुझे. 'सुलतान भारती' बनाने में एक अहम किरदार निभाया था ! अवध की जरखेज़ साहित्यिक मिट्टी की यही समुदायिक खासियत है जो गंगा जमुनी रवायत की जड़ों को रूहानी ताक़त बख्शती है !
          सात महीने पहले मैं जब पहली बार डॉली से मिला , तभी मैने उसे अपना संकलन निकालने की सलाह दी थी, क्यों कि मैं चाहता था कि उसकी रचनाओं को पंख मिलें और उसके ख्वाब बिसुहिया (उनका गांव) से निकल कर विश्व भर में परवाज़ करें!
      डॉली की रचनाओं में कई भाषाओं के शब्द सितारे मिल जाएंगे ! उसके रचनाओं की कायनात  दर्द ज़ख्म सिसकियों की आहट से भरी हैं ! डॉली दर्द के इस कायनात के बारे में बेबाकी से लिखने में अपनी उम्र से भी कहीं आगे निकल जाती हैं ---

गमज़दा ख़्वाब ढोते रहे उम्र भर !
मौत के बाद भी कोई राहत नहीं !!

      वह आंसू और उम्मीद की अलमबरदार हैं!  अपनी रचनाओं में हालाते हाजरा पर सवाल उठाते हुए डॉली बड़ी कद्दावर नज़र आती हैं ---  

हर शख़्स को है एक ही मंज़िल की जुस्तजू !
'वाइज'  बताए   रास्ते  क्यूं   हैं  जुदा  जुदा !!

      "जीस्त ए डॉली" पाठकों की अदालत में है!   देख कर अच्छा लगा कि डॉली के पहली ही किताब को साहित्य और सियासत जगत के कई चमकते सितारों के सशक्त भावात्मक आशीर्वाद मिलें हैं ! आगे डॉली को इसी कहकशां का एक सितारा बनना है !  डॉली की हिम्मत, साहित्यिक प्रतिभा,  आसमान छूने की आशावादिता , बेखौफ अंदाज़ और सतत संघर्ष के हौंसले को सलाम करते हुए मैं उसे यकीन दिलाना चाहूंगा,,,,,,, कि 

अकेला ही मुसाफ़िर कारवां बन जाता है जिस दिन !
उसी  दिन  मुश्किलों  के  हौंसले  भी  टूट  जाते  हैं !!

                           (  सुलतान भारती )

Wednesday, 23 March 2022

("व्यंग्य भारती") ''गरीब आदमी का सेल फ़ोन''

 ( ' व्यंग्य भारती")

             "गरीब आदमी का सेलफ़ोन"

      अगर कोई घर गरीबी की गिरफ्त में हो तो उसका असर घर के चूहे और बिल्ली तक पर पड़ता है ! चूहे उस घर में आजादी से आते जाते हैं, वहीं - दूध मुक्त रसोई होने के कारण बिल्लियां  घर को दूर से ही प्रणाम कर लेती हैं ! गुरबत भरे घर के लोग कुपोषित लेकिन चूहे हृष्ट पुष्ट और इतने दबंग होते हैं कि डेढ़ साल तक के बच्चे से रोटी छीन कर चले जाते हैं!  ढीठ इतने कि ये चूहे अक्सर घर की पुरानी रजाई में ही बच्चे दे देते हैं ! गरीब के घर का दरवाज़ा इतना कमज़ोर और कुपोषित होता है, कि मुहल्ले का कृषकाय कुत्ता  तक बेरोक टोक अंदर आ सकता है !  इसके  बाद  भी अगर  वो  कुत्ता   उस घर में नहीं घुसता तो उसकी शराफ़त नहीं, चूहों की भरमार है! ( आत्मनिर्भर चूहे कमज़ोर कुत्ते को दौड़ा लेते हैं!!)
           ऐसे घरों में एक  फोन भी पाया जाता  है! जी हां, घर में वक्त पर फफूंद लगी रोटी हो या न हो, लेकिन आज़ के जमाने में फ़ोन तो होना चाहिए ! तो,,, इस घर में भी एक फोन है ! ये फोन घर के मुखिया के पास होता है और इतनी छोटी साइज़ का होता है कि पसंद आने पर घर के  चूहे उसे खींच कर बिल में छुपा सकते हैं! गरीब आदमी के फ़ोन में रिश्तेदार के कम ठेकेदार के ज्यादा नंबर होते हैं ! गरीब के फ़ोन पर बाहर से आने वाली कॉल कम और मिसकॉल ज़्यादा होती है ! गरीब आदमी मिस कॉल को ठेकेदार की कॉल समझ  पलट कर फोन करता और दुखी होता  है ! गरीब आदमी का फ़ोन और बीड़ी का बंडल एक ही जेब में होता है! कभी कभी मजदूरी  न  मिलने  के  टेंशन में वो  बंडल  की   जगह मोबाइल से बीड़ी निकालने की कोशिश करता है ! क्या करे,- गरीबी वाले- जिगर मा बड़ी आग है ! जब बुद्धि धुआं देने लगती है तो नोकिया फोन और नूरा बीड़ी में फर्क नहीं नजर आता !!
          गरीब का फोन कई शिफ्ट में ड्यूटी देता है ! शाम को थका हारा गरीब जैसे ही आठ बजे सोता है, उसकी पत्नी तकिए के नीचे से फोन निकाल कर अपनी बड़ी बहन को फोन करती है, - " दीदी  ! फिर ठेकेदार इनका पैसा मार  कर भाग गया !  इनको अब तक सारे  ठेकेदार रणछोड़दास ही मिलते आए हैं ! जीजा जी से कहकर कहीं  ऑफिस में चपरासी या गार्ड की बढ़िया नौकरी लगवा देती " ! उधर से ऑक्सीजन विहीन  आश्वासन  पाकर  वो  अपनी  छोटी  बहन  को फोन करके  बड़ी   बहन  की  स्तुति   शुरू  कर  देती  है, - ' जीजा जी एक मामूली क्लर्क हैं तब इतना नखरा है, कहीं ठेकेदार होते तो आंख बड़ेरी  से नीचे न उतरती । इस महीने सारे फ़ोन मैने ही लिए, उधर से एक बार भी फोन नही आया -हमारे  ठेंगे से !! सुना है , पिछले साल दीदी की बड़ी लड़की घर से दो दिन गायब रही"?
           घर का बड़ा लड़का हाई स्कूल में पढ़ रहा है ! वह जानता है कि दिन भर के हाड़ तोड़ काम के बाद मां भी नौ बजे तक फ़ोन बाप की तकिया के नीचे सरका कर सो जायेगी !  दस बजे फोन लेकर लड़का अपने दोस्त अकील को फोन करता है , देर  से  फोन उठते  ही उसने पूछा ,- '' हां यार अब बता, क्या  शर्त  लगाया  तूने अपनी गर्ल फ्रेंड से ? तूने कहा था न कि रात में शालू के बारे में कुछ बताएगा !!" उधर से नींद में सर से पैर तक डूबा  अकील  दीवार  घड़ी  देख  कर  भन्नाया  हुआ बोला, - ' दो घंटे करवट बदल बदल कर जागने के बाद अब जाकर नींद आई थी ! अब तू भी सो जा यार ! शालू चीज ही ऐसी है, कल तुझसे मिलवाता हूं - गुड नाईट !!'  अब शालू से मिलने की कल्पना में बाकी रात करवट बदलने की बारी इस लौंडे की थी! 
           गरीब आदमी का फ़ोन भी उसी की तरह ठोकर खाकर जीता रहता है ! वह  इतनी बार जमीन पर गिरता है कि नंबर तक लहू लुहान लगते हैं। फोन के बार   बार गिरने से क्रुद्ध आदमी कभी कभी फोन को ठेकेदार समझ कर गाली देता है, - ' किसी दिन  तुझ पर ईंट बजाऊंगा साले "! 
         हमारे गांव में हालात के मारे एक जमालू भाई हैं ! उनका फोन उनसे ज्यादा दुखियारा और दीन हीन है। जमालू भाई का ये फ़ोन एक्सपायरी डेट के बाद भी चल रहा है ! फोन में बैटरी और नेटवर्क के अलावा ज़िंदा रहने की कोई निशानी नही है ! उनका फोन सबके सोने के बाद नेटवर्क पकड़ता है और सुबह पांच बजे तक -सबका साथ सबका विकास - पर अमल करता है! अक्सर जमालू फ़ोन की बैटरी निकाल कर उसे धूप में सुखाते हैं! इस दौरान आस पास अपने चूजों को लेकर घूम रही मुर्गियां भी बैटरी पर दो चार चोंच मारने के फिराक में रहती हैं, इसलिए जमालू भाई डंडा लेकर बैठते हैं ! पिछली नवंबर की सर्दियों में गांव जाने पर मैंने जब लगातार तीन दिन तक बैट्री को सुखाते देखा तो कारण पूछा ! बड़ी दिलचस्प कहानी बताई जमालू भाई ने !!
     " चार दिन पहले की बात है, रात में पेट के अन्दर गुड़ गुड़ शुरू हुई , मैं जाकर गांव से बाहर तालाब के किनारे बैठा ! निवृत होकर जैसे ही मैं पानी के लिए तालाब की ओर झुका ऊपर की जेब में रखा फोन तालाब में जा गिरा! मैं कपड़ा उतार कर फ़ौरन तालाब में कूद गया ! फ़ोन निकाल कर कपड़ा पहना और घर आकर रजाई फाड़ा, रूई निकाला और फ़ोन की बैट्री और फ़ोन दोनों को रूई में लपेट दिया , ताकि रूई पानी खींच ले ! अब तीन दिन तक  धूप में  बैट्री और फ़ोन को सुखाना है ! कल बदरी थी, इसलिए एक दिन और सही"!

             संकट में इंसान की आस्था सेकुलर हो जाती है, ऐसे में प्राणी 'पहलवान बाबा' के साथ साथ 'पीर बाबा'  की भी परिक्रमा कर लेता है, - न जाने किस भेष में बाबा मिल जाए भगवान-!!

  कमाल था,  चौथे  दिन जमालू भाई के फोन का नेटवर्क काम करने लगा था !!

                   

    

Wednesday, 16 March 2022

" वन लाईन स्टोरी" ( कहर)

स्टोरी    ,,,,,,,,,,,,, कहर
ट्रांजीशन,,,,,,,,,,,,, कहर
आइडिया,,,,,,,,,,,,,, फुटपाथ पर बिकती लड़कियां !
ट्रांजीशन,,,,,,,,,,,,,,,,        कहर

 ।।।।    कहानी के पात्र     और  परिचय   ।।।

  1. 

Tuesday, 15 March 2022

स्क्रिप्ट " सौदा" ( द पॉवर ऑफ लव)

           (  वन लाईन स्टोरी)
स्क्रिप्ट,,,,,,,    "सौदा"।     ( द पॉवर ऑफ लव)
Transition,,,,,,, सौदा    ( द पॉवर ऑफ लव)

आइडिया,,,,,,,, अंतर्जातीय प्रेम और खून खराबे की                             दोहरी प्रेमकथा !!

चरित्र सूची,,,,,,,,,,,भानु प्रताप सिंह ,,,,,,    कॉलोनाइजर
(कैरेक्टर्स)
अजय सिंह,,,,,,,,,,,,, भानु के सबसे बड़े बेटे !
समर प्रताप,,,,,,,,,,,, भानु का छोटा बेटा!
सोनिया सिंह,,,,,,,,,,,, भानु की पोती, अजय की बेटी !
अफ़ज़ल   'गैंती',,,,,,, अपने मां बाप के कातिलों को मार                             कर फरार हुआ एक युवक
गीता यादव,,,,,,,,,,,, उत्तर भारत के एक उग्र दक्षिण पंथी 
                         संगठन की कुख्यात हत्यारी लड़की !
शहजाद बाबर,,,,,,,, दिल्ली एनसीआर का डॉन
जयमंगल सिंह राठौर,,,,,,यूपी से दिल्ली हायर किया गया                                   अंतरराजजीय हत्यारा और                                    शहजाद गैंग का सालार
तेजा सन्यासी,,,,,,,,,,,, भानु प्रताप का वफादार शूटर
जगत  बैगा,,,,,,,,,,,,,,, एक आदिवासी हत्यारा !
जफर  'कन्हैया',,,,,,,,,,, भानू गैंग का एक विचित्र हत्यारा
इंस्पेक्टर जुगल किशोर,,,,,, स्पेशल सेल के अधिकारी।
महंत जसराज,,,,,,,,,,,  गीता यादव के गुरु
शिव प्रताप यादव,,,,, अपराधियों का लाइजनर और गॉड                               फादर
    ( इसके अलावा दर्जन भर और पात्र )

                 "  वन लाईन स्टोरी "
       ( "सौदा"  or   'द पॉवर ऑफ लव' )

( यूपी के अलग अलग शहरों में लगभग एक दर्जन असरदार लोगों का कत्ल हो जाता है ! मारे गए लोगों में आठ मुस्लिम समुदाय के होते हैं विधान सभा में हंगामा हो गया। जांच में जुटी पुलिस को एक सनसनीखेज जानकारी मिली कि हर कत्ल के पीछे अलग अलग नाम से एक लड़की को देखा गया था ! वह एक अनाथ लड़की थी, जिसे साधुओं के एक उग्र संगठन "कवच" ने धर्मयोद्धा बनाया था !  गीता यादव नाम की वह लड़की  अचानक  यूपी से भी लापता हो गई ! उन्हीं दिनों जौनपुर और आजमगढ़ की सीमा पर स्थित एक गांव में चार लोगों को गैंती से मारकर एक और युवक फरार हुआ - अफ़ज़ल शेख ! पुलिस ने उसे नाम दिया अफ़ज़ल गैंती !  ''कवच' ने अफ़ज़ल का नाम भी गीता की हिट लिस्ट में शामिल कर दिया था !!
        नोएडा और दिल्ली में कॉलोनाइजर और बड़े बिल्डर्स के बीच गैंगवॉर शुरू हो चुका था और शिव प्रताप भारी कीमत लेकर एक से एक अपराधी और गैंगस्टर को भानु तथा शहजाद बाबर के ज़खीरे में भेज रहा था ! शिव प्रताप ने गलती से गीता यादव को भानु के ज़खीरे में भेज दिया जहां पहले से ही अफ़ज़ल गैंती छुप कर पहुंचा हुआ था ! गीता उसे ही ढूंढ रही थी ! लेकिन गीता को उन्नाव का कुख्यात सुपारी किलर और गैंगस्टर जय मंगल राठौर ढूंढ रहा था , जिसे शहज़ाद बाबर ने अदालत में पेशी पर जाते हुए पुलिस की गाड़ी पर हमला कर छुड़वा लिया था ! अब शुरु हुई असली गैंगवार और शहज़द का बड़ा बेटा और भानू का छोटा बेटा मारे गए! गैंगवॉर तब क्लाइमैक्स पर पहुंची जब अपने एक मित्र की शादी में पूरे लाव लशकर के साथ पहुंचने के बाद भानु को जय मांगल और जगत बैगा ने मार डाला !
                       ( इंटरवल)
              उधर सड़क पर एक घायल कबूतर को देख कर स्कूल बस रुकवा कर उसकी तीमारदारी में लगी एक लड़की को शहज़द बाबर  का पोता शेरबाज बाबर देख कर उस लड़की के स्कूल बस का पीछा उसके कॉलेज तक करता है! फिर वह हर दिन उस बस का पीछा करता है ! कई महीने बीत जाते हैं,आखिरकार वो लड़की खुद उससे पूछती है कि वोह चाहता क्या है ! तब दोनों को पता चलता है कि वह एक दूसरे के दुश्मनों की औलाद हैं ! शूटर गीता यादव जब अफ़ज़ल गैंती का कत्ल नहीं कर पाती तो कवच की ओर से गीता को खत्म करने के लिए कुछ लोग दिल्ली आते हैं ! अब अफ़ज़ल को गीता की असलियत का पता  चलता है ! 
           शहज़द  बाबर और भानू के जखीरे के बीच गैंगवॉर शुरू होती है ! दोनों तरफ़ के वसीम जाट, जगत बैगा , नसीम कुंजड़ा, मोस्ट वांटेड जफर कन्हैया, तेजा सन्यासी, मंगी बेड़िया, सद्दाम जरगर  आदि मारे जाते हैं !   दिल्ली पुलिस, यूपी एटीएस  और कवच से घिरी गीता अफ़ज़ल से मदद मांगती है और फिर एक भयानक फैसला लेकर दोनों शेरबाज़ और सोनिया सिंह को देश से दूर मलेशिया भेज देते हैं और कार में हथियार लेकर एक रात वापस यूपी लौट पड़ते हैं ! अफ़ज़ल का फोन  ट्रेस होता है और दिल्ली पुलिस की एक टीम दो घंटे पीछे रवाना हो जाती है! पुलिस टीम के पीछे अफ़ज़ल गैंती और गीता का जानी दुश्मन जय मंगल राठौर अपने घातक हथियार "पिनाका" के साथ रवाना होता है !
          कानपुर में दोनों ने अपने पहले शिकार शिव प्रताप यादव को दिन दहाड़े ठिकाने लगाया, जो सारे अपराधियों के बीच बरगद के नाम से जाना जाता था। इसके बाद दोनों ने प्रयाग स्थित कवच के सुप्रीमो सत्या वैरागी  को उनके मठ में घुस कर मारा ! आख़री  शिकार के लिए वह उसी रात कार से जौनपुर पहुंचे और कवच के प्रधान नत्था महंत को ठिकाने लगाया! सुबह होते होते दोनो जौनपुर और आजमगढ़ जिले के बॉर्डर पर स्थित अफ़ज़ल गैंती के गांव पहुंचे! दोनों का प्लान था कि फातिहा के बाद कब्रिस्तान से निकल कर दोनो सतना के जंगलों में चले जायेंगे जहां देश के सबसे बड़े डॉन गुलाब सिंह राठौर उनका इंतजार कर रहे थे !
            लेकिन कबरस्तान उनके सफ़र की आख़री
 सरहद थी- जहां एटीएस , पुलिस और जयमांगल सिंह तीनों उनका इंतज़ार कर रहे थे ।
                                            (   द  एंड)

Sunday, 13 March 2022

(व्यंग्य भारती) ' गरीबी रेखा के नीचे का ग्लैमर '

(व्यंग्य चिंतन)

          " गरीबी रेखा का गेहूं "

              मैं बड़ी मुश्किल से भाग्यशाली हो पाया हूं ! दीवार के अमिताभ बच्चन की तर्ज पर बोलूं तो-' मेरे मेरे पास (संगम विहार में) मकान है, सरकारी राशन है, बगैर पानी की टंकी है और गरीबी रेखा के नीचे वाला (बीपीएल) कार्ड है - तुम्हारे पास क्या है - अंय - !!" हीन भावना के साथ सामने वाला कहेगा -" मेरे पास केजरीवाल हैं"! अब इसके बाद तो किसी चाहत  की ज़रूरत  ही नहीं 
   मैं खामोश हूं और वर्मा जी तर्क दे रहे हैं, -' भला केजरी सरकार से पहले दिल्ली में क्या था - कुछ भी नही ! विकास देखने के लिए गली में एक कैमरा तक नहीं था ! विकास जमुना वाले लोहे के पुल पर  खड़ा पसीना पोंछ रहा था ! दिल्ली गुफा युग में पड़ी थी और सारी पार्टियां तीतर बटेर की लड़ाई को विकास समझ रही थीं ! ऐसे अंधकार युग में केजरीवाल जी  "अन्ना हज़ारे" नामक वाहन पर सवार  होकर  डायरेक्ट जंतर मंतर पर अवतरित हुए ! उनकी भुजाओं में झाड़ू जैसा कोई अमोघ अस्त्र था जिस के प्रहार से पहले कांग्रेस, बाद में भाजपा और आखिरकार अन्ना भी  कराह रहे हैं !"
          अब विकास पुरूष दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं, और हारी हुई पार्टियां दर्शक दीर्घा में बैठी विकास में घुन तलाश रही हैं ! फिर विकास पुरूष ने  गिनती शुरु करवाई कि कितने प्राणी गरीबी रेखा के ऊपर हैं और कितने नीचे। गरीबी रेखा के नीचे वालों को फ़ौरन बीपीएल कार्ड देने का ऐलान किया गया ! ऐसे कार्ड धारी के लिए मिलने वाली सुविधाओं में फाइबर से भरपूर सरकारी राशन  का गेहूं था ! बस फिर क्या था, गरीबी रेखा से नीचे जाने के लिए भगदड़ मच गई ! खुद को गरीब साबित करने के लिए लोगों का उत्साह देख कर विकास पुरूष मुस्कुराए , मुफ़्त में गेहूं पाकर जनता आत्मनिर्भर होने का सपना देख रही थी ! जो समर्थ और सर्वशक्तिमान थे, वो भीड़ को धक्का दे कर सबसे पहले गरीबी रेखा के नीचे चले गए ! जांच अधिकारी इतनी सशक्त गरीबी देख कर भौंचक्के थे, और गरीबी रेखा के ऊपर  खडे 'ओरिजनल गरीब' आत्मनिर्भर होने के लिए छटपटा रहे थे ! क्या तिलिस्म था, आम आदमी कलम की जगह   'झाड़ू ' पाकर सशक्त हो रहा था ।
      सब को बीपीएल कार्ड चाहिए था,  सारी दिल्ली गरीबी रेखा के नीचे जाने के लिए व्याकुल थी ! विकास में भगदड़ की ख़बर मेरी बेगम को लगी ! उन्होनें  ललकारा , -'कहां सोए पड़े हो ! गरीबी रेखा के नीचे नहीं जाना है क्या ? पिछड़े कहीं के !! पता है -  वर्मा जी पिछ्ले  महीने ही आत्म निर्भर हो गए ! "
     मैंने समझाया " हिंदी का लेखक हूं, गरीबी रेखा के नीचे जाने के लिए मुझे प्रयास करने की  जरूरत नहीं है।  लक्ष्मी जी लेखकों वाली  कॉलोनी में आती ही नहीं"!
 " अपना साहित्य अपने पास रखो , और जल्दी से बीपीएल वाला कार्ड बनना लो ! तुम्हारे दोस्त चौधरी तक भैंसों को लेकर गरीबी रेखा के नीचे जा चुके हैं ! तुम कब जागरूक होंगे और कब गरीबी रेखा के नीचे जाओगे !"
       मैं जाग गया ! प्रक्रिया मुश्किल थी,पर नामुमकिन नहीं! पहले स्थानीय विद्यायक से फॉर्म पर मुहर और दस्तखत   करवाना  था !   विधायक के सहयोग के बग़ैर  'गरीब' होना  मुश्किल  था ! लेकिन विधायक मुझे देखते ही नाराज़ हो गए, - " जिसे देखो वही गरीब होने कू तावला सै  ! काम मैं करूं,  अर  वोट तम झाड़ू के धोरे गेर दो!"
        " लेकिन वोट तो मैं आपको देता हूं , गरीब होने के लिये किसी और के पास क्यों जाऊं "?
    " मुफ्त में ही गरीब होना चाहते हो क्या?"
        खैर फॉर्म अटेस्ट हो गया, पर आत्मनिर्भरता में अभी एक बाधा दौड़ बाकी थी ! स्थानीय थाने से फॉर्म का एक क्लॉज अटेस्ट कराना था कि मेरे ऊपर कोई अपराधिक मामला नहीं है! (गरीब साबित होने के लिए सचरित्र होना ज़रूरी है!) मैं आश्वस्त था, क्योंकि आज़ तक थाने से मेरा कोई वास्ता ही नहीं था ! बड़े कॉन्फिडेंस के साथ फॉर्म लेकर थाने की ओर चल पड़ा ! पर जैसे जैसे थाना करीब आता गया, कॉन्फिडेंस लीक होने लगा ! हालत यह हुई कि जब थाने के गेट पर पहुंचा तो चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी और सांस ऐसे फूली हुई थी गोया मैं किसी की जेब काट कर भागा हूं ! कॉन्फिडेंस पसीना बन कर बह रहा था और मुझे अपने ही चरित्र पर शक होने लगा था । क्षेत्र के बीट कॉन्स्टेबल को ढूंढ कर मैंने हड़बड़ाते हुए कहा, -" मैं गरीबी रेखा के नीचे जाना चाहता हूं !"
                 उसने ऊपर से नीचे तक घूर कर मुझे देखा, - " गरीब होने के लिए तू बिलकुल सही जगह आया है ! पर नू बता, अक  गरीब होण ते पहले कुछ पाणी पत्ता लेगा या घणी जल्दी सै ?"
     मैंने थूक निगलते हुए कहा, -' ये फॉर्म अटेस्ट कराना है ! थोड़ा जल्दी है "!
     " भाई तू गरीबी रेखा के नीचे जाए या मालगाड़ी के , मन्ने के मिलेगो ? मोए के पत्तो, अक  तेरो खिलाफ़ कोई केस नही है ! हांफ तो ऐसा रहो अक  जैसे तने कदी छेड़खानी की हो, चेन खींच कर भागा हो या फिर किसी की जेब काट ली हो ! थारी जांच पड़ताल करने पर ही पता चलेगा !" 
    मेरी आंखों के नीचे अंधेरा छा गया ! मैं अपनी ही नजरों में संदिग्ध लगने लगा ! जूता खरीदने के लिए जेब में रखा पांच सौ का नोट फ़ौरन बीट कॉन्स्टेबल को दिया ! वो फौरन गंभीर हो कर बोला, - " गांधी जी की जै हो ! " दस्तख़त और मुहर के बाद कॉन्स्टेबल ने  नेक  सलाह  भी  दे डाली, -" और किसी नै गरीब होना हो तो अपने गैल ले आना , रेट होगा आठ सौ रुपए "!
     " पर अभी तो मैंने पांच सौ रुपए ,,,,!!"
 " तीन सौ तुम्हारा कमीशन रहेगा !! "

          कुफ्र टूटा खुदा खुदा करके ! गरीबी रेखा से नीचे आकर भी सुकून नहीं मिला ! जब से बीपीएल कार्ड बना है, केस देने के लिए बीट कॉन्स्टेबल बराबर फ़ोन कर  रहा है ! 

   क्या बताऊं, बहुत कठिन है डगर पनघट की !!

                     (  सुलतान भारती)