Tuesday, 6 October 2026

(व्यंग्य 'चिंतन') 'डर'

( व्यंग्य 'चिंतन')
    ' डर '
          अब किसे समझाऊं,और कैसे समझाऊं कि डर क्या होता है ! जो  रात में भी रोशनी जला कर सोते हैं सिर्फ़ उन्हें - डर के आगे जीत- नज़र आती है ! सुखद कल्पनाएं अंततः बहुत तकलीफ़ देती हैं जब हवाओं में परवाज करते ख़यालात के  साथ हमारे पैर ज़मीन से लगते हैं ! डर के आगे जीत किसी ने देखी है ? डर के आगे जीत मुकम्मल डर होता है जो किश्तों की शक़्ल में किस्मत par