Sultan Bharti
Saturday, 18 April 2026
(व्यंग्य'चिंतन' ) ,,,,की ट्रेन कहीं छूट न जाये
व्यंग्य चिंतन
ट्रेन कही छूट न जाए
आज सुबह से ही वर्मा जी के घर में धमाचौकङी मची हुई थी ! पङोसी हैरान थे कि सुबह देर तलक सोने वाले वर्मा जी आज खुद ही सबको जगा रहू थे! खटापट से मेरी भी नींद टूट चुकी थी
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